ट्रंप जीतते हैं तो उप राष्ट्रपति पद की दौड़ में ये भारतीय भी रहेंगे शामिल

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- Author, होली होंडेरिच और सैम कैब्राल
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़ वॉशिंगटन
डोनाल्ड ट्रंप अगले महीने विस्कांसिन में होने वाले रिपब्लिकन पार्टी की कन्वेंशन के दौरान उप राष्ट्रपति पद के लिए अपनी पसंद का एलान करेंगे.
ट्रंप की टीम में शामिल होने की इच्छा रखने वालों में कई नाम लिए जा रहे हैं.
इन्ही में से कई उम्मीदवारों को अपनी वित्तीय पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी मांगने वाले पुनरीक्षण दस्तावेज (वैटिंग मैटीरियल्स) भेजे गए हैं.
चर्चा में शामिल नामों में भारतीय मूल के राजनेताओं के नाम भी शामिल हैं.
आइए उन संभावित उम्मीदवारों के बारे में जानते हैं, जिन्हें ट्रंप कैंपेन की ओर से जांच पड़ताल के दस्तावेज मिले हैं या जिनके नाम की चर्चा है.
तुलसी गबार्ड

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एक डेमोक्रेट के रूप में वो अमेरिकी संसद की पहली हिंदू सदस्य थीं. तुलसी गबार्ड ट्रंप की शॉर्ट लिस्ट में सबसे बड़ी उलटफेर हो सकती हैं.
एक दशक पहले वो इराक़ युद्ध में लड़ चुकी हैं और अमेरिकी आर्मी रिज़र्विस्ट रही हैं.
तुलसी गबार्ड ने 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेट पार्टी का उम्मीदवार बनने की कोशिश की थी.
बाद में उन्होंने हिलेरी क्लिंटन की जगह बर्नी सेंडर्स का समर्थन किया था.
2013-21 के दौरान अमेरिकी कांग्रेस में रहते हुए वो ओबामा प्रशासन और अमेरिकी सेना के दखल देने वाले रवैये की घोर आलोचक रहीं.
2020 में राष्ट्रपति पद के लिए डेमोक्रेटिक प्राइमरी की दौड़ में शामिल रहीं और मौजूदा उप राष्ट्रपति कमला हैरिस की तीखी आलोचक थीं.
42 साल की तुलसी गबार्ड ने बाद में फॉक्स न्यूज़ में जाने की घोषणा की और 2022 में डेमोक्रेटिक पार्टी को छोड़ दी
फ़रवरी में वॉशिंगटन पोस्ट ने ख़बर दी कि यूक्रेन मदद की मुखर आलोचक गबार्ड से ट्रंप ने विदेश नीति और पेंटागन के संचालन को लेकर बात की थी.

जेडी वांस

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39 साल के जेडी वांस ओहायो से जूनियर सीनेटर हैं और पिछले कई महीनों से कई मौकों पर ट्रंप के समर्थन में मजबूती से खड़े रहे हैं.
येल से पढ़े वांस एक बेस्ट सेलिंग किताब 'हिलबिली एलेगी' लिख चुके हैं.
कभी वो ट्रंप के विरोधी रहे, लेकिन जब ट्रंप के महत्वपूर्ण समर्थन से 2022 में सीनेट के चुनाव में वो खड़े हुए, उसके बाद उन्होंने अपना रुख़ बदला.
अपने कार्यकाल में उन्होंने ऐसे कई मुद्दों का समर्थन किया जो ट्रंप का समर्थन बढ़ाते हैं.
जेडी वांस मानते हैं कि सीनेट में भविष्य के ट्रंप प्रशासन के लिए वो बेहतर साबित होंगे, हालांकि उप राष्ट्रपति की संभावना को ख़ारिज नहीं किया है.
टिम स्कॉट

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सीनेटर टिम स्कॉट अमेरिका के प्रमुख ब्लैक रिपब्लिकन चेहरा हैं और वो पार्टी के प्राइमरी चुनाव में ट्रंप के प्रतिद्वंद्वी रहे थे.
58 साल के स्कॉट अपने प्रचार अभियान के लिए फ़ंड नहीं जुटा पाए और तीन डिबेट में लचर प्रदर्शन के बाद प्राइमरी से बाहर हो गए और ट्रंप का समर्थन किया.
न्यू हैंपशर प्राइमरी से पहले ट्रंप की चुनावी रैली में मंच से उनकी एक जोशीली टिप्पणी ने उन्हें राष्ट्रपति पद के दावेदारों में सबसे आगे कर दिया.
उन्होंने कहा था, "हमें डोनाल्ड ट्रंप की ज़रूरत है."
उन्होंने ट्रंप से कहा, "मैं आपको प्यार करता हूं."
पूर्व राष्ट्रपति ने मुस्कराते हुए जवाब दिया, "इसीलिए तो आप महान राजनेता हैं."
सीबीएस के मुताबिक ट्रंप कैंपेन की ओर से स्कॉट को भी संदेश आया है.
डग बुरगम

