बांग्लादेश: विरोध प्रदर्शनों में 90 से अधिक लोगों की मौत, भारतीय उच्चायोग ने जारी की एडवाइज़री

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- Author, अनबरासन एथिराजन
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
भारत के पड़ोसी बांग्लादेश में पुलिस और सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के बीच बढ़ते संघर्ष में कम से कम 90 लोग मारे गए हैं.
इस बीच बांग्लादेश के सिलहेट स्थित भारतीय सहायक उच्चायोग ने देश में रह रहे भारतीयों और छात्रों के लिए एडवाइज़री जारी की है और दूतावास के संपर्क में रहने को कहा गया है.
बांग्लादेश में छात्र संगठन सरकारी नौकरियों में आरक्षण का विरोध कर रहे हैं. छात्र नेताओं ने प्रधानमंत्री शेख़ हसीना से पद छोड़ने की मांग की है और सविनय अवज्ञा आंदोलन की घोषणा की है.
पुलिस के मुताबिक़ सिराजगंज ज़िले में हज़ारों लोगों ने एक पुलिस स्टेशन पर हमला कर दिया, जिसमें 13 पुलिस अधिकारी मारे गये.
बांग्लादेश में सरकारी नौकरियों में कोटा समाप्त करने की मांग को लेकर पिछले महीने से छात्रों का आंदोलन चल रहा है. लेकिन अब यह एक व्यापक सरकार विरोधी आंदोलन में बदल गया है.
रविवार को देश के कई हिस्सों में इस तरह के विरोध प्रदर्शन हुए.
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितरबितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया. इसके अलावा देश में रात में कर्फ्यू भी लगाया गया है. अब तक इन प्रदर्शनों में क़रीब 200 लोग घायल भी हुए हैं.

राजधानी ढाका में इंटरनेट पर रोक
स्थानीय समयानुसार रविवार शाम छह बजे के बाद से देशभर में कर्फ्यू लागू कर दिया गया है.
राजधानी ढाका में मोबाइल इंटरनेट को फिलहाल निलंबित कर दिया गया है.
बांग्लादेश दूरसंचार नियामक आयोग (बीटीआरसी) के एक अधिकारी ने बीबीसी बांग्ला सेवा को बताया कि ढाका क्षेत्र में 4जी इंटरनेट सेवा फिलहाल बंद कर दी गई है, लेकिन यहां ब्रॉडबैंड सेवाएं जारी रहेंगी.
4जी और 3जी के बिना लोग अपने मोबाइल डिवाइस पर इंटरनेट का इस्तेमाल कर के आपस में संपर्क नहीं कर सकते.
सूत्रों ने अब तक ये नहीं बताया है कि स्थिति कब तक सामान्य होने की उम्मीद है.
देश के उत्तरी ज़िले बोगरा, पबना और रंगपुर सहित देश के अलग-अलग हिस्सों से लोगों के मारे जाने और घायल होने की खबरें मिल रही हैं.

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भारतीय दूतावास ने जारी की एडवायज़री
देश में विरोध प्रदर्शनों के दौरान कई पुलिस स्टेशनों और सरकारी भवनों में आग भी लगाई गई है और उसके बाद पिछले महीने प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने शांति बहाल करने के लिए सेना को बुलाया था.
बांग्लादेश के सिलहट में मौजूद भारतीय सहायक उच्चायोग ने वहां रह रहे भारतीयों और छात्रों के लिए एडवाइज़री जारी की है.
भारतीय सहायक उच्चायोग ने कहा है, "सिलहट स्थित भारतीय सहायक उच्चायोग के अधिकार क्षेत्र में रहने वाले छात्रों सहित सभी भारतीय नागरिकों से अनुरोध है कि वे इस कार्यालय से संपर्क में रहें और उनको सतर्क रहने की सलाह दी जाती है."
दूतावास ने आपात नंबर भी जारी किया है और कहा है, "आपात स्थिति में, कृपया +88-01313076402 पर संपर्क करें."
वहीं बांग्लादेश में मौजूद भारतीय दूतावास ने 18 जुलाई को जारी एडवाइज़री को अपने सोशल मीडिया हैंडल पर सबसे ऊपर पिन कर दिया है.
इस एडवाइज़री के अनुसार "लोगों को सलाह दी जाती है कि वो जितना हो सके लोकल ट्रैवल से बचें. लोग जहां हैं वहीं रहें और बाहर न निकलें."

