कंट्री म्यूज़िक एलबम और उससे जुड़ा विवाद क्या है? - दुनिया जहान

कंट्री म्यूज़िक

इमेज स्रोत, Columbia records

इमेज कैप्शन, बियोन्से

एक म्यूज़िक एलबम के पोस्टर पर बहस तेज़ हो गयी है. इस पोस्टर में एक महिला घुड़सवार विजयी मुद्रा में एक सफ़ेद घोड़े पर सवार दिखायी दे रही है. उसने काउबॉय हैट पहन रखी है, बाल हवा में लहरा रहे हैं और हाथों में अमेरिका का झंडा है. यह तस्वीर कंट्री म्यूज़िक के मूल भाव को प्रतिबिंबित करती है.

इस एलबम में 27 गाने हैं जिन्हें कई कंट्री म्यूज़िक कलाकारों के साथ मिलकर बनाया गया है. इसमें डॉली पार्टन के मशहूर गीत ‘जोलीन’ को भी नए अंदाज़ में बनाकर शामिल किया गया है.

यह म्यूज़िक एलबम इतनी लोकप्रिय हुई कि इस साल की सबसे लोकप्रिय एलबम बनकर लोकप्रिय म्यूज़िक के चार्ट में सबसे ऊपरी पायदान पर पहुंच गयी. आप सोच रहे होंगे कि इसमें आश्चर्य की क्या बात है?

पिछले कुछ सालों में कंट्री म्यूज़िक की लोकप्रियता लगातार बढ़ती रही है. कंट्री म्यूज़िक सिर्फ़ अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में लोकप्रिय हो रहा है.

संगीत के बाज़ार में बिकने वाले कुल संगीत का दस प्रतिशत हिस्सा केवल कंट्री म्यूज़िक से आता है.

इस संगीत एलबम को बनाने वाली कलाकार पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं मगर उन्हें कंट्री म्यूज़िक नहीं बल्कि आर एंड बी (Rhythm & Blues) और पॉप म्यूज़िक के लिए जाना जाता है.

कंट्री म्यूज़िक उन्होंने पहली बार रचा है और संगीत जगत में लोकप्रियता की सबसे ऊपरी पायदान पर पहुंच गयी हैं. वो एक काली महिला हैं और नाम है बियोन्से.

इस सप्ताह दुनिया जहान में हम यही जानने की कोशिश करेंगे कि कंट्री म्यूज़िक क्या है?

इसकी शुरुआत कहां से हुई?

कंट्री म्यूज़िक

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, लुई आर्मस्ट्रॉन्ग
छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

कंट्री म्यूज़िक की जड़ें अमेरिका के दक्षिणी ग्रामीण क्षेत्रों के लोक संगीत में पायी जाती हैं. ख़ासतौर पर एपेलेशियन पर्वत श्रृंखला के निचले इलाकों में.

एपेलेशियन पर्वत श्रृंखला कनाडा के न्यूफ़िनलैंड से अमेरिका के अलबामा तक फैली हुई है. इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और आयरलैंड से आए प्रवासी वेस्ट वर्जीनिया, जॉर्जिया और टेनेसी में आकर बस गए थे.

19वीं सदी की शुरुआत में इन लोगों के साथ उनके नृत्य संगीत की ख़ास शैली भी अमेरिका पहुंची. इस संगीत के बारे में जानने के लिए हमने बात की विलियम नैश से जो मिडलबरी कॉलेज में अमेरिकी अध्ययन और अंग्रेज़ी के प्रोफ़ेसर हैं.

वो कहते हैं, “शुरुआत में इस संगीत में ज़्यादातर बेंजो, मेंडोलिन और फ़िडल का इस्तेमाल होता था. गिटार उन दिनों बहुत महंगे होते थे और उच्च वर्ग के लोग ही गिटार ख़रीद पाते थे. फिर 20वीं सदी के आख़िरी सालों में गिटार कुछ सस्ते हुए और आम लोग की पहुंच में आ गए. उसके बाद ही कंट्री म्यूज़िक में गिटार का इस्तेमाल होने लगा. यह संगीत मुख्यरूप से डांस के लिए बना था.”

