अखिलेश यादव के 'पीडीए' की बीजेपी ने क्या निकाली काट

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- Author, सैयद मोज़िज़
- पदनाम, बीबीसी हिंदी
उत्तर प्रदेश में नौ विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में बीजेपी ने सात सीटें जीतकर बढ़त बनाई, जबकि समाजवादी पार्टी ने दो सीटों पर जीत दर्ज की है.
इस उपचुनाव से पहले इन नौ सीटों में से चार सीटों पर समाजवादी पार्टी के विधायक थे. इन सीटों में करहल, कटेहरी, कुंदरकी और सीसामऊ शामिल हैं.
वहीं, बीजेपी गठबंधन के पास खैर, गाज़ियाबाद, फूलपुर, मझवां (निषाद पार्टी) और मीरापुर (आरएलडी) की सीटें थीं.
चुनाव के नतीजों के बाद समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया और कुछ लोगों को वोट डालने से रोका गया.
वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि यह जीत डबल इंजन सरकार की नीतियों और कार्यकर्ताओं की मेहनत का परिणाम है.

समाजवादी पार्टी का आरोप और बीजेपी का जवाब

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चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी ने बीजेपी पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाया था, जिसके बाद चुनाव आयोग ने पांच अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की थी.
मीरापुर विधानसभा में पुलिस प्रशासन पर आरोप लगे थे कि वे मुस्लिम मतदाताओं को वोट डालने से रोक रहे हैं. बीबीसी से बातचीत में पुलिस प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज किया था.
इस सीट पर एक पुलिसकर्मी की तस्वीर वायरल हुई थी, जिसमें वह पिस्टल लहराते हुए महिलाओं को कथित तौर पर धमका रहे थे.
समाजवादी पार्टी ने पुलिस पर धमकाने का आरोप लगाया था, लेकिन मुज़फ़्फ़रनगर के एसएसपी अभिषेक सिंह ने इन आरोपों को नकार दिया है.
बाद में पुलिस ने हत्या का प्रयास, दंगा फैलाने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में 28 नामजद और 100 से 120 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की.
अब नतीजों के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 'इलेक्शन में करप्शन' का मुद्दा उठाया.
उन्होंने एक्स पर लिखा, "इलेक्शन’ को ‘करप्शन’ का पर्याय बनाने वालों के हथकंडे तस्वीरों में क़ैद होकर दुनिया के सामने उजागर हो चुके हैं. दुनिया से लेकर देश और उत्तर प्रदेश ने इस उपचुनाव में चुनावी राजनीति का सबसे विकृत रूप देखा."
वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है, "यह चुनाव समाजवादी पार्टी और इंडी गठबंधन की 'लूट' और 'झूठ' की पॉलिटिक्स के अंत की उद्घोषणा है."
प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा, "समाजवादी पार्टी का 'पीडीए-परिवार डेवलपमेंट एजेंसी' बन गया है."
'पीडीए बनाम पीडीए'

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समाजवादी पार्टी ने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के सहारे 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को कड़ी चुनौती दी थी, जहां पार्टी को 37 सीटों पर जीत मिली थी.
सपा की सहयोगी कांग्रेस ने भी छह लोकसभा सीटें जीती थीं, जबकि बीजेपी 64 सीटों से घटकर 33 सीटों पर सिमट गई थी.
इस उपचुनाव में भी समाजवादी पार्टी ने पीडीए फॉर्मूला अपनाया और उसी आधार पर अपने उम्मीदवार उतारे.
दिलचस्प बात यह है कि बीजेपी ने भी अपने उम्मीदवारों के चयन में 'पीडीए' का समीकरण साधने की कोशिश की.
वरिष्ठ पत्रकार नवलकांत सिन्हा का कहना है, "बीजेपी के पीडीए में 'ए' का मतलब 'अगड़ा' है, जबकि समाजवादी पार्टी में 'ए' का मतलब 'अल्पसंख्यक' है."
उनके मुताबिक, "ये कहना अभी जल्दबाजी होगी कि अखिलेश यादव का पीडीए फ्लॉप हो गया है. उपचुनाव में हमेशा सत्ताधारी दल का प्रभाव रहता है, जो इस बार भी देखने को मिला."
बीजेपी के नेता और पिछड़ा कल्याण मंत्री नरेन्द्र कश्यप ने बीबीसी से बातचीत में दावा किया, "अखिलेश यादव चुनाव जीतने के बाद पिछड़ों को भूल गए. इसलिए पीडीए उनसे दूर हुआ."
"चुनाव में हमने समझाया कि बीजेपी आरक्षण विरोधी नहीं है. समाजवादी पार्टी का पीडीए फॉर्मूला एक छलावा था. अब वो नहीं चल रहा है."
समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री शाहिद मंज़ूर ने इस पर पलटवार करते हुए कहा, "मैं नहीं मानता कि पीडीए फॉर्मूला फेल हो गया है."
"चुनाव बीजेपी से नहीं, बल्कि सरकार से लड़ा जा रहा था. जहां जनता सक्षम थी, वहां हम जीते. जहां जनता नहीं टिक पाई, वहां सत्ता की ताकत ने जीत दिलाई."
कहां किसकी हुई जीत

