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स्पेसएक्स रॉकेट के ताज़ा टेस्ट की दुनिया में क्यों हो रही है इतनी चर्चा?
- Author, एस्मी स्टालार्ड
- पदनाम, क्लाइमेट एंड साइंस रिपोर्टर, बीबीसी न्यूज़
एलन मस्क के स्टारशिप रॉकेट के ताज़ा परीक्षण की दुनियाभर में चर्चा हो रही है.
असल में इस परीक्षण के दौरान स्टारशिप रॉकेट को लॉन्च पैड पर वापस सुरक्षित उतारा गया और एलन मस्क की स्पेसएक्स कंपनी ऐसा कारनामा करने वाली दुनिया की पहली कंपनी बन गई है.
पांचवीं टेस्ट फ़्लाइट में स्पेसएक्स के अंतरिक्ष यान को आधे रास्ते से धीमा किया गया और बूस्टर को उसी लॉन्च टॉवर में दोबारा उतारने में सफलता हासिल की, जहां से उसे छोड़ा गया था.
इस परीक्षण के बाद तेज़ी से और दोबारा इस्तेमाल करने वाले रॉकेट बनाने की अपनी महत्वाकांक्षी परियोजना में स्पेसएक्स अहम चरण में पहुंच गया है.
'ऐतिहासिक'
बूस्टर के सुरक्षित रूप से वापस आने को स्पेस एक्स के इंजीनियरों ने “ऐतिहासिक दिन” क़रार दिया है.
रॉकेट का निचला हिस्सा, जिसे सुपर हैवी बूस्टर के नाम से जाना जाता है, उसे इतनी सफ़ाई से लॉन्चिंग पैड में उतारा गया, जो बहुत मुश्किल प्रक्रिया थी.
लॉन्च से पहले स्पेसएक्स टीम ने इस मिशन की असफलता को लेकर शंका व्यक्त की थी और कहा था कि उन्हें हैरानी नहीं होगी अगर बूस्टर लॉन्च पैड की बजाय मेक्सिको की खाड़ी में गिर जाए.
पिछले दो परीक्षणों में मिली उपलब्धि के बाद, अब स्पेसएक्स कुछ असाधारण उपलब्धियों पर ध्यान केंद्रित कर सकता है.
यह उपलब्धि पहले असफल परीक्षण के 18 महीने के अंदर ही मिली है, जब लॉन्चिंग के कुछ देर बाद ही रॉकेट में विस्फोट हो गया था.
स्पेसएक्स का कहना है कि ये असफलताएं विकास की योजना का हिस्सा रही हैं- यानी जल्द लॉन्च के समय असफलता की उम्मीद थी ताकि जितना संभव हो डेटा इकट्ठा किया जा सके और अपने प्रतिद्वंद्वी से जल्द अपनी प्रणाली को विकसित किया जा सके.
पांचवें परीक्षण के शुरुआती चरण भी पिछले परीक्षणों जैसे ही थे, यानी ज़मीन से उठने के 2.75 मिनट में यान से बूस्टर अलग हो गया.
इसके बाद बूस्टर टेक्सास के बोका चिका में मौजूद लॉन्च पैड की ओर वापस आना शुरू हो गया.
लैंडिंग के लिए दो मिनट का समय था और जब टीम अंतिम निरीक्षण कर रही थी तब तक यह निश्चित नहीं था कि यह कोशिश सफल भी होगी.
जब फ़्लाइट डायरेक्टर ने संकेत दिया, मिशन कंट्रोल में मौजूद स्पेसएक्स के कर्मचारियों में खुशी की लहर दौड़ गई.
मुश्किल प्रक्रिया कैसे पूरी हुई?
कंपनी ने कहा था कि इस कोशिश के लिए हज़ारों बारीक़ प्रक्रियाओं का पालन किया जाना था.
सुपर हैवी बूस्टर जैसे ही पृथ्वी के वातावरण में लौटा, इसके रैप्टर इंजन इसे धीमा करने का काम करने लगे. उस समय इसकी रफ़्तार कुछ हज़ार मील प्रति घंटे थी.
जब बूस्टर 146 मीटर ऊंचे खड़े लैंडिंग टॉवर के पास पहुंचा तो लगभग हवा में स्थिर हो गया था और बूस्टर के निचले हिस्से में बैंगनी लपटें उठ रही थीं. इसके बाद बहुत आहिस्ता से बूस्टर मकैनिकल आर्म में आकर फिट हो गया.
