ईरान के ताबड़तोड़ मिसाइल हमलों को इसराइल वाक़ई रोक लेता है?

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- Author, राघवेंद्र राव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
ईरान ने मंगलवार को इसराइल पर दर्जनों मिसाइलें दागीं. इनमें से कुछ इसराइली इलाक़े में भी गिरी थीं.
इस साल ईरान का इसराइल पर ये दूसरा हवाई हमला था.
अप्रैल में भी ईरान ने इसराइल पर दर्जनों मिसाइलों और ड्रोन से हमले किए थे.
मंगलवार के हमले के बाद ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने दावा किया कि दागी गई मिसाइलों में से 90 फ़ीसदी मिसाइल अपने निशाने पर लगीं.
वहीं इसराइल ने कहा कि ज़्यादातर मिसाइलों को इसराइल पहुँचने से पहले ही हवा में नष्ट कर दिया गया.

ईरान के हमले का कितना असर?

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ईरान का दावा है कि पहली बार हाइपरसोनिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया है और आईआरजीसी सूत्रों के मुताबिक़ तीन इसराइली सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया.
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ ईरान के मिसाइल हमलों से इसराइली ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद के मुख्यालय से 1500 मीटर दूर एक गड्ढा बन गया.
मोसाद मुख्यालय के बाहर गड्ढे और मलबा दिखाने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुआ.
ईरानी हमले में इसराइल को ज़्यादा नुकसान होने के कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं. .
इसकी एक बड़ी वजह ये मानी जा रही है कि हमला शुरू होते ही इसराइल के लोगों ने ऐसी स्थिति से निपटने के लिए बनाए गए बॉम्ब शेल्टरों में पनाह ले ली थी.
इसराइली डॉक्टरों ने ये ज़रूर कहा कि छर्रे लगने से दो लोग मामूली रूप से घायल हो गए हैं.
वहीं कब्ज़े वाले वेस्ट बैंक शहर जेरिको में एक फ़लस्तीनी व्यक्ति की मौत हो गई.
इन सब के बीच एक बार फिर से इसराइल के एयर डिफ़ेन्स सिस्टम की चर्चा हो रही है.
वाक़ई इसराइल की कई परतों वाली हवाई रक्षा प्रणाली ने ईरान के मंसूबों को बेअसर किया?
आयरन डोम और डेविड्स स्लिंग क्या हैं?

ईरान के मिसाइल हमले को नाकाम बताते हुए इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा कि ये हमला इसराइल की उस हवाई रक्षा प्रणाली की वजह से विफल हुआ जो दुनिया में सबसे उन्नत है.
इसराइल के पास कई एयर डिफ़ेन्स सिस्टम हैं, जिनमें से हर एक को अलग-अलग ऊँचाई और दूरी पर आने वाली मिसाइलों को रोकने के लिए डिज़ाइन किया गया है.
इनमें सबसे जानी-मानी हवाई सुरक्षा ढाल है, आयरन डोम. यह कम दूरी से दागे गए रॉकेट या मिसाइलों को रोक सकता है. आयरन डोम चार किलोमीटर से लेकर 70 किलोमीटर की दूरी से दागे गए रॉकेट या मिसाइलों को रोक सकता है.
आयरन डोम रडार से आने वाले रॉकेटों का पता लगाता है और उन पर नज़र रखता है. यह पता करता है कि कौन से रॉकेट के आबादी वाले इलाक़ों में गिरने की संभावना है.
इसके बाद यह उन रॉकेटों पर मिसाइलें दागता है जबकि बाक़ी रॉकेटों को खुले मैदान में गिरने के लिए छोड़ दिया जाता है.
आयरन डोम को अमेरिकी मदद के साथ इसराइली फ़र्म राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स और इसराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ने डिज़ाइन किया है. इसे पहली बार 2011 में तैनात किया गया था.
उसी साल इसका पहली बार इस्तेमाल भी किया गया, जब इसने ग़ज़ा से दागे गए रॉकेट को रोका.
अक्टूबर 2023 से आयरन डोम मिसाइलों ने ग़ज़ा से हमास और अन्य चरमपंथी समूहों द्वारा दागे गए हज़ारों रॉकेटों को रोका है.
आयरन डोम के बाद इसराइल की सबसे ज़्यादा कामयाब हवाई रक्षा प्रणाली है, डेविड्स स्लिंग जो एक मध्यम दूरी तक मार करने की क्षमता रखती है.
हिब्रू भाषा में "मैजिक वैंड" या जादू की छड़ी कहे जाने वाले डेविड्स स्लिंग 300 किमी दूर तक की मिसाइलों को रोक सकता है.
इसराइल के राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम और अमेरिका के रेथियॉन द्वारा संयुक्त रूप से विकसित इस प्रणाली ने 2017 में काम करना शुरू किया था.
डेविड्स स्लिंग की "स्टनर" मिसाइलों को कम ऊंचाई पर कम दूरी, मध्यम दूरी और लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने के लिए डिज़ाइन किया गया है.
आयरन डोम की ही तरह डेविड्स स्लिंग सिर्फ़ उन मिसाइलों को निशाना बनाता है जो आबादी वाले इलाक़ों के लिए ख़तरा हो सकती हैं.
डेविड्स स्लिंग और आयरन डोम दोनों को विमान, ड्रोन और क्रूज मिसाइलों को रोकने के लिए भी डिज़ाइन किया गया है. एक डेविड्स स्लिंग मिसाइल की कीमत क़रीब दस लाख अमेरिकी डॉलर है.
एरो-2 और एरो-3 क्या हैं?