बैंजो वो वाद्य यंत्र है जिसे अमेरिका और कैरेबियाई देशों में लाए गए काले ग़ुलामों ने बनाया था. उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में अमेरिका के दक्षिणी क्षेत्र में कपास और तंबाकू की खेती में काम करने के लिए लाखों काले ग़ुलामों को लाया गया था. उस समय काउबॉय या खेतों में काम करने वाले सिर्फ़ गोरे लोग ही नहीं थे बल्कि काले लोग भी थे. मगर उन गीतों का विषय क्या होता था?

विलियम नैश ने कहा कि, “वो गाने उस समय की घटनाओं के बारे में होते थे. मिसाल के तौर पर कोई रेल दुर्घटना हो या बाढ़ का क़हर हो. यह संगीत आमतौर पर समसामयिक विषयों पर आधारित होता था. यही नहीं, कई गाने खेतों में काम करने वाले मज़दूरों की पीड़ा और उनके ख़िलाफ़ अन्याय के बारे में भी होते थे. कई गाने कॉटन मिलों के मज़दूरों के बारे में भी रचे गए.”

शुरुआत में ग्रामीण इलाक़ों में मशहूर था

कंट्री म्यूज़िक

वो औद्योगिक क्रांति का दौर था जब अमेरिका के दक्षिणी इलाकों में सैकड़ों कॉटन और कपड़ा मिलें खुल रही थीं. बीसवीं सदी की शुरुआत होते होते वायरलैस और रिकॉर्डिंग की टेक्नोलॉजी दुनिया में आ चुकी थी जिसकी वजह से यह संगीत अधिक लोगों तक पहुंचने लगा था.

विलियम नैश कहते हैं कि स्थानीय कार्यक्रमों से निकल कर संगीत अब रेडियो के ज़रिए लोगों तक पहुंचने लगा और इसके श्रोताओं की संख्या बढ़ने लगी. 1920 के दशक में कंट्री म्यूज़िक दक्षिणी क्षेत्रों के ग्रामीण इलाकों में लोकप्रिय था. बाद में यह लोग उत्तरी क्षेत्रों और बड़े शहरों में जाकर बसने लगे और उनके ज़रिए इस संगीत की लोकप्रियता उत्तरी इलाक़ों और शहरों में भी बढ़ने लगी.

शहरों में लोग कंट्री म्यूज़िक सुनने लगे. उस समय इस संगीत को ‘हिल बिली’ कहा जाता था क्योंकि शुरुआत में यह पहाड़ी ग्रामीण इलाकों में लोकप्रिय था. मगर पूरे देश में इसकी लोकप्रियता दूसरे महायुद्ध के समय फैलने लगी.

विलियम नैश के अनुसार दूसरे महायुद्ध के दौरान दक्षिणी क्षेत्र के कई लोग देश के दूसरे इलाके के लोगों के साथ सेना में भर्ती हो चुके थे जिसके चलते अधिक लोगों को कंट्री म्यूज़िक के बारे में पता चला और 1945 के बाद कंट्री म्यूज़िक पूरे देश में लोकप्रिय हो गया. और यह कंट्री म्यूज़िक के नाम से जाना जाने लगा.

उस समय कंट्री म्यूज़िक काफ़ी हद तक देशभक्ति की भावना पर आधारित था. इसके कुछ सालों बाद टेनेसी राज्य की राजधानी नैशविल का पहला रिकॉर्डिंग स्टूडियो खोला गया जिसके चलते नैशविल कंट्री म्यूज़िक का केंद्र बन गया.

संगीत के व्यवसायीकरण के बाद संगीत शैलियों की कैटेगरी बननी शुरू हुई और इस उद्योग को चलाने वाले यह तय करने लगे कि किस संगीत को कंट्री म्यूज़िक कहा जाए और किसे नहीं.

पूर्वाग्रह

कंट्री म्यूज़िक

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, लिंडा मार्टेल

नॉर्थ ईस्टर्न यूनिवर्सिटी के संगीत विभाग में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर फ़्रैंचेस्का इंगिलस कहती हैं कि 20वीं और 21वीं सदी में संगीत कलाकारों का कंट्री म्यूज़िक की ओर रुख़ कोई चौंकाने वाली बात नहीं है क्योंकि वो कंट्री म्यूज़िक सुनते हुए बड़े हुए हैं. लेकिन कंट्री म्यूज़िक का कलाकार होना और कंट्री म्यूज़िक के कलाकार के रूप में स्वीकार किया जाना- दो अलग बातें हैं.

