कुवैत: इमारत में आग लगने से 49 की मौत, भारतीय मज़दूर ने बताया आंखोंदेखा हाल

घटनास्थल पर कुवैत के सुरक्षा बल

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कुवैत में एक बहुमंज़िला इमारत में लगी आग से मरने वालों की संख्या बढ़कर 49 हो गई है.

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बीबीसी को बताया है कि मरने वाले लोगों में अधिकतर भारतीय नागरिक हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर दुख जताया है.

सोशल प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने लिखा, "कुवैत सिटी में आग लगने की घटना दुखद है. मेरी संवेदनाएं उन सभी के साथ हैं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है.मैं प्रार्थना करता हूं कि घायल जल्द से जल्द ठीक हो जाएं. कुवैत में भारतीय दूतावास स्थिति पर नज़र बनाए हुआ है और इस घटना से प्रभावित हुए लोगों की सहायता के लिए वहां के अधिकारियों के साथ काम कर रहा है."

कुवैत में नेपाल के राजदूत घनश्याम लमसल ने इस बात की पुष्टि की है कि उस बिल्डिंग में पांच नेपाली रह रहे थे. राजदूत लमसल के मुताबिक, घायल नेपालियों की पहचान उजागर नहीं की गई है. उन्होंने कहा, "पांच लोगों में से दो सुरक्षित हैं और तीन घायल हैं. दूतावास की टीम उनकी स्थिति की जांच करने के लिए अस्पताल गई है."

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मज़दूर ने बताया आंखों देखा हाल

तमिलनाडु के मणिकंदन कुवैत में मज़दूरी करते हैं. उन्होंने बीबीसी तमिल से आग लगने की इस घटना के बारे में बात की.

मणिकंदन ने बताया, "जहां आग लगने की घटना हुई, मैं वहां पास में ही एक अपार्टमेंट में रहता हूं. चूंकि गर्मियों का मौसम है इसलिए ज़्यादातर मज़दूर नाइट शिफ़्ट में काम कर रहे हैं. कुछ मज़दूर जो नाइट शिफ़्ट करके तड़के लौटे थे, वे काम से लौटने के बाद खाना बना रहे थे. जैसे ही आग लगी, ये तेज़ी से फैलने लगी. जो लोग इमारत में मौजूद थे, वे आग पर काबू पाने की स्थिति में नहीं थे."

"इमारत में रहने वाले ज़्यादातर लोग भारत से थे, ख़ासकर केरल और तमिलनाडु से. उस इमारत में रहने वाले किसी व्यक्ति मैं निजी तौर पर नहीं जानता हूं लेकिन आग लगने के दौरान फैले धुएं से मैंने कई लोगों का दम घुटते हुए देखा. उनमें से कुछ लोग सो रहे थे क्योंकि वो सुबह का वक़्त था."

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विदेश मंत्री और राहुल गांधी ने क्या कहा

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा है, "इस घटना की ख़बर से स्तब्ध और दुखी हूं. कुवैत सिटी में आग लगने से 40 से अधिक भारतीयों की मौत की भयावह खबर से स्तब्ध और दुखी हूं. शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं. मैं उन सभी घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूं."

राहुल गांधी ने लिखा, "मध्य पूर्व में हमारे श्रमिकों की स्थिति गंभीर चिंता का विषय है. भारत सरकार को अपने समकक्षों के साथ मिलकर काम करते हुए हमारे नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए और उनका सम्मानजनक जीवन स्तर सुनिश्चित करना चाहिए."

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि कुवैत में भारत के राजदूत ने अस्पतालों का दौरा कर घायलों का हालचाल पूछा है. उन्होंने घटना में मरने वाले लोगों के परिजनों के प्रति अपनी संवेदना भी प्रकट की.

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि प्रधानमंत्री के निर्देश पर विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह कुवैत जा रहे हैं.

उन्होंने एक्स पर लिखा, "वे आग लगने की त्रासदी में घायल हुए लोगों की सहायता की निगरानी करेंगे. वे इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में मारे गए लोगों के शवों को शीघ्र स्वदेश वापस लाने के लिए स्थानीय अधिकारियों के साथ कॉअर्डिनेट करेंगे."

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'ये कुवैत के लिए एक उदास कर देने वाला दिन है'

स्थानीय अख़बार 'टाइम्स ऑफ़ कुवैत' के संपादक रेवेन डिसूज़ा ने बीबीसी संवाददाता मोहनलाल शर्मा को बताया, "कुवैत में आग लगने की घटनाएं पहले भी होती रही हैं. इतने लोगों की मौत पहले कभी नहीं हुई थी. इस हिसाब से ये बहुत बड़ी घटना है."

"भारतीय समुदाय और कुवैत के लोग भी घबराए हुए हैं. आज सुबह से हम लोग सब इस ख़बर से घबराए हुए हैं. यहां माहौल बहुत उदास है. हम इस घटना के बारे में सोच भी नहीं सकते थे."

भारत के अलग-अलग इलाकों से कुवैत जाकर काम करने वाले लोग वहां किन हालात में रहते हैं? इस सवाल पर रेवेन डिसूज़ा ने बताया, "ये नहीं कह सकते कि यहां सब लोग बुरे हालात में ही रहते हैं. कई लोगों के लिए अच्छे हालात भी होते हैं लेकिन कभी-कभी छोटे-मोटे वॉयलेशन (नियमों का उल्लंघन) होते रहते हैं."

