बीजेपी में राष्ट्रीय अध्यक्ष की जगह कार्यकारी अध्यक्ष क्यों नियुक्त किया गया?

नितिन नबीन

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इमेज कैप्शन, नितिन नबीन के कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किए जाने से पहले पार्टी में सिर्फ़ जेपी नड्डा ही अध्यक्ष बनने से पहले कार्यकारी अध्यक्ष रहे हैं.
    • Author, दिलनवाज़ पाशा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

भारतीय जनता पार्टी ने पटना की बांकीपुर सीट से विधायक और बिहार सरकार में मंत्री नितिन नबीन सिन्हा को पार्टी का नया कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है.

नितिन नबीन भारतीय जनता पार्टी के इतिहास में जेपी नड्डा के बाद दूसरे कार्यकारी अध्यक्ष होंगे.

भारतीय जनता पार्टी के संविधान में कार्यकारी अध्यक्ष का कोई औपचारिक पद नहीं है.

लेकिन साल 2019 के बाद से बीजेपी में पूर्णकालिक अध्यक्ष नियुक्त करने से पहले कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त करने की एक परंपरा शुरू हुई है.

बीजेपी में अध्यक्ष पद के लिए चुनाव कब होगा अभी यह स्पष्ट नहीं है लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में पार्टी के शीर्ष नेताओं के हवाले से दावा किया जा रहा है कि अगले साल जनवरी में ये प्रक्रिया पूरी की जा सकती है. मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल भी जनवरी तक ही है.

नितिन नबीन के कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किए जाने से पहले पार्टी में सिर्फ़ जेपी नड्डा ही अध्यक्ष बनने से पहले कार्यकारी अध्यक्ष रहे हैं.

2019 में जब बीजेपी के तत्कालीन अध्यक्ष अमित शाह केंद्रीय गृह मंत्री बने तब पार्टी ने पूर्णकालिक अध्यक्ष नियुक्त करने से पहले जेपी नड्डा को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया था.

विनोद शर्मा का कोट

भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में राष्ट्रीय अध्यक्ष औपचारिक रूप से सबसे बड़ा पद है.

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वहीं कार्यकारी अध्यक्ष अस्थायी, अनाधिकारिक और एक ऐसा पद है जिसका पार्टी के संविधान में कोई ज़िक्र नहीं है.

ऐसे में ये सवाल उठ रहा है कि जब कुछ दिनों बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति होनी ही है तो पार्टी ने कार्यकारी अध्यक्ष क्यों नियुक्त किया है?

इसका कोई स्पष्ट जवाब तो नहीं है लेकिन ये माना जा रहा है कि बीजेपी अपने संविधान के हिसाब से होने वाले राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को आम सहमति और निर्विरोध रूप से करना चाहती है.

वरिष्ठ पत्रकार विजय त्रिवेदी कहते हैं, "बीजेपी जनवरी में राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू करेगी. पार्टी में इसकी एक औपचारिक प्रक्रिया है. ऐसे तो कोई चुनाव नहीं हो रहा है लेकिन नामांकन तिथि, चुनाव तिथि ये औपचारिक प्रक्रियाएं हैं, पार्टी को इन्हें करना है."

वहीं वरिष्ठ पत्रकार विनोद शर्मा कहते हैं, "कार्यकारी अध्यक्ष घोषित कर बीजेपी ने ये साफ़ कर दिया है कि नितिन नबीन ही अगले अध्यक्ष होंगे. अब राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव एक औपचारिक प्रक्रिया होगी. शायद ही कोई अब पार्टी के भीतर से इस पद के लिए दावेदारी करे."

बीजेपी में कैसे होता है राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव?

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी नड्डा के साथ कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन

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भारतीय जनता पार्टी के संविधान के अनुसार राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति चुनाव से होती है जो आमतौर पर गुप्त बैलेट के ज़रिए होता है. हालांकि आमतौर पर पार्टी अध्यक्ष आम सहमति से निर्विरोध ही चुने जाते रहे हैं.

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए राज्य कार्यकारिणी और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य मतदान करते हैं.

राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए कम से कम आधे राज्यों में पार्टी की ज़िला, मंडल और राज्य स्तरीय पदों के लिए नियुक्तियां पूरी हो जानी चाहिए.

बीजेपी ने देश के 37 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 30 में संगठन के पदों के लिए चुनाव पूरे कर लिए हैं.

पार्टी अध्यक्ष का कार्यकाल तीन साल का होता है और अधिकतम एक व्यक्ति लगातार दो कार्यकाल पूरे कर सकता है.

बीजेपी में राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया में लंबा समय लगता है. आम सहमति से लेकर आंतरिक चुनाव इसका मुख्य कारण होते हैं.

