बिहार का गृह विभाग सम्राट चौधरी को मिलना, क्या नीतीश कुमार के लिए कोई संदेश है?

नीतीश कुमार

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इमेज कैप्शन, नीतीश कुमार ने अपने दो दशक के शासन में हमेशा गृह विभाग ख़ुद के पास रखा था

बिहार में नीतीश कुमार का यह कार्यकाल उनके पहले के सभी कार्यकाल से अलग होने जा रहा है.

पिछले दो दशक में पहली बार ऐसा होने जा रहा है, जब बिहार का गृह विभाग मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास नहीं होगा.

शुक्रवार को बिहार में जब नीतीश कैबिनेट में विभागों का बँटवारा हुआ तो गृह विभाग उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को मिला. इसके बदले में जेडीयू को वित्त विभाग के साथ वाणिज्यिक कर विभाग मिला है.

कहा जा रहा है कि सम्राट चौधरी को गृह विभाग मिलना एनडीए के भीतर एक अहम बदलाव है.

बीजेपी अभी बिहार में 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है. लेकिन जब नीतीश कुमार के पास 43 सीटें थीं, तब भी उन्होंने गृह विभाग अपने पास रखा था. यानी बिहार में क़ानून व्यवस्था की कमान अब एनडीए में बीजेपी नेता के पास होगी.

जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने बीबीसी न्यूज़ हिंदी से कहा कि "इस कदम के अधिक मायने निकालने की ज़रूरत नहीं है."

उन्होंने कहा कि कोई भी विभाग किसी के पास क्यों न हो "सरकार में सभी फ़ैसले सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही लिए जाएंगे."

जेडीयू नेता नीरज कुमार ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, "ये कोई विषय ही नहीं है, क़ानून व्यवस्था हमारी यूएसपी है, कल भी रहेगा."

वहीं बीजेपी नेता और मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा, "हमारी प्राथमिकता क़ानून का राज है. सीएम नीतीश कुमार ने भरोसा करके ये विभाग बीजेपी को दिया है. हम क़ानून का राज लाएंगे."

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नीतीश के कार्यकाल में बिहार के डीजीपी रहे अभयानंद ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा कि मुख्यमंत्री के पास अब पहले की तरह शक्ति नहीं होगी.

अभयानंद कहते हैं, ''गृह विभाग या क़ानून व्यवस्था से जुड़ा कोई विवाद होगा तभी मुख्यमंत्री के पास आएगा. यानी गृह सचिव और गृह मंत्री के बीच विवाद की स्थिति में ही कोई मामला मुख्यमंत्री के पास आएगा. सारे फ़ैसले अब सम्राट चौधरी लेंगे. ज़ाहिर है कि नीतीश कुमार अब गृह विभाग में हस्तक्षेप करने की स्थिति में नहीं होंगे.''

अभयानंद कहते हैं कि विभाग में "बदलाव तो हो जाएगा लेकिन ये प्रभावी तभी होगा जब क़ानून में इस तरह का बदलाव किया जाएगा."

बिहार के प्रशासन के बारे में अभयानंद बताते हैं कि यहां ये व्यवस्था दूसरे राज्यों से अलग है क्योंकि यहां पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम नहीं है.

वह कहते हैं, "बिहार में मैजिस्ट्रिरीयल पावर और पुलिस पावर अलग-अलग है. इससे परेशानी तो होगी ही क्योंकि क़ानून व्यवस्था की स्थिति में पुलिस का डेपुटेशन मैजिस्ट्रेट के बिना नहीं होता."

अभयानंद कहते हैं कि लालू प्रसाद यादव के सीएम रहते इस व्यवस्था में बदलाव की कोशिश की गई थी लेकिन ये हो नहीं सका. बाद में नीतीश के कार्यकाल में भी कोशिश हुई लेकिन ये हुआ नहीं क्योंकि इसका सबसे ज़्यादा विरोध आईएएस ही करते हैं.

