शी जिनपिंग की जगह भारत आए चीन के प्रधानमंत्री को क्या साबित करना होगा – प्रेस रिव्यू

दिल्ली में ली चियांग का स्वागत करते पूर्व सेनाध्यक्ष वीके सिंह

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चीन के प्रधानमंत्री ली चियांग शुक्रवार शाम जी-20 सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली पहुंच गए हैं. इसी सप्ताह ली चियांग ने जकार्ता में ईस्ट एशिया समिट में हिस्सा लिया था.

द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ चीन के नंबर दो नेता ली चियांग के लिए दिल्ली में जी-20 सम्मेलन में हिस्सा लेना पहली बड़ी अंतरराष्ट्रीय चुनौती होगी.

रिपोर्ट में कहा गया है कि चियांग को जी-20 सम्मेलन में पश्चिमी नेताओं का सामना करना पड़ेगा जो यूक्रेन संकट को लेकर चीन की तीखी आलोचना कर रहे हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि जी-20 के इतिहास में ऐसा पहली बार हो सकता है जब साझा बयान में दिक़्क़तें आ सकती हैं. यूक्रेन संकट की वजह से ऐसा हो सकता है.

चियांग ऐसे समय भारत आए हैं जब भारत और चीन के बीच संबंध सामान्य नहीं हैं. शुक्रवार शाम तक दोनों देशों के नेताओं की तरफ़ से द्विपक्षीय वार्ता की पुष्टि नहीं हुई है.

अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक़ जी-20 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ली चियांग के बीच अनौपचारिक बात हो सकती है. लेकिन वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) की स्थिति पर चर्चा की संभावना नहीं हैं.

शी जिनपिंग के शासन काल के दौरान चीन में प्रीमियर (प्रधानमंत्री) कार्यालय की भूमिका को बहुत हद तक सीमित कर दिया गया है. ली चिंयाग सिर्फ़ आर्थिक मामलों को ही संभालते हैं.

चीन ने पिछले 11 महीने से भारत में राजदूत भी नियुक्त नहीं किया है और इसका कोई कारण भी नहीं बताया है. भारत में चीन के दूतावास के सीडीए (चार्ज डे अफ़ेयर्स) मा जिया ने शुक्रवार को ली चियांग के भारत पहुंचने से पहले कहा कि दोनों देशों को "अंतरराष्ट्रीय एजेंडे में विकास को केंद्र बिंदु के रूप में बहाल करना चाहिए."

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भारत और चीन के द्विपक्षीय रिश्तों के बारे में बोलते हुए मा जिया ने कहा कि मौजूदा स्थिति में दोनों देशों के रिश्ते स्थिर हैं. जिया ने कहा कि दोनों नेता संचार के ज़रिये संपर्क में रहते हैं. राष्ट्रपति जिनपिंग और प्रधानमंत्री मोदी पिछले साल जी-20 सम्मेलन में और हाल ही में ब्रिक्स सम्मेलन में आमने-सामने भी आये थे.

मा जिया ने ये भी कहा कि दोनों देशों के बीच बॉर्डर पर भी स्थिति संतुलित है और राजनयिक और सैन्य चैनलों के ज़रिये दोनों देशों के बीच संपर्क बना हुआ है.

चीन के अधिकारियों और विशेषज्ञों का कहना है कि जी-20 शिखर सम्मेलन का एजेंडा आर्थिक ही रहना चाहिए और यूक्रेन युद्ध जैसे मुद्दों पर इस मंच से राजनीति नहीं होनी चाहिए.

इस सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के ना पहुंचने पर चीन ने कोई कारण नहीं बताया है लेकिन ये माना जा रहा है कि जिनपिंग की अनुपस्थिति से चीन पश्चिम के प्रति अपनी नाराज़गी ज़ाहिर कर रहा है. ये भी माना जा रहा है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अनुपस्थिति में जिनपिंग पश्चिमी नेताओं के बीच अकेले भी पड़ सकते थे.

द हिंदू अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में मीडिया रिपोर्टों के हवाले से बताया है कि जिनपिंग के भारत ना आने का एक कारण घरेलू स्तर पर आर्थिक स्थिति की वजह से पेश आ रहा दबाव भी हो सकता है.

हालांकि हाल ही में जिनपिंग ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए जोहानसबर्ग पहुंचे थे. जिनपिंग दो दिन तक दक्षिण अफ़्रीका में थे जबकि भारत में सम्मेलन में हिस्सा एक दिन का समय निकालकर भी लिया जा सकता था.

वहीं इस सप्ताह जिनपिंग चीन में अपना समय राजधानी से दूर चीन के उत्तर-पूर्वी इलाक़ों के दौरे में बिता रहे हैं. अगले कुछ दिनों में वेनेज़ुेला के राष्ट्रपति निकोलास मादुरौ और जांबिया के राष्ट्रपति हाकाइंदे हिचिलेमा चीन पहुंच रहे हैं.

अशोक गहलोत और भूपेश बघेल

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जी-20ः राष्ट्रपति के डिनर में क्यों नहीं आ रहे ये 6 मुख्यमंत्री?

अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ जी-20 के मौक़े पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मेज़बानी में हो रहे डिनर से विपक्ष के छह मुख्यमंत्री अनुपस्थित रह सकते हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक़ विपक्ष की सत्ता वाले 12 राज्यों में से 6 के मुख्यमंत्री अलग-अलग कारणों से डिनर से दूर रह सकते हैं.

