भारतीय छात्र बांग्लादेश में क्या पढ़ने जाते हैं और क्यों?

20 जुलाई को बांग्लादेश से भारत आते छात्र

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    • Author, सुभोजित बागची
    • पदनाम, बीबीसी के लिए

बांग्लादेश में छात्रों की पसंद के मोहम्मद यूनुस की अगुवाई में अंतरिम सरकार बनने जा रही है.

ये छात्रों का ही आंदोलन था, जिसके बाद हालात ऐसे हो गए कि शेख़ हसीना को देश छोड़कर भागना पड़ा.

कहा जाता है कि बांग्लादेश के छात्र राजनीति को लेकर काफी सक्रिय होते हैं.

मगर बांग्लादेश में कुछ छात्र भारत के भी होते हैं, जो वहां पढ़ाई करने जाते हैं.

बांग्लादेश में हालात बिगड़ने के दौरान ये छात्र भारत आए और अब हालात सामान्य होने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं ताकि वहां जाकर अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें.

जुलाई के अंत तक क़रीब सात हज़ार भारतीय छात्र भारत लौटे हैं.

इन छात्रों में से क़रीब दर्जन भर छात्र, जो पिछले दो हफ्तों में वापस आए हैं, बीबीसी से बात करते हुए बांग्लादेश में पढ़ाई करने के कई फ़ायदें बताते हैं.

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बांग्लादेश के मेडिकल कॉलेज के स्टूडेंट्स

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कौन सी पढ़ाई के लिए बांग्लादेश जाते हैं भारतीय छात्र

पूर्वी बांग्लादेश में अब्दुल हामिद मेडिकल कॉलेज में चौथे साल की पढ़ाई कर रहे सुदीप्ता मैती कहते हैं कि बांग्लादेश में पढ़ाई करने का भारतीय छात्रों के लिए सबसे बड़ा फ़ायदा पढ़ाई में लगने वाले ख़र्च हैं.

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सुदीप्ता कहते हैं, “जब बांग्लादेश में हिंसा की शुरुआत हुई तब हम लोग अखौरा-अगरतला बॉर्डर क्रॉस करके वापस अपने देश आ गए.''

बांग्लादेश के किशोरगंज में मौजूद इस कॉलेज से अगरतला तीन घंटे में पहुंचा जा सकता है.

यहाँ से कोलकाता एक घंटे की हवाई यात्रा के बाद पहुंचा जा सकता है.

फिर अगले तीन घंटों में सुदीप्ता मैती पश्चिम बंगाल के पूर्वी मिदनापुर ज़िले में अपने घर पर पहुँच चुके थे.

सुदीप्ता आगे कहते हैं, “बांग्लादेश अब इतने अच्छे ढंग से भारत से जुड़ा हुआ है कि कोई भी महज कुछ घंटों में कोलकाता पहुँच सकता है. शायद यह भी एक कारण है बांग्लादेश में प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में भारतीय छात्रों की संख्या बढ़ने की.''

भारत सरकार के आंकड़ों के मुताबिक़, 2022 में 13 लाख से ज़्यादा छात्र विदेश में पढ़ाई करने गए थे और इनमें से 9 हज़ार 308 छात्र बांग्लादेश गए थे.

बेहतर कानेक्टिविटी, कम दूरी, समान संस्कृति, भारत में सीमित सीट और पढ़ाई के ख़र्चे के कारण भारतीय छात्र बांग्लादेश का रुख़ करते हैं.

कश्मीर की काज़ी पांचवें साल की एमबीबीएस की छात्रा हैं.

काज़ी कहती हैं कि जहां मेडिकल की पढ़ाई में भारत में एक करोड़ से ज़्यादा रुपए ख़र्च हो जाते हैं वहीं बांग्लादेश में 40 से 50 लाख रुपए में मेडिकल की पढ़ाई हो जाती है.

