इराक़, कुवैत में रेत की भीषण आंधी, नारंगी हुआ आसमान- तस्वीरें

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इराक़ कुवैत, सीरिया और ईरान सहित मध्य पूर्व के कुछ हिस्सों में सोमवार को भयंकर रेत की आंधी आई, जिसके चलते कई सार्वजनिक स्थानों और हवाई अड्डों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है.
समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार इस साल अप्रैल के मध्य के बाद से इराक़ आया ये नौवां ऐसा रेत की तूफ़ान है.
एजेंसी ने देश के स्वास्थ्य मंत्री के प्रवक्ता सैफ़ अल-बद्र के हवाले से कहा है कि रेतीले तूफ़ान के कारण हज़ारों लोगों को सांस की परेशानी हुई है और हज़ार से ज़्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

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देश के प्रधानमंत्री मुस्तफ़ा अल-कदीमी ने 'बेहद ख़राब मौसम' स्वास्थ्य और रक्षा सेवाओं के अलावा सभी सरकारी संस्थाओं को बंद करने का आदेश दिया है.
अधिकारियों ने लोगों से घरों के भीतर ही रहने की अपील की है और कहा है कि बाहर निकलते समय वो चेहरे पर सर्जिकल मास्क का इस्तेमाल करें. सरकार ने आपात स्थति से निपटने के लिए एक आपातकालीन फ़ोन नंबर भी जारी किया है.

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न्यूज़ वेबसाइट अल अरबिया के मुताबिक़ इस महीने में ये दूसरी बार है जब रेतीले तूफ़ान के कारण पड़ोसी कुवैत में भी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से सभी उड़ानें निलंबित कर दी गईं. बताया जा रहा है कि रेतीली आंधी में कुछ भी ठीक से देख पाना बहुत मुश्किल हो रहा था.
ना सिर्फ उड़ानें बल्कि कुवैत फ़ुटबॉल एसोसिएशन को ख़राब मौसम के चलते आमिर कप के फ़ाइनल मैच को भी स्थगित करना की घोषणा करनी पड़ी. सोमवार को आई रेतीली आंधी के चलते आसमान भी नारंगी दिखने लगा था.

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इस महीने की शुरूआत में आए एक ऐसे ही रेतीले तूफ़ान के कारण पांच हज़ार से अधिक लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया था. उस वक्त स्वास्थ्य मंत्री ने कहा था कि अकेले बगदाद प्रांत में दो हज़ार लोगों मे सांस लेने में परेशानी की शिकायत की थी.
मध्य पूर्व के देशों में इस तरह की रेतीली आंधियां गर्मी और वसंत के मौसम में आती हैं, लेकिन जानकार कहते हैं कि इस बार मार्च महीने से इस तरह की रेतीली आंधियां देखी जा रही हैं, और ये लगातार आ रही हैं.

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नासा के अनुसार इस मौसम में सूखी उत्तर-पश्चिम मौसमी हवाएं चलती हैं जिन्हें शमल कहा जाता है. ये तेज़ हवाएं अपने साथ रेत लेती चलती हैं जिसके कारण मध्य पूर्व के कई देशों में धूल की आंधियां आती हैं.
द न्यू अरब वेबसाइट के अनुसार जानकार कहते हैं कि बार-बार पड़ने वाले सूखे, ज़मीन में पानी की कमी और कम होती बरसात के कारण इराक़ में रेत की आंधियों का आना बढ़ रहा है.

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बीते महीने देश के पर्यावरण मंत्रालय के एक अधिकारी ने चेतावनी दी थी कि इराक़ इस साल "272 दिन तक रेत की आंधियों का सामना कर सकता है."
बीते साल की तुलना में इस साल इराक़ में जल संसाधन 50 फीसदी कमी है और जल संसाधन मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि इराक़ के पानी की ज़रूरत को पूरा करने वाली नदियां दजला और फरात का पानी आने वाले बीस सालों में काफी सूख सकता है.
जानकार कहते हैं कि सूखे के अलावा इसका एक कारण ये भी है कि पर्यावरण के अधिक गर्म होने से ज़मीन से नमी ख़त्म हो रही है और आने वाले वक्त में सूखे की संभावना बढ़ती जा रही है.

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अल जज़ीरा के मुताबिक़ सीरिया में चिकित्सा विभाग को अलर्ट पर रखा गया था क्योंकि पूर्वी प्रांत डेर अल-ज़ूर में रेतीला तूफान आया था जो कि इराक़ की सीमा के क़रीब था.
वेबसाइट के मुताबिक़ इस मई महीने की शुरुआत में इस क्षेत्र में इस तरह की आंधी से तीन लोगों की मौत हो गई थी.

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सीरिया के स्वास्थ्य मंत्रालय के कार्यालय के प्रमुख बशर शौएबी ने बताया कि अस्पतालों में 850 से ज्यादा ऑक्सीजन टैंक और सांस के रोगियों से निपटने के लिए ज़रूरी दवाओं की व्यवस्था की गई है.
संयुक्त अरब अमीरात के अल हमरा और उम अल शेफ़ में मंगलवार सवेरे विज़िविलिटी सौ मीटर से भी कम थी. यहां विशेषज्ञों ने इस हफ्ते देश के बड़े हिस्से में धूल भरी के चलते स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों की चेतावनी दी है.
डॉक्टरों का कहना है कि जैसे-जैसे हवाएं धूल और रेत को वातावरण में उड़ाती हैं इससे ना केवल विज़िबिलिटी कम होती है बल्कि लोगों को सांस लेने में भी दिक्कत का सामना करना पड़ता है.
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