ताजिकिस्तान के युवाओं में क्यों बढ़ रही है कट्टरता

ताजिकिस्तान

इमेज स्रोत, Muhammadsobir Fayzov / VK

इमेज कैप्शन, मुहम्मदसोबिर फ़ैज़ोव, जिनके परिवार का दावा है कि वो एक नाई के रूप में काम करते थे.
    • Author, ग्रिगोर एटनेसियन
    • पदनाम, बीबीसी रूसी सेवा

ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे के पास महमदशोई-पोयोन गांव के एक घर पर बीबीसी की टीम पहुँचती है.

इस घर के बाहर दो पैनल वाले लोहे के दरवाज़े लगे हुए हैं, जैसे ही बीबीसी की टीम को यहाँ देखा जाता है, दरवाज़ों को कसकर बंद कर दिया जाता है.

ये वही घर है, जहाँ पर मुहम्मदसोबिर फ़ैज़ोव बड़े हुए हैं. फ़ैज़ोव, मार्च में रूस में हुए हमले के चार ताजिक आरोपियों में से एक हैं.

मास्को के क्रॉकस सिटी हॉल पर हुए इस हमले में कम 144 लोगों की मौत हो गई थी. इस हमले के आरोप में चार ताजिक युवकों को गिरफ़्तार किया गया था.

ताजिकिस्तान
इमेज कैप्शन, ये वही घर है जहां पर मुहम्मदसोबिर फ़ैज़ोव बड़े हुए हैं.

अभियोजकों का कहना है कि 19 साल के फ़ैज़ोव उस समूह का हिस्सा थे, जिसने बिल्डिंग में आग लगाने से पहले कॉन्सर्ट में आए लोगों पर गोली चलाई और उन पर चाकूओं से हमला किया.

ईरान और इस्तांबुल में हुए हालिया हमलों के आरोपियों में ताजिक लोग शामिल थे. साथ ही यूरोप में हमले की योजना बनाने वाले संदिग्धों में भी ये लोग शामिल हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि ताजिकिस्तान के युवा आईएस-खुरासान की ओर आकर्षित हो रहे हैं. आईएस-खुरासान, इस्लामिक स्टेट की अफ़ग़ानिस्तान में फैली शाखा है, जिसने मॉस्को हमले की ज़िम्मेदारी ली थी.

आख़िर ऐसा क्यों है कि ताजिकिस्तान के युवा ऐसे संगठन की ओर आकर्षित हो रहे हैं?

परिवार और गाँव के लोग फ़ैज़ोव के बारे में क्या कहते हैं?

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

फ़ैज़ोव, ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे के पास के एक गांव में पैदा हुए. उनके परिवार का कहना है कि वो धार्मिक नहीं थे और फ़ुटबॉल खेलना पसंद करते थे.

जब हम उनके गांव पहुंचे तो पता चला कि उनका परिवार मीडिया से बातचीत नहीं करना चाहता है. फ़ैज़ोव की मां को पुलिस ने पूछताछ के लिए बुलाया था.

उनके एक भाई ने बताया कि फ़ैज़ोव परिवार के पांच बच्चों में सबसे छोटे हैं, दो साल पहले वो रूस गए थे और मॉस्को के उत्तर-पूर्व में स्थित एक शहर में हेयरड्रेसर के तौर पर काम कर रहे थे.

उनका कहना है कि फ़ैज़ोव धार्मिक नहीं थे. परेशान दिख रही उनकी दादी कहती हैं कि वो फ़ुटबॉल के बहुत बड़े फ़ैन थे.

स्थानीय मस्जिद के इमाम सैद्रहमान हबीबोव इस बात को मानते थे कि फ़ैज़ोव ख़ास तौर से धार्मिक तो नहीं लगते थे. हालांकि, उन्होंने कई बार अपने एक भाई की प्रार्थना वाली माला बेचने में मदद की थी.

स्थानीय तौर पर उनका परिवार प्रसिद्ध है क्योंकि फ़ैज़ोव के पिता एक स्थानीय स्कूल में रूसी पढ़ाते थे और मां लाइब्रेरी चलाती थीं.

