अमेरिका में क्या जेल से राष्ट्रपति चुनाव लड़ा जा सकता है?

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- Author, मार्क शी
- पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस
अमेरिकी राजनीति का एक अभूतपूर्व दिन, डोनाल्ड ट्रंप किसी अपराध के लिए दोषी ठहराए जाने वाले पहले पूर्व या सेवारत अमेरिकी राष्ट्रपति बन गए हैं.
अधिकांश एक्सपर्ट इस बात से सहमत हैं कि गुरुवार को मैनहेट्टन की कोर्ट ने जिन 34 अपराधों के लिए ट्रंप को दोषी ठहराया उसमें जेल की सज़ा की कम संभावना है.
वो इसके ख़िलाफ़ अपील करेंगे और फिर भी फ़ैसला बरक़रार रहता है तो उन पर जुर्माना आदि लगाए जाने की संभावना अधिक है.
लेकिन सबसे ख़राब स्थिति, यानी जेल की सज़ा हो जाए तब भी ट्रंप उम्मीदवार बने रह सकते हैं और संभावित रूप से जेल से ही अमेरिकी राष्ट्रपति का चुनाव लड़ सकते हैं.
सज़ायाफ़्ता व्यक्ति कैसे राष्ट्रपति चुनाव लड़ सकता है?
अमेरिका में 1789 में जॉर्ज वॉशिंगटन पहले राष्ट्रपति बने, उसके बाद से राष्ट्रपति उम्मीदवारी के लिए क़ानूनी पात्रता के नियम नहीं बदले हैं.
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में अमेरिकी हिस्ट्री के प्रोफ़ेसर रहे इवान मॉर्गन ने बीबीसी से कहा, “उम्मीदवारी के लिए ज़रूरी योग्यता है कि वे अमेरिका में पैदा हुए हों और उनकी निश्चित (35 साल से अधिक) उम्र हो. इसीलिए उस समय बहस छिड़ी थी कि ओबामा वाक़ई एक अमेरिकी नागरिक हैं या नहीं.”
गृह युद्ध के बाद 14 साल तक अमेरिका में रहने का एक नियम भी लागू किया गया ताकि अमेरिका के ख़िलाफ़ विद्रोह में शामिल रहे लोगों को रोका जा सके.
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप के ख़िलाफ़ इस नियम के इस्तेमाल की किसी भी संभावना को ख़ारिज कर दिया है.
लेकिन व्हाइट हाउस की दौड़ में शामिल होने पर सज़ायाफ़्ता व्यक्ति पर कोई प्रतिबंध नहीं है.
प्रोफ़ेसर मॉर्गन कहते हैं, “अमेरिका क्रांति से पैदा हुआ था और इसकी संभावना थी कि कोई भी व्यक्ति जो राजशाही के ख़िलाफ़ गतिविधियों के चलते जेल में बंद हो उसे राष्ट्रपति चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराया जा सकता था.”
1787 में अमेरिकी संविधान बनाने के लिए हुए सम्मेलन के संस्थापक नेताओं में से किसी को भी ब्रिटिश ने जेल में नहीं डाला था, हालांकि उनमें से कुछ लोग इसके बहुत क़रीब थे.
वो कहते हैं, “अगर क्रांति सफल नहीं होती, उन्हें राजशाही के ख़िलाफ़ विद्रोह का दोषी ठहराया गया होता और अपराधी होते.”
यही वजह है कि संविधान लिखने वाले लोगों ने राष्ट्रपति कौन बन सकता है इस पर बहुत प्रतिबंध नहीं लगाए और इसी नीति के चलते तीन उम्मीदवारों ने जेल से राष्ट्रपति चुनाव का प्रचार किया.
यूजीन वी डेब्स