बीजेपी के फूलपुर से दीपक पटेल, कटेहरी से धर्मराज निषाद, और मझवां सीट से सुचिश्मिता मौर्या ने जीत दर्ज की.
कुंदरकी से रामवीर सिंह भारी मतों से जीते, जबकि समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी इस मुकाबले में कहीं नजर नहीं आए.
ग़ाज़ियाबाद से बीजेपी के संजीव शर्मा को कामयाबी मिली, जबकि खैर की सुरक्षित सीट से बीजेपी के सुरेंद्र दिलेर ने चुनाव जीता. मीरापुर से बीजेपी की सहयोगी आरएलडी ने जीत दर्ज की.
बीजेपी ने कुल चार ओबीसी उम्मीदवार उतारे थे, जबकि एक सीट मीरापुर आरएलडी के खाते में गई थी. आरएलडी ने यहां से मिथिलेश पाल को उम्मीदवार बनाया था.
समाजवादी पार्टी ने ग़ाज़ियाबाद सीट से दलित समुदाय के उम्मीदवार को मैदान में उतारा, लेकिन सफलता नहीं मिली.
कानपुर की सीसामऊ सीट से नसीम सोलंकी ने जीत दर्ज की. उनके पति, पूर्व विधायक इरफान सोलंकी, जेल में हैं. करहल सीट से तेज प्रताप यादव विजयी हुए, जो अखिलेश यादव के रिश्तेदार हैं.
समाजवादी पार्टी ने नौ सीटों में से चार पर मुस्लिम, दो पर दलित और तीन पर ओबीसी समुदाय के उम्मीदवार उतारे थे.
पूर्व विधायक मुस्तफा सिद्दीकी को फूलपुर से उतारा गया, लेकिन सफलता नहीं मिली.
कुंदरकी से पूर्व विधायक मोहम्मद रिज़वान मैदान में थे, पर हार गए.
मीरापुर से सुंबुल राणा को टिकट दिया गया था, लेकिन पार्टी जीत हासिल नहीं कर सकी.
मझवां सीट पर सपा ने ज्योति बिंद को उतारा, जो मामूली अंतर से हार गईं.
खैर सीट पर चारू कैन को मैदान में उतारा गया. चारू जाटव समाज से हैं और उनके पति जाट समुदाय से हैं, लेकिन इसका कोई लाभ नहीं मिल पाया.
बीएसपी, एएसपी, एआईएमआईएम ने बिगाड़ा खेल?

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बहुजन समाज पार्टी, एआईएमआईएम और आज़ाद समाज पार्टी ने समाजवादी पार्टी को मीरापुर में नुकसान पहुंचाया है. जहां जीत हार का जितना अंतर है, उससे ज्यादा वोट इन दलों को मिले हैं.
फूलपुर और कटेहरी में अकेले बीएसपी उम्मीदवार ने सपा का खेल खराब किया है.
चुनाव आयोग के मुताबिक सपा उम्मीदवार का बीजेपी से तकरीबन 12 हजार वोट का फासला था, लेकिन बीएसपी को यहां बीस हज़ार वोट मिले हैं.
कटेहरी में बीएसपी उम्मीदवार को 32 हज़ार से ज्यादा वोट मिले हैं, सपा की शोभावती वर्मा के खाते में अगर इसे जोड़ दिया जाए तो ये बीजेपी के धर्मराज निषाद से ज्यादा वोट हैं.
मझवां में बीएसपी के दीपक तिवारी भी सपा की जीत में बाधा बने हैं. उन्हें 34000 वोट मिले. यहां सपा उम्मीदवार ज्योति बिंद 5000 वोटों से पीछे रह गईं.
वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ कलाहंस कहते हैं कि जो वोट बीएसपी और अन्य दल को मिले हैं, वो सपा के लिए नुकसानदायक साबित हुए हैं.
समाजवादी पार्टी को वोट के इस बिखराव को रोकने के लिए आगे ध्यान रखना पड़ेगा.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की साख बढ़ी

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इस उपचुनाव के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की साख भी बढ़ी है, क्योंकि उपचुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के पास चार सीटें थीं. पूरा उपचुनाव मुख्यमंत्री के नेतृत्व में लड़ा गया था.
योगी आदित्यनाथ ने 'बंटेंगे तो कटेंगे' का नारा दिया, जबकि समाजवादी पार्टी ने 'जुड़ेंगे तो जीतेंगे' का नारा दिया.
विश्लेषकों के मुताबिक उपचुनाव के नतीजे बताते हैं कि योगी का नारा जनता को ज्यादा पसंद आया है.
बीजेपी के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी का कहना है, "निश्चित तौर पर मुख्यमंत्री की साख बढ़ी है, क्योंकि बीजेपी ने मुरादाबाद के कुंदरकी की सीट 1993 के बाद पहली बार जीती है."
हालांकि, कुंदरकी की सीट को लेकर वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ कलाहंस का कहना है कि यह सपा में भीतरघात का नतीजा है. ये स्पष्ट है कि मुरादाबाद मंडल में सब कुछ ठीक नहीं है.
इस सीट पर ज़ियाउर्हमान बर्क विधायक थे, लेकिन वे सांसद चुन लिए गए थे. इसके बाद से यह सीट खाली थी.
इसके बचाव में सपा प्रवक्ता फख़रूल हसन कहते हैं कि वीडियो मे सबने देखा कि मीरापुर और कुंदरकी में प्रशासन ने क्या किया. जबकि, आम चुनाव में नतीजे सपा के पक्ष में थे.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.