हेडमास्टर अब्दुलअज़ीज़ अब्दुलसमादोव का कहना है कि फ़ैज़ोव को गणित पसंद था और वो डॉक्टर बनना चाहते थे. वो कहते हैं, ''स्कूल छोड़ने के बाद वो एकदम बदल गया होगा, ऐसा नहीं हुआ है तो ये मानना कठिन है कि उसने ऐसा कुछ किया है.''

'वो एक चींटी भी नहीं मार सकता'

ताजिकिस्तान
इमेज कैप्शन, मिरज़ोयेव की मां का कहना है कि वो एक चिंटी भी नहीं मार सकते थे.

32 साल के डलेद्ज़ोन मिरज़ोयेव रूस पर हुए हमले के चार आरोपियों में से एक हैं. वो अपनी पत्नी और बच्चों के साथ दुशांबे के पास एक गांव गलाखोना में रहते थे. उनकी मां गुलराकत हमें बताती हैं, ''वो मुर्गे तक नहीं मार सकता था, वो चींटी भी नहीं मार सकता था.''

मिरज़ोयेव के परिवार का कहना है कि वो क़रीब एक दशक तक हर छह महीने रूस में काम करते थे. हाल ही में वो नोवोसिबिर्स्क में टैक्सी चलाते थे.

उनके बड़े भाई रावशंजोन पर भी चरमपंथ का आरोप लगा था. परिवार का कहना है कि साल 2016 के बाद से उनके बारे में परिवार नहीं जानता, वो रूस चले गए थे.

ताजिक अधिकारियों का कहना है कि वो सीरिया में इस्लामिक स्टेट के लिए लड़ने चले गए थे. कुछ रिपोर्ट में कहा गया था कि साल 2020 में उनकी हत्या हो गई थी.

मॉस्को हमले में जिन दो और लोगों पर आरोप लगे हैं, वो हैं 30 साल के सैदाक्रामी मुरोडाली राखबलिज़ोदा और 25 साल के फरीदूनी शमसीद्दीन. ये दोनों भी दुशांबे के पास ही रहते थे.

राखबलिज़ोदा, 18 साल की उम्र से ही रूस में कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करते थे. उनके चाचा ने बीबीसी को बताया कि आव्रजन नियमों को तोड़ने के कारण उन्हें पांच साल के लिए देश से प्रतिबंधित कर दिया गया था. इस साल जनवरी में ही वो दोबारा लौटे थे.

शमसीद्दीन का क़रीबी परिवार बीबीसी से बात नहीं करना चाहता था. लेकिन उसके गांव के लोगों ने बताया कि काम की तलाश में रूस जाने से पहले वो एक बेकरी में काम करते थे.

उनके एक रिश्तेदार ने बताया कि शमसीद्दीन को कुछ समय जेल में बिताना पड़ा था, रिश्तेदार का दावा था कि उन पर ग़लत आरोप लगाए गए थे और उन्हें यौन उत्पीड़न के आरोप में जेल भेजा गया था.

ताजिकिस्तान

इमेज स्रोत, Russian Investigative Committee / Reuters

इमेज कैप्शन, मास्को के क्रॉकस सिटी हॉल पर हुए इस हमले में कम 144 लोगों की मौत हो गई थी

जब चारों अभियुक्तों को अदालत में पेश किया गया था तो मिरज़ोयेव और राखबलिज़ोदा की आंखें काली पड़ी थीं और शमसीद्दीन का चेहरा बुरी तरह से सूजा हुआ था.

फ़ैज़ोव व्हीलचेयर पर थे, वो बमुश्किल होश में दिखाई दे रहे थे, एक कैथेटर बैग उनके पास दिखाई दे रहा था. उनकी आंखें बंद थीं, जिसमें से एक आंख पर चोट लगी हुई थी.

बेरहमी से किए गए पूछताछ के कुछ वीडियो टेलीग्राम पर साझा किए गए थे. ऐसे ही एक वीडियो में राखबलिज़ोदा के कान का हिस्सा काटकर उनके मुंह में डालता दिखाया गया था. एक तस्वीर से पता चलता है कि शमसीद्दीन को बिजली के झटके दिए गए थे.

राखबलिज़ोदा जब अदालत में पेश हुए तो उनके कान पर पट्टी बंधी हुई थी.

