हमास के साथी हिज़बुल्लाह में इसराइल से जंग को लेकर हिचकिचाहट है?

हसन नसराल्लाह

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इमेज कैप्शन, हसन नसरल्लाह (फ़ाइल फोटो)
    • Author, ओरला गुरिन
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़, बेरूत, लेबनान

इसराइल और हमास की जंग में इसराइली सीमा पर हमले करने वाले चरमपंथी समूह हिज़बुल्लाह ने फ़िलहाल अपने तेवर थोड़े नरम कर लिए हैं.

हिज़बुल्लाह चीफ़ हसन नसरल्लाह ने बेरूत में शुक्रवार को जो भाषण दिया है उससे इतना तो तय हो गया है कि फ़िलहाल उनका संगठन इसराइल के ख़िलाफ़ पूरी तरह युद्ध छेड़ने का इरादा नहीं रखता है.

हालांकि पिछले महीने शुरू हुई इसराइल और हमास के बीच जंग से नरक बन गई ग़ज़ा पट्टी के हालात को देखते हुए नसरल्लाह की प्रतिक्रिया को थोड़ा ठहर कर उठाया गया क़दम माना जा रहा है.

लेकिन अपनी स्पीच में उन्होंने जो नहीं कहा उसकी भी कोई कम अहमियत नहीं है. और वो ये कि उन्होंने फ़िलहाल इसराइल के ख़िलाफ़ पूरी तरह जंग छेड़ने का एलान नहीं किया है .

लेबनान में शायद ही किसी ने नसरल्लाह के इस तेवर का अंदाज़ा लगाया होगा.

नसरल्लाह जानते हैं कि उनके देश के अंदर अब अपने ताक़तवर पड़ोसी से लड़ने की बहुत कम इच्छा बची है. इसराइल से इसने अपनी पिछली लड़ाई 2006 में लड़ी थी.

अब लेबनान के हालात भी बदल गए हैं. अर्थव्यवस्था ठीक नहीं है और राजनीतिक नेतृत्व भी दिवालियेपन का शिकार दिखता है.

इसके अलावा पूर्वी भूमध्यसागर में तैनात दो अमेरिकी युद्धपोत भी शायद जंग छेड़ने के हिज़बुल्लाह के इरादे को रोक रहे हैं.

हसन नसरल्लाह की ये स्पीच सिर्फ उनके समर्थकों के लिए अहम नहीं है, जो उनके एक-एक शब्द को बड़े ग़ौर से सुनते है. बल्कि इसराइल और अमेरिका के लिए भी उसकी उतनी ही अहमियत है.

हिज़बुल्लाह क्या करने वाला है और क्या नहीं ये उनके लिए बेहद अहमियत रखता है.

हालांकि नसरल्लाह ने अपनी स्पीच में ये ज़रूर कहा कि ‘सभी विकल्प खुले’ हैं. उन्होंने कहा कि हालात कभी भी जंग जैसे हो सकते हैं.

लेकिन ये ग़ज़ा में इसराइल की कार्रवाई और लेबनान के प्रति उसके रवैये पर निर्भर करेंगे.

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इमेज कैप्शन, हसन नसरल्लाह के भाषण को रैली स्थल के बाहर स्क्रीन पर सुनते लोग

7 अक्टूबर का हमला पूरी तरह फ़लस्तीनी ऑपरेशन - नसरल्लाह

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हिज़बुल्लाह ने हमास पर इसराइल की कार्रवाई के बाद इसराइली सीमा पर हमले कर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया था. इसके बाद इसराइली सेना को इस इलाके में सेना तैनात करनी पड़ी थी. लेकिन हमास चाहता है कि हिज़बुल्लाह अपने हमले और तेज़ करे.

नसरल्लाह ने हिज़बुल्लाह के लड़ाकों की ओर से की गई अब तक की कार्रवाई का बचाव किया है.