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प्रोफ़ेसर मॉर्गन कहते हैं, “जेल में रहते हुए 1920 में राष्ट्रपति चुनाव लड़ने वाले सबसे अहम उम्मीदवार थे यूजीन डेब्स.”
डेब्स को पहली बार 1894 में जेल हुई जब उन्होंने एक ट्रेड यूनियन नेता के तौर पर एक ट्रेन कंपनी के ख़िलाफ़ हड़ताल की, उन्हें ट्रेन रोकने का दोषी पाया गया.
सेना ने इस हड़ताल को तुड़वाया और डेब्स को छह महीने तक जेल में रहना पड़ा. इस अनुभव ने उनके राजनीतिक नज़रिये पर बहुत प्रभाव डाला.
प्रोफ़ेसर मॉर्गन कहते हैं, “20वीं शताब्दी की शुरुआत में वो सोशलिस्ट पार्टी ऑफ़ अमेरिका के प्रमुख सदस्य बन गए. वो 1904, 1908, 1912 और 1920 में राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बने.”
डेब्स ने सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी के टिकट पर 1900 में भी चुनाव लड़ा था.
“1912 में एक चतुष्कोणीय मुकाबला था, जिसमें डेमोक्रेट वुडरो विल्सन, रिपब्लिकन विलियम हॉवर्ड टाफ़्ट, प्रगतिशील उम्मीदवार और पूर्व रिपब्लिकन राष्ट्रपति थियोडोर रूसवेल्ट थे.”
डेब्स ने बड़े दमदार तरीक़े से चुनाव लड़ा और क़रीब 10 लाख वोट यानी कुल वोट का 6% हासिल किया, जो कि अमेरिका में सोशलिस्ट पार्टी उम्मीदवार को मिलने वाले वोट में सर्वाधिक था.
“लेकिन प्रथम विश्व युद्ध के दौरान अमेरिकी मतदाताओं में संशय पैदा हुआ कि वे देशभक्ति के आधार पर समर्थन करें या पूंजीवादी युद्ध के तौर पर विरोध करें?”
डेब्स युद्ध के कटु आलोचक थे और अमेरिकियों को इसमें शामिल होने से लगातार हतोत्साहित कर रहे थे.
प्रो. मॉर्गन कहते हैं, “जंग लगभग समाप्त होने को थी लेकिन 1918 में अमेरिकी जनता से युद्ध के मसौदे का विरोध करने का आह्वान किया.”
उन्हें राजद्रोह का दोषी ठहराया गया और अप्रैल 1919 में जेल भेज दिया गया. जेल में रहते हुए उन्होंने अगले साल चुनाव लड़ा.
हालांकि उनकी सेहत जेल में बिगड़ गई थी और 1926 में उनकी मौत हो गयी.
लिंडन लरूश

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लिंडन लरूश ने अलग कारणों से जेल से राष्ट्रपति चुनाव लड़ा. 1976 से लेकर 2008 तक हर चुनाव में कभी डेमोक्रेट या किसी अन्य पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर उनका नाम मतपत्र पर आता रहा.
लरूश की 1940 के दशक में राजनीतिक शुरुआत वामपंथी थी, लेकिन 1970 के दशक आते आते वो दक्षिणपंथ की ओर झुक गई.
लरूश अपने अजीबोगरीब विश्व दृष्टिकोण के आधार पर, कम टैक्स और लोकलुभावन वायदों के साथ एक राजनीतिक आंदोलन खड़ा करते, जिसमें कभी 2000 से अधिक लोग नहीं हुए.
वो अपने ही नागरिकों पर जासूसी के सख़्त आलोचक थे.
प्रो. मॉर्गन कहते हैं कि आश्चर्यजनक रूप से 1986 में इलिनॉयस राज्य में अहम भूमिकाओं के लिए लरूश समर्थित उम्मीदवार ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवारी हासिल कर ली. साथ ही लरूश ने बहुत सारा चंदा इकट्ठा किया.
प्रो. मॉर्गन के अनुसार, “हम कभी नहीं जान पाएंगे कि ये कितना था लेकिन कुछ लोगों का अनुमान है कि 20 करोड़ डॉलर था. इस फ़ंड से उन्होंने स्थानीय, राज्य और कांग्रेस के चुनावों में काफ़ी खर्च किया लेकिन बहुत कम सफलता मिली.”
1989 में उन्हें मेल फ्रॉड के लिए दोषी ठहराया गया और 15 साल के लिए जेल की सज़ा दी गई.
इसके बाद 1992 का चुनाव आया, लरूश इसमें शामिल होना चाहते थे और कुछ राज्यों में बैलट पर उनका नाम भी आया और उन्हें कुल वोटों का 0.1% या 27000 वोट हासिल हुए.
बाद में उनकी सज़ा कम कर दी गई और 1994 में जेल से भी छोड़ दिया गया. इसके बाद उन्होंने 1996, 2000, 2004 और 2008 के राष्ट्रपति चुनावों में भी हिस्सा लिया.
फ़ंड जुटाने की उनकी काबिलियत और चुनावों में निरंतरता के बावजूद वो बहुत प्रभाव छोड़ पाने में सफल नहीं रहे.
लिंडन लरूश की मौत 2019 में हुई.
जोसेफ़ स्मिथ