ताजिकिस्तान

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, अदालत में पेशी के वक्त फ़ैज़ोव व्हीलचेयर पर थे, वो बमुश्किल होश में दिखाई दे रहे थे.

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

टेक्सस ए एंड एम यूनिवर्सिटी के मध्य एशिया विशेषज्ञ एडवर्ड लेमन का कहना है, ''वो ताजिक परिवार जिनके बेटे इराक़ और सीरिया में आईएस में शामिल हो गए थे, वो अक्सर कहते थे, 'वो अच्छा लड़का था, धार्मिक नहीं था, कभी मुसीबत में नहीं पड़ा.'

उनका मानना है कि कई आर्थिक, राजनीतिक और ऐतिहासिक वजह हैं, जिनके कारण युवा ताजिक ख़ास तौर से चरमपंथियों की भर्ती की तरफ़ आकर्षित हो रहे हैं.

एक हालिया भाषण में ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति एमोमाली रहमोन ने कहा कि सोशल नेटवर्क पर चरमपंथ के प्रचार की वजह से पिछले दशक में आईएस और दूसरे सशस्त्र समूहों में शामिल होने वाले युवाओं की संख्या बढ़ी है.

उन्होंने कहा कि विदेशों में सशस्त्र संघर्षों में शामिल होने की वजह से हज़ारों ताजिक नागरिक मारे गए हैं और कई हज़ार लापता हो गए हैं.

आईएस ने साल 2014 में सीरिया और इराक़ में बड़े पैमाने पर कई इलाकों पर क़ब्ज़ा कर लिया था. ये संगठन सामूहिक हत्याओं, अपहरण और सिर काटने जैसी क्रूरता के लिए कुख़्यात हो गया था.

साल 2019 में हार मिलने के बाद आईएस-खुरासान ने नए स्तर पर भर्तियां करना शुरू कर दिया. इसका नाम- आईएस-खुरासान एक प्राचीन इलाके को दर्शाता है, जो अब अफ़ग़ानिस्तान, ईरान और मध्य एशिया के कुछ हिस्सों को कवर करता है.

ताजिकिस्तान

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, पेशी के वक्त राखबलिज़ोदा के कान पर पट्टी बंधी हुई थी

आईएस की तरफ़ आकर्षित होने के कारण

ताजिकिस्तान के युवाओं को प्रभावित करने का एक कारण ये हो सकता है कि भले ही इस देश में इस्लाम को आधिकारिक धर्म के तौर पर मान्यता है और अधिकांश ताजिक मुस्लिम हैं लेकिन इसके बावजूद यहां पर इस्लाम को लेकर सख़्ती नहीं है.

सोवियत संघ के पतन के बाद, 1992 में इस्लामिक रेनेसां पार्टी (आईआरपीटी) के नेतृत्व वाले विपक्ष और राष्ट्रपति रहमोन के नेतृत्व वाली सरकार के बीच एक गृह युद्ध छिड़ गया.

साल 1997 में हुए शांति समझौते के बाद वो राष्ट्रपति बने रहे. आईआरपीटी पर दबाव बढ़ता गया और पार्टी हाशिए पर चली गई. सरकार ने साल 2015 में इसे आतंकी सगंठन घोषित कर दिया.

मौजूदा वक्त में यहां, इस्लाम के राजनीतिक स्वरूपों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. सरकार जिन मस्जिदों को संचालित करती है, वहां इमाम को वेतन दिया जाता था और शुक्रवार को किन विषयों पर चर्चा होगी ये भी सरकार ही तय करती है.

सालों से लंबी दाढ़ी रखने पर अनौपचारिक तौर पर प्रतिबंध है, ऐसा ही हिजाब के साथ भी था, हाल ही में हिजाब पहनने को औपचारिक तौर पर ग़ैर-कानूनी घोषित कर दिया गया था.

ताजिकिस्तान में इस्लाम को सख़्ती से नियंत्रित किया गया है लेकिन राष्ट्रपति एमोमाली रहमोन चार बार मक्का की हज यात्रा कर चुके हैं.

ताजिकिस्तान

इमेज स्रोत, ©Tajik President’s Press Service

इमेज कैप्शन, राष्ट्रपति एमोमाली रहमोन चार बार मक्का की हज यात्रा कर चुके हैं.