उन्होंने अपनी स्पीच में कहा, "हमारे सामने जो हो रहा है वो काफी अहम है. जो लोग कह रहे हैं कि हिज़बुल्लाह को तुरंत जंग में उतर जाना चाहिए उन्हें लग रहा है कि बॉर्डर पर हमारी कार्रवाई काफी कम है. लेकिन निष्पक्ष होकर देखें तो पाएंगे कि हमारे लिए ये कार्रवाई खासी बड़ी है.’’

उन्होंने कहा कि हाल के हफ्तों में इसमें हिज़बुल्लाह के 57 लोग मारे गए हैं.

नसरल्लाह ने ये कह कर ये जता दिया कि उनके सामने हिज़बुल्लाह की कार्रवाई को तेज़ करने का विकल्प खुला है.

उन्होंने कहा, "मैं आपको भरोसा दिलाता हूं ये आख़िरी कार्रवाई नहीं है. इसे मैं पर्याप्त भी नहीं मानता.’’

नसरल्लाह ने कहा कि 7 अक्टूबर को हमास का हमला सौ फीसदी फ़लस्तीनी ऑपरेशन था. ये पूरी तरह गुप्त था और इसके बारे में हमास के सहयोगियों को भी नहीं बताया गया था.

उन्होंने दावा कि उन्हें इस बारे में कुछ भी पता नहीं था. उनका कहना था कि इस बारे में ईरान को भी कुछ पता नहीं था. इसका किसी क्षेत्रीय या दूसरे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से भी संबंध नहीं था.

लेबनान की राजधानी बेरूत के एक दक्षिणी उपनगर की तपती गर्मी में रैली के दौरान नसरल्लाह के इस भाषण के दौरान लोग नारे लगा रहे थे- "नसरल्लाह हम तुम्हारे साथ हैं.’’

जिस वक़्त ये भाषण चल रहा था उस वक्त एक नकाबपोश शख्स छत पर खड़े होकर हालात पर नज़र रखे हुए था. उसके पास ड्रोन को रोकने लिए एक भारी मशीन थी.

इसराइल

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इमेज कैप्शन, हिज़बुल्लाह के लड़ाकों के ख़िलाफ़ चौकसी करते इसराइली सैनिक

हिज़बुल्लाह कब जंग में उतरेगा?

ये इलाका हिज़बुल्लाह का गढ़ है. यहां इस इस्लामी ग्रुप के कट्टर समर्थक बड़ी तादाद में मौजूद हैं. अमेरिका और ब्रिटेन समेत दुनिया के कई देश इसे आतंकवादी संगठन मानते हैं.

इस भाषण को सुन रही 17 साल की पत्रकारिता की छात्रा फातिमा ने बीबीसी से कहा, "मुझे नहीं लगता कि वो पूरे देश को जंग की आग में झोंकने जा रहे हैं. लेकिन वो जो भी फैसले ले रहे हैं, मैं उससे पूरी तरह सहमत हूं. लेकिन अगर जंग होती है तो भी हमें कोई डर नहीं है. क्योंकि एक अच्छे मकसद के लिए जान भी चली जाए तो कोई बात नहीं. हम अपने फ़लस्तीनी भाई और बहनों के साथ खड़े हैं.’’

फिलहाल ऐसे संकेत हैं कि हिज़बुल्लाह फिलहाल ग़ज़ा की जंग को हमास के भरोसे ही छोड़े रखना चाहता है.

लेकिन हमास हारता हुआ दिखेगा तो समीकरण बदल सकते हैं. अगर इसराइल को ग़ज़ा में जीत मिलती है तो इसकी क़ीमत बड़ी जंग में तब्दील हो सकती है. हिज़बुल्लाह जंग के मैदान में उतर सकता है.

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हसन नसरल्लाह कौन हैं?

हिज़बुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह ने अपने भाषण में सात अक्टूबर के इसराइल पर हमास के हमले की तारीफ़ की. इस हमले में 1400 से अधिक लोग मारे गए थे.

शिया मौलवी नसरल्लाह साल 1992 से ही हिज़बुल्लाह की कमान थामे हुए हैं. नसरल्लाह को इस बात का भी श्रेय दिया जाता है कि उन्होंने हिज़बुल्लाह को एक राजनीतिक और मिलिट्री ताक़त में बदल दिया.

हसन नसरल्लाह के ईरान और उसके सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली ख़ामनेई के साथ साल 1981 से ही क़रीबी रिश्ते हैं.

ये वही साल था जब ईरान के पहले सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह रुहोल्लाह खोमैनी ने उन्हें लेबनान में अपने निजी प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त किया था.

नसरल्लाह पिछले कई सालों से सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं. माना जाता है कि नसरल्लाह को इस बात का डर है कि कहीं इसराइल उनकी हत्या न करा दे.

लेकिन हिज़बुल्लाह में नसरल्लाह का क़द सबसे बड़ा है. वे हर एक हफ़्ते टीवी पर अपना रिकॉर्डेड भाषण जारी करते हैं.

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हिज़बुल्लाह क्या है?

हिज़बुल्लाह लेबनान में ईरान से समर्थन प्राप्त शिया इस्लामी राजनीतिक पार्टी और अर्द्धसैनिक संगठन है. वर्ष 1992 से इसकी अगुवाई हसन नसरल्लाह कर रहे हैं. इस नाम का मायने ही 'अल्लाह का दल' है.

1980 के दशक की शुरुआत में लेबनान पर इसराइली कब्ज़े के दौरान ईरान की वित्तीय और सैन्य सहायता से हिज़बुल्लाह का उदय हुआ. ये दक्षिणी लेबनान में पारंपरिक रूप से कमज़ोर शियाओं की रक्षा करने वाली ताक़त के रूप में उभरा.

हालांकि, इसकी वैचारिक जड़ें 1960 और 1970 के दशक में लेबनान में शिया पुनरुत्थान तक जाती हैं. वर्ष 2000 में इसराइल के पीछे हटने के बाद हिज़बुल्लाह ने अपनी सैन्य टुकड़ी इस्लामिक रेज़िस्टेंस को मज़बूत करना जारी रखा.

ये समूह रेज़िस्टेंस ब्लॉक पार्टी के प्रति अपनी वफ़ादारी के चलते धीरे-धीरे लेबनान की राजनीतिक व्यवस्था में इतना अहम बन गया कि इस देश की कैबिनेट में वीटो शक्ति तक हासिल कर ली.

हिज़बुल्लाह पर वर्षों से इसराइली और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए बमबारी और षड्यंत्र रचने का आरोप लगता रहा है. पश्चिमी देश, इसराइल, अरब खाड़ी देशों और अरब लीग हिज़बुल्लाह को 'आतंकवादी' संगठन मानते हैं.

वर्ष 2011 में जब सीरिया में गृह युद्ध शुरू हुआ तो सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद के कट्टर समर्थक माने जाने वाले हिज़बुल्लाह ने अपने हज़ारों चरमपंथियों को बशर अल-असद के लिए लड़ने के लिए भेजा. विद्रोहियों के कब्ज़े में जा चुके हिस्सों, खासतौर पर पहाड़ी लेबनानी सीमा के पास वाले इलाकों को वापस पाने में ये काफ़ी निर्णायक साबित हुआ.

इसराइल अकसर सीरिया में ईरान और हिज़बुल्ला से जुड़े ठिकानों पर हमले करता है, लेकिन कभी-कभार ही हमले की बात कबूलता है. हालांकि, सीरिया में हिज़बुल्लाह की भूमिका को लेकर लेबनान के कुछ गुटों में तनाव बढ़ा.

सीरियाई शिया राष्ट्रपति के प्रति इसके समर्थन और ईरान के साथ मज़बूत संबंधों के कारण ईरान के मुख्य क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी सऊदी अरब के नेतृत्व में अरब खाड़ी देशों से इसकी दुश्मनी भी गहरी होती गई.

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