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जोसेफ़ स्मिथ ने 1830 में यीशू मसीह पर केंद्रित एक संप्रदाय मोर्मोनिज़्म की स्थापना की थी, जो कि कैथोलिक, प्रोटेस्टेंट्स और ऑर्थोडॉक्स चर्चों से अलग थी.
उन्होंने अपने आंदोलन के अंदर क़रीबी सहयोगियों के लिए बहुविवाह प्रथा की शुरुआत भी की.
प्रोफ़ेसर मॉर्गन कहते हैं, “इसे अमेरिका के बुनियादी मूल्यों के लिए ख़तरे के रूप में देखा गया. बहुविवाह को दुनिया का सबसे बुरा अपराध माना जाता था और कथित रूप से स्मिथ की 20 पत्नियां थीं.”
स्मिथ मूल रूप से मैसाचुसेट्स से थे, लेकिन अपने अनुयायियों के लिए एक सुरक्षित जगह की तलाश उन्हें इलिनॉयस लेकर आई.
1940 के दशक में मोर्मोन ने मिसीसिप्पी के किनारे अपना अलग शहर बसाया, जहां वो रहने और शांति के साथ आध्यात्म में लीन होने की उम्मीद कर रहे थे.
स्मिथ को मेयर के रूप में चुना गया और यहां उन्होंने मोर्मोन मिलिशिया बनाया.
लेकिन बहुपत्नी प्रथा के चलते वो काफ़ी कुख्यात हो गए थे, इसलिए उनके कई विरोधी पैदा हो गए थे.
स्मिथ ने अपने ख़िलाफ़ लिखने वाले अख़बार के प्रिंटिंग प्रेस को नष्ट कर अपने मिलिशिया को आदेश दिया. अंत में उनके जेल जाने का यही कारण बना.
1844 के चुनाव में वो रिफ़ॉर्म पार्टी के उम्मीदवार रहे.
पार्टी ने बहुपत्नी प्रथा को बढ़ावा दिया और स्मिथ के विचारों का प्रचार किया कि हर मनुष्य भगवान है इसलिए उनके विचारों के कारण उनके दुश्मनों की संख्या भी बढ़ती गई.
उनकी जेल के बाहर एक भीड़ ने हमला कर दिया और जिस इमारत में वो छिपे थे, वहीं उन्हें गोली मार दी गई.
लेकिन 1844 के चुनावों में रिफॉर्म पार्टी ने कोई वैकल्पिक उम्मीदवार नहीं दिया.

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तो राष्ट्रपति पद के तीन अन्य उम्मीदवार रहे हैं जिन्होंने जेल में रहते हुए चुनाव लड़ा और चौथे जोसेफ़ माल्डोनाडो-पैसेज हो सकते हैं जिन्होंने नवंबर में होने वाले चुनाव में उतरने का ऐलान किया है.
2020 में नेटफ़्लिक्स डॉक्युमेंट्री 'टाइगर किंग' के स्टार और जोए एक्ज़ॉटिक के नाम से पहचाने जाने वाले जोसेफ़ ने डोमोक्रेट के रूप में चुनाव लड़ने की इच्छा ज़ाहिर की थी.
पशु क्रूरता और एक प्रतिद्वंद्वी चिड़ियाघर मालिक की हत्या की साज़िश के आरोप में वो 20 साल के लिए जेल की सज़ा भुगत रहे हैं.
अब ट्रंप जेल जाते हैं या नहीं, इससे ट्रंप की स्थिति बहुत अनोखी तो नहीं होगी, लेकिन जेल से राष्ट्रपति चुनाव लड़ने वाले वो सबसे महत्वपूर्ण शख़्सियत हो सकते हैं.
अगर उन्हें जेल नहीं भी होती है तो बीबीसी उत्तरी अमेरिका संवाददाता जॉन सुडवर्थ के शब्दों में वो एक ध्रुवीकृत राष्ट्र के आधे हिस्से के लिए एक सज़ायाफ़्ता उम्मीदवार होंगे.
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