ईरान की यूनिवर्सिटी में लड़की ने उतारे अपने कपड़े, क्या है पूरा मामला?

यूनिवर्सिटी कैंपस

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इमेज कैप्शन, बीबीसी फ़ारसी ने इस बात की पुष्टि की है कि यह तस्वीर तेहरान आज़ाद यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड रिसर्च के ब्लॉक 1 की है.
    • Author, रोजा असदी
    • पदनाम, बीबीसी फ़ारसी

शनिवार 2 नवंबर को तेहरान की यूनिवर्सिटी ऑफ़ साइंस एंड रिसर्च के परिसर में अंडरवियर में एक लड़की के दिखने और फिर उसकी गिरफ़्तारी के वीडियो पर बड़ी प्रतिक्रिया सामने आ रही है.

इस वीडियो पर सोशल मीडिया पर काफ़ी लोगों ने टिप्पणी की है. इसमें लड़की के अपने कपड़े उतारने के बारे में भी ख़बरें सामने आई हैं.

बीबीसी फ़ारसी की डिजिटल टीम ने इस घटना की जगह की पुष्टि की है. यह जगह तेहरान की इस्लामिक आज़ाद यूनिवर्सिटी ऑफ़ साइंस एंड रिसर्च के ब्लॉक-1 की है.

बीबीसी के मुताबिक यह घटना शनिवार 2 नवंबर की है.

अन्य तस्वीरों में यह लड़की अपने अंडरवियर में कैंपस में बेपरवाह घूमते हुए दिखाई दे रही है.

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वीडियो में क्या दिख रहा है?

इस वीडियो में अंडरवियर में एक लड़की यूनिवर्सिटी कैंपस में एक मंच पर बैठी है और यूनिवर्सिटी के पुरुष और महिला सुरक्षा अधिकारी उससे बात कर रहे हैं, लेकिन वीडियो में यह बातचीत नहीं सुनी जा सकती.

शायद इस वीडियो को दूर कहीं क्लास की खिड़की से बनाया गया है. एक अन्य वीडियो में यह लड़की ब्लॉक एक के पास एक सड़क पर चलते हुए दिख रही है.

उनकी हलचल से स्पष्ट है कि वह अपने शॉर्ट्स उतार रही हैं. घटनास्थल पर मौजूद लोगों की प्रतिक्रिया भी इस बात की पुष्टि करती है.

थोड़ी ही देर बाद कई पुलिस अधिकारियों के साथ एक कार घटनास्थल पर आती है.

ऐसा दिखता है कि कई अधिकारी इस कार से उतरते हैं और आक्रामक अंदाज़ में लड़की को कार में बिठा लेते हैं.

सोशल मीडिया पर हो रहे दावे

सोशल मीडिया

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इमेज कैप्शन, सोशल मीडिया पर लड़की को लेकर अलग अलग दावे किए जा रहे हैं.

ईरान के बाहर कई मीडिया प्लेटफ़ॉर्म और सोशल मीडिया नेटवर्क पर प्रकाशित रिपोर्टों ने इसे लड़की के विरोध का तरीका बताया है.

इस घटना को हिजाब पहनना ज़रूरी करने और यूनिवर्सिटी के सुरक्षा अधिकारियों के व्यवहार के विरोध की प्रतिक्रिया बताया जा रहा है.

इससे जुड़ी कई रिपोर्ट्स 'अमीर कबीर न्यूज़लेटर' के टेलीग्राम चैनल पर प्रकाशित की गई हैं.

'अमीर कबीर न्यूज़' में कहा गया है कि 'मास्क न पहनने की वजह से लड़की को परेशान किया गया और सुरक्षा बलों ने उसके कपड़े फाड़ दिए, उसके बाद विरोध जताते हुए लड़की ने अपने सारे कपड़े उतार दिए.'

बीबीसी फ़ारसी के जवाब में अमीर कबीर अख़बार ने कहा कि उसने एक जानकार सूत्र से मिली सूचना के आधार पर यह रिपोर्ट प्रकाशित की है.

बीबीसी को चश्मदीदों ने क्या बताया

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इस घटना के दो चश्मदीदों ने बीबीसी फ़ारसी के साथ एक बातचीन में घटना के बारे में बताया है.

उन्होंने बीबीसी फ़ारसी को बताया कि लड़की, "हाथ में मोबाइल फोन लेकर कई क्लासरूम में घुस गई और लग रहा था कि जैसे कि वो छात्रों के वीडियो बनी रही हो."

उनके मुताबिक़ बिना अनुमति के क्लारूप में घुसने से नाराज़ प्रोफेसरों में से एक ने एक छात्र को उसके पीछे यह पूछने के लिए भेजा कि वह क्या कर रही है. एक गवाह के मुताबिक़, इस पर वह लड़की चिल्लाने लगी और शोर मचाने लगी.

एक चश्मदीद ने बीबीसी को बताया कि जब वो आंगन में पहुंचे तो उन्होंने देखा कि लड़की ने अपने कपड़े उतार दिए थे.

इन गवाहों के मुताबिक़, इस लड़की और गार्ड के बीच "कोई लड़ाई नहीं हुई थी."

लेकिन इन दोनों गवाहों ने क्लासरूम में लड़की के अचानक प्रवेश के बाद से ही इस घटना को देखा है.

उन्होंने कहा है कि उन्हें नहीं पता कि लड़की के क्लासरूम में आने से पहले क्या हुआ था.

उन्होंने यह नहीं देखा कि लड़की के इमारत से निकलने और उसके कपड़े उतारने से पहले क्या हुआ था?

इस लड़की के कपड़े उतारने के बाद ये दोनों गवाह वहां पहुंचे थे.

