नीतीश कुमार रेड्डी: हैदराबाद के 'हिटमैन' को क्या टीम इंडिया में मिलेगा मौक़ा?

नीतीश कुमार रेड्डी

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    • Author, विमल कुमार
    • पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार

सनराइजर्स हैदराबाद के ख़िलाफ़ जीत के लिए आख़िरी ओवर में पंजाब किंग्स के सामने 29 रनों की मुश्किल चुनौती थी.

इसके बावजूद पंजाब दो युवा बल्लेबाज़ों के बूते एक रोमांचक जीत की उम्मीद कर रहा था तो वो ग़लत नहीं था.

शशांक सिंह और आशुतोष शर्मा की जोड़ी ने पिछले हफ्ते ही गुजरात टाइटंस के ख़िलाफ़ एक हैरतअंगेज साझेदारी कर हारे हुए मैच को जीत में बदल डाला था.

लेकिन आख़िरी गेंद पर शशांक के छक्का लगाने के बावजूद पंजाब को अगर जीत नहीं मिली तो इसके लिए उनके टॉप-ऑर्डर को कसूरवार ठहराना ज़्यादा उचित होगा.

आखिर आईपीएल में कौन सी टीम पावर-प्ले के 6 ओवर में सिर्फ 27 रन बनाती है?

जवाब है- पंजाब की टीम.

इस आईपीएल के दौरान पावर-प्ले फेज़ का सबसे ख़राब स्कोर उनकी टीम ने देखा.

कई मायनों में देखा जाए तो दोनों टीमों का खेल लगभग एक जैसा ही रहा. अगर हैदराबाद ने अपने शुरुआती तीन विकेट महज 39 रन पर खो दिए तो पंजाब चेज़ करने के दौरान 20 रन पर तीन विकेट खो चुका था.

10वें ओवर के दौरान अगर हैदराबाद का स्कोर चौथे विकेट के नुकसान होने पर 64 रन था. वहीं पंजाब का स्कोर भी 10वें ओवर के दौरान चौथा विकेट गिरते ही 58 ही रहा.

लेकिन, यहीं से मैच की सबसे निर्णायक और अहम पारी की शुरुआत हुई.

20 साल के नीतीश कुमार रेड्डी ने ना सिर्फ मैच का इकलौता अर्धशतक जड़ा बल्कि 64 रनों की पारी के चलते मैन ऑफ़ द मैच का पुरस्कार भी जीता.

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बहुत सारे क्रिकेट फैन शायद हैदराबाद के इस खिलाड़ी की प्रतिभा से अंजान हों.

मगर विराट कोहली को अपना आदर्श मानने वाले नीतीश में वो काबिलियत है, जिसके चलते वो भविष्य में एक बेशकीमती खिलाड़ी साबित हो सकते हैं.

मौजूदा समय में हार्दिक पांड्या की ही तरह ये खिलाड़ी भारत के उन चुनिंदा खिलाड़ियों में से एक हैं, जिसे फास्ट बॉलिंग ऑलराउंडर की श्रेणी में रखा जा सकता है.

पिछले साल ब्रायन लारा और डेल स्टेन जैसे दिग्गजों के साथ नीतीश ने काफी वक्त बिताया.

हैदराबाद के ही हनुमा विहारी ने नीतीश के बारे में कहा है कि ये तो सिर्फ एक झलक थी, भारतीय क्रिकेट को उन पर (ध्यान)निवेश करने की ज़रूरत है क्योंकि वो विरले खिलाड़ी हैं.

पहली 18 गेंदों पर सिर्फ एक चौका लगाकर 14 रन बनाने वाले रेड्डी ने अपनी पारी की आख़िरी 19 गेंदों पर तीन चौके, पांच छक्कों की झड़ी लगा दी और 50 रन ठोक डाले.

नीतीश की इस आक्रामकता को साथ मिला अब्दुल समाद (12 गेंदों पर 25 रन) और शाहबाज़ अहमद( 7 गेंदों पर 14 रन) की छोटी लेकिन मददगार पारियों का, जिन्होंने हैदराबाद का स्कोर 182 रनों तक पहुंचा दिया.

हैदराबाद के लिए कप्तान पैट कमिंस ने अपनी किफायती और कसी हुई गेंदबाज़ी से पंजाब पर दबाव बनाए रखा. कमिंस ने जिस चतुराई से अपने गेंदबाज़ों को इस्तेमाल किया, उससे पंजाब की टीम लगातार दबाव में रही. कमिंस ने 4 ओवर में सिर्फ 22 रन दिए और जॉनी बेयस्ट्रो का कीमती विकेट लिया.

भुवनेश्वर कुमार ने भी सीनियर गेंदबाज़ की भूमिका निभाई और 4 ओवर में सिर्फ 32 रन देकर 2 विकेट लिए.

टी नटराजन ने पंजाब की बल्लेबाज़ी के दौरान जो 19वां ओवर फेंका उसने मैच का नतीजा लगभग तय कर दिया.

आख़िरी 2 ओवर में पंजाब को जब 39 रनों की ज़रूरत थी तो नटराजन ने अपने आख़िरी ओवर में सिर्फ 10 रन दिए. इस कारण जयदेव उनादकट के पास मैच बचाने के लिए 29 रन थे.

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टीम इंडिया में नीतीश को मिल सकता है मौक़ा

चार ओवर में 49 रन देकर उनादकट मैच के सबसे महंगे गेंदबाज़ थे. मगर जिस आख़िरी ओवर में उन पर मैच को बचाने की ज़िम्मेदारी थी, उसे पूरा करने में वो सफल रहे.

बल्लेबाज़ी के दौरान आख़िरी के चार ओवर में हैदराबाद की टीम किसी तरह से 32 रन ही बना पाई थी जबकि पंजाब के लिए अकेले ही 29 रनों की चुनौती आख़िरी ओवर में थी.

अगर अर्शदीप सिंह की शानदार गेंदबाज़ी( 4 ओवर में 29 रन देकर 4 विकेट) के बावजूद पंजाब की टीम को अपने घरेलू मैदान पर हार का सामना करना पड़ा तो इसके लिए उनके बल्लेबाज़ ही ज़िम्मेदार रहे.

आशुतोष और शंशाक को जोड़ी ने मैच में अपना सब कुछ झोंक दिया. मगर जिस टीम में कप्तान शिखर धवन का अनुभव हो, बेयस्टो- सैम करन और सिकंदर रज़ा जैसे धाकड़ विदेशी बल्लेबाज़ हों, विकेटकीपर बल्लेबाज़ के तौर पर जितेश शर्मा हों... इसके बावजूद बल्लेबाज़ों का ना चलना आने वाले मैचों में भी पंजाब के लिए संकट पैदा करने के संकेत दे रहा है.

चलते-चलते आखिर में एक बार फिर से चर्चा नीतीश रेड्डी की हो जाए.

इस साल जनवरी महीने में मुंबई के ख़िलाफ़ मुंबई में रणजी ट्रॉफी मैच के दौरान नीतीश ने शानदार गेंदबाज़ी करते हुए पारी में 5 विकेट झटके थे. इसमें अंजिक्य रहाणे और श्रेयस अय्यर के विकेट भी शामिल थे.

उम्मीद की जा सकती है कि मुंबई के ही अजीत अगरकर जो इस वक्त मुख्य चयनकर्ता की भूमिका में हैं, उन्हें भी इस युवा ऑलराउंडर के बारे में उस दिन निश्चित तौर पर ज़रूर पता चल गया होगा.

अगर नहीं चला हो तो नीतीश ने घरेलू क्रिकेट के सबसे बड़े प्लेटफॉर्म पर अपने बल्ले से ना सिर्फ अगरकर और भारतीय चयनकर्ताओं को अपने होने का एहसास कराया बल्कि पूरी दुनिया का भी ध्यान खींचने में कामयाब हुए होंगे.

अपने हीरो कोहली से कुछ दिन पहले तक अपने बल्ले पर ऑटोग्राफ़ लेने वाले इस खिलाड़ी को अगर जल्द ही कोहली के साथ टीम इंडिया के लिए बल्लेबाज़ी करने का मौक़ा मिले तो आप चौंकिएगा मत.

(बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित)

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