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एरो-2 इसराइल की एक और हवाई रक्षा प्रणाली है, जिसे पृथ्वी से क़रीब 50 किमी ऊपर वायुमंडल से गुज़रते समय कम दूरी और मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को तबाह करने के लिए डिज़ाइन किया गया है.
ये 500 किलोमीटर दूर से मिसाइलों का पता लगा सकता है और लॉन्च साइट से 100 किलोमीटर तक की दूरी पर रोक सकने में सक्षम है.
एरो-2 की मिसाइलें ध्वनि की गति से नौ गुना तेज़ गति से उड़ती हैं और ये एक बार में 14 लक्ष्यों पर फायर कर सकती हैं.
साल 2000 से इसराइल इसका इस्तेमाल कर रहा है.
एरो-3 को लंबी दूरी की उन बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए डिज़ाइन किया गया है जो पृथ्वी के वायुमंडल के बाहर उड़ती हैं. इसकी रेंज 2,400 किलोमीटर है.
एरो-3 का पहली बार इस्तेमाल साल 2023 में उस बैलिस्टिक मिसाइल को रोकने के लिए किया गया जो यमन के हूती विद्रोहियों ने दक्षिणी इसराइल के तटीय शहर ईलाट पर दागा था.
इस प्रणाली को पहली बार साल 2017 में तैनात किया गया था.
रक्षा विश्लेषक राहुल बेदी मानते हैं कि इस तरह के मिसाइल हमले को विफल करने में इसराइल की एरो-2 और एरो-3 हवाई रक्षा प्रणालियाँ बहुत कारगर हैं.
बेदी कहते हैं, "ये हवाई रक्षा प्रणालियां अमेरिका की हैं और इसराइल के पास उच्च स्तर की सटीक इंजीनियरिंग है, जिससे वे अपनी मारक क्षमता को बढ़ाते हैं."
उनका कहना है कि अगर 180 मिसाइलों से हमले के बाद सिर्फ़ एक मौत की सूचना मिली है, तो यह दिखता है कि हवाई रक्षा प्रणालियां काम कर रही हैं.
'कोई भी एयर डिफ़ेन्स सिस्टम फूलप्रूफ़ नहीं'