इन चश्मदीदों के मुताबिक़, लड़की ने बिल्डिंग के अंदर छात्राओं से कहा कि ''मैं तुम्हें बचाने आई हूं.''

इस यूनिवर्सिटी की छात्रा नज़र आ रही एक यूज़र ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि इस लड़की ने कहा, "मैं तुम्हें बचाने आई हूं".

यूनिवर्सिटी और मीडिया की प्रतिक्रिया

इस तस्वीर में भी लड़की दिखाई देती है.

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इमेज कैप्शन, इस सड़क पर भी घूमते हुए लड़की दिखाई देती है.

इस्लामिक आज़ाद यूनिवर्सिटी के जनसंपर्क विभाग के निदेशक अमीर महज़ोब ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में इस लड़की को यूनिवर्सिटी की छात्रा बताया है, लेकिन सुरक्षाकर्मियों के साथ उसकी किसी भी तरह की बहस से इनकार किया है.

अमीर महज़ोब के मुताबिक़, "जांच से पता चला है कि लड़की ने अपनी मानसिक दशा के चलते अपने सहपाठियों और अपने शिक्षकों का वीडियो बनाना शुरू कर दिया, जिस पर उसे टोका भी गया."

"छात्रों और सुरक्षाकर्मियों की चेतावनी के बाद वह भागते हुए आंगन में गई और यह सब किया."

आईएसएनए सहित ईरानी मीडिया ने यह दावा किया है कि इस 'लड़की' को छात्रों का वीडियो बनाने के बाद उनके विरोध का सामना करना पड़ा और इसी विरोध के जवाब में उसने अपने कपड़े उतार दिए.

मीडिया में यूनिवर्सिटी के हवाले से कहा गया है कि "यह छात्रा गंभीर मानसिक दबाव और मानसिक बीमारी से ग्रस्त है और उसे एक मेडिकल सेंटर में भेज दिया गया है."

छात्रा की तत्काल रिहाई की मांग

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अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस लड़की की गिरफ़्तारी पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है.

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने ‘एक्स’ पर एक ट्वीट में लिखा है, "2 नवंबर को हिंसक तरीके से गिरफ़्तार की गई छात्रा को ईरानी अधिकारियों को तुरंत और बिना शर्त रिहा करना चाहिए, जिसके साथ इस्लामिक आज़ाद यूनिवर्सिटी में सुरक्षा अधिकारियों ने जबरन हिजाब पहनने के लिए दुर्व्यवहार किया और इसके विरोध में उसने अपने कपड़े उतार दिए थे."

एमनेस्टी ईरान ने एक्स पर लिखा है, "इस दौरान अधिकारियों को उसके साथ अत्याचार और अन्य दुर्व्यवहार को रोकना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके परिवार के सदस्यों को वकील मिल सके. हिरासत के दौरान उनके ख़िलाफ़ मारपीट और यौन हिंसा के आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से जांच की जानी चाहिए."

माई सातो, जिन्होंने अगस्त में ईरान के लिए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के विशेष दूत के रूप में अपना काम शुरू किया है, उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर एक ट्वीट में लिखा है, "मैं इस घटना और इस पर अधिकारियों की प्रतिक्रिया पर बारीकी से नज़र रखूंगा."

हिजाब के खिलाफ विरोध?

हिजाब

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हालाँकि इस लड़की ने जो कुछ किया उस पर अलग-अलग कहानियाँ और दावों की वजह से हम इसकी सबसे बड़ी वजह नहीं जानते हैं, लेकिन कई यूज़र्स ने उपलब्ध जानकारी के आधार पर इस लड़की के बारे में बात करना शुरू कर दिया है.

कई यूज़र्स ने लड़की के इस कदम को हिजाब की अनिवार्यता के ख़िलाफ़ विरोध बताया है, जो यूनिवर्सिटी के सुरक्षा बलों के कठोर रवैये के ख़िलाफ़ किया गया था.

ऐसा दावा करने वालों में एक वकील मरियम कियानार्थी भी शामिल हैं जिन्होंने लिखा, "मानविकी की इस छात्रा का विद्रोह हिजाब पहनने के लिए छात्राओं पर कठोर और अनुचित दबाव की निशानी है."

उनका कहना है कि वो इस लड़की के लिए बिना पैसे लिए केस लड़ने और उसका प्रतिनिधित्व करने के लिए तैयार हैं.

ऐसे यूज़र्स जो मानते हैं कि लड़की ने हिजाब पहनने के लिए बनाए गए दबाव और सुरक्षाबलों के व्यवहार की वजह से कपड़े उतारे थे, वो इस लड़की के कदम को “साहसिक” बता रहे हैं.

कुछ लोगों ने दावा किया है कि इस लड़की ने ऐसा केवल घबराहट और दबाव में किया था और यह जानबूझकर किया गया विरोध प्रदर्शन नहीं था.

हालाँकि ईरानी सरकार के कई समर्थकों और "महिला, जीवन, स्वतंत्रता" आंदोलन के विरोधियों का कहना है कि इस लड़की का कदम उनके दावे की पुष्टि है कि "इस आंदोलन में प्रदर्शनकारी नग्न होना चाह रहे हैं.”

कई यूजर्स का कहना है कि वो इस लड़की की पहचान ढूंढ रहे हैं ताकि उसके बारे में जानकारी दे सकें और सोशल मीडिया पर उसका समर्थन कर सकें.

ऐसे लोगों का मानना है कि विरोध जताने वालों की गुमनामी की वजह से ख़बरें खामोश हो जाती हैं, जो अंत में हानिकारक साबित होती हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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