अभयानंद कहते हैं कि नीतीश के पहले के कार्यकाल की तुलना में उनका ये कार्यकाल अलग होगा.

वह समझाते हैं कि नीतीश के पास, "पहले फ़ाइलें दो कपैसिटी में आती थीं, एक गृह मंत्री के रूप में और दूसरा मुख्यमंत्री के रूप में. लेकिन अब उन्हें हस्तक्षेप करना पड़ेगा, रूटीन तरीके से उनके पास फ़ाइलें नहीं जाएंगी. सीएम के तौर पर मतभेद की सूरत में ही उन तक मामला पहुंचेगा."

वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने सोशल मीडिया पर लिखा है, "बिहार में वक़्त बदलने का पहले संकेत दिख रहा है, महत्वपूर्ण गृह विभाग सम्राट चौधरी को दिया गया है."

आगे उन्होंने लिखा, "कुछ महीने पहले तक उन पर कई गंभीर आरोप लगे थे. अब चुनावी जीत के बाद वह बिहार में पार्टी का 'चेहरा' बन गए हैं. दो दशकों में यह पहली बार है जब नीतीश कुमार ने गृह विभाग अपने पास नहीं रखा है. (सिवाय उस समय के जब उन्होंने कुछ समय के लिए मुख्यमंत्री पद से हटने का फै़सला किया था)"

कांग्रेस ने क्या कहा?

अभिषेक मनु सिंघवी

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और चर्चित वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने लिखा कि बिहार में सभी महत्वपूर्ण विभाग बीजेपी नेताओं को दिए गए हैं.

उन्होंने एक्स पर लिखा है, "ग़लती न करें, बिहार की नई कैबिनेट असल में बीजेपी कैबिनेट है. सभी महत्वपूर्ण पोर्टफ़ोलियो और विभाग बीजेपी के हाथों में हैं. नीतीश कुमार की तरफ से डील स्पष्ट है- जब तक आप मुझे मुख्यमंत्री रहने देंगे, आप जितने चाहे उतने महत्वपूर्ण पोर्टफ़ोलियो ले सकते हैं."

अभिषेक मनु सिंघवी ने लिखा, "सीएम के तौर पर नीतीश के आख़िरी कार्यकाल के बाद जेडीयू शायद एक पार्टी के तौर पर न बचे. बिहार में गठबंधन का धर्म केवल नाम का है, यहां बीजेपी का दबदबा है."

दो दशक तक गृह विभाग अपने पास रखा

बिहार के नए गृह मंत्री के रूप में सम्राट चौधरी अब राज्य में पुलिस व्यवस्था, क़ानून-व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा की ज़िम्मेदारी संभालेंगे.

कई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अब सीमा से जुड़े इलाक़ों में इमिग्रेशन की समस्या पर भी उनकी निगरानी रहेगी.

यह वह विभाग है जिसे पिछले दो दशकों में कई गठबंधनों के दौरान अब तक नीतीश कुमार खुद संभालते आए थे.

वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब सामान्य प्रशासन, सतर्कता (विजिलेंस), कैबिनेट सचिवालय, निर्वाचन विभाग और अन्य ऐसे विभाग अपने पास रखेंगे जो गै़र–आवंटित हैं.

बीते 20 सालों में नीतीश कुमार ने ज़्यादातर मौक़ों पर गृह विभाग को अपने हाथ से जाने नहीं दिया. बतौर सीएम जीतन राम मांझी के कार्यकाल में भले ही गृह विभाग सीएम कार्यालय के अधीन था, लेकिन जेडीयू के अंदरूनी सूत्र कहते हैं कि उस समय भी इस विभाग पर नीतीश का प्रभाव था.

महागठबंधन सरकार के दौरान नीतीश पर सहयोगी दलों का दबाव भी रहा, लेकिन तब भी उन्होंने गृह विभाग पर अपनी पकड़ बनाए रखी.