ख़राब स्वास्थ्य की वजह से दो पूर्व प्रधानमंत्री, डॉ. मनमोहन सिंह और एचडी देवेगौड़ा भी अनुपस्थित रह सकते हैं.

अख़बार ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया डिनर में नहीं आएंगे.

रिपोर्ट के मुताबिक़ अशोक गहलोत के अंगूठे में फ्रैक्चर है और वो यात्रा करने से बच रहे हैं. वहीं बघेल का भी स्वास्थ्य दिल्ली यात्रा के लिए ठीक नहीं है. सिद्धारमैया ने भी ऐसे ही कारण बताये हैं.

वहीं तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने कोई कारण नहीं बताया है लेकिन अख़बार ने उनके कार्यालय के सूत्रों के हवाले से बताया है कि वो भी दिल्ली नहीं आ रहे हैं.

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी इस समय लंदन में हैं और वो 12 सितंबर को वापस लौटेंगे.

वहीं ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटयानक ने दिल्ली आने की ना पुष्टि की है और ना खंडन किया है.

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने बताया है कि वो दिल्ली नहीं आ रहे हैं. हालांकि उन्होंने इसका कोई कारण नहीं दिया है.

वहीं तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू इस डिनर में शामिल होंगे.

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य पार्टी प्रमुखों को इस डिनर का न्यौता नहीं दिया गया है.

शनिवार शाम राष्ट्रपति मुर्मू की तरफ़ से जी-20 के आयोजन स्थल भारत मंडपम में डिनर का आयोजन है.

आईआईटी दिल्ली

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जातिगत भेदभाव पर आईआईटी दिल्ली का सर्वे जारी होने के कुछ घंटे बाद ही वापस

हाल के महीनों में आईआईटी दिल्ली में अनुसूचित जाति के दो छात्रों की आत्महत्या के बाद बोर्ड फॉर स्टूडेंट्स पब्लीकेशन (बीपीएस) ने कैंपस में जातिगत भेदभाव को लेकर एक सर्वे प्रकाशित किया.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़ इसे कुछ ही घंटों के भीतर वापस ले लिया गया.

कई छात्रों का कहना है कि इस सर्वे में कई असंवेदनशील और अप्रासंगिक सवाल पूछे गये थे.

एक छात्र ने अपना नाम न ज़ाहिर करते हुए बताया कि इस सर्वे में संस्थान की आरक्षण नीति के बारे में भी सवाल गया था. इस सवाल के जवाब में छात्रों को इन विकल्पों में से एक चुनना था- मौजूदा व्यवस्था का समर्थन करते हैं, आर्थिक स्थिति के आधार पर नई नीति से पूरी तरह बदल देना चाहिए, आरक्षण समाप्त हो जाना चाहिए, जवाब देना नहीं चाहते.

छात्र का सवाल था- आख़िरी विकल्प की क्या ज़रूरत है, आरक्षण पर खुलकर बात करने में क्या समस्या है?

इस सर्वे में छात्रों से परिवार की सालाना आय, ग्रामीण या शहरी परिवेश, संस्थान में दाख़िला लेने का साल, लिंग और किस कोर्स की पढ़ाई कर रहे हैं के बारे में भी पूछा गया था.

सर्वे का एक सवाल था- “कॉमन रूम में छात्रों के बीच इस तरह के संवाद कितने आम है कि ‘उसे आसानी से दाख़िला मिल गया’ या इस तरह की अन्य टिप्पणियां करना कितना सामान्य है.”

अख़बार से बात करते हुए आईआईटी दिल्ली के एससी/एसटी लायसन अधिकारी प्रवीण इंगोले का कहना है कि वो इसे देख रहे हैं और जल्द ही दूसरा सर्वे जारी करने की प्रक्रिया में हैं.

भारत का नया संसद भवन

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पुरानी संसद को अलविदा कहने के लिए होगी साझा बैठक

द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ संसद के पांच दिनों के विशेष सत्र के दौरान 19 सितंबर को संसद के दोनों सदनों की साझा बैठक संसद के सेंट्रल हॉल में आयोजित की जा सकती है. पुरानी संसद को अलविदा कहने के लिए इस बैठक का आयोजन हो सकता है.

संसद का विशेष सत्र 18 सितंबर को पुरानी संसद में ही शुरू होगा, अगले दिन सत्र को गणेश चतुर्थी के मौक़े पर नई संसद में ले जाया जाएगा.

अख़बार के मुताबिक़ अभी 19 सितंबर की साझा बैठक के बारे में अधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है लेकिन अख़बार को पता चला है कि इसकी तैयारी चल रही है.

संसद के दोनों सदनों की साझा बैठकें सेंट्रल हाल में ही होती रही हैं.

संसद की नई इमारत में सेंट्रल हाल नहीं है, लेकिन नई लोकसभा में साझा बैठक की जा सकती है क्योंकि यहां 1272 सांसदों के बैठने की व्यवस्था है.

अधिकारियों के मुताबिक़ नई संसद के दोनों सदन पूरी तरह तैयार हैं और दफ़्तर और समितियों के लिए निर्धारित कमरे भी चालू हैं.

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