काज़ी बताती हैं, ''जब मैंने ढाका के अद-दीन मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई के लिए 2019 में कश्मीर छोड़ा तो उस समय कश्मीर में केवल दो मेडिकल कॉलेज थे. प्राइवेट मेडिकल कॉलेज तो थे ही नहीं जबकि बांग्लादेश में बहुत सारे मेडिकल कॉलेज थे.''

उनका दावा है कि भारतीय करेंसी के हिसाब से 30-35 लाख के ख़र्च में बांग्लादेश में मेडिकल की पढ़ाई हो जाती है.

भारत में मेडिकल कैंप की तस्वीर

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कम ख़र्च के अलावा अन्य फ़ायदे

पश्चिम बंगाल के 24 परगना में जॉय नगर के एक हेडमास्टर के बेटे बासित अनवर भारतीय छात्रों के अन्य देशों के मुकाबले बांग्लादेश चुनने के पीछे कई कारण बताते हैं.

बासित अनवर कहते हैं, “कम ख़र्चे के कारण भारतीय छात्र मेडिकल की पढ़ाई के लिए रूस और यूक्रेन को पहले भी प्राथमिकता देते थे और अब भी देते हैं लेकिन बांग्लादेश में पढ़ाई का एक बड़ा फायदा है.”

पश्चिमी देशों में से कुछ चुनिंदा देशों को छोड़कर भारत से बाहर मेडिकल पढ़ाई कर देश लौटने वाले भारतीय छात्रों को फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (एफएमजीई) पास करना होता है. इस परीक्षा में पास करने वालों में से बांग्लादेश में पढे़ भारतीय छात्रों का प्रतिशत बहुत अधिक होता है.

बासित कहते हैं, “शायद यही एक संभावित कारण है जिसके कारण ज्यादा भारतीय छात्र बांग्लादेश का रुख कर रहे हैं. दोनों देश का सिलेबस लगभग समान है और हम लोग वही किताबें पढ़ते हैं जो भारत में पढ़ाई जाती हैं.”

“यहाँ तक कि पढ़ाने वाले भी कोलकाता में पढे़ होते हैं इसलिए उन्हें एफएमजीई को पास करने की हमारी ज़रूरत के बारे में पता होता है. इसमें हमें 19 विषयों में 300 में से 150 स्कोर करना पड़ता है. हालांकि कोई कट-ऑफ नहीं है लेकिन हमें कम से कम पचास प्रतिशत स्कोर करना पड़ता है.''

बासित के दोस्त कहते हैं कि एफएमजीई की परीक्षा में शामिल होने के लिए कोई समय-सीमा नहीं है लेकिन बांग्लादेश से पढ़े छात्र अक्सर इस परीक्षा को पास कर जाते हैं.

भारत के अस्पताल में डॉ

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बांग्लादेश में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले सबसे अधिक भारतीय

बढ़ती राजनीतिक अनिश्चितताओं और ग्लोबल डेमोक्रेसी के पैमाने पर गिरावट के बाद भी बांग्लादेश ने गरीबी कम करने और तेज आर्थिक तरक्की के लिए असाधारण रूप से काफ़ी काम किया है.

हालांकि, वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक़ कोविड महामारी के बाद बांग्लादेश अभी भी आर्थिक मोर्चे पर रिकवरी में संघर्ष कर रहा है.

पिछले वित्तीय वर्ष में जीडीपी 7.1 % से घटकर 5.8 % पर आ गई थी.

बांग्लादेश में ताज़ा तनाव के पीछे आर्थिक चुनौतियाँ, बढ़ती मंहगाई, बेरोज़गारी और घटते रिजर्व डॉलर जैसे कारण बताए जा रहे हैं.

17 करोड़ की आबादी में क़रीब 3.2 करोड़ युवा नौकरी और पढ़ाई से बाहर हैं.

बांग्लादेश में साल दर साल मेडिकल शिक्षा में निवेश के कारण स्वास्थ्य सेवाओं में खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में सुधार हुआ है.