वो कहती हैं, “काले लोग बहु-नस्लीय गुटों द्वारा बनाए गए कंट्री म्यूज़िक की रिकॉर्डिंग में शामिल तो होते थे लेकिन कई बार उनके नाम और तस्वीर उस संगीत की एलबम में शामिल नहीं की जाती थी. कई बार काले अमेरिकी कंट्री म्यूज़िक आर्टिस्टों के नाम तक बदल दिए जाते थे.”

इसमें साउथ केरोलाइना की बेहद प्रतिभाशाली गायिका लिंडा मार्टेल एक बड़ा अपवाद थीं. उनकी कंट्री म्यज़िक एलबम ‘कलर मी कंट्री’ 1970 में रिलीज़ हुई. नैशविल के प्रतिष्ठित ग्रैंड ओल्ड ओपरी में गाने वाली वो पहली काली महिला कलाकार थीं. लेकिन जल्द ही म्यूज़िक इंडस्ट्री ने उन्हें अलग-थलग कर दिया और पांच साल में वो संगीत की दुनिया से ग़ायब हो गयीं.

फ़्रैंचेस्का इंगिलस ने उनके बारे में कहा कि, “वो कहती थीं कि कई बार स्टेज पर गाते समय लोग उन्हें हैकल करते, मज़ाक उड़ाते और नस्लवादी फ़िकरे कसते. अंतत: उन्हें कंट्री म्यूज़िक की दुनिया से बाहर कर दिया गया. उस समय वो अनूठी काली कंट्री म्यूज़िक आर्टिस्ट थीं लेकिन उन्हें ना स्वीकार किया गया ना ख़ास पैसे मिले.”

ऐसा ही संघर्ष दूसरे काले संगीत कलाकारों को भी करना पड़ा.

फ़्रैंचेस्का इंगिलस का कहना है, “यह धारणा और छवि तैयार की गयी थी कि सिर्फ़ गोरे लोग ही कंट्री म्यूज़िक सुनते हैं और गोरे पुरुष कलाकार ही कंट्री म्यूज़िक रच सकते हैं. इस स्टीरियोटाइप को संगीत बेचने वाली कंपनियों और संगीत उद्योग ने काफ़ी बढ़ावा दिया. गोरे पुरुषों द्वारा रचा गया कंट्री म्यूज़िक ही रेडियो पर अधिक चलता था, उनके म्यूज़िक टूर भी ज़्यादा होते थे. हालांकि शुरुआत में कंट्री म्यूज़िक में कई नस्ल के रचनाकार और कलाकार हुआ करते थे.”

कंट्री म्यूज़िक

कई जाने-माने काले संगीत कलाकारों ने जैज़ और पॉप म्यूज़िक में नाम कमाने के बाद जब कंट्री म्यूज़िक का रुख़ किया तो रिकॉर्ड लेबल या म्यूज़िक कंपनियों ने उन्हें अलग-थलग कर दिया. लूई आर्मस्ट्रांग और रे चार्ल्स ने साठ और सत्तर के दशक में कंट्री म्यूज़िक एलबम रिलीज़ किए. ऐसा ही प्रयास टीना टर्नर ने भी किया.

फ़्रैंचेस्का इंगिलस कहती हैं कि दूसरी संगीत शैली के कलाकार बताकर उन्हें नज़रअंदाज़ कर दिया गया.

दूसरी वजह यह थी कि यह लोग काले थे. 21वीं सदी में सोशल मीडिया के प्रभाव को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता.

2019 में अमेरिकी रैपर और गीतकार लिल नैस एक्स ‘Lil Nas X’ ने एक कंट्री म्यूज़िक सिंगल रिलीज़ की जिसका नाम था ओल्ड टाउन रोड. टिकटॉक पर वो वायरल हो गयी और यूएस टॉप 40 चार्ट में पहले नंबर पर पहुंच गयी.

लेकिन जब वह हॉट कंट्री सॉन्ग चार्ट में उन्नीसवें नंबर पर पहुंची तो चार्ट चलाने वालों ने यह कहकर उसे डिसक्वालिफ़ाई यानी बाहर कर दिया कि उसमें समकालीन कंट्री म्यूज़िक के पर्याप्त भाव नहीं हैं. ग़ौरतलब यह भी है कि लिल नैस एक्स काले हैं और क्वियर भी.

काउबॉय कार्टर

कंट्री म्यूज़िक

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, बियोन्से

बियोन्से संगीत जगत के आज तक के सबसे सफल कलाकारों में से एक हैं. उन्हें यह शोहरत और कामयाबी आर एंड बी (R&B) और पॉप म्यूज़िक की शैली में रचे संगीत की बदौलत मिली है.