जेपी नड्डा जून 2019 में कार्यकारी अध्यक्ष बने थे और फिर जनवरी 2020 में उन्हें सर्वसम्मति से राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया था.

अब उनकी जगह लेने जा रहे नितिन नबीन सिन्हा को भी पहले कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है.

बीजेपी के संसदीय बोर्ड ने नितिन नबीन सिन्हा को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष मनोनीत किया है.

नितिन नबीन का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना तय?

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इमेज कैप्शन, नितिन नबीन छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों के लिए बीजेपी के प्रभारी थे और बीजेपी ने यह चुनाव भारी बहुमत से जीता था.

वरिष्ठ पत्रकार विजय त्रिवेदी और विनोद शर्मा मानते हैं कि नितिन नबीन का पार्टी का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना लगभग तय है.

26 साल की उम्र में पहली बार विधायक चुने जाने वाले नितिन नबीन पांच बार से लगातार विधायक हैं और बिहार से बीजेपी के पहले कार्यकारी अध्यक्ष हैं.

मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल तीन साल पहले ही समाप्त हो गया था और उन्हें लगातार एक्सटेंशन दिया जा रहा था.

45 साल के नितिन नबीन का कार्यकारी अध्यक्ष बन जाना ज़रूर कई लोगों को हैरान कर रहा है लेकिन विश्लेषक इससे हैरान नहीं है.

बिहार चुनावों के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नितिन नबीन से दो घंटे मुलाक़ात की थी.

विजय त्रिवेदी मानते हैं कि अगर पीछे की कड़ियों को जोड़कर देखा जाए तो नितिन नबीन का नाम बहुत हैरान नहीं करता है.

नितिन नबीन पार्टी के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों के प्रभारी थे और बीजेपी ने यह चुनाव भारी बहुमत से जीता था. यानी नितिन नबीन अपनी संगठनात्मक क्षमता पहले ही साबित कर चुके हैं.

वरिष्ठ पत्रकार विनोद शर्मा कहते हैं, "नितिन नबीन को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है और ये लगभग तय है कि वही आगे चलकर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे."

पार्टी में पीढ़ीगत बदलाव का दौर?

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इमेज कैप्शन, नितिन नबीन साल 2006 में पटना पश्चिम विधानसभा सीट से पहली बार विधायक बने थे. साल 2010 से 2025 तक वो लगातार बांकीपुर सीट से जीतते आ रहे हैं.

सवाल ये भी उठ रहा है कि क्या नितिन नबीन की नियुक्ति के पीछे कोई खास वजह या पार्टी की कोई ख़ास रणनीति है?

विश्लेषक मान रहे हैं कि पार्टी में ये बदलाव का दौर है और ये समय की ज़रूरत के हिसाब से उठाया गया क़दम है.

विजय त्रिवेदी और विनोद शर्मा दोनों ही मानते हैं कि पार्टी जनरेशन चेंज यानी पीढ़ीगत बदलाव से गुज़र रही है.

पार्टी में पुरानी पीढ़ी के नेताओं की जगह नए नेताओं को आगे बढ़ाया जा रहा है. राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री के रूप में पुराने नेताओं को हटाना और नए चेहरों को लाना पार्टी की इसी रणनीति का हिस्सा है और नितिन नबीन का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जाना इस कड़ी में अगला क़दम है.

पार्टी के पीढ़ीगत बदलाव की रणनीति पर ज़ोर देते हुए विजय त्रिवेदी कहते हैं कि पार्टी नए नेतृत्व को आगे लाना चाहती है और ये नियुक्ति भी उसी दिशा में है.

विजय त्रिवेदी कहते हैं, "नितिन नबीन युवा नेता हैं. बीजेपी ने इससे पहले मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की जगह मोहन यादव को सीएम बनाकर, राजस्थान में वसुंधरा राजे की जगह भजन लाल को और हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर की जगह नायब सिंह सैनी को सीएम बनाया. पार्टी ऐसा करती रही है."

वहीं विनोद शर्मा इस बात पर ज़ोर देते हैं कि बीजेपी में ऐसे नेताओं को आगे लाया जा रहा है जो किसी भी तरह से नरेंद्र मोदी या अमित शाह के लिए चुनौती पेश ना करें.

विनोद शर्मा कहते हैं, "नितिन नबीन की नियुक्ति हैरान इसलिए नहीं कर रही है क्योंकि उन्हें अमित शाह की सहूलियत के हिसाब से बनाया गया है. वो पार्टी के ऐसे कोई मज़बूत नेता नहीं है जिनसे अमित शाह को किसी तरह की चुनौती मिल सके."

शर्मा कहते हैं, "मेरा मानना है कि बीजेपी सेकंड लाइन ऑफ़ लीडरशिप को इस तरह बना रही है कि मोदी जी के बाद अमित शाह जी की ही जगह बने. किसी भी ऐसे नेता को मज़बूत पद पर नहीं लाया जा रहा है जो आगे चलकर किसी भी तरह की चुनौती पेश कर पाए."

बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का क़रीबी रिश्ता रहा है और आरएसएस को पार्टी का वैचारिक अभिभावक माना जाता है.

विश्लेषक यह भी मान रहे हैं कि नितिन नबीन का नाम उन चुनिंदा लोगों में रहा होगा जिन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी अनुमोदन प्राप्त हुआ है.

पत्रकार विजय त्रिवेदी कहते हैं, "संघ बीजेपी को कोई एक नाम नहीं देता है, जो चार-पांच नाम सुझाए होंगे उनमें नितिन नबीन का नाम रहा होगा. नरेंद्र मोदी और अमित शाह की सहमति के बाद उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया गया है."

पिछले दिनों अयोध्या में एक कार्यक्रम के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी और मोहन भागवत

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इमेज कैप्शन, पिछले दिनों अयोध्या में एक कार्यक्रम के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी और मोहन भागवत

राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए शिवराज सिंह चौहान और पार्टी के कई अन्य नेताओं का नाम भी मीडिया रिपोर्टों में आ रहा था.

विश्लेषक मान रहे हैं कि जब जेपी नड्डा को कार्यकारी अध्यक्ष और फिर राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था तब भी कई नेताओं के नाम चर्चा थे और उस समय भी उनकी नियुक्ति ने हैरान किया था.

विजय त्रिवेदी कहते हैं, "बहुत से लोगों को नितिन नबीन अभी बड़े नेता नहीं लग रहे हैं. उनका नाम नया लग रहा है, लेकिन साल दो साल बाद वो भी ऐसे ही बड़े नेता लगने लगेंगे जैसे जेपी नड्डा."

हालांकि, विश्लेषक इस बात पर ज़्यादा ज़ोर दे रहे हैं कि बीजेपी में इस समय सत्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के इर्द-गिर्द ही केंद्रित है और पार्टी के सभी निर्णयों पर इन दो शीर्ष नेताओं की छाप साफ़ दिखाई दे रही है.

विनोद शर्मा कहते हैं, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी नितिन नबीन की नियुक्ति से ख़ुश ही होंगे क्योंकि वो भी नहीं चाहते कि पार्टी में अमित शाह के लिए कोई चुनौती खड़ी हो. नितिन नबीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के दिशा निर्देशन में ही काम करेंगे और उनके लिए पार्टी के भीतर कभी चुनौती नहीं बनेंगे."

अगले साल पश्चिम बंगाल में चुनाव हैं. उसके बाद साल 2027 में उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में विधानसभा चुनाव हैं.

हालांकि विश्लेषक ये मान रहे हैं कि पार्टी ने कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति आगामी चुनावों को देखते हुए नहीं की है.

विजय त्रिवेदी कहते हैं, "नितिन नबीन ना ही पश्चिम बंगाल का चुनाव जिता सकते हैं और ना ही उत्तर प्रदेश का. पार्टी में बड़े बॉस बैठे हुए हैं, जो रूटीन काम हैं, संगठनात्मक दृष्टि से उन्हें करने के लिए नितिन नबीन को लाया जा रहा है."

विजय त्रिवेदी का कोट

जातिगत समीकरण

नितिन नबीन कायस्थ हैं और बिहार से आते हैं

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इमेज कैप्शन, नितिन नबीन साल 2016-19 में बीजेपी युवा मोर्चा के बिहार स्टेट प्रेसिडेंट थे. उन्हें पहली बार नीतीश कुमार की सरकार में साल 2021 में मंत्री बनाया गया था.

यदि नितिन नबीन सिन्हा आगे चलकर राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते हैं तो वो 1980 में पार्टी के गठन के बाद से कायस्थ जाति से आने वाले पहले अध्यक्ष होंगे.

विनोद शर्मा कहते हैं कि नितिन नबीन कायस्थ हैं और बिहार से आते हैं जहां कायस्थ एक प्रतिशत से भी कम हैं, ऐसे में उनका कोई बहुत बड़ा ज़मीनी राजनीतिक आधार नहीं है. लेकिन पार्टी को लग रहा है कि वो संगठन को सही से संभाल लेंगे.

साथ ही वो पार्टी के सबसे युवा अध्यक्ष होंगे और 52 साल की उम्र में पार्टी की कमान संभालने वाले नितिन गडकरी का सबसे युवा अध्यक्ष रहने का रिकॉर्ड तोड़ देंगे.

उनसे पहले अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कुशाभाऊ ठाकरे, वेंकैया नायडू, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, अमित शाह और जे.पी. नड्डा पार्टी अध्यक्ष रह चुके हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.