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अंतरिक्ष जाने वाली महिलाएं पीरियड्स की चुनौती का कैसे सामना करती हैं?
पीरियड्स (मासिक धर्म) हर महिला के लिए एक चुनौती है. अगर किसी महिला अंतरिक्ष यात्री को अंतरिक्ष यात्रा के दौरान मासिक धर्म आ जाए तो क्या होता है? वे इसका सामना कैसे करती हैं?
क्या होगा यदि सुनीता विलियम्स की तरह किसी महिला को अचानक लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहना पड़े?
आमतौर पर जब महिलाएं यात्रा करती हैं तो इसे लेकर सतर्क रहती हैं.
सुनीता विलियम्स आठ दिन के मिशन के लिए अंतरिक्ष गई थीं लेकिन उन्हें वहां नौ महीने से अधिक समय तक रहना पड़ा.
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सुनीता विलियम्स को यह समस्या हुई या नहीं ये तो पता नहीं क्योंकि ये उम्र पर भी निर्भर करता है.
लेकिन जिन महिलाओं को मासिक धर्म होता है उन्हें अंतरिक्ष में महीनों रहना पड़े तो क्या होगा. इस दौरान वो इससे कैसे निपटेंगीं.
ये जानने के लिए बीबीसी ने डॉक्टर वर्षा जैन से बात की थी. डॉ. वर्षा जैन 'स्पेस गाइनेकोलॉजिस्ट' हैं.
उन्होंने अंतरिक्ष में महिलाओं के स्वास्थ्य पर रिसर्च के लिए नासा के साथ मिलकर काम किया है.
2019 में बीबीसी की पत्रकार एम्मा बार्नेट ने डॉक्टर जैन से इस मुद्दे पर बात की थी. आइए जानते हैं कि उन्होंने क्या बताया.
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अगर अंतरिक्ष में पीरियड्स हो तो क्या करें?
जब महिला अंतरिक्ष यात्रियों को मासिक धर्म होगा तो वो इससे कैसे निपटेंगीं?
नासा को भी ऐसे सवालों का सामना करना पड़ा था जब उसने अपनी पहली महिला अंतरिक्ष यात्री सैली राइड को अंतरिक्ष भेजा था.
उस समय अंतरिक्ष यात्रियों ने कहा था कि जब तक यह समस्या न बन जाए तब तक इसकी चिंता करने की जरूरत नहीं है. लेकिन इंजीनियरों को ही पूरी योजना बनानी पड़ी.
उन्हें यह अनुमान लगाना था कि एक महिला को कितने सैनिटरी नैपकिन की जरूरत होगी.
उस समय यह अनुमान लगाया गया था कि हर सप्ताह 100 से 200 सैनिटरी नैपकिन की जरूरत होगी. बाद में पता चला कि इतने नैपकिन की जरूरत नहीं थी.
वर्तमान में महिला अंतरिक्ष यात्री मासिक धर्म रोकने के लिए गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल करती हैं.
जब तक वे स्वस्थ हैं उन्हें सैनिटरी नैपकिन इस्तेमाल करने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए.
वर्षा कहती हैं कि महिलाएं वहां मासिक धर्म से बच सकें इसके लिए रिसर्च कर रही हैं.
अंतरिक्ष में जाने वाली प्रथम महिला सोवियत संघ की वेलेंतीन तेरेश्कोवा थीं. उन्होंने यह उपलब्धि 1963 में हासिल की थी.
इसके ठीक 20 साल बाद, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अपनी पहली महिला अंतरिक्ष यात्री सैली राइड को अंतरिक्ष में भेजा.
महिलाओं और पुरुषों पर अंतरिक्ष यात्रा का क्या असर?
वर्षा जैन ने बताया था कि अंतरिक्ष के माहौल के अनुकूल ढलना महिलाओं और पुरुषों के लिए लगभग एक जैसा है. हालांकि कुछ अंतर भी है.
अंतरिक्ष में जाने पर महिलाओं को कुछ हद तक थकान या सुस्ती महसूस होती है. लेकिन पुरुषों को ये थकान तब महसूस होती है जब वो धरती की ओर लौट रहे होते हैं.
अंतरिक्ष से लौटने के बाद पुरुषों को देखने और सुनने में दिक्कत आ सकती है, जबकि महिलाओं को ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्याएं आ सकती हैं.
अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि ये पुरुषों और महिलाओं की समस्याओं में ये अंतर हार्मोन की वजह से होता है या इसकी वजह कुछ और है.
इन सवालों के विस्तृत अध्ययन से पता चलेगा कि लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने की वजह से स्वास्थ्य में क्या परिवर्तन होते हैं.
शौचालय को लेकर भी क्या कोई दिक्कत होती है?
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में दो टॉयलेट्स हैं. हालांकि उन्हें भी मासिक धर्म संबंधी समस्याओं को ध्यान में रखकर नहीं बनाया गया है.
अंतरिक्ष यात्रियों की यूरिन नष्ट नहीं होती है. इन्हें रीसाइकिल कर साफ पानी में बदला जाता है.
चूंकि मासिक धर्म का रक्त ठोस माना जाता है इसलिए स्पेस स्टेशन के शौचालय इससे लिक्विड अलग नहीं कर पाते. इसलिए इससे मौजूद पानी रीसाइकिल नहीं हो सकता.
इसके अलावा पानी के इस्तेमाल पर कुछ पाबंदियां हैं. इसलिए अंतरिक्ष में मासिक धर्म के दौरान व्यक्तिगत तौर पर स्वच्छता बरकरार रखने में दिक्कतें आती हैं.
प्रजनन क्षमता पर असर
डॉ. वर्षा जैन ने बताया था कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि अंतरिक्ष यात्रा का प्रजनन क्षमता पर कोई प्रभाव पड़ता है या नहीं.
ऐसे कई महिलाएँ और पुरुष हैं जो अंतरिक्ष की यात्रा कर चुके हैं और लौटने के बाद वो माता-पिता नहीं बने. हालांकि ये भी ध्यान रहे कि पहली बार अंतरिक्ष जाने वाली महिलाओं की औसत उम्र 38 साल है.
भविष्य में गर्भधारण के लिए महिलाएं अपने अंडाणु और पुरुष अपने शुक्राणु को संरक्षित रख सकते हैं. हालांकि ये उनका व्यक्तिगत फ़ैसला होगा. नासा का इस संबंध में कोई नियम नहीं है.
अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में विकिरण का खतरा रहता है. हालाँकि, प्रजनन क्षमता पर इसके प्रभाव के बारे में कोई जानकारी नहीं है.
अंतरिक्ष यात्रा के दौरान पुरुषों के शुक्राणुओं की गुणवत्ता कम हो जाती है, लेकिन पृथ्वी पर लौटने के बाद ये फिर बहाल हो जाती है. इसके दीर्घकालिक असर पर अभी अध्ययन नहीं हुआ है.
स्वास्थ्य पर अंतरिक्ष यात्रा का असर
उनके मुताबिक़ मानव शरीर अंतरिक्ष में जल्दी बूढ़ा होता है. अंतरिक्ष में उनकी हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है. पृथ्वी पर लौटने के बाद आप चाहे कितनी भी अच्छी आदतें अपना लें या उपाय कर लें लेकिन फिर भी कुछ असर आपके शरीर पर दिखेंगे ही.
डॉ. वर्षा जैन ने कहा था, "मैं भी अंतरिक्ष से पृथ्वी को देखना चाहती हूं. हालांकि, मैं इसे दीर्घकालिक लक्ष्य के रूप में देखती हूं. फिलहाल, मैं पृथ्वी पर अपनी बेहतरीन काम कर रही हूं.''
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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