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प्राइमरी में ट्रंप से हारे एक और प्रतिद्वंद्वी हैं डग बुरगम. 67 साल के बुरगम नॉर्थ डकोटा के दूसरी बार गवर्नर हैं.
राष्ट्रपति की उम्मीदवारी की दौड़ में वो कुछ ख़ास छाप नहीं छोड़ पाए थे.
2023 में उन्होंने कहा था कि ट्रंप के साथ वो कोई रिश्ता नहीं रखेंगे क्योंकि 'जैसी संगत होती है, आपके बारे में छवि भी वैसी बनती है.'
बुरगम ने एक छोटे से सॉफ़्टवेयर स्टार्टअप के साथ अपना करियर शुरू किया था, जिसे माइक्रोसॉफ़्ट ने ख़रीद लिया और बाद के सालों में वो अरबपति बन गए.
कहा जाता है कि अपने कम नाटकीय व्यवहार और राजनीतिक ज्ञान से उन्होंने ट्रंप को प्रभावित किया है. इन्हीं खूबियों के चलते 2016 में पूर्व उप राष्ट्रपती माइक पेंस का चुनाव हुआ था.
कथित तौर पर बुरगम को भी पुनरीक्षण के लिए संदेश मिला है.
बायरन डोनाल्ड्स

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बायरन डोनाल्ड्स ने काले लोगों के बीच रिपब्लिकन पार्टी के आधार को फैलाने में बड़ी भूमिका निभाई है.
न्यूयॉर्क में एक सिंगल मदर से पैदा हुए 45 साल के बायरन डोनाल्ड्स ने 2012 में फ़्लोरिडा की राजनीति में कदम रखा, उससे पहले वो वित्तीय संस्थाओं में काम करते थे.
फ़्लोरिडा हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव में चार साल तक सेवा देने के बाद 2020 में में उन्होंने यूएस हाउस में दक्षिणपंथी धड़े का प्रतिनिधित्व किया.
काले मतदाताओं को जोड़ने के लिए 15 जून को उन्होंने ट्रंप की मिशिगन रैली में हिस्सा लिया. ट्रंप ने उन्हें खुलेआम अपनी पसंद बताया था.
ट्रंप ने कहा था, "बायरन डोनाल्ड्स एक शानदार शख़्स हैं और उप राष्ट्रपति के लिए संभावित उम्मीदवारों की सूची में वो हैं. क्या कोई उन्हें उप राष्ट्रपति के रूप में देखना चाहता है?"
बायरन भी सार्वजनिक तौर पर ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में उप राष्ट्रपति पद की ज़िम्मेदारी की इच्छा जता चुके हैं.
उन्हें भी जांच पड़ताल वाले दस्तावेज भेजे गये हैं.
एलिस स्टेफ़ानिक

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एलिस स्टेफ़ानिकक न्यूयॉर्क से कांग्रेस की सदस्य हैं और अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में शीर्ष रिपब्लिकन महिला नेता हैं.
पहले उदार और ट्रंप को लेकर हिचक रखने वाली 39 साल की एलिस हाल के सालों में दक्षिणपंथ की ओर झुकीं और कैपिटल हिल दंगा मामले में उन्हें ट्रंप का सबसे वफ़ादार समर्थक माना जाता है.
हाल के महीनों में अमेरिकी कॉलेज परिसरों में यहूदीवाद विरोधी भावना के मुद्दे को उठाने को लेकर मीडिया में बनी रहीं.
उन्होंने कहा कि वो किसी भी क्षमता के साथ ट्रंप प्रशासन का हिस्सा बनना चाहेंगी.
सीबीएस के अनुसार, उन्हें भी संदेश प्राप्त हुआ है.
मार्को रूबियो

