पीएम मोदी के ख़िलाफ़ आचार संहिता उल्लंघन के शिकायत मामले में ये फ़ैसला दे सकता है चुनाव आयोग? - प्रेस रिव्यू

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अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस ने एक ख़ास रिपोर्ट की है जिसमें बताया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ आदर्श आचार संहिता उल्लंघन के शिकायत मामले में केंद्रीय चुनाव आयोग क्या फ़ैसला सुना सकता है.
अख़बार लिखता है कि चुनाव आयोग कह सकता है कि चुनाव प्रचार से जुड़ी रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राम मंदिर के उद्घाटन की बात करने को धर्म के नाम पर वोट मांगने की अपील नहीं कहा जा सकता.
चुनाव आयोग ये भी कह सकता है कि सिख आबादी वाले चुनाव क्षेत्र में प्रधानमंत्री मोदी के सिखों के धर्मस्थलों में से एक.. करतारपुर साहिब कॉरिडोर के विकास का ज़िक्र करना और अफ़ग़ानिस्तान से सिखों के लिए पवित्र माने जाने वाले गुरु ग्रंथ साहिब का वापस लाना आचार संहिता का उल्लंघन नहीं है.
अख़बार लिखता है कि उसे पता चला है कि प्रधानमंत्री के ख़िलाफ शिकायत के मामले में चुनाव आयोग ये फ़ैसले दे सकता है.
दरअसल मामला ये है कि सुप्रीम कोर्ट के वकील आनंद एस. जोनदाले ने आयोग से शिकायत की थी कि 9 अप्रैल को उत्तर प्रदेश की पीलीभीत में एक चुनावी रैली में प्रधानमंत्री मोदी ने "हिंदू देवी-देवताओं और हिंदू पूजा स्थलों और सिखों के पवित्र स्थलों और सिख गुरुओं के नाम पर वोट मांगे थे."
पीलीभीत में पीएम मोदी की रैली के एक दिन बाद, यानी 10 अप्रैल को जोनदाले ने चुनाव आयोग से शिकायत की थी. उनका कहना था कि ऐसा कर मोदी ने चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन किया है.
ये फ़ैसला ऐसे वक्त आ सकता है जब राजस्थान के बांसवाड़ा की एक रैली में पीएम मोदी पर मुसलमानों को लेकर की गई टिप्पणी पर भी चुनाव आयोग से शिकायत की गई है.
कांग्रेस ने चुनाव आयोग से शिकायत की है कि पीएम मोदी ने 21 अप्रैल की एक रैली में मुसलमानों की बात की और कहा कि अगर कांग्रेस सत्ता में आई तो वो देश की संपत्ति 'घुसपैठियों' और 'ज़्यादा बच्चे पैदा करने वालों' को दे देगी.
इस मामले में अब तक चुनाव आयोग की तरफ से कोई फ़ैसला नहीं आया है.
सूत्रों के हवाले से अख़बार ने लिखा कि जोनदाले ने इस सिलसिले में दिल्ली हाई कोर्ट में शिकायत दर्ज की है जिसकी सुनवाई अगले सप्ताह हो सकती है. इससे पहले आयोग जोनदाले की शिकायत पर अपना फ़ैसला सुना सकती है.
दिल्ली हाई कोर्ट भी गया मामला

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ये मामला समाज में मौजूदा भेदभाव को बढ़ाने और दो समुदायों, जाति या धर्म के लोगों के बीच नफरत और तनाव फैलाने और धर्म या समुदाय के नाम पर वोट मांगने से जुड़ा है, जिसे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन माना जाता है. वहीं चुनावी प्रोपेगैंडा के लिए मंदिर, मस्जिद और चर्च जैसे पूजा स्थलों के इस्तेमाल पर भी मनाही है.
आनंद जोनदाले ने चुनाव आयोग से कहा था कि मोदी के ख़िलाफ़ 153ए के तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए जो धर्म-नस्ल, जन्म स्थान, रिहाइश और भाषा के नाम पर अलग-अलग समुदायों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने से जुड़ा है.
शिकायत पर चुनाव आयोग से फ़ैसला न मिलने पर आनंद ने 15 अप्रैल को दिल्ली हाई कोर्ट का रुख़ किया और कोर्ट से कहा कि उनकी शिकायत के आधार पर कोर्ट चुनाव आयोग को प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने का आदेश दे.
अख़बार लिखता है कि उसे पता चला है कि चुनाव आयोग ने इस मामले से जुड़ी अपनी जांच में इसे आचार संहिता का उल्लंघन नहीं माना है और फ़ैसला किया है कि पीलीभीत की रैली में मोदी केवल अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनवा रहे थे.
अख़बार लिखता है कि उसे ये पता चला है कि आयोग ने ये भी फ़ैसला किया है कि पीएम की स्पीच से दो समुदायों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने जैसा जोखिम नहीं है और चुनाव प्रचार के दौरान धर्म की ज़िक्र करना चुनाव आयोग की कार्रवाई के लिए पर्याप्त वजह नहीं है, क्योंकि इससे उम्मीदवार की चुनाव प्रचार की आज़ादी पर असर पड़ सकता है.
9 अप्रैल की रैली में पीएम मोदी ने इंडिया गठबंधन पर जमकर हमला बोला था और कहा था कि पार्टी ने अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन में हिस्सा नहीं लिया, ऐसा कर के उन्होंने भगवान राम का अपमान किया था.
पीलीभीत में सिख समुदाय की आबादी भी अच्छी खासी है. बीजेपी के लिए उनका समर्थन हासिल करने के लिए मोदी ने रैली में 1984 के दंगों का ज़िक्र किया और कांग्रेस की कथित भूमिका के बारे में बात की. उन्होंने कहा था कि चुनावों में समाजवादी पार्टी 'इस पार्टी' के साथ खड़ी है.
रूसी सेना में गए भारतीय के भाई को भारतीय दूतावास ने दिया ये जवाब?