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भारतीय सेना के रिटायर मेजर जनरल एसबी अस्थाना रक्षा और सामरिक मामलों के विशेषज्ञ हैं.
उनका कहना है कि "दुनिया में कोई भी एयर डिफेंस सिस्टम फुलप्रूफ नहीं है."
अस्थाना कहते हैं, "इसराइल के पास कई परतों वाला एयर डिफेंस सिस्टम है लेकिन इस सिस्टम की क्षमता एक सीमा तक है. अगर मिसाइलों, ड्रोन और प्रोजेक्टाइल की संख्या एक निर्धारित संख्या से ज़्यादा हो जाती है तो कुछ हद तक वो अपने निशाने तक पहुँच जाएंगे. यही वजह है कि जब भी ईरान इसराइल पर निशाना साधता है तो वह काफ़ी संख्या में मिसाइलें दागता है ताकि कम से कम कुछ तो अपने लक्ष्य को भेद सकें."
अस्थाना के मुताबिक़ इसमें कोई शक़ नहीं है कि इसराइल का मिसाइल डिफेंस सिस्टम अच्छा है और इसमें भी कोई शक़ नहीं है कि भूमध्य सागर में मौजूद सभी अमेरिकी युद्धपोतों द्वारा कुछ मिसाइलों को रोके जाने से भी उन्हें मदद मिल रही है.
अस्थाना कहते हैं, "इन सभी क्षमताओं के साथ बड़ी संख्या में मिसाइलें नष्ट हो जातीं हैं लेकिन कुछ निश्चित रूप से निशाने पर लगती हैं. अब यह इसराइल के हितों के अनुकूल है कि यह न दिखाया जाए कि बहुत ज्यादा नुक़सान हुआ है.''
''वे यह दिखाना चाहेंगे कि इसराइल का एयर डिफेंस सिस्टम अभेद्य है. लेकिन दुनिया में कोई भी हवाई रक्षा प्रणाली अभेद्य नहीं है. इसमें अमेरिका की हवाई रक्षा प्रणाली भी शामिल है."
मेजर जनरल अस्थाना कहते हैं कि ईरान का ये दावा करना कि उनकी मिसाइलों ने बहुत नुक़सान किया है उसकी वजह ये है कि उसे अपने प्रॉक्सी का मनोबल बढ़ाना है. वे कहते हैं, "अगर ईरान कार्रवाई नहीं करता तो तो उसके प्रॉक्सी पर उसकी पकड़ कम हो जाएगी."
'ईरान से बचना आसान नहीं'

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रक्षा विशेषज्ञ अजय शुक्ला के मुताबिक़ फ़िलहाल कुछ भी कहना अटकलबाज़ी होगी क्योंकि इस बात का सटीक विवरण उपलब्ध नहीं है कि ईरान ने कौन से मिसाइलें दागींऔर कितनी दूरी से दागीं.
शुक्ला कहते हैं, "इसराइल निश्चित रूप से उनमें से कुछ मिसाइलों को रोकने और नष्ट करने में कामयाब रहा होगा. लेकिन कुछ मिसाइलें इसराइल के एयर डिफेन्स सिस्टम्स से बच निकली होंगी."
अजय शुक्ला कहते हैं, "आयरन डोम जो इसराइल की हवाई रक्षा का मुख्य आधार रहा है वो मूल रूप से कम दूरी की मिसाइलों से निपट सकता है. जैसे ग़ज़ा या लेबनान से से दागी गई मिसाइलें. कम दूरी की मिसाइल होने के कारण वे कम गति से आती हैं और उन्हें रोकना आसान होता है.''
''तो इसराइल के लिए ग़ज़ा से होने वाले हमलों से निपटना आसान है लेकिन ईरान से होने वाले हमलों से नहीं क्योंकि ईरान के पास बेहतर तकनीक है. ईरान के पास बेहतर रेंज की मिसाइलें हैं जो अपने लक्ष्य को भेद सकती हैं."
शुक्ला के मुताबिक़ इसराइल के लिए हमास और हिज़्बुल्लाह जैसे समूहों से निपटना आसान है क्योंकि इन समूहों के पास ईरान की तुलना में कम प्रभावी तकनीक है. वे कहते हैं, "जब बात ईरान की आती है, तो इसराइल के लिए उनसे निपटना ज़्यादा मुश्किल है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित












