इसराइल पर ईरान के हमले का जुआ कितना कारगर?

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- Author, जियार गोल
- पदनाम, वैश्विक मामलों के संवाददाता, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस
ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर के कमांडर-इन-चीफ़ मेजर जनरल हुसैन सलामी अपने वॉर रूम में एक बड़े से बैनर के सामने खड़े थे.
उनके हाथ में फ़ोन था और वे इसराइल के ख़िलाफ़ 200 बैलिस्टिक मिसाइल दागने का आदेश दे रहे थे.
इस घटना का वीडियो ईरानी मीडिया में शेयर किया जा रहा है.
जनरल ने कहा है कि बैनर पर जिन तीन लोगों के चित्र हैं, वो उनकी मौत का बदला ले रहे हैं.
जिन लोगों की तस्वीर लगी है, वो थे- हमास नेता इस्माइल हनिया जो जुलाई में तेहरान में मारे गए थे. इस हमले के बाद इसराइल पर ही उंगलियां उठी थीं. दूसरी तस्वीर हिज़्बुल्लाह के नेता हसन नसरल्लाह की है और तीसरी तस्वीर है गार्ड्स कोर के कमांडर ब्रिगेडियर-जनरल अब्बास निलोफ़रशां की. ये दोनों लोग पिछले हफ़्ते बेरूत पर हुए इसराइल हमले में मारे गए थे.

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'12 मिनट के भीतर इसराइल पहुंची मिसाइल'
गार्ड्स कोर ने दावा किया है कि जिन मिसाइलों से हमला किया गया है कि उनमें फ़तह हाइपरसोनिक मिसाइल भी है, जो 12 मिनट के भीतर इसराइल पहुँच गई थी.
उनका दावा है कि ये मिसाइलें इसराइल हवाई अड्डों और मोसाद के मुख्यालय को निशाना बनाने में सफल रही हैं.
लेकिन इसराइली डिफ़ेंस फ़ोर्सज़ ने कहा है कि ईरान की ओर से दागी गई अधिकतर मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर लिया गया था.
इसराइल का कहना है कि बहुत कम संख्या में मिसाइलें केंद्रीय और दक्षिणी इसराइल की कुछ जगहों को निशाना बना पाई थीं.
हमले के बाद तेहरान के फ़लस्तीन चौक पर एक भीमकाय बैनर लगाया गया था. इस बैनर पर उन मिसाइलों की तस्वीरें छपी थीं, जो इसराइल पर दागी गई थीं.
बैनर पर लिखा था - 'ज़ॉयोनिज़्म के ख़ात्मे की शुरूआत.’
इस्माइल हानिया की मौत के बाद ईरान ने एक तरह से धैर्य का इस्तेमाल किया था लेकिन अपने नज़दीकी सहयोगी हिज़्बुल्लाह पर इसराइली कार्रवाई उसके लिए ‘अपमानजनक’ बन गई.
इसराइल कार्रवाई में बीते शुक्रवार को नसरल्लाह और निलोफ़रशां की मौत हो गई थी.
ईरानी हथियार, ट्रेनिंग और फंडिंग ने ही हिज़्बुल्लाह को लेबनान की सबसे ताक़तवर हथियारबंद फ़ोर्स बनाया है. इस गुट का गठन भी गार्ड्स कोर के सहयोग से 1980 के दशक में किया गया था.
सितंबर से पहले ईरान के नेताओं को लग रहा था कि हिज़्बुल्लाह के साथ झड़पों के कारण इसराइल कमज़ोर पड़ जाएगा क्योंकि वो फ़िलहाल ग़ज़ा में हमास के साथ भी उलझा हुआ है.

ख़ुद को ताकतवर दिखाने की कोशिश
ईरान अपने परमाणु और मिसाइल ठिकानों की हिफ़ाज़त के लिए हिज़्बुल्लाह के रॉकेटों और मिसाइलों के जखीरे का इस्तेमाल करता रहा है.
जुलाई में सत्ता में आए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजे़शकियान ने इसराइल पर ईरान को एक ऐसे जंग के लिए उकसाने के आरोप लगाए हैं जिसमें अमेरिकी भी खिंचा चला आएगा.
पेज़ेशकियान ने क़तर में ईरानी मीडिया को बताया, “हम भी सुरक्षा और शांति चाहते हैं. याद रखें कि इसराइल ने ही तेहरान में हनिया की हत्या की थी. यूरोप और अमेरिका कह रहे हैं कि अगर हम कोई एक्शन ना लें तो ग़ज़ा में एक हफ़्ते में शांति हो जाएगी. हमने इंतज़ार किया लेकिन हत्याएं और बढ़ती जा रही हैं. ”
कई कट्टर विचार रखने वाले लोग इस बात से असहज थे कि ईरान इसराइल के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है.
देश के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई और गार्ड्स कोर के नियंत्रण वाले सरकारी टीवी चैनल पर कई कंमेंटेटर ये कह रहे हैं कि हनिया की मौत का बदला ना लेकर ईरान ने इसराइल की हिम्मत बढ़ा दी थी.
मंगलवार के मिसाइल अटैक के बाद ईरानी आर्म्ड फ़ोर्सज़ के चीफ़ मेजर जनरल मोहम्मद बाक़ेरी ने कहा है कि अब धैर्य और संयम का वक़्त ख़त्म हो गया है.
बाक़ेरी ने कहा, ''हमने इसराइल में मिलिट्री और इंटेलिजेंस के ठिकानों को निशाना बनाया है. हमने आर्थिक और इंडस्ट्रियल इलाक़ों पर हमला करने से गुरेज़ किया है. लेकिन इसराइल ने पलटवार किया तो हमारा जवाब और अधिक ताक़तवर होगा.”
मिसाइल हमला ईरानी नेताओं के बीच बढ़ती इस चिंता को दिखाता है कि इसराइल के हमलों के बाद चुप रहना घर में और देश के बाहर हिज़्बुल्लाह और हमास जैसे सहयोगियों के बीच उन्हें कमज़ोर के रूप में दिखाएगा.

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'छद्म युद्ध'
ईरान और इसराइल अरसे से एक छद्म युद्ध का हिस्सा रहे हैं. उनकी नीति ‘न युद्ध, न शांति’ रही है. लेकिन लगता है कि अब ये यथास्थिति बदल रही है.
इसराइल ने ईरानी मिसाइल हमले का करारा जवाब देने की बात कही है. देश के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने चेतावनी दी है कि ईरान ने एक बहुत बड़ी भूल की है और उसे इसका ख़ामियाजा भुगतना पड़ेगा.
इस बार अमेरिका की रणनीति में भी एक बदलाव देखा जा सकता है.
अप्रैल में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने इसराइल को संयम बरतने के लिए कहा था. तब ईरान ने इसराइल पर मिसाइल दागे थे जिन्हें अमेरिका और उसके सहयोगियों ने मार गिराया था.
ईरान ने ये हमले सीरिया में ईरान के कंसुलेट पर इसराइली हवाई हमलों के जवाब में किए थे. कंसुलेट में ईरान के कई शीर्ष गार्ड कोर के कमांडर मारे गए थे.
इसराइल ने अमेरिका की बात मान ली थी और उसने सिर्फ़ सेंट्रल ईरान के एक सैन्य ठिकाने पर मिसाइल दागी थी.
लेकिन इस बार बाइडन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैक सुलिवान ने चेतावनी दी है कि ईरान हमले के गंभीर परिणाम होंगे और अमेरिका इसके लिए ‘इसराइल के साथ’ काम करेगा.
बुधवार को इसराइली मीडिया में छप रही ख़बरों के अनुसार- इसराइल कुछ ही दिनों के भीतर ईरान के कुछ अहम रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाएगा. इन हमलों में ईरान के तेल के अहम ठिकानों पर हमले की भी अटकलें हैं.

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ईरान पर अब कैसा ख़तरा
कुछ अधिकारियों ने ये भी कहा है कि अगर इसराइल पर हमले का ख़तरा हुआ तो ईरान के परमाणु ठिकानों को भी निशाना बनाया जा सकता है.
सीनियर ईरान अधिकारियों ने कहा है कि अब हानिया, नसरल्लाह और निलोफ़रशां की हत्याओं का बदला लिया जा चुका है और अगर उन्हें उकसाया नहीं गया तो और हमले नहीं होंगे.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने भी कहा है कि उन्होंने अमेरिका को तेहरान स्थित स्विटज़रलैंड के दूतावास के ज़रिए बताया है कि वो इस मामले में हस्तक्षेप न करे.
अब्बास अरागची ने कहा, “कोई भी तीसरा मुल्क जो इसराइल की मदद करे या अपने एयरस्पेस का इस्तेमाल ईरान के ख़िलाफ़ होने देगा वो ईरानी हमले का वैध टार्गेट होगा.”
मध्य-पूर्व में करीब 40,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, इनमें अधिकतर इराक़ और सीरिया में हैं. इन सैनिकों को सीरिया में मौजूद ईरान समर्थित गुटों से ख़तरा हो सकता है.
लेकिन फ़िलहाल ईरान को इसराइली जवाब का इंतज़ार करना है और उम्मीद करनी है कि उसने जो दांव खेला है वो कारगर साबित हो.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित








