उमर ख़ालिद को सात दिनों की अंतरिम ज़मानत मिली, कोर्ट ने ये शर्तें भी लगाईं

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दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व छात्र उमर ख़ालिद को अंतरिम ज़मानत दे दी है.
उमर ख़ालिद को यह ज़मानत सात दिनों के लिए मिली है. दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट ने ख़ालिद को उनके रिश्तेदार की शादी में शामिल होने के लिए 28 दिसंबर से तीन जनवरी तक के लिए ज़मानत दी है.
इसके लिए अदालत ने कुछ शर्तें भी लगाई हैं.

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क्या नहीं कर सकेंगे उमर ख़ालिद?

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अदालत ने कहा है कि ज़मानत के दौरान उमर ख़ालिद केवल अपने रिश्तेदारों और दोस्तों से मुलाक़ात कर सकेंगे. इस दौरान वो अपने घर या फिर जहां कार्यक्रम हो रहा है वहीं रहेंगे.
इसके अलावा अदालत ने उन्हें सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं करने और गवाहों से बात नहीं करने को कहा है.
अदालत ने ज़मानत के लिए 20 हज़ार रुपये का बेल बॉन्ड और दो ज़मानतदारों से हस्ताक्षर करवाए हैं.
उमर ख़ालिद पर आतंकवाद विरोधी क़ानून 'गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम' यानी यूएपीए के तहत आरोप लगाए गए हैं.
छात्र नेता और सामाजिक कार्यकर्ता उमर ख़ालिद सितंबर 2020 से जेल में बंद हैं. उन पर आरोप है कि उन्होंने फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्व दिल्ली में हुई हिंसा को भड़काया था. उनके ख़िलाफ़ दो एफ़आईआर दर्ज हैं.
एक मामले में उमर को अप्रैल 2021 में ज़मानत मिल गई थी. दूसरे मामले में उनके ख़िलाफ़ यूएपीए के तहत आरोप लगाए गए हैं.
उमर ख़ालिद पर आरोप क्या हैं?

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नागरिकता कानून में संशोधन (सीएए) के ख़िलाफ़ दिसंबर 2019 में व्यापक पैमाने पर आंदोलन हुआ था. इस संशोधन में पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और बांग्लादेश जैसे भारत के पड़ोसी मुल्क़ों के धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को नागरिकता दिए जाने की बात थी. उमर ख़ालिद इन विरोध-प्रदर्शनों में शामिल रहे. प्रदर्शन क़रीब तीन महीने तक चले थे.
फ़रवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे भड़क उठे थे. इसमें 53 लोग मारे गए. इनमें से अधिकांश मुसलमान थे. अभियोजन पक्ष का आरोप है कि उमर ख़ालिद ने प्रदर्शन के दौरान अन्य लोगों के साथ मिलकर हिंसा की साज़िश रची. इसी वजह से दंगे हुए.
उमर ख़ालिद के ख़िलाफ़ दो एफआईआर दर्ज की गईं. एफआईआर नंबर 101/2020 को 24 फ़रवरी 2020 को उत्तर पूर्वी दिल्ली में दर्ज कराया गया.
इसमें उमर पर दंगा करने, पत्थरबाज़ी और बमबाज़ी करने, दो समुदायों के बीच नफ़रत फैलाने, पुलिस पर हमला करने, सरकारी संपत्ति को नुक़सान पहुंचाने आदि के आरोप हैं.
वहीं एफआईआर संख्या 59/2020 में उमर ख़ालिद और अन्य लोग अभियुक्त बनाए गए हैं. उमर ख़ालिद पर चरमपंथ, साज़िश रचने, यूएपीए के तहत गैर-कानूनी गतिविधियों और आईपीसी की धाराओं के तहत दंगा फैलाने के आरोप लगाए गए हैं.
इस मामले में अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया है कि एक गहरी साज़िश की वजह से दिल्ली में दंगे हुए. अभियुक्तों पर सीएए के ख़िलाफ़ ग़लत जानकारियां फैलाने और सड़क पर चक्का जाम करने का आरोप भी लगाया गया है.
उसका कहना है कि उमर ख़ालिद की पहचान एक गवाह ने की है कि वो इस साज़िश के अभियुक्तों से मिल रहे थे.
वहीं ख़ालिद के वकील का कहना है कि पत्थरबाज़ी के समय वो वहां मौजूद नहीं थे. उनका आरोप है कि उमर ख़ालिद की गिरफ्तारी विरोध की आवाज़ को दबाने की राजनीतिक साज़िश है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.