भारत से बांग्लादेश के इन मेडिकल संस्थानों में दाखिले के लिए कन्सल्टन्सी देने वाले कोलकाता के काज़ी मोहम्मद हबीब कहते हैं, “बांग्लादेश में बहुत ही कम समय में लगभग 70 मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की गई और इन 70 कॉलेजों में 3100 सीटें हैं. इन सीटों पर अधिकतम 45 फ़ीसद विदेशी छात्र ही दाखिला ले सकते हैं.”

इनमें अधिकतम संख्या भारतीय छात्रों की है.

बांग्लादेश के मेडिकल शिक्षा महानिदेशालय के अप्रैल में जारी आंकड़ों के मुताबिक़, 2023-24 में कुल 1067 भारतीय छात्रों ने मेडिकल स्ट्रीम में दाखिल लिया था.

नेपाल, भूटान और पाकिस्तान से क्रमश: 264, 12 और 2 छात्र ही आए जबकि फ्रांस, ब्रिटेन और कनाडा ने एक-एक छात्रों को भेजा.

बांग्लादेश के सरकारी कॉलेजों में 220 सीटें सार्क देशों के छात्रों के लिए आरक्षित हैं जिसमें से भारत 22 छात्रों को भेज सकता है.

हबीब एक तरफ जहां प्राइवेट कॉलेजों के विस्तार को सार्क देशों के छात्रों के लिए अच्छी बात मानते हैं तो दूसरी तरफ बांग्लादेश भी भारतीय छात्रों से भी ठीक ठाक कमाई कर रहा है.

औसत रूप से बांग्लादेश में मेडिकल पढ़ाई का खर्च 30-50 हजार अमेरिकी डॉलर पड़ता है.

अस्पताल में मरीजों की भीड़

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फिर भी इलाज के लिए बांग्लादेश से भारत आते हैं मरीज

फिर भी अच्छी संख्या में बांग्लादेशी मरीज इलाज के लिए भारत विशेषकर पश्चिम बंगाल आते हैं.

इसके पीछे भी मंहगा इलाज और मेडिकल ट्रैवल एजेंसियों में बढ़ोतरी को कारण माना जा रहा है.

एक अनुमान के मुताबिक़, दक्षिणी कोलकाता के एक प्राइवेट अस्पताल में 30 से 40 प्रतिशत मरीज बांग्लादेश से आते हैं.

हबीब कहते हैं, ''मेडिकल शिक्षा और मेडिकल सुविधा दो अलग अलग चीजें हैं. बांग्लादेश ने मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में तो अच्छा काम किया है जबकि मेडिकल सुविधाओं में अभी और विकास करना बाकी है.''

दक्षिण एशियाई देशों के छात्र यह सिर्फ मेडिकल संस्थानों में ही नहीं आते हैं. विजुअल आर्ट्स और सोशल साइंस के बड़े संस्थानों में भी भारतीय छात्र हैं.

ऐसा ही एक संस्थान है- 'पाठशाला', एक स्कूल जहां फोटोग्राफी और टेलेविजन एंड फिल्म में ट्रेनिंग दी जाती है.

यह की एक पूर्व छात्र सुपर्णा नाथ इस संस्थान को अपने तरह का एक अलग संस्थान बताती हैं.

दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में जहां बांग्लादेश एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक हब के रूप में उभरा है तो वहीं हाल के अस्थिरता ने छात्रों को बहुत प्रभावित किया है.

छात्रों के अनुसार एक दोस्ताना माहौल वाले देश में पिछले कुछ दिन काफी कष्टदायक रहे हैं.

शेख़ हसीना देश में हाल के तनाव के लिए अपने राजनीतिक विरोधियों को जिम्मेदार ठहराती रही हैं.

हालांकि विपक्षी पार्टियां शेख़ हसीना के आरोप को सिरे से नकारती हैं.

जबकि विश्लेषकों का मानना है कि हाल के हिंसात्मक घटनाओं के कारण बंगलादेश को भारी पड़ सकता है.

छात्रों को उम्मीद है कि बांग्लादेश बहुत जल्द देश में चल रहे तनाव को ख़त्म कर लेगा जिससे उनका शैक्षणिक सत्र और अधिक समय तक प्रभावित न हो.

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