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पप्पू यादव का पूर्णिया से निर्दलीय नामांकन, क्या बढ़ेंगी तेजस्वी की मुश्किलें?
- Author, चंदन कुमार जजवाड़े
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, पूर्णिया, बिहार
बिहार की पूर्णिया लोकसभा सीट से पूर्व सांसद पप्पू यादव ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन कर दिया है. बिहार में विपक्षी दलों के बीच सीटों के बंटवारे के बाद से ही यह सीट सुर्खियों में बनी हुई है.
विपक्षी गठबंधन में सीटों की साझेदार में यह सीट राष्ट्रीय जनता दल के खाते में गई है. हालाँकि इस सीट के लिए पप्पू यादव लंबे समय से चुनावी तैयारी में लगे हुए थे. हाल ही में उन्होंने अपनी जन अधिकार पार्टी का विलय कांग्रेस में भी कर दिया था.
गुरुवार को नामांकन के दिन पप्पू यादव ने पूर्णिया की सड़कों पर अपने समर्थकों के साथ निकले. इसे उनके शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देखा जा रहा है. पप्पू यादव के समर्थकों के हाथ में कांग्रेस का झंडा भी मौजूद था.
इससे पहले बुधवार को आरजेडी की उम्मीदवार बीमा भारती ने भी अपना नामांकन किया था.
माना जाता है कि इस बार पूर्णिया के लोकसभा चुनाव में तीन उम्मीदवारों के बीच वोटों का बड़ा हिस्सा बंट सकता है. इसमें तीसरे उम्मीदवार हैं जनता दल यूनाइटेड के संतोष कुशवाहा. संतोष कुशवाहा फ़िलहाल पूर्णिया के सांसद भी हैं.
पप्पू यादव कई महीनों से विपक्षी दलों को मनाने में लगे थे कि पूर्णिया की सीट पर विपक्ष उनका साथ दे. इस सीट पर अपनी उम्मीदवारी के लिए वो लालू प्रसाद यादव को मनाने की कोशिश भी कर रहे थे, लेकिन अब उनकी नाराज़गी बाहर आने लगी है.
कौन हैं बीमा भारती
पप्पू यादव ने आरोप लगाया है, “आपने (लालू यादव) बेगूसराय सीट छीन ली, कन्हैया वहाँ से नहीं लड़ रहा है. निखिल बाबू औरंगाबाद से नहीं लड़ रहे, आपने वह भी छीन ली. सुपौल से कभी आरजेडी नहीं जीती वह भी कांग्रेस की सीट रही है वह भी छीन ली, पूर्णिया भी छीन ली.”
पप्पू यादव की तमाम कोशिशों के बाद भी लालू ने इस सीट पर बीमा भारती को आरजेडी का उम्मीदवार बना दिया है. बीमा भारती अब अपने लिए पप्पू यादव का समर्थन मांग रही हैं.
साल 2020 के बिहार विधानसभा चुनावों में बीमा भारती पूर्णिया की रूपौली विधानसभा सीट से जेडीयू के टिकट पर चुनाव जीतकर विधायक बनी थीं.
बीमा भारती ने साल 2000 में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर रूपौली विधानसभा सीट से चुनाव जीता था. उसके बाद साल 2005 में आरजेडी के टिकट पर इसी सीट से विधायक बनी थीं.
बीमा भारती बिहार के पिछले तीन विधानसभा चुनावों में जेडीयू के टिकट पर विधायक बनी हैं. बिहार में इसी साल फ़रवरी महीने में नीतीश सरकार के फ़्लोर टेस्ट के दौरान बीमा भारती की नीतीश से नाराज़गी की ख़बर सामने आई थी.
क्या कहते हैं पूर्णिया के लोग
उस दौरान इनके पति को पुलिस ने गिरफ़्तार किया था. ख़बरों के मुताबिक़ उन पर अवैध हथियार रखने का आरोप लगा था और वो अभी भी जेल में हैं. बीमा भारती ने इसके लिए बिहार सरकार पर आरोप भी लगाया था.
बीमा भारती के नामांकन के बाद हुई जनसभा में पहुँची एक महिला विद्या देवी कहती हैं, “बीमा भारती पहले विधानसभा चुनाव में खड़ी हुई थीं, वो अच्छी नेता हैं, अब लोकसभा के लिए लड़ रही हैं. मैं पप्पू यादव को भी जानती हूँ, वो भी अच्छे आदमी हैं. अभी से नहीं बता सकते कौन जीतेगा.”
पूर्णिया के बाज़ार और सड़कों को देखकर नहीं लगता है कि यह बिहार की सियासत की एक रणभूमि में बदल चुका है. चुनाव आयोग की सख़्ती ने सार्वजनिक संपत्तियों और जहाँ-तहाँ से चुनावी प्रचार के झंडे, बैनर और पोस्टर गायब कर दिए हैं.
वहीं भीषण गर्मी और लोगों की रोज़ाना की ज़रूरतों में आमतौर पर शहर से चुनावी रंग गायब हुए दिखते हैं. कभी-कभी किसी गाड़ी या ई-रिक्शे पर किसी पार्टी का झंडा नज़र आता है तब भारत में लोकसभा चुनावों की आहट महसूस होती है.
पूर्णिया के महिला कॉलेज के पास मौजूद एक व्यवसायी ब्रजेश सिंह कहते हैं, “पप्पू यादव कर्मठ नेता हैं इसमें कोई संदेह नहीं है. मुझे लगता है कि उनके साथ अन्याय हुआ है. आप दो बजे रात भी उनको फ़ोन कर दीजिए तो वो आपकी मदद करते हैं. उनके सामने बीमा भारती कमज़ोर नेता हैं, वो केवल अपने विधानसभा तक सीमित हैं.”
