भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया: वर्ल्ड कप 2023 फ़ाइनल के वो 5 सबक, जो चैंपियंस ट्रॉफ़ी सेमीफ़ाइनल में आएँगे काम

ट्रेविस हेड

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इमेज कैप्शन, अहमदाबाद में हुए वनडे वर्ल्ड कप के फ़ाइनल में ट्रेविस हेड ने 137 रनों की मैच जिताऊ पारी खेली थी. उसी मैच के दौरान रोहित शर्मा का कैच पकड़ने के बाद जश्न मनाते हुए हेड.
    • Author, भरत शर्मा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

"जब केएल राहुल और विराट कोहली बल्लेबाज़ी कर रहे थे, तो हम 270-280 रन तक पहुँचने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन हमने लगातार विकेट गँवाई. ऑस्ट्रेलिया ने तीन विकेट गँवाने के बाद बड़ी साझेदारी की. बोर्ड पर 240 रन थे, हमें जल्दी विकेट चाहिए थे, लेकिन ट्रैविस हेड और मार्नस लाबुशेन ने हमें मैच से बाहर कर दिया."

-रोहित शर्मा, वनडे वर्ल्ड कप 2023 के बाद

"अगले मैच में क्या टीम उतारनी है, इसे लेकर हमें विचार करना होगा, लेकिन ज़्यादा विकल्प हैं तो ये सिरदर्द अच्छा है. ये एक अच्छा मैच होगा. आईसीसी टूर्नामेंट में ऑस्ट्रेलिया का बढ़िया रिकॉर्ड रहा है. हमें बस उस दिन सब कुछ सही करना होगा. इस मैच का इंतज़ार है. उम्मीद है कि इस बार नतीजा हमारे पक्ष में आएगा."

- रोहित शर्मा, चैंपियंस ट्रॉफ़ी सेमीफाइनल 2025 से पहले

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वक़्त की सबसे अच्छी बात ये है कि वