निगार शाजी: सूरज के रहस्यों से पर्दा उठाने की कमान है जिनके कंधों पर उनका क्या है कहना

    • Author, डॉ. अनुभा जैन
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

भारत का आदित्य एल-1 मिशन देश का पहला महत्वाकांक्षी सौर मिशन है और इसकी प्रोजेक्ट डायरेक्टर इसरो की वरिष्ठ महिला वैज्ञानिक निगार शाजी हैं.

निगार शाजी का बचपन प्रसिद्ध वैज्ञानिक और नोबेल पुरस्कार से सम्मानित मैरी क्यूरी की कहानियां सुनकर बीता. विज्ञान और गणित में बेहद दिलचस्पी रखने वाले उनके पिता उन्हें ये कहानियां सुनाते थे.

विज्ञान और गणित की दुनिया के बारे में उनके पिता के समझाने के अंदाज़ ने निगार शाजी को इस फ़ील्ड से जोड़ दिया.

वो इसरो के यूआर राव सैटेलाइट सेंटर में एसोसिएट डायरेक्टर के वरिष्ठतम पद पर कार्यरत हैं.

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इसरो की वैज्ञानिक शाजी कहती हैं कि साइंस की दुनिया में महिलाएं काफी आगे आईं हैं और वो जो चाहें कर सकती हैं.

उन्होंने लगातार प्रयासों से न केवल इसरो में अपना स्थान स्थापित किया, बल्कि विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में महिलाओं के लिए एक मिसाल पेश की है.

आदित्य एल-1 मिशन, इसरो, साइंस की दुनिया में महिलाओं के राह बनाने और इसमें आने वाली चुनौतियों समेत कई विषयों पर निगार शाजी से ख़ास बातचीत की गई.

विज्ञान की दुनिया में कैसे दिलचस्पी जगी

निगार शाजी अपने करियर के प्रेरणास्रोत के बारे में कहती हैं कि उनके पिता ने विज्ञान और गणित के प्रति रुचि पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

उनके पिता गणित में ग्रेजुएट थे और बचपन में उन्हें मैरी क्यूरी की कहानियां सुनाते थे, जिससे उन्हें विज्ञान के प्रति एक गहरी रुचि विकसित हुई.

वो कहती हैं, "मेरे पिता ने मुझे गणित और फ़िज़िक्स के कांसेप्ट्स इस तरह से समझाए कि मेरी इन विषयों में रुचि बढ़ी और यह मुझे सरल और रोचक लगने लगे. एक समय ऐसा आया जब तकनीक का विकास ज़ोर पकड़ रहा था और मैंने तब यह निश्चय किया कि साइंस की जगह मैं तकनीक में करियर बनाऊंगी जो कि एक उभरता हुआ क्षेत्र था और जहां मै साइंस को वास्तविक रूप दे सकती थी तकनीक के ज़रिए."

निगार शाजी ने पहले इंजीनियरिंग में प्रवेश का मन बनाया और ये ख़त्म करने के बाद वो नौकरी की तलाश में इसरो और कई अन्य जगहों के लिए कोशिश करती रहीं.

इसी दौरान उनका चयन इसरो में हो गया. वो कहती हैं कि इसरो में आने के बाद उन्होंने चुनौतियों को हर दिन महसूस किया और उससे पार भी पाती गईं.

महिलाओं के लिए विज्ञान की दुनिया में प्रवेश बहुत कठिन

महिलाओं के विज्ञान और अनुसंधान क्षेत्र में आने पर वो कहती हैं कि लोगों में ये धारणा है कि विज्ञान और गणित बहुत कठिन होते हैं जबकि उन्हें ये ज़्यादा आसान लगते हैं क्योंकि ये एक लॉजिक और रीज़निंग पर आधारित है न कि रट्टा लगाने पर.

वो कहती हैं कि अब अधिक संख्या में महिलाएं इन क्षेत्रों में अपना करियर बना रही हैं और ये देखकर उन्हें खुशी महसूस होती है क्योंकि आज महिलाएं इस क्षेत्र में बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं.

इंजीनियरिंग के क्षेत्र में महिलाओं की स्थिति में बदलाव के बारे में बात करते हुए निगार शाजी ने बताया, "जब मैंने इंजीनियरिंग में प्रवेश लिया, तो उस समय यह क्षेत्र महिलाओं के लिए ज़्यादा खुला नहीं था. मेरी रुचि मैकेनिकल इंजीनियरिंग में थी, लेकिन ये क्षेत्र उस समय महिलाओं के लिए बहुत उपलब्ध नहीं था, इसलिए मैंने इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन की शाखा को चुना."

उन्होंने ये भी कहा कि कॉलेज के दिनों में जो ज्ञान उन्होंने प्राप्त किया था, इसरो में आकर वह मूर्त रूप में अनुभव हुआ, आज तकनीकी क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसे क्षेत्रों में बेहतरीन विकास हुआ है.

आदित्य-एल 1 मिशन का लक्ष्य क्या है?

चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर 5 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग के एक सप्ताह बाद ही भारत ने सूर्य के अध्ययन के लिए एक मिशन लॉन्च किया था. ये था आदित्य-एल 1 मिशन.

इस मिशन के महत्व के बारे में निगार शाजी कहती हैं, "आदित्य एल 1 मिशन सूर्य और उसके विभिन्न पहलुओं को समझने के लिए है, जैसे सूर्य के कण, फ्लेयर, आदि."

"इससे हम स्पेस वेदर को समझ सकते हैं और भविष्य में होने वाली घटनाओं का पूर्वानुमान लगा सकते हैं, जिससे हम अंतरिक्ष यानों को होने वाले नुक़सान को रोक सकते हैं."

वो कहती हैं, "इसरो के स्वयं के 50 से ज्यादा स्पेसक्राफ्ट्स अंतरिक्ष में हैं. कई बार ये सुनने में आता है कि सोलर इरोशन या विस्फोट से कई बार स्पेसक्राफ्ट्स या अंतरिक्ष यान को नुकसान पहुंचता है."

"आज तकनीक और पृथ्वी के मौसम का पूर्वानुमान वैज्ञानिकों द्वारा काफी सही अनुमानित किये जाते हैं."

"इसी तरह स्पेस वेदर का पूर्वानुमान लगाकर हम स्पेस में होने वाले नुकसानों को रोक सकते हैं. आदित्य एल 1 मिशन के माध्यम से, इसरो बेहतर स्पेस वेदर मॉडल और प्रिडिक्शन बनाने में सक्षम होगा, जिससे स्पेस के मौसम की सही जानकारी मिल सकेगी."

महिलाओं का योगदान और समाज में बदलाव

इसरो महिला वैज्ञानिकों के बड़े मिशन पर कमान संभालने को लेकर पहले भी चर्चाओं में रहा है. चंद्रयान मिशन से लेकर मंगल मिशन में महिला वैज्ञानिकों ने अहम भूमिकाएं निभाई हैं.

निगार शाजी कहती हैं कि ये सिर्फ़ विज्ञान का ही नहीं बल्कि हर क्षेत्र का मामला है. वो कहती हैं, "महिलाएं जिस दिशा में भी जाना चाहें, उन्हें पूरी लगन और एकाग्रता से अपने लक्ष्य को प्राप्त करना चाहिए."

स्पेस ही नहीं बल्कि हर क्षेत्र में आज तकनीक बेहद महत्वपूर्ण और अहम मानी जाती है. स्पेस में भी कटिंग ऐज तकनीक का प्रयोग हो रहा है.

एक महिला को अपनी काबिलियत साबित करने के लिए पुरुषों के मुक़ाबले कहीं ज़्यादा संघर्ष करना पड़ता है.

इस पर उनका कहना है, "महिलाओं को घर और कार्यक्षेत्र में संतुलन बनाते हुए आगे बढ़ना होता है. मैं अपनी मां को श्रेय देती हूं, जिनकी वजह से मैं घर और नौकरी के बीच तालमेल बना पाई."

"हमें बच्चों की परवरिश इस प्रकार करनी चाहिए कि वे महिला और पुरुष के बीच समानता और सम्मान की भावना को समझें."

'वैज्ञानिक नहीं होती तो खिलाड़ी या फ़ाइटर पायलट होती'

निगार शाजी को खाली समय में किताब पढ़ना और बागवानी करना पसंद है. जब उनसे पूछा गया कि अगर वे वैज्ञानिक नहीं होतीं तो क्या करतीं, तो उन्होंने कहा, "अगर मैं वैज्ञानिक नहीं होती, तो मैं या तो स्पोर्ट्स पर्सन या फिर फाइटर पायलट होती."

निगार शाजी इसरो में अपने 35 वर्षों से अधिक के कार्यकाल में अनेक प्रमुख अभियानों का हिस्सा रही हैं.

निगार शाजी ने 1987 में इसरो में शामिल होने के बाद संचार उपग्रहों, डिज़ाइन और नियंत्रण प्रणालियों सहित कई अन्य क्षेत्रों में अपना योगदान दिया.

वो रिसोर्स सैट-2ए उपग्रह की एसोसिएट प्रोजेक्ट डायरेक्टर भी रही हैं और इसरो के सैटेलाइट टेलीमेट्री सेंटर की प्रमुख के रूप में भी कार्य किया है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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