पाकिस्तान: लादेन ने जिस रात वज़ीरिस्तान के एक घर में डिनर किया

ओसामा बिन लादेन

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    • Author, एम. इलियास ख़ान
    • पदनाम, बीबीसी उर्दू के लिए

अगर आपके घर डिनर पर आने वाला 'मेहमान' दुनिया का सबसे वॉन्टेड व्यक्ति निकले तो आपको कैसा लगेगा?

हम बात कर रहे हैं चरमपंथी संगठन अल-क़ायदा के नेता ओसामा बिन लादेन की और ये साल 2010 की गर्मियों की बात है.

जिस घर में उसके लिए डिनर का आयोजन किया जा रहा था, वह पाकिस्तान के कबायली इलाके वज़ीरिस्तान में स्थित था.

इस आमंत्रण के ठीक एक साल बाद दो मई, 2011 को अमेरिकी नेवी के सील्स ने पाकिस्तान के एबटाबाद में एक ऑपरेशन में ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था.

ओसामा की मौत के एक साल बाद 2012 में बीबीसी के एक विशेष कार्यक्रम में वज़ीरिस्तान के दो लोगों ने वह कहानी बताई जब बिन लादेन को उनके घर पर डिनर की दावत दी गई थी.

इस कहानी की ख़ास बात ये थी कि मेज़बानों को ये नहीं पता था कि उनके मेहमान कौन हैं?

उस रात की कहानी के अनुसार, वज़ीरिस्तान के एक स्थानीय परिवार के आधा दर्जन लोग एक मेहमान का इंतज़ार कर रहे थे.

इस मेहमान के बारे में उन्हें कई हफ़्ते पहले ही बता दिया गया था कि एक 'महत्वपूर्ण शख़्स' आने वाला है.

उन्हें मेहमान का नाम नहीं बताया गया और मेहमान के आने का निश्चित समय भी कुछ घंटे पहले ही बताया गया.

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रात के ग्यारह बजे जब उस इलाके के लोग गहरी नींद में थे तो मेहमान के इंतज़ार में उन्हें आती हुई गाड़ियों की आवाज़ सुनाई दी.

इस परिवार के एक व्यक्ति ने नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर बीबीसी से बात की.

उन्होंने बताया, "लगभग एक दर्जन बड़ी जीपें हमारे अहाते में दाखिल हुईं. वो साफ़ तौर पर अलग-अलग दिशाओं से आ रही थीं."

इनमें से एक जीप अहाते के बरामदे के ठीक बगल में रुकी और पीछे की सीट से सफ़ेद पगड़ी और लबादा पहने एक लंबा लेकिन कमज़ोर दिख रहा आदमी बाहर निकला.

रात के अंधेरे में वज़ीरिस्तान के उन मेज़बानों को अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था.

क्योंकि उनके सामने जो शख़्स खड़ा था, वह कोई आम शख़्स नहीं बल्कि दुनिया का मोस्ट वॉन्टेड शख़्स ओसामा बिन लादेन था.

अमेरिका जैसी महाशक्ति अपनी पूरी ताक़त और सभी संसाधनों के साथ उसकी तलाश कर रही थी.

उस शख़्स के बारे में सूचना देने वाले व्यक्ति के लिए ढाई लाख अमेरिकी डॉलर का इनाम मुक़र्रर किया गया था.

वज़ीरिस्तान में बिन लादेन की मेज़बानी करने वाले उस परिवार के एक सदस्य ने कहा, "हम हैरान थे. हमें उम्मीद नहीं थी कि हमारे घर आने वाला मेहमान ओसामा होगा."

ओसामा बिन लादेन गाड़ी से बाहर निकला और उसने सभी से हाथ मिलाया.

ओसामा बिन लादेन

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वज़ीरिस्तान के इस कबायली नेता के मुताबिक़, उसने ओसामा का हाथ पकड़कर उसे चूमा और इज़्ज़त के साथ अपनी आंखों से भी लगाया.

ओसामा ने अपने एक सहयोगी के कंधे पर हाथ रखा और उस कमरे की ओर चल दिया जो मेहमान के लिए तैयार किया गया था.

घर के लोग ओसामा के साथ अंदर नहीं गए. वहां सिर्फ ओसामा के साथ आए दो लोग ही मौजूद थे.

बता दें कि यह घटना ओसामा की मौत से एक साल पहले की है.

ओसामा की मौत की ख़बर मिलने के बाद उनकी मेहमाननवाज़ी करने वाले इस कबायली परिवार ने अपने कुछ दोस्तों को इस अनुभव के बारे में बताया.

उन्होंने बीबीसी से केवल इस शर्त पर बात की कि उनका और उनके गांव की पहचान गोपनीय रखी जाएगी.