वो टैक्सस की रहने वाली हैं जहां काउबॉय संस्कृति प्रबल है. इस साल मार्च में बियोन्से ने अपनी पहली कंट्री म्यूज़िक एलबम रिलीज़ की जिसका नाम है काउबॉय कार्टर.

डलास स्थित संगीत समीक्षक और लेखिका टेलर क्रंपटन कहती हैं कि 27 गानों की इस एलबम से एक साफ़ संदेश यह भेजा गया कि कंट्री म्यूज़िक कई नस्ल के कलाकारों का है ना कि केवल गोरे कलाकारों का.

टेलर क्रंपटन कहती हैं, “बियोन्से ना गोरी हैं ना पुरुष. वो एक काली महिला कलाकार हैं. यानी कंट्री म्यूज़िक के पारंपरिक नियमों के अनुसार उन्हें कंट्री म्यूज़िक कलाकार के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता. तो उन्होंने अपनी शैली का कंट्री म्यूज़िक रचा है. इसके ज़रिए वो संगीत की संस्थाओं को बताना चाहती हैं कि कंट्री म्यूज़िक हमेशा से ही बहु-नस्लीय रहा है. भिन्न पीढ़ी के कलाकार यह संगीत रचते रहे हैं और कंट्री म्यूज़िक विभिन्न संगीत शैलियों से प्रभावित हुआ है.”

मगर एक नज़र इस बात पर भी डालते हैं कि आख़िर काउ बॉय कार्टर एलबम का पोस्टर विवादों में क्यों घिर गया. इस पोस्टर में काउ बॉय हैट पहने बियोन्से के बाल हवा में लहरा रहे हैं और उनके हाथ में अमेरिका का झंडा है. इस प्रकार के दृश्य रोडियो कार्यक्रमों में आमतौर पर दिखाई देते हैं.

रोडियो घुड़सवारी के कौशल की मनोरंजक प्रतियोगिताएं होती हैं जिनका आयोजन अमेरिका के कई राज्यों में किया जाता है. मगर पोस्टर में बियोन्से की इस तस्वीर से उनके कई प्रशंसक नाराज़ हो गए क्योंकि उन्हें इसमें अतिदक्षिणपंथी विचारधारा की झलक दिखाई दे रही थी.

टेलर क्रंपटन के अनुसार कई लोगों को लगा कि उन्होंने अपने प्रशंसकों के साथ विश्वासघात किया है. वो पच्चीस सालों से संगीत की दुनिया में हैं और लोगों ने उन्हें सराहा है. मगर उन्होंने इसकी परवाह नहीं की.

लेकिन अन्य कई लोगों ने इस पोस्टर को अलग नज़रिये से देखा.

टेलर क्रंपटन ने कहा कि, “जो लोग काले लोगों की रोडियो संस्कृति से परिचित थे उन्हें ऐसा नहीं लगा कि यह पोस्टर श्वेत राष्ट्रवाद का अनुमोदन करता है. रोडियो कार्यक्रमों में रोडियो क्वीन घोड़े पर बैठ कर अमेरिकी झंडा लहराती हैं और इस पोस्टर में बियोन्से रोडियो क्वीन की तरह दिखाई गई हैं जो अपनी रोडियो टीम का प्रतिनिधित्व करती हैं.”

कंट्री म्यूज़िक

ग़ौरतलब है कि यह बियोन्से का रोडियो से जुड़ा पहला तजुर्बा नहीं है. 2016 में उन्होंने कंट्री म्यूज़िक अवॉर्ड कार्यक्रम में एक ऐसे म्यूज़िक ग्रुप के साथ मिल कर परफ़ॉर्म किया था जिसकी मुख्य कलाकार ने दस साल पहले अमेरिका के इराक़ पर हमले की आलोचना की थी.

नतीजतन इस म्यूज़िक ग्रुप पर कई रेडियो स्टेशनों ने प्रतिबंध लगा दिया था. ऐसे में जब बियोन्से इस ग्रुप के साथ स्टेज पर आयीं तो दक्षिणपंथी गुटों ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी. उन्हें हैकल किया गया, गालियां दी गयीं.

