बीजेपी के घोषणापत्र में सीएए-एनआरसी को लेकर अब क्या कहा गया है - प्रेस रिव्यू

मोदी

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भारतीय जनता पार्टी ने इस बार अपने चुनावी घोषणापत्र से नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़न्स (एनआरसी) को हटा दिया है. पिछले लोकसभा चुनाव के लिए जारी मेनिफ़ेस्टो में यह बीजेपी का अहम चुनावी वादा था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी का घोषणापत्र जारी किया. बीजेपी अपने घोषणापत्र को संकल्प पत्र कहती है. इस बार इसे 'मोदी की गारंटी' नाम दिया गया है.

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, इसमें एनआरसी नहीं है, लेकिन नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को लागू करने की बात की गई है.

इसमें लिखा गया है, “हमने नागरिकता संशोधन अधिनियम बनाने का ऐतिहासिक क़दम उठाया है और सभी पात्र व्यक्तियों को नागरिकता देने के लिए हम इसे लागू करेंगे.”

2019 में पार्टी के घोषणापत्र में कहा गया था, “कुछ इलाक़ों की सांस्कृतिक और भाषाई पहचान में अवैध आप्रवासन के कारण बड़ा बदलाव आया है जिससे स्थानीय लोगों की रोज़ी-रोटी पर बुरा असर पड़ा है.”

इसमें कहा गया था, “हम इन इलाक़ों में तेज़ी से एनआरसी की प्रक्रिया पूरी करेंगे. भविष्य में देश के अन्य हिस्सों में भी चरणबद्ध तरीक़े से एनआरसी को लागू किया जाएगा.”

एनआरसी

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अख़बार लिखता है कि असम इकलौता राज्य है जहां सबसे पहले 1951 में एनआरसी तैयार की गई थी और उसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 2019 में अपडेट किया गया था.

11 दिसंबर 2019 को संसद के दोनों सदनों से सीएए के पारित होने के चार साल बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 11 मार्च को सीएए के नियम नोटिफ़ाई किए थे, ताकि इस क़ानून को लागू किया जा सके.

सीएए से अफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के छह ग़ैर मुस्लिम समुदायों- हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी या ईसाई धर्मों के उन लोगों को नागरिकता दी जा सकती है, जो 31 दिसंबर 2014 या उससे पहले भारत में दाख़िल हुए थे.

इसमें नागरिकता का पात्र होने के लिए 11 सालों की अवधि को घटाकर पांच साल कर दिया गया था.

अख़बार के अनुसार, आशंका जताई जा रही है कि देशभर में एनआरसी तैयार करने से मुसलमान प्रभावित होंगे क्योंकि जो ग़ैर-मुस्लिम एनआरसी में शामिल नहीं होंगे, उन्हें सीएए से राहत मिल जाएगी जबकि मुसलमानों को दस्तावेज़ पेश करके अपनी नागरिकता का सुबूत देना होगा.

भारत आने को तैयार टेस्ला के सामने चुनौतियां

एलन मस्क

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इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) बनाने वाली कंपनी टेस्ला के प्रमुख एलन मस्क इस महीने भारत आ सकते हैं और यहां ईवी बनाने के उद्योग में निवेश का एलान कर सकते हैं.

इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि मस्क को उम्मीद होगी कि उनका खुली बांहों से स्वागत किया जाए, लेकिन उन्हें कुछ चुनौतियों का सामना भी करना पड़ सकता है.

अख़बार के अनुसार, मस्क चीन में दबाव का सामना कर रहे हैं क्योंकि वहां की स्थानीय कंपनियों ने टेस्ला को पीछे छोड़ दिया है और फिर वहां मांग में भी कमी आई है.

ऐसे में टेस्ला के लिए भारत उतनी ही अहमियत रखता है, जितनी अहमियत भारत के लिए इलेक्ट्रिक वाहन रखते हैं.

अख़बार के अनुसार, भारत की नई ईवी नीति में 35 हज़ार डॉलर से महंगी कारों पर आयात कर 100 प्रतिशत से घटाकर 15 फीसदी किया गया है, बशर्ते कंपनी भारत में 500 मिलियन डॉलर का निवेश करने को तैयार है.

माना जा रहा है कि यह टेस्ला के स्वागत के लिए उठाया गया क़दम है. इसी तरह सब्सिडी के स्वरूप में भी बदलाव किए गए हैं.

हालांकि, टेस्ला को कुछ दिक्कतों का सामना भी करना पड़ सकता है. जैसे कि भारत में जिस सेगमेंट में सबसे ज़्यादा कारें बिकती हैं, उसमें टेस्ला की एंट्री नहीं हो पाएगी क्योंकि अमेरिका में उसका सबसे सस्ता मॉडल क़रीब 40 हज़ार डॉलर (क़रीब 33 लाख रुपये) है.

इसके अलावा, चीन की ईवी कंपनियां तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं. जैसे कि शेनज़ेन की कंपनी बीवाईडी ने 2023 के आख़िरी तीन महीनों में टेस्ला से भी ज़्यादा गाड़ियां बेची हैं.

लद्दाख में इस साल बन जाएगा न्योमा एयरबेस

लद्दाख

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चीन के साथ लगती सीमा पर भारत इस साल के आख़िर तक न्योमा एयरबेस में 2.7 किलोमीटर लंबी हवाई पट्टी तैयार करने जा रहा है.

हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के अनुसार, बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइज़ेशन (बीआरओ) के प्रमुख लेफ़्टिनेंट जनरल रघु श्रीनिवासन ने कहा है कि चीन के साथ विवादित सीमा के पास इन्फ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करते हुए इसी साल अक्टूबर तक इस परियोजना को पूरा कर लिया जाएगा.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बीते साल सितंबर में 218 करोड़ रुपये की इस परियोजना का शिलान्यास किया था. उस समय उन्होंने कहा था कि न्योमा एयरबेस भारतीय सशस्त्र बलों के लिए 'गेम चेंजर' साबित होगा.

चार साल पहले चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर हुए टकराव के बाद इस प्रॉजेक्ट को काफ़ी अहम माना जा रहा है.

श्रीनिवासन ने कहा, “हम इस परियोजना को तेज़ी से पूरा करने के लिए शिफ़्टों में काम कर रहे हैं. इलाक़े की पेचीदगियों के बावजूद हम भारतीय वायुसेना के लिए इसे उपलब्ध करवाने के लिए समय पर संसाधन जुटा पाए हैं. इस पट्टी से वायुसेना के पास विकल्प बढ़ जाएंगे."

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