इस रॉकेट का अंतरिक्ष यान वाला हिस्सा पहले ही अलग हो गया था और इसमें स्वतंत्र इंजन चालू हो गया था. यह वही मॉड्यूल है जिसमें भविष्य के अभियानों में अंतरिक्ष यात्री बैठकर जाएंगे.
यह अंतरिक्ष यान 40 मिनट बाद हिंद महासागर में आकर गिरा.
स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क ने एक्स पर लिखा, “अंतरिक्ष यान सटीक जगह पर उतरा. दो लक्ष्यों में से दूसरा पूरा हुआ.”
केवल अंतरिक्ष यान ही सटीक तरीक़े से नहीं उतरा बल्कि स्पेसएक्स ने यान के हार्डवेयर के कुछ हिस्सों को सुरक्षित बचाने में कामयाबी भी हासिल की, जिसकी उम्मीद नहीं की जा रही थी.
लॉन्च पैड पर ही बूस्टर को दोबारा सही सलामत उतारे जाने से इस तरह के मिशन में जटिलता कम होगी और तेज़ी के साथ अंतरिक्ष यानों को मिशन पर भेजने में मदद मिलेगी.
एलन मस्क और स्पेसएक्स की एक बड़ी परियोजना है जिसमें इसके रॉकेट सिस्टम एक दिन इंसानों को चंद्रमा पर ले जाएंगे और मानवजाति को ‘बहुग्रहीय’ बना देंगे.
इस कामयाबी से अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा भी खुश है.
2026 तक चंद्रमा की सतह तक अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाने वाले स्पेसशिप लैंडर के विकास के लिए नासा ने स्पेसएक्स के साथ 2.8 अरब डॉलर का करार किया है.
अंतरिक्ष के संदर्भ में यह दिन बहुत दूर नहीं है इसलिए एलन मस्क की टीम रॉकेट को रीलॉन्च करने के लिए बहुत जल्दबाज़ी में है.
लेकिन अमेरिका के सरकारी विभाग संघीय उड्डयन प्रशासन (एफ़एए) ने पहले कहा था कि नवंबर से पहले तब तक कोई लॉन्च नहीं होगी, जब तक कंपनी के परमिट की समीक्षा नहीं हो जाती.
एफ़एए ही सभी उड़ानों के लिए मंज़ूरी देता है.
पिछले महीने से एफ़एए और एलन मस्क के बीच का विवाद तब सार्वजनिक हो गया जब एफ़एए ने कहा था कि लाइसेंस की शर्तों को पूरा करने में नाकामी और पहले की उड़ानों के लिए परमिट न लिए जाने के लिए वो स्पेसएक्स पर 6.33 लाख डॉलर का फ़ाइन लगाएगा.
लाइसेंस जारी करने से पहले एफ़एए उड़ान की समीक्षा करता है, ख़ासकर पर्यावरण पर इसके असर के बारे में.
इस फ़ाइन के जवाब में मस्क ने एजेंसी पर मुकदमा करने की धमकी दी थी और स्पेसएक्स ने एक सार्वजनिक पोस्ट कर ‘ग़लत रिपोर्टिंग’ का आरोप लगाते हुए आलोचना की थी, क्योंकि ये कहा जा रहा था कि रॉकेट के हिस्से पर्यारण में प्रदूषण फैलाते हैं.
अभी एफ़एए, उत्सर्जन के व्यापक प्रभावों की बजाय, रॉकेट लॉन्च का पर्यावरण पर पड़ने वाले तात्कालिक प्रभाव का ही आंकलन करता है.
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में एटमॉस्फ़ेरिक केमिस्ट्री और एयर क्वालिटी पढ़ाने वाली प्रोफ़ेसर डॉ. एलॉइस मरैस ने कहा कि परिवहन के अन्य माध्यमों की तुलना में रॉकेट से होने वाला कार्बन उत्सर्जन कम है लेकिन ग्रह के तापमान बढ़ाने वाले अन्य प्रदूषकों की बात पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है.
वो कहती हैं, “काला कार्बन सबसे बड़ी चिंता का सबब है. स्टारशिप रॉकेट में तरल मीथेन इस्तेमाल किया जा रहा है. यह अपेक्षाकृत नया ईंधन है और इससे होने वाले उत्सर्जन को लेकर हमारे पास बहुत कम आंकड़े हैं.”
डॉ. मरैस ने कहा कि रॉकेट से निकलने वाले काले कार्बन को लेकर बड़ी चिंता इसलिए है क्योंकि यह विमानों की अपेक्षा अधिक ऊंचाई पर उड़ता है जहां इसका असर लंबे समय तक रह सकता है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित