लेबनान में इसराइल के आठ सैनिकों के मारे जाने के बाद हिज़्बुल्लाह क्या कह रहा है?

इमेज स्रोत, Getty Images
- Author, ह्यूगो बशेगा और डेविड ग्रिटेन
- पदनाम, बीबीसी मध्य-पूर्व संवाददाता
इसराइल की सेना ने कहा है कि दक्षिणी लेबनान में उसके आठ सैनिक मारे गए हैं.
हथियारबंद गुट हिज़्बुल्लाह के ख़िलाफ़ ज़मीनी हमला शुरू करने के बाद यह उसका पहला बड़ा नुक़सान है.
ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह ने कहा कि उसने लड़ाई के दौरान इसराली टैंकों को नष्ट कर दिया है और इस बात का ध्यान रखा है कि उसके पास इसराइली सेना को पीछे धकेलने के लिए पर्याप्त सैनिक और गोला-बारूद है.
इससे पहले इसराइली सेना ने घोषणा की थी कि लेबनान के सीमावर्ती गांवों में कथित "आतंकवादी बुनियादी ढांचे" को नष्ट करने के उसके अभियान में और ज़्यादा पैदल और बख्तरबंद सैनिक शामिल हो गए हैं.

इस बीच लेबनानी अधिकारियों के मुताबिक़ कि मध्य बेरूत के बचौरा इलाक़े में इसराइली हवाई हमले में कम से कम पाँच लोग मारे गए और आठ घायल हो गए.
इसराइली हमले में जिस बहुमंज़िला इमारत को निशाना बनाया गया, उसमें हिज़्बुल्लाह से जुड़ा स्वास्थ्य केंद्र था. यह लेबनान की संसद और संयुक्त राष्ट्र के क्षेत्रीय मुख्यालय से कुछ ही मीटर की दूरी पर मौजूद है.
बेरुत के सेंटर में यह पहला इसराइली हमला है जबकि रात में दक्षिणी उपनगर दहिए में भी अन्य इसराइली हमले हुए.
इससे पहले बुधवार शाम को लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा था कि पिछले 24 घंटों में देश में इसराइली हमलों में 46 लोग मारे गए और 85 घायल हुए हैं.
इनमें आम लोग और हिज़्बुल्लाह के लड़ाके भी शामिल हैं.
लेबनानी अधिकारियों के मुताबिक़ दो सप्ताह के इसराइली और अन्य हमलों के बाद हिज़्बुल्लाह कमज़ोर हो गया है. इन हमलों में लेबनान में 1,200 से अधिक लोग मारे गए हैं और क़रीब 12 लाख़ लोग विस्थापित हुए हैं.

इमेज स्रोत, Getty Images
एक साल से जारी संघर्ष
ग़जा में जंग की वजह से क़रीब एक साल से जारी सीमा पार शत्रुता के बाद इसराइल ने आक्रामक रुख़ अपनाया हुआ है.
उसका कहना है कि वह हिज़्बुल्लाह के हमलों से विस्थापित हुए सीमावर्ती इलाक़ों में रहने वालों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करना चाहता है.
हिज़्बुल्लाह एक शिया इस्लामी ग्रुप है जो लेबनान में काफ़ी ताक़तवर है. इसे इसराइल, अमेरिका, ब्रिटेन और कई अन्य देशों ने आतंकवादी संगठन घोषित किया हुआ है.
लेबनान पर अपने ज़मीनी हमले के दूसरे दिन इसराइली सैनिकों का पहली बार हिज़्बुल्लाह के लड़ाकों से सामना हुआ.
इसराइली रक्षा बल (आईडीएफ) ने बुधवार को एक बयान में कहा कि लड़ाकू विमानों के समर्थन से सैनिकों ने दक्षिणी लेबनान के कई इलाक़ों में "सटीक हथियारों और नज़दीकी मुठभेड़ों में आतंकवादियों का सफाया कर दिया और आतंकवादी बुनियादी ढांचे को नष्ट कर दिया."
बाद में आईडीएफ ने घोषणा की कि इस कार्रवाई में उसके आठ सैनिक मारे गए. इनमें से ज़्यादातर एलिट ईगोज़ और गोलान इलाक़े के टोही इकाइयों के कमांडो थे.
ख़बरों के मुताबिक़ छह इसराइली सैनिकों पर हिज़्बुल्लाह लड़ाकों ने घात लगाकर हमला किया जबकि अन्य दो मोर्टार हमले में मारे गए.
हिज़्बुल्लाह ने कहा है कि बुधवार को एक सीमावर्ती गांव में हुई झड़पों के दौरान उसके दर्जनों लड़ाकों ने इसराइली कमांडो पर टैंक रोधी मिसाइलें दागीं, जिससे इसराइल के दर्जनों कमांडो मारे गए और घायल हुए.

इमेज स्रोत, Getty Images
इसराइल अपने मक़सद के कितने क़रीब
हिज़्बुल्लाह ने यह भी दावा किया कि कफ़्र क़िला के बाहरी इलाक़े में अन्य इसराइली सैनिकों को विस्फोटकों और गोलीबारी से निशाना बनाया गया और मारून अल-रास के क़रीब मिसाइलों से इसराइल के तीन मर्कवा टैंक नष्ट कर दिए गए.
हिज़्बुल्लाह ने दक्षिणी लेबनान में बुनियादी ढांचे को तैयार करने में कई साल लगाए हैं, जिसमें व्यापक भूमिगत सुरंगें शामिल हैं. इसके पास हज़ारों लड़ाके भी हैं, जो इस इलाक़े को अच्छी तरह जानते हैं.
अपने आठ सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा कि वह इस जंग को जीतेंगे.
इसराइली एयर डिफेंस सिस्टम भी एक दिन पहले ही सक्रिय हुआ था, जब उन्होंने मंगलवार रात को ईरान के 180 से ज़्यादा मिसाइल हमलों में से ज़्यादातर को नाकाम कर दिया था.
ये मिसाइल पिछले शुक्रवार को बेरूत में हुए इसराइली हवाई हमले के जवाब में दागी गई थीं, जिसमें हिज़्बुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह और एक शीर्ष ईरानी कमांडर की मौत हो गई थी.
आईडीएफ के मुताबिक़ बुधवार को पूरे दिन दक्षिणी लेबनान से उत्तरी इसराइल की तरफ़ 240 से ज़्यादा रॉकेट दागे गए.
नेतन्याहू ने ज़ोर देकर कहा कि लेबनान में ज़मीनी हमले से हिज़्बुल्लाह की ताक़त कम हो जाएगी और उसके लड़ाके पीछे हट जाएंगे, जिससे अंत में क़रीब 60 हज़ार इसराइली सीमा के निकट अपने घरों को लौट सकेंगे.
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा कि वो ईरान के परमाणु ठिकानों पर इसराइल के जवाबी हमले का समर्थन नहीं करते हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिका "ईरानी बमबारी के जवाब में इसराइल के साथ बातचीत करेगा कि वो क्या करने जा रहे हैं."
लेबनान की राजधानी बेरुत के दक्षिणी उपनगरों में हिज़्बुल्लाह के गढ़ दहिए में भारी हमलों के बाद, बेरुत में रात भर हवाई हमले हुए हैं.
इससे पहले रात को आईडीएफ ने उन इमारतों के आसपास के इलाक़ों को खाली करने के कई आदेश जारी किए थे, जिनके बारे में उसने कहा था कि वो हिज़्बुल्लाह से जुड़ी हुई हैं.