क्या कहते हैं आँकड़े
भले ही पूर्णिया की सियासत को लेकर ज़्यादा चर्चा महागठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर हो रही हो और बीमा भारती और पप्पू यादव की उम्मीदवारी सुर्खियों में बनी हुई हो, लेकिन यहाँ से लगातार दो बार चुनाव जीतने वाले जेडीयू के संतोष कुशवाहा की दावेदारी कहीं से कमज़ोर नहीं दिखती है.
जनता दल यूनाइटेड ने एक बार फिर से अपने मौजूदा सांसद संतोष कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया है. संतोष कुशवाहा साल 2014 में उस वक़्त भी पूर्णिया सीट से जेडीयू के टिकट पर चुनाव जीतने में सफल रहे थे, जब नीतीश कुमार एनडीए से अलग गए थे.
पूर्णिया में पान का व्यवसाय करने वाली आशा देवी कहती हैं, “सब अपनी-अपनी जाति देखकर वोट करेंगे. यहाँ फूल छाप (बीजेपी) का उम्मीदवार नहीं है तो हमलोग तीर छाप (जेडीयू) को वोट देंगे. पप्पू यादव को उनकी जाति के लोग वोट देंगे. यहाँ जाति से ही वोट पड़ता है.”
पूर्णिया लोकसभा सीट में सात विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं. बिहार में इससे पहले जो बड़ा चुनाव हुआ था, वह साल 2020 का विधानसभा चुनाव था.
उन चुनावों आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी थी और उसने कई इलाक़ों में अच्छा प्रदर्शन किया था.
लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में पूर्णिया सीट पर एनडीए का पलड़ा काफ़ी भारी था. भले ही नीतीश कुमार और उनकी पार्टी ने आरोप लगाया था कि चिराग पासवान ने जेडीयू के उम्मीदवारों को हराने के लिए एनडीए में रहकर भी अपने उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारा था.
क्या त्रिकोणीय होगा पूर्णिया का मुक़ाबला?
लेकिन इससे पूर्णिया के समीकरण पर बहुत असर नहीं देखा गया था. बिहार के पिछले विधानसभा चुनाव में पूर्णिया की सात में से तीन सीटों पर जेडीयू और दो पर बीजेपी की जीत हुई थी. जबकि आरजेडी और कांग्रेस को एक-एक सीट मिली थी.
आँकड़े बताते हैं कि पिछले विधानसभा चुनावों में पूर्णिया का बेटा होने का दावा करने वाले पप्पू यादव की उस वक़्त की पार्टी जेएपी को भी कोई सफलता नहीं मिली थी.
भले ही पप्पू यादव तीन बार अपने दम पर पूर्णिया से लोकसभा चुनाव और एक बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं, लेकिन हालिया चुनावी आँकड़े उनके साथ नहीं दिखते हैं.
तो क्या इस बार के लोकसभा चुनावों में लालू ने अपने नई रणनीति के तहत बीमा भारती को टिकट दिया है?
बिहार सरकार ने पिछले साल जातीय गणना के आँकड़े जारी किए थे. इन आंकड़ों के मुताबिक़ राज्य में सबसे बड़ी आबादी अत्यंत पिछड़ा वर्ग(ईबीसी) की है. बीमा भारती इसी समुदाय से ताल्लुक रखती हैं.
साल 2019 के चुनावों में इस सीट पर जेडीयू के संतोष कुशवाहा के मुक़ाबले कांग्रेस ने उदय सिंह उर्फ़ पप्पू सिंह को टिकट दिया था. पप्पू सिंह पहले भी इस सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं.
पूर्णिया लोकसभा सीट का जातीय गणित
लेकन संतोष कुशवाहा ने पिछले लोकसभा चुनावों के वक़्त पप्पू सिंह को हरा दिया था. इससे पहले साल 2014 के लोकसभा चुनावों में जेडीयू और बीजेपी अलग-अलग चुनाव मैदान में उतरे थे.
साल 2014 में भी जेडीयू के संतोष कुशवाहा ने बीजेपी के पप्पू सिंह को 1 लाख से ज़्यादा वोटों से पराजित किया था.
जबकि आरजेडी के समर्थन के बाद भी कांग्रेस उम्मीदवार अमरनाथ तिवारी तीसरे नंबर पर रहे थे. यानी आँकड़ों के हिसाब से इस सीट पर जेडीयू के संतोष कुशवाहा भी काफ़ी मज़बूत दिखते हैं.
माना जाता है कि क़रीब 16 लाख़ वोटरों वाले पूर्णिया लोकसभा इलाक़े में 7 लाख़ मुस्लिम, डेढ़ लाख यादव, 2 लाख अति पिछड़ा और क़रीब 4 लाख़ दलित-आदिवासी वोटर हैं.
अगर बीमा भारती, पूर्णिया सीट पर बीजेपी-जेडीयू के अति पिछड़ा वोट बैंक में सेंध लगा पाती हैं तो वह चुनावी मैदान में अच्छा मुक़ाबला पेश कर सकती हैं, लेकिन संतोष कुशवाहा से मुक़ाबला करने से पहले उन्हें पप्पू यादव से मुक़ाबला करना होगा.
माना जाता है कि पप्पू यादव को भी मुस्लिम, यादव बिरादरी का बड़ा समर्थन मिलता रहा है. पूर्णिया सीट पर लोकसभा चुनावों के दूसरे चरण में 26 अप्रैल को वोट डाले जाएँगे.
सियासत में हर रोज़ बदल रहे मुद्दों और समीकरण पर भी निर्भर कर सकता है कि पूर्णिया की जनता इस बार किस उम्मीदवार पर भरोसा जता सकती है.
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