टेलर क्रंपटन मानती हैं कि वो एक नस्लवादी घटना थी. वो कहती हैं उस समय अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव हो रहे थे और कंट्री म्यूज़िक हमेशा से अमेरिका की राष्ट्रवादी सोच के साथ जुड़ा रहा है. लेकिन लगता है अब स्थिति बदल गयी है रेडियो स्टेशन पर इस एलबम के गाने बज रहे हैं.

कमर कसने का समय

लेखक और मेमफ़िस के रोड्स कॉलेज के असोसिएट प्रोफ़ेसर चार्ल्स ह्यूज़ मानते हैं कि कंट्री म्यूज़िक को हमेशा गोरों के संगीत के तौर पर पेश किया गया है. रिपब्लिकन पार्टी के मतदातओं में कंट्री म्यूज़िक काफ़ी लोकप्रिय रहा है और रिपब्लिकन पार्टी ने इसका राजनीति के लिए भरपूर उपयोग किया है.

“1960 से ही रिपब्लिकन पार्टी गोरे मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए कंट्री म्यूज़िक का इस्तेमाल करती रही है. रिचर्ड निक्सन के चुनावी रणनीतिकारों ने पूरे देश में नागरिक अधिकार आंदोलन से नाराज़ गोरे मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए कंट्री म्यूज़िक का इस्तेमाल करने की रणनीति बनायी थी.”

इस साल अमेरिका में फिर चुनाव होने जा रहे हैं. कुछ साल पहले बियोन्से ने एक एलबम रिलीज़ की थी जिसका नाम था लेमोनेड. इसमें उन्होंने ब्लैक लाइव्स मैटर्स आंदोलन और पुलिस की क्रूरता का ज़िक्र करके अपनी राजनीतिक सोच को स्पष्ट कर दिया था.

चार्ल्स ह्यूज़ की राय है कि संभवत: इसी कारण कंट्री म्यूज़िक को लेकर विवाद इतना तूल पकड़ रहा है.

“जब हम कंट्री म्यूज़िक से जुड़े नियंत्रण की बात करते हैं कि उसमें कौन शामिल हो सकता है और कौन नहीं तो दरअसल हम केवल संगीत नहीं बल्कि देश की संस्कृति और राजनीति की चौकीदारी या गेटकीपिंग की बात कर रहे होते हैं – कि इसमें किसे आने दिया जाए और किसे नहीं. अब हम फिर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक दौर की कगार पर हैं.”

लेकिन लगता है कि धीरे धीरे स्थिति बदल रही है.

कंट्री म्यूज़िक

चार्ल्स ह्यूज़ ने कहा कि, “मुझे लगता है कुछ हद तक टेलर स्विफ़्ट और दूसरे कलाकारों ने कंट्री म्यूज़िक को आम लोगो में लोकप्रिय बनाना जारी रखा है और कंट्री म्यूज़िक क्या हो और कंट्री आर्टिस्ट कौन हो इस बारे मे नई वैकल्पिक सोच लोगों के सामने रखी है जो काफ़ी महत्वपूर्ण है."

"लेकिन सही मायने में बदलाव तभी आएगा जब बियोन्से ही नहीं बल्कि कई सारे काले संगीत कलाकारों के कंट्री म्यूज़िक को अपनाया जाएगा, रेडियो पर उनके गाने बजेंगे और संगीत से जुड़े संस्थान उन्हें पूरी तरह अपनाएंगे.”

तो अब लौटते हैं अपने मुख्य प्रश्न की ओर - कंट्री कौन है? कंट्री म्यूज़िक में कौन शामिल हो सकता है? कौन इसे रच सकता है और कौन नहीं यह बहस पिछले सौ सालों से चली आ रही है.

कंट्री म्यूज़िक की जड़ें अमेरिका के पशुपालन से जुड़े दक्षिणी क्षेत्र में हैं जहां केवल गोरे नहीं बल्कि दूसरी नस्ल के लोग भी रहते आए हैं. पिछली सदी के मध्य से यह संगीत पूरे देश में लोकप्रिय होने लगा था लेकिन अब सोशल मीडिया के चलते नए श्रोता इसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं और भिन्न संगीत शैली के संगीतकार कंट्री म्यूज़िक की रचना कर रहे हैं.

चार्ल्स ह्यूज़ की राय है कि जब भिन्न नस्ल और समुदायों के आर्टिस्ट कंट्री म्यूज़िक से जुड़ेंगे तो यह और निखरेगा और तभी इस संगीत के रचनाकारों श्रोताओं और देश के स्वरूप को प्रतिबिंबित करेगा.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)