इसराइल की लेबनान में भारी बमबारी के आगे पश्चिमी देश कैसे बेबस हो गए हैं?

इसराइली पीएम बिन्यामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन

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    • Author, जेरेमी बोवेन
    • पदनाम, इंटरनेशनल एडिटर, बीबीसी न्यूज़, यरूशलम से

मध्य पूर्व के बारे में इस चर्चा को अब बंद कर देना चाहिए कि यह इलाक़ा अधिक गंभीर जंग के कगार पर खड़ा है.

कथित तौर पर हिज़्बुल्लाह के मुख्यालयों को निशाना बनाने के दावे के साथ बेरुत में हुए भयानक इसराइली हमलों के बाद ऐसा लगता है कि अब वे धावा बोल रहे हैं.

जो लोग बेरुत में थे उनके मुताबिक़, यह विशाल धमाकों की एक शृंखला थी. शहर में मौजूद एक दोस्त ने कहा कि उन्होंने ऐसे शक्तिशाली धमाके, पहले लेबनान में हो चुके युद्धों में भी नहीं सुने थे.

शनिवार को इसराइली सेना ने कहा कि उसने हमले में हिज़्बुल्लाह के अन्य कमांडरों के साथ गुट के नेता हसन नसरल्लाह को मार दिया है.

हिज़्बुल्लाह ने एक बयान जारी कर नसरल्लाह की मौत की पुष्टि कर दी है.

बयान में कहा गया है कि नसरल्लाह की मौत "दक्षिणी हिस्से में विश्वासघाती ज़ायनिस्ट हमले के बाद" हुई.

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लेकिन इसराइली एयर फ़ोर्स ने अपने बमबारी अभियान को अभी रोका नहीं है. इसराइली सेना का कहना है वो हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर लगातार बमबारी कर रही है.

इसराइल क्या चाहता है?

आज इस बात की उम्मीद की जा रही थी इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू 21 दिन के युद्ध विराम के प्रस्ताव पर बातचीत के लिए कम से कम तैयार होंगे. हालांकि यह उम्मीद धूमिल हो गई.

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यह प्रस्ताव इसराइल के सबसे प्रमुख पश्चिमी सहयोगियों यानी अमेरिका और फ़्रांस की ओर से दिया गया था.

लेकिन न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने चिर-परिचित अड़ियल और आक्रामक भाषण में नेतन्याहू ने कूटनीति के बारे में कोई बात नहीं की.

उन्होंने कहा, इसराइल के पास असभ्य दुश्मन से लड़ने के अलावा कोई चारा नहीं बचा था, जो इसराइल को ख़त्म करना चाहता है.

हिज़्बुल्लाह को हराया जाएगा और ग़ज़ा में हमास पर संपूर्ण जीत हासिल होगी, तभी इसराइली बंधकों की वापसी सुनिश्चित हो पाएगी.

उन्होंने कहा कि ‘क़त्ल के लिए तैयार मेमना’ बनने की बजाय, इसराइल जीत रहा है. नाज़ी हॉलोकास्ट के संदर्भ में यह एक इसराइली कहावत है.

और जब उनका भाषण ख़त्म हुआ तो बेरुत में बड़े हमले किए गए, जो इस बात के संकेत हैं कि लेबनान में संघर्ष विराम का मुद्दा इसराइल के एजेंडे में नहीं है.

ऐसा लगता है कि यह हमला नेतन्याहू की उस धमकी के तुरंत बाद किया गया जिसमें उन्होंने कहा था कि दुश्मन जहां भी हों, इसराइल उन्हें निशाना बना सकता है और निशाना बनाएगा.

उधर, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इस बड़े हमले को लेकर इसराइल की ओर से उसे कोई पूर्व जानकारी नहीं दी गई थी.

नेतन्याहू ने दी थी हमले की मंज़ूरी

नेतन्यूाहू

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इमेज कैप्शन, कथित तौर पर नेतन्याहू ने न्यूयॉर्क के एक होटल में बैठकर हमले की मंज़ूरी दी थी.

यरूशलम में प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी की गई तस्वीर में नेतन्याहू कई सारे संचार उपकरणों के बीच देखा जा सकता है और ऐसा लगता है कि यह तस्वीर न्यूयॉर्क सिटी के किसी होटल की है. तस्वीर के कैप्शन में लिखा है कि यह उस पल की तस्वीर है जब उन्होंने हमले की इजाज़त दी थी.

अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन अपनी उस नीति का बचाव किया है जिसके लिए वो महीनों से काम कर रहे थे. उन्होंने कहा कि बातचीत के लिए अभी भी समय है. हालांकि यह दावा खोखला दिख रहा है.

अमेरिकियों के पास दोनों पक्षों में से किसी पर भी दबाव डालने की गुंजाइश कम ही है. क़ानूनी तौर पर वे हिज़्बुल्लाह और हमास से बात नहीं कर सकते क्योंकि उन्होंने इन संगठनों को विदेशी चरमपंथी संगठन घोषित किया हुआ है.