इमेज स्रोत, Getty Images
वीरान हुए लेबनानी शहर
बुधवार की सुबह बीबीसी की एक टीम हिज़्बुल्लाह के आयोजन में एक मीडिया दौरे पर पहुंची, जिसका मक़सद हाल की तबाही को दिखाना था.
कभी चहल-पहल से भरा रहने वाला दहिए अब एक भुतहा शहर जैसा लगने लगा है, यहाँ दुकानें बंद हो चुकी हैं, सड़कें वीरान हैं और इसके ज़्यादातर लोग शहर छोड़कर जा चुके हैं.
इस दौरे में शामिल जगहों में से एक सिरात टीवी का मुख्यालय भी था, जिस पर सोमवार को इसराइल ने हमला किया था. यह ध्वस्त हो चुका है और आस-पास की इमारतों को भारी नुक़सान पहुंचा, जो बताता है कि हमला कितना बड़ा था.
वहां मलबे से धुआं निकल रहा था और हवा में भारी गंध थी जबकि ऊपर से उड़ते इसराइली ड्रोन की आवाज़ सुनी जा सकती थी.

इमेज स्रोत, Getty Images
इस इलाक़े में हसन नसरल्लाह के चेहरे वाले कई पोस्टर लगे थे, जिनमें से एक पर लिखा था, "हमारा कोई भी बैनर नहीं गिरेगा."
हिज़्बुल्लाह का कहना है कि इसराइल आम लोगों से जुड़ी इमारतों पर हमला कर रहा है, न कि सैन्य मक़सद के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इमारतों पर.
इसराइल ने हिज़्बुल्लाह पर आवासीय क्षेत्रों में हथियार और गोला-बारूद छिपाने का आरोप लगाया है.
अमेरिकी और इसराइली अधिकारियों का मानना है कि हिज़्बुल्लाह के आधे शस्त्र भंडार नष्ट हो चुके हैं और उसका नेतृत्व समाप्त हो चुका है.

इमेज स्रोत, Getty Images
सड़कों पर सोते लोग
लेकिन हिज़्बुल्लाह के प्रवक्ता मोहम्मद अफ़िफ़ अपने रुख़ पर कायम हैं.
उन्होंने बीबीसी से कहा, "मैं कह सकता हूं कि हमारा प्रतिरोध तेज़ी से अपनी ताक़त वापस पा रहा है. इस प्रतिरोध का नेतृत्व अच्छा है, इसकी कमान और नियंत्रण ढांचा अच्छा है और इसकी रॉकेट की आपूर्ति भी अच्छी है."
"अल्लाह की इच्छा से हम इसराइली दुश्मनों को उस समय परास्त कर देंगे जब वे लेबनान में घुसने का दुस्साहस करेंगे."
दहिए के साथ-साथ कई लोग दो अन्य क्षेत्रों दक्षिणी और पूर्वी बेका घाटी से भी पलायन कर गए हैं, जहां हिज़्बुल्लाह की मज़बूत मौजूदगी है.
बेरुत का शहीद चौक एक ऐसा स्थान बन गया है, जहाँ दर्जनों परिवार इकट्ठा हुए हैं, जिनके पास कोई अन्य ठिकाना नहीं है.
यहाँ कुछ टैंट कंक्रीट की दीवारों के पास लगाए गए हैं, लेकिन कई लोग पास में ही मोहम्मद अल-अमीन मस्जिद की सीढ़ियों पर या ज़मीन पर गद्दों पर सो रहे हैं.
55 साल के मोहम्मद अपनी पत्नी, बेटे और सात पोते-पोतियों के साथ पांच दिन पहले यहां आए थे. उन्होंने बताया कि वो शेल्टर होम में जाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उन्हें कोई जगह नहीं मिली.
उन्होंने कहा, "हमारे पास कोई जगह नहीं है."
वे लोग दान में मिला खाना खा पा रहे हैं. लेकिन डायपर, दूध और दवा के बिना उन्हें संघर्ष करना पड़ रहा है.
उनके बगल में 26 साल के मोहम्मद अपने तीन बच्चों के साथ आए थे.
उन्होंने बताया कि वह दहिए में काम करते थे, लेकिन उनकी नौकरी चली गई क्योंकि वहां की सभी दुकानें बंद हो गई हैं. उन्होंने बताया, "वहां कोई काम नहीं है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
