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जम्मू-कश्मीर के एक युवक एजाज़ अहमद शेख़ का कहना है कि रूस में काम कर रहे उनके भाई के बारे में जानकारी पाने के लिए जब उन्होंने भारतीय दूतावास से संपर्क किया तो उन्हें रूसी अधिकारियों से संपर्क करने को कहा गया.
द हिंदू में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार एजाज़ का कहना है कि चार महीने पहले 27 साल के उनके भाई ज़हूर अहमद ख़ान को बतौर हेल्पर रूसी सेना में काम मिला था. लेकिन बीते दिनों उन्हें जबरन रूस-यूक्रेन के बीच चल रही लड़ाई में झोंक दिया गया और युद्ध के मैदान में भेज दिया गया.
उनके बारे में और जानकारी के लिए जब उन्होंने मॉस्को स्थित रूसी दूतावास से संपर्क किया तो उनसे कहा गया कि इसके लिए वो रूसी अधिकारियों के पास जाएं.
अख़बार लिखता है कि बीते साल 31 दिसंबर को आख़िरी बार एजाज़ ने ज़हूर अहमद के साथ बात की थी, उसके बाद से उनके साथ संपर्क नहीं हो सका है.
एजाज़ मे कहा, "हमने मॉस्को में भारतीय दूतावास से संपर्क किया. कुछ दिन पहले उन्होंने रूस के सरकारी अधिकारियों के फ़ोन नंबर और ईमेल आईडी भेजे. इनमें से कुछ नंबर रक्षा मंत्रालय के हैं और वो हमारे फ़ोन का जवाब नहीं दे रहे हैं."
एजाज़ के बड़े भाई मुख़्तियार शेख़ बॉर्डर सिक्योरिटी फ़ोर्स (बीएसएफ़) में काम करते थे और साल 1999 में विद्रोहियों के साथ एक मुठभेड़ में उनकी मौत हो गई थी.
विदेश मामलों के मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से अख़बार ने लिखा है कि ज़हूर के साथ दूतावास का सीधा संपर्क नहीं है लेकिन वो रूसी अधिकारियों से उन्हें छुड़ाने को लेकर बात कर रहे हैं.
एक अधिकारी ने कहा, "इस मामले को केवल विदेश मंत्रालय नहीं देख रहा है, बल्कि रक्षा मंत्रालय और सिक्योरिटी काउंसिल भी इस मामले पर नज़र रखे हुए है. जब तक ये पता नहीं चल जाता कि व्यक्ति कहां पर है और उसकी रिहाई सुनिश्चित नहीं हो जाती दूतावास इस मामले पर काम करता रहेगा."
कनौज से खुद उतरेंगे अखिलेश यादव
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने बुधवार को कहा कि वो उत्तर प्रदेश की कन्नौज सीट से नामांकन दाखिल करेंगे.
द हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार कन्नौज से पार्टी ने तेज प्रताप यादव के नाम की घोषणा की थी, लेकिन पार्टी का गढ़ बनी इस सीट पर अब खुद सपा प्रमुख मैदान में उतरेंगे.
जसवंत नगर में संवाददाताओं से बात करते हुए अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव ने बुधवार को कहा था कि "इस बारे में आपको कल पता चल जाएगा. हो सकता है कि नामांकन से पहले की स्थिति साफ हो जाए."
इसके बाद शाम को सपा के सोशल मीडिया हैंडल पर किए गए एक पोस्ट में साफ़ कर दिया गया कि गुरुवार 12 बजे कन्नौज से राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर्चा भरेंगे.
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रायबरेली और अमेठी को लेकर सस्पेंस जारी
इंडियन एक्स्प्रेस में छपी एक ख़बर के अनुसार कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाले रायबरेली और अमेठी में अब तक कांग्रेस ने लोकसभा उम्मीदवार का नाम नहीं घोषित किया है.
अख़बार लिखता है कि ऐसे में प्रियंका गांधी वाड्रा और राहुल गांधी के अलावा एक और गांधी-नेहरू परिवार से जुड़े शख़्स का ध्यान इस तरफ हो सकता है.
अख़बार के अनुसार, पीलीभीत से बीजेपी का टिकट न मिलने के बाद हो सकता है कि वरुण गांधी को रायबरेली से उतारा जाए. हालांकि वरुण गांधी ने अब तक इसकी पुष्टि नहीं की है और न ही खंडन किया है.
अख़बार लिखता है कि कांग्रेस ने अब तक ये नहीं बताया है कि क्या प्रियंका गांधी अपना पहला चुनाव रायबरेली से लड़ेंगी और क्या अमेठी से पिछला चुनाव हारने के बाद राहुल गांधी एक बार फिर अमेठी से खड़े होंगे. लेकिन कार्यकर्ता चाहते हैं कि दोनों इस बार इन सीटों से चुनाव लड़ें.
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