यहां की सरकार इस्लाम की जगह सांस्कृतिक विकल्प भी तलाशती दिखी है. साल 2006 में ताजिकिस्तान की सरकार ने 'आर्यन सभ्यता का वर्ष' घोषित किया था, उस वक्त सड़कों को ताजिकिस्तान के मुस्लिम पूर्व पूर्वजों के पोस्टरों से सजाया गया था.

यहां तक कि राष्ट्रपति ने ख़ुद अपने नाम को "रहमोनोव" से बदलकर मूल ताजिक "रहमोन" में बदल लिया था.

साल 2015 में लेमन ने अपने एक लेख में कहा था कि सरकार की तरफ़ से किए जा रहे 'धर्म के दमन' की वजह से 'अधिक लोगों को कट्टरपंथी समूहों की तरफ़ धकेला गया है.'

उन्होंने कहा कि ताजिक इस्लामिक लड़ाकों की प्रोफ़ाइल को देखने से पता चलता है कि ''अलगाव, हाशिए पर धकेले जाने और असुरक्षा के मिश्रण की वजह से ये लोग सीरिया और इराक की तरफ़ जाने के लिए आकर्षित हुए हैं.''

अब कई युवा ताजिकिस्तान नागरिकों को सोशल मीडिया पर चल रहे आज़ाद, सियासी और अक्सर कट्टरपंथी होने वाले नैरेटिव, सरकार नियंत्रित इस्लाम और आर्य इतिहास की तुलना से ज़्यादा आकर्षक लगते हैं.

ताजिकिस्तान में लाखों फॉलोअर वाले कई इस्लामिक ब्लॉगर्स हैं. वो ग़ज़ा, इज़राइल-हमास युद्ध समेत कई मुद्दों पर चर्चा करते हैं.

ताजिकिस्तान

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, अधिकांश ताजिक मुस्लिम हैं लेकिन इसके बावजूद यहां पर इस्लाम को सख़्ती से विनयमित किया गया है.

ग़रीबी भी एक वजह है

ग़रीबी भी एक बड़ा कारण है. क्रॉकस सिटी हमले के सभी चार आरोपी विदेश से कमाकर जो पैसे भेजते थे उनसे उनका बड़ा परिवार गुजर बसर करता था.

ताजिकिस्तान, मध्य एशिया का सबसे ग़रीब देश है. लाखों ताजिक काम की तलाश में रूस जाते हैं, अक्सर ऐसी नौकरियों में जिसमें दस्तावेज की ज़रूरत नहीं होती है. साथ ही इन्हें कठिन कामकाजी हालात, दुश्मनी और पूर्वाग्रह का सामना करना पड़ता है.

लेमन कहते हैं, युवाओं के कंधों पर ये एक भारी बोझ है और कई प्रवासी कामगार ख़ुद को सांत्वना देने के लिए धर्म की ओर मुड़ता पाते हैं.

इसके बाद वो चरमपंथी संदेशों और भर्तियों के प्रति आकर्षित होते हैं.

इस साल मार्च में आईएस-के ने टेलीग्राम पर अपनी प्रोपेगेंडा मैग्ज़ीन वॉयस ऑफ़ खुरासान का पहला ताजिक संस्करण प्रकाशित किया था. इसमें आईएस-के की तरफ़ से पूछा गया था- ''क्या आपमें शहीद होने की प्यास है?''

मैग्ज़ीन में राष्ट्रपति रहमोन को 'शैतान' बताया गया था और उनके शासन की आलोचना करते हुए इसे 'इस्लाम के साथ विश्वासघात' बताया गया था.

मैग्ज़ीन के एक चित्रण में राष्ट्रपति रहमोन को रूस की कठपुतली के तौर पर दिखाया गया था, जिस पर अफ़ग़ानिस्तान, चेचन्या और सीरिया में निर्दोष मुसलमानों की हत्या का भी आरोप है.

ताजिकिस्तान

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, अदालत में पेशी के वक्त शमसिद्दीन का चेहरा बुरी तरह से सूजा हुआ था

रूस के बाहर भी डर

लेमन और उनके सहयोगी ताजिकिस्तान से इस्लामिक स्टेट समूह में भर्ती हुए लोगों का एक डेटाबेस रखते हैं.