"जहां ये मज़दूर रहते थे, कंपनी उन्हें अच्छा वेतन और रहने के लिए अच्छी जगह मुहैया कराती है. इसीलिए लोग कुवैत आना चाहते हैं. लेकिन कभी कभी अचानक कुछ हो जाता है, जिसके बारे में हमने सोचा नहीं होता है. वॉयलेशन को लेकर अभी जांच जारी है और पता लगेगा कि लोगों की मौत कैसे हुई है."

"ये कुवैत और हम सभी लोगों के लिए एक बहुत उदास दिन है. प्रधानमंत्री मोदी जी ने भी इस पर ट्ववीट किया है और हिज़ हाइनेस अमीर ने भी इस घटना को गंभीरता से लिया है. मुझे लगता है कि इस घटना से कई ग़लतियों के सुधार की शुरुआत होगी. जो ग़लत काम चल रहे थे, उनको वॉर्निंग मिल गई है."

रेवेन डिसूज़ा ने बताया कि मरने वाले लोगों में ज़्यादातर ऑयल रिफाइनरी में काम करते थे. वे कुशल और अर्धकुशल कामगर थे. कोई पाइप फिटर होगा तो कोई टेक्नीशियन, कोई लेबर भी हो सकता है. ये लोग कुवैत के अलग-अलग ऑयल सेक्टर्स में काम करने वाले लेबर फ़ोर्स का हिस्सा थे."

"हम ये बात पक्के तौर पर नहीं कह सकते हैं लेकिन मुमकिन है कि उनमें से बहुत सारे लोग केरल के हों. हमारे पास इसके ब्योरे उपलब्ध नहीं है. बिल्डिंग में रहने वाले 195 लोगों में से केवल 67 लोग ख़तरे से पूरी तरह से बाहर हैं. इस बिल्डिंग में इतने सारे लोगों के रहने की क्षमता नहीं थी."

"इसमें कोई शक नहीं कि वहां नियमों का उल्लंघन हुआ था. क्षमता से अधिक लोगों को रहना तब तक समस्या नहीं थी जब तक कि वहां आग नहीं लगी थी. सरकार मज़दूरों के रहने की व्यवस्था देने वाली कंपनियों के टर्म्स एंड कंडीशन की समीक्षा कर रही है.

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कैसे लगी आग

अधिकारियों का कहना है कि इस घटना में कम से कम 15 लोग घायल हुए हैं जिन्हें अस्पताल ले जाया गया है.

कुवैत के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता मेजर जनरल ईद अल-अवेहान ने सरकारी टेलीविज़न को बताया कि ये आग एक बहुमंज़िली इमारत में बुधवार सुबह स्थानीय समयानुसार छह बजे लगी.

उन्होंने ये भी बताया कि आग पर काबू पा लिया गया है और राहत कार्य का काम जारी है.

सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे वीडियो में बिल्डिंग के निचले हिस्से में आग और ऊपर की मंज़िल से गहरा काला धुआं निकलता हुआ देखा जा सकता है.

अधिकारियों ने बताया कि क़ुवैत के मंगाफ़ इलाके के एक छह मंज़िला बिल्डिंग के किचन से आग की शुरुआत हुई.

इस इमारत में अधिकतर प्रवासी मज़दूर रहते हैं. रिपोर्टों के मुताबिक़, मरने वालों में 5 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं.

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क्षमता से अधिक लोग रह रहे थे

स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों में ये कहा गया है कि उस इमारत में क्षमता से अधिक लोग रह रहे थे.

पुलिस के एक सीनियर अधिकारी ने सरकारी टेलीविज़न को बताया कि घटना के वक़्त इमारत में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे.

उन्होंने बताया, "दर्जनों लोगों को निकाला गया है लेकिन आग की वजह से दम घुटने के कारण कई लोगों की मौत हुई है."

पुलिस अधिकारी ने ये भी बताया कि इस तरह की रिहाइशी इमारतों में क्षमता से अधिक लोगों के रहने के मुद्दे को लेकर पहले भी कई बार चेतावनी जारी की गई है.

दुर्घटना से हताहत होने वाले मज़दूर किस देश के थे या फिर वे किस तरह का काम करते थे, इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है.

ऐसा कहा जा रहा है कि घटना के समय में बिल्डिंग में 160 मज़दूर मौजूद थे. सभी मज़दूर एक ही कंपनी में काम करते हैं.

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कुवैत के उपप्रधानमंत्री ने क्या कहा

कुवैत के उपप्रधानमंत्री शेख़ फहद यूसुफ़ अल-सबाह ने घटनास्थल का दौरा किया है.

शेख़ फहद यूसुफ़ अल-सबाह देश के गृह मंत्री भी हैं. मौके पर पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, "संपत्ति मालिकों का लालच इस घटना का कारण है."

उन्होंने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, "उन्होंने नियम तोड़े और ये इसी का नतीजा है."

कुवैती मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़ इस इमारत में क्षमता से अधिक लोग रह रहे थे. गृह मंत्री ने कहा है कि संपत्ति क़ानून के उल्लंघनों की जांच की जाएगी.

भारतीय दूतावास ने इस दुखद घटना के बाद एक हेल्पलाइन नंबर +965-65505246 जारी किया है. सहायता के लिए लोग इस नंबर पर काल कर सकते हैं.

कुवैत में दो-तिहाई आबादी प्रवासी मज़दूरों की है. ये देश बाहरी मज़दूरों पर निर्भर है, ख़ासकर निर्माण और घरेलू क्षेत्र में. मानवाधिकार समूह कई बार कुवैत में प्रवासियों के जीवनस्तर को लेकर सवाल उठा चुके हैं.

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