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2016 के रिपब्लिकन प्राइमरी में फ़्लोरिडा से सीनेटर मार्को रूबियो और ट्रंप प्रतिद्वंद्वी थे.
2012 में रूबियो को रिपब्लिकन नामित मिट रोमनी की पसंद के रूप में आगे किया था.
मज़दूर वर्ग की पृष्ठभूमि वाले क्यूबाई प्रवासी के वो बेटे हैं. उन्होंने शुरुआत में ही अपने पूर्व प्रतिद्वंद्वी का समर्थन कर दिया था.
52 साल के रूबियो अपेक्षाकृत युवा और टेलीविज़न के लिहाज से आकर्षक है और ट्रंप को लातिनी समाज के वोट का एक बड़ा हिस्सा दिला सकते हैं.
सीबीएस की ख़बर के अनुसार उन्हें कथित रूप से दस्तावेज मिला है.
क्रिस्टी नोएम

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साउथ डकोटा की गवर्नर क्रिस्टी नोएम एक समय ट्रंप समर्थकों के बीच उप राष्ट्रपति पद की पहली पसंद हो गई थीं.
52 साल की नोएम तब चर्चा में आईं जब कोविड के दौरान फॉक्स न्यूज़ पर मास्क की पाबंदियों को तोड़ते दिखाई दीं.
उनके संस्मरण प्रकाशित होने से पहले वो राइज़िंग स्टार थीं.
इसमें उन्होंने ज़िक्र किया था कि शिकार के लिए अच्छा साथी साबित न होने के लिए उन्होंने 14 महीने के कुत्ते को गोली मार दी थी. इसी तरह एक बकरी को गोली मार दी.
इन कहानियों की चौतरफा आलोचना हुई और वो उप राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी से दूर होती गईं.
निकी हेली, विवेक रामास्वामी और अन्य नाम

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विवेक रामास्वामीः भारतीय मूल के 37 साल के रामास्वामी का जन्म ओहायो में हुआ था. उन्होंने हार्वर्ड और येल से पढ़ाई की और बायो टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में करोड़ों रुपये कमाए. 2024 के प्राइमरी में उन्होंने ट्रंप समर्थकों के बीच बोल्ड नीति वाले एजेंडा और युवा जज्बे से छाप छोड़ी थी. उनका पूर्व का राजनीतिक अनुभव नहीं है.
निकी हेलीः भारतीय मूल की निकी हेली ने एक दशक पहले 39 साल की उम्र में अमेरिका की सबसे युवा गवर्नर बनने का रिकॉर्ड बनाया था. रिपब्लिकन प्राइमरी में हार के बाद भी ट्रंप का समर्थन करने से उनके इनकार ने ट्रंप को असहज किया था. लेकिन निकी हेली ने कहा है कि वो नवंबर में ट्रंप को वोट करेंगी. निकी हेली का जन्म भारत से जाकर अमेरिका के साउथ कैरोलाइना के बामबर्ग में बसे एक पंजाबी सिख परिवार में हुआ है. उनके परिवार का कपड़ों का व्यापार है. जन्म के वक्त निकी का नाम निम्रता निकी रंधावा था.
बेन कार्सनः आवास और शहरी विकास मामले में कार्सन ट्रंप के पूर्व सेक्रेटरी रह चुके हैं. वो पीडियाट्रिक न्यूरो सर्जन हैं और 2016 में राष्ट्रपति की उम्मीदवारी के दौड़ में थे. ट्रंप पर चले मुकदमे के दौरान वो दखाई नहीं दिया. एनबीसी का कहना है कि उनका भी नाम भी चल रहा है.
टॉम कॉटनः सीबीएस के मुताबिक, दो बार के अकांसास सीनेटर को भी दस्तावेज मिले हैं. ये पूर्व सैनिक हैं और विदेश नीति में युद्ध समर्थक माना जाता है. हार्वर्ड लॉ स्कूल से ग्रैजुएट कॉटन को पहले ट्रंप ने संभावित सुप्रीम कोर्ट नामिनी के रूप में आगे किया था.
रॉन डीसैंटिसः 2022 में फ़्लोरिडा के गवर्नर पद के लिए हुए मध्यावधि चुनाव में उन्होंने कहा था कि वो ट्रंप के आंदोलन को आगे ले जाने वाले कंज़रवेटिव नेता साबित हो सकते हैं.
केटी ब्रिटः अलाबामा से पहली बार चुनी गई सीनेटर हैं और इस साल जो बाइडन के स्टेट ऑफ़ यूनियन भाषण पर प्रतिक्रिया देने से चर्चा में आईं.
कैरी लेकः पूर्व टीवी एंकर ने 2020 के चुनावों में फ़्रॉड के ट्रंप के दावों का पूरी तरह समर्थन किया था. लेकिन 2022 में एरिज़ोना के गवर्नर पद की दौड़ में असफल रही थीं.
सारा हुकाबी सैंडर्सः व्हाइट हाउस में दो साल तक ट्रंप की प्रेस सचिव रह चुकी हैं.
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