किसे कौन विभाग मिला

अभयानंद

सरकारी नोटिफ़िकेशन के मुताबिक़, मुख्यमंत्री ने राजस्व और भूमि सुधार विभाग की ज़िम्मेदारी राज्य के दूसरे उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा को सौंपी है.

सिन्हा इसके साथ-साथ खनन एवं भू–विज्ञान विभाग की ज़िम्मेदारी भी संभालते रहेंगे.

राजस्व और भूमि सुधार विभाग पहले बीजेपी के मंत्री संजय सरावगी के पास था, जिन्हें इस कैबिनेट से बाहर रखा गया है.

महत्वपूर्ण माना जाने वाला वित्त विभाग जेडीयू के वरिष्ठ नेता बिजेन्द्र प्रसाद यादव को दिया गया है. उन्हें इसके अलावा वाणिज्यिक कर विभाग भी दिया गया है. पहले की सरकार में ये दोनों ही विभाग सम्राट चौधरी के अधीन थे.

बिजेन्द्र यादव अपने पास पहले से मौजूद ऊर्जा और योजना एवं विकास विभाग की ज़िम्मेदारी भी संभालेंगे. उनके पास अब मद्यनिषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग भी होगा, जिसे अब तक उन्ही के पार्टी के रत्नेश सदा देखा करते थे. रत्नेश को नई कैबिनेट में शामिल नहीं किया गया है.

जेडीयू ने कई प्रमुख विभागों की ज़िम्मेदारी अपने पुराने मंत्रियों को दी है. जैसे शिक्षा विभाग का दायित्व सुनील कुमार को, ग्रामीण विकास विभाग श्रवण कुमार को, सोशल वेलफ़ेयर की ज़िम्मेदारी मदन सहनी को, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग का दायित्व लेशी सिंह को, ग्राम कार्य की ज़िम्मेदारी अशोक चौधरी और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की ज़िम्मेदारी ज़मा ख़ान को दी है.

इसके अलावा श्रवण कुमार को परिवहन विभाग भी दिया गया है जो अब तक जेडीयू की मंत्री शीला मंडल देखती थीं. शीला नई कैबिनेट से बाहर हैं.

बिजेन्द्र यादव, सुनील कुमार और मदन सहनी

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नए शिक्षा मंत्री सुनील कुमार को विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की ज़िम्मेदारी भी सौंपी गई है. जेडीयू के सुमित कुमार सिंह चकाई से चुनाव हारने के बाद मंत्रिमंडल से अलग हो गए हैं. ये विभाग पहले उनके पास था.

जेडीयू के महेश्वर हज़ारी और जयंत राज कुशवाहा भी नए मंत्रिमंडल में जगह नहीं बना पाए हैं. उनके अधीन रहे सूचना एवं जन संपर्क विभाग और भवन निर्माण विभाग का दायित्व अब जेडीयू के ही विजय कुमार चौधरी संभालेंगे. इनके अलावा विजय के पास जल संसाधन और संसदीय कार्य विभाग की भी ज़िम्मेदारी है.

बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडेय को एक बार फिर स्वास्थ्य और क़ानून विभाग की ज़िम्मेदारी दी गई है, जबकि पूर्व विधायक नवीन किशोर सिन्हा के बेटे नितिन नवीन को पथ निर्माण और नगर विकास एवं आवास विभाग सौंपा गया है. नगर विकास विभाग पहले जिवेश कुमार के पास था लेकिन नई कैबिनेट में उन्हें मंत्री नहीं बनाया गया है.

बिहार की नई सरकार में बीजेपी के नए चेहरों को भी अहम विभाग मिले हैं. इनमें वर्तमान प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल हैं जिन्हें उद्योग मंत्री बनाया गया है.

उन्होंने बीजेपी के नीतीश मिश्रा की जगह ली है, जो बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा के बेटे हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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