इनमें से ज़्यादातर श्रमिक हैं, जिन्हें रूस में भर्ती किया जाता है और फिर विदेशी ठिकानों पर भेज दिया जाता है. हालांकि, इनमें मध्यम वर्ग के पुरुष, मेडिकल छात्र और अधिकारियों के बच्चे भी शामिल हैं.

ये लोग अक्सर अफ़ग़ानिस्तान पहुंचते हैं. जहां पर रूस के नेतृत्व वाले श्रेत्रीय सुरक्षा समूह ने ताजिकिस्तान सीमा के क़रीब चरमपंथी प्रशिक्षण शिविरों के बढ़ते नेटवर्क पर चेतावनी दी है.

23 जून को रूस के दागिस्तान इलाक़े में दो चर्चों और सिनेगॉग पर हुए हमले के बाद अटकलें लगाई जाने लगीं कि क्या इसके लिए इस्लामी चरमपंथी ज़िम्मेदार है.

लेकिन किसी ने ज़िम्मेदारी नहीं ली. रूसी अधिकारियों का कहना है कि पांच हमलावर मारे गए थे.

रूस के बाहर डर बढ़ रहा है. क्रॉकस हमले के बाद, आईएस-के ने एक तस्वीर जारी की थी जिसमें एक छायादार आकृति लंदन, मैड्रिड, पेरिस और रोम की तस्वीरों को देख रही है. कैप्शन में लिखा था- ''मॉस्को के बाद अगला कौन है?''

पिछले जुलाई में जर्मन और डच एजेंटों ने किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान के कई लोगों को हमलों की योजना बनाने के संदेह में गिरफ़्तार किया था. दिसंबर में, एक ताजिक नागरिक को नए साल की पूर्व संध्या पर एक कैथेड्रल पर हमले की योजना बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.

मॉस्को हमले के बाद, फ्रांस ने अपने आतंकी ख़तरे के स्तर को ''असाधारण'' तक बढ़ा दिया. साथ ही क़रीब 45 देशों के सुरक्षा विशेषज्ञों से पेरिस ओलंपिक खेलों की सुरक्षा में मदद करने का अनुरोध किया.

बीबीसी हिंदी
इमेज कैप्शन, बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

रूस, कीएव पर लगा रहा है आरोप

ताजिकिस्तान

इमेज स्रोत, EPA

इमेज कैप्शन, रूस में दो चर्चों और सिनेगॉग पर हुए हमले के बाद अटकलें लगाई जाने लगीं कि क्या इसके लिए इस्लामी चरमपंथी ज़िम्मेदार

यूरोप में नेटो के एक पूर्व सुप्रीम कमांडर जेम्स स्टाविरिडिस ने क्रॉकस हमले को दुनिया के लिए जागरूक होने का आह्वान बताया. साथ ही ख़तरे का मुक़ाबला करने के लिए अमेरिका के साथ रूस, चीन और यहां तक कि अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के सहयोग की बात की.

लेकिन यूक्रेन के साथ रूस का चल रहा संघर्ष कार्रवाई को दूसरी तरफ़ ले जा रहा है. मॉस्को कार्रवाई की बजाए इस बात पर जोर दे रहा है कि क्रॉकस सिटी हॉल हमले की साजिश कीएव ने रची थी.

अदालत में पहली पेशी के बाद, चारों ताजिक आरोपी मई में फिर से कैमरे पर नज़र आए.

उन सभी ने ये कहा कि हमले की योजना यूक्रेन में बनाई गई ती लेकिन मानवाधिकार समूहों का कहना है कि उनकी गवाही को विश्वसनीय नहीं माना जाना चाहिए क्योंकि ऐसे संकेत मिले हैं कि यातना का इस्तेमाल किया गया था.

क्षेत्रीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़, ताजिकिस्तान के विदेश मंत्री ने भी गिरफ्तार किए गए लोगों के साथ किए जा रहे बर्ताव और उनके देश और नागरिकों के बारे में बनाई जा रही "नकारात्मक धारणा" पर चिंता जताई है.

कथित यातना के बारे में पूछे जाने पर क्रेमलिन के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

अभी आरोपियों के ट्रायल को लेकर कोई तारीख़ नहीं तय कई गई है.

((सोहराब ज़िया की अतिरिक्त रिपोर्टिंग))

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)