उनके मुताबिक, ओसामा बिन लादेन ने उस रात वहां करीब तीन घंटे बिताए थे. इस दौरान नमाज़ अदा की गई और आराम के बाद मेहमानों की ख़ातिरदारी के लिए उन्हें चावल और मीट खिलाया गया.

इस दौरान, मेज़बानों को घर का आहता छोड़ने की इजाज़त नहीं थी और बाहर से भी कोई अंदर नहीं दाखिल हो सकता था.

अहाते के मुख्य द्वार सहित छत और कैंपस के चारों ओर हथियारबंद लोग मौजूद थे.

जब एक मेज़बान ने गुज़ारिश की कि उसके 85 वर्षीय पिता को ओसामा बिन लादेन से मिलने की इजाज़त दी जाए.

वीडियो कैप्शन, ओसामा बिन लादेन को लेकर पाकिस्तान में विवाद क्यों?

इस फरमाइश पर ओसामा बिन लादेन के अंगरक्षक असहज दिखे.

हालाँकि मेज़बान ने अनुरोध किया कि इसे उसके पिता की अंतिम इच्छा के रूप में स्वीकार किया जाए.

अंगरक्षकों ने ये संदेश अल-क़ायदा नेता तक पहुंचाया और फिर ओसामा ने मुलाक़ात के लिए हामी भर दी.

मेज़बान के पिता को लेने के लिए चार गार्ड उनके साथ गए थे.

उन बुजुर्ग को ओसामा बिन लादेन की मौजूदगी के बारे में केवल तभी सूचित किया गया जब वो अहाते में दाखिल हो गए.

मेज़बान के बुजुर्ग पिता ने ओसामा के साथ लगभग 10 मिनट बिताए और उनके अनुसार, पश्तो में अल-क़ायदा नेता के लिए प्रार्थना की.

साथ ही अपने अनुभवों के आधार पर कबायली इलाके में युद्ध की रणनीति पर सलाह दी.

मेज़बान का कहना था कि बुजुर्ग की सलाह पर ओसामा बिन लादेन और उनके अंगरक्षकों के चेहरे पर मुस्कान आ गई थी.

ओसामा और उनके अंगरक्षक जैसे आए थे वैसे ही चले गये. जैसे ही वे आधा दर्जन जीपों में बैठे, वो गाड़ियां कैंपस से आगे-पीछे तेज़ी से निकलीं और अलग-अलग दिशाओं के लिए रवाना हो गईं.

मेज़बान अंदाज़ा नहीं लगा सके कि उनमें से ओसामा की गाड़ी कौन सी थी और उसकी दिशा क्या थी.

वीडियो कैप्शन, ओसामा बिन लादेन को मारने की योजना ऐसे बनी थी vivechana

यह कहानी सुनाते समय वज़ीरिस्तान के ये लोग इस बात पर अड़े रहे कि वे उस व्यक्ति के बारे में बात नहीं कर सकते जिसने उनसे मेहमानों के रहने और खाने का इंतजाम करने को कहा था.

वह ओसामा के साथ आए लोगों के बारे में भी बात करने से कतरा रहे थे.

गौरतलब है कि एबटाबाद में ओसामा की मौत के बाद अमेरिकी और पाकिस्तानी अधिकारियों ने दावा किया था कि अल-क़ायदा नेता करीब पांच साल से शहर में अकेले रह रहा था और इस दौरान उसने कभी अपना परिसर नहीं छोड़ा.

लेकिन ये कहानी साबित करती है कि ये दावा सच नहीं है. हालाँकि, अभी भी कई सवालों के जवाब नहीं मिले हैं.

साल 2010 की उस रात ओसामा जिस इलाके में अचानक प्रकट हुआ था, वह एक विशाल और सुदूर कबायली इलाका था.

इस इलाके में पाकिस्तानी फौज ने वज़ीरिस्तान सहित पूर्व एफएटीए में चरमपंथियों और दर्जनों सैन्य चौकियों के ख़िलाफ़ कई अभियान चलाए थे.

ओसामा बिन लादेन इन फौजी चौकियों से कैसे बचे होंगे.

पाकिस्तान की सरकार और सेना ने हमेशा ओसामा बिन लादेन के बारे में कोई जानकारी होने से इनकार किया है. उनके अनुसार, अल-क़ायदा नेता को पाकिस्तान का कोई समर्थन हासिल नहीं था.

एक सवाल यह भी है कि वह अज्ञात और रहस्यमयी लेकिन प्रभावशाली व्यक्ति कौन था जिसने ओसामा बिन लादेन के आवास और भोजन के साथ-साथ यात्रा सुविधाओं की व्यवस्था की थी और ओसामा की इस यात्रा का मक़सद क्या था?

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