ऐसे में जब अमेरिकी चुनाव को महज कुछ हफ़्ते ही बचे हैं, तो इसराइल पर पिछले साल की तरह दबाव बनाने की भी कम संभावना है.

इसराइली सरकार और सेना में शक्तिशाली आवाजें इस बात की पुरज़ोर तरीके से वक़ालत कर रही थीं कि अक्टूबर में हुए हमास के हमले के बाद के दिनों पर हिज़्बुल्लाह पर हमला किया जाए.

उन्होंने तर्क दिया था कि लेबनान में अपने दुश्मनों को इसराइल निर्णायक झटका दे सकता है. हालांकि अमेरिकियों ने उन्हें ऐसा न करने के लिए मनाया था और तर्क दिया था कि इससे पूरे इलाक़े में भड़के युद्ध से इसराइल की सुरक्षा को कोई फ़ायदा नहीं होगा.

लेकिन इसराइल कैसे जंग लड़े, इस पर राष्ट्रपति बाइडन की हर बात को काटने की नेतन्याहू ने एक आदत बना ली थी.

पश्चिमी देश असहाय

बेरुत

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इमेज कैप्शन, बेरुत पर हालिया हमले के बाद मलबे में लोगों की तलाश करते राहत और बचाव कर्मी.

बेरुत पर हमले में इस्तेमाल होने वाले लड़ाकू विमानों और बमों को इसराइल को मुहैया कराने के बावजूद, राष्ट्रपति बाइडन और उनकी टीम सिर्फ मूकदर्शक बनी हुई है.

इसराइल के लिए आजीवन समर्थन के तौर पर पिछले साल से उनकी नीति, एकजुटता और समर्थन जताने, हथियार देने और कूटनीतिक संरक्षण प्रदान करने के माध्यम से नेतन्याहू को प्रभावित करने की रही थी.

बाइडन मानते थे कि वो इसराइल जिस तरह जंग लड़ रहा है उसमें न केवल बदलाव लाने के लिए नेतन्याहू को मना लेंगे, बल्कि इसराइल के साथ एक स्वतंत्र फ़लस्तीनी राज्य को बनाने की अमेरिकी योजना को भी स्वीकार करा लेंगे.

राष्ट्रपति बाइडन ने बार-बार दोहराया कि इस जंग से लोगों को भारी परेशानी हो रही है और बहुत अधिक फ़लस्तीनी नागरिक मारे जा रहे हैं.

लेकिन नेतन्याहू ने इस विचार को सीधे-सीधे ख़ारिज कर दिया था और बाइडन के सुझाव को नज़रअंदाज़ कर दिया था.

बेरुत पर हमले के बाद, ब्लिंकन ने अपने विचार को दोहराया कि मध्य पूर्व में एक व्यापक जंग छिड़ने से बचने के लिए प्रतिरोध और कूटनीति का मिलाजुला इस्तेमाल किया गया था.

लेकिन हालात जैसे-जैसे अमेरिका के हाथ से निकल रहे हैं, उनका नज़रिया बहुत विश्वसनीय नहीं लगता.

वीडियो कैप्शन, इसराइल के हवाई हमले के बाद कैसी है तबाह हो चुके लेबनान के जियेह कस्बे की हालत

आने वाला समय बड़े फैसलों का होगा. सबसे पहले तो, नसरल्लाह के साथ या उनके बिना हिज़्बुल्लाह को ये फैसला लेना होगा कि वो उसे अपने हथियारों का कैसे इस्तेमाल करना है. क्या वे इसराइल पर बड़े पैमाने पर हमला करने के लिए इसका इस्तेमाल करेंगे? अगर वे अपने रॉकेट और मिसाइलों का इस्तेमाल नहीं करते हैं तो वो चाहेंगे कि इसराइल और क़रीब आए ताकि वे उन्हें और अधिक नुकसान पहुंचा सकें.

इसराइलियों को भी अपने फैसलों के भारी नतीजों का सामना करना पड़ेगा. वे पहले ही लेबनान में ज़मीनी सैन्य अभियान चलाने के बारे में बातें कर चुके हैं और हालांकि उन्होंने ज़रूरत भर सैनिकों को अभी तक तैनात नहीं किया है, लेकिन लेबनान पर आक्रमण उनके एजेंडे में है.

लेबनान में कुछ लोग मानते हैं कि ज़मीनी हमले में हिज़्बुल्ला इसराइल की सैन्य मज़बूती को भारी नुकसान पहुंचा सकता है.

पश्चिमी राजनयिक इसराइल से कूटनीतिक समाधान स्वीकार करने की अपील करते हुए मामले को ठंडा करने की उम्मीद करते हैं. इन राजनयिकों में से कुछ तो इसराइल के कट्टर सहयोगी भी हैं.

अब वे इन घटनाओं को बहुत निराशा से देख रहे हैं और असहाय महसूस कर रहे हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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