हमारे धैर्य की भी सीमा है- क़ानून मंत्री
रविवार को बांग्लादेश के क़ानून और न्याय मंत्री अनीसुल हक़ ने बीबीसी के न्यूज़ आवर कार्यक्रम में कहा कि अधिकारी "संयम" दिखा रहे हैं.
उन्होंने कहा, "अगर हमने संयम नहीं दिखाया होता तो देश में ख़ून-खराबा हो जाता. मुझे लगता है कि हमारे धैर्य की भी सीमा है."
रविनवार को ढाका के मुख्य चौक पर हज़ारों लोग इकट्ठा हो गए और शहर के अन्य भागों में भी हिंसक घटनाएं हुईं हैं.
कुछ जगहों पर सत्तारूढ़ अवामी लीग के समर्थकों और सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के बीच भी झड़प हो रही है.
नाम न बताने की शर्त पर एक पुलिसकर्मी ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया, "पूरा शहर युद्ध के मैदान में बदल गया है."
उन्होंने बताया कि कई हज़ार प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने एक अस्पताल के बाहर कारों और मोटरसाइकिलों में आग लगा दी.
सरकार विरोधी प्रदर्शनों के पीछे के समूह, स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन ने प्रधानमंत्री शेख़ हसीना से पद छोड़ने की मांग की है.
देशभर में सरकार के ख़िलाफ़ 'अवज्ञा आंदोलन'

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इस संगठन ने रविवार से पूरे देश में अवज्ञा आंदोलन की घोषणा की हुई है, जिसमें नागरिकों से कर या अन्य कई तरह के बिल का भुगतान न करने को कहा गया है.
छात्रों ने सभी कारखानों और सार्वजनिक परिवहन को बंद रखने की भी अपील की है.
बांग्लादेश में जुलाई में हुई हिंसा में 200 से अधिक लोग मारे गये थे, जिनमें से कई पुलिस की गोली से मारे गये थे.
पिछले दो हफ़्तों में सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई में क़रीब दस हज़ार लोगों को हिरासत में लिया है. गिरफ़्तार किए गए लोगों में विपक्षी समर्थक और छात्र शामिल हैं.
अवामी लीग भी रविवार को पूरे देश में मार्च निकाल रही है. बांग्लादेश में अगले कुछ दिन दोनों खेमों के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं.

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बीते महीने हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद बांग्लादेश में कई शहरों में विरोध प्रदर्शन फिर से शुरू हो गए हैं.
प्रदर्शनों के ख़िलाफ़ सरकार की शुरुआती प्रतिक्रिया की वजह से छात्रों के बढ़ते गुस्से पर काबू पाने के लिए सरकार संघर्ष कर रही है.
बांग्लादेशी मीडिया का कहना है कि पिछले महीने के विरोध प्रदर्शनों में ज़्यादातर लोग पुलिस की गोली से मारे गए और हज़ारों लोग घायल हुए.
सरकार का तर्क है कि पुलिस ने केवल अपनी सुरक्षा और देश की संपत्ति को बचाने के लिए गोलियाँ चलाईं.
प्रधानमंत्री शेख़ हसीना के इस्तीफ़े की मांग
एक छात्र नेता नाहिद इस्लाम ने शनिवार को ढाका में एक सभा में हज़ारों लोगों से कहा, "पीएम शेख़ हसीना को न केवल इस्तीफ़ा देना चाहिए, बल्कि उनपर हत्या, लूटपाट और भ्रष्टाचार के लिए मुक़दमा भी चलना चाहिए."
यह विरोध प्रदर्शन शेख़ हसीना के लिए एक बड़ी चुनौती है. वो जनवरी में हुए चुनावों में लगातार चौथी बार निर्वाचित हुई थीं. मुख्य विपक्षी दलों ने चुनावों को एकतरफा बताते हुए उसका बहिष्कार किया था.

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साल 1971 में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ बांग्लादेश में आज़ादी की लड़ाई लड़ने वालों के रिश्तेदारों के लिए कई सिविल सेवा नौकरियों में आरक्षण दिया गया है. इसके ख़िलाफ़ छात्र सड़कों पर हैं.
हालांकि सरकार के एक फ़ैसले के बाद अब ज़्यादातर कोटे में कटौती कर दी गई है, लेकिन छात्र मारे गए और घायल हुए लोगों के लिए इंसाफ़ की मांग कर रहे हैं.
अब वो चाहते हैं कि पीएम शे़ख हसीना अपने पद से इस्तीफ़ा दें, लेकिन शेख़ हसीना के समर्थकों ने उनके इस्तीफ़े की संभावना से इंकार किया है.
इससे पहले शेख़ हसीना ने छात्र नेताओं केसाथ बिना शर्त बातचीत की पेशकश करते हुए कहा था कि वह हिंसा ख़त्म करना चाहती हैं.
उन्होंने कहा, "मैं आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ बातचीत करना चाहती हूँ और उनकी बात सुनना चाहती हूँ. मैं कोई टकराव नहीं चाहती."
लेकि प्रदर्शनकारी छात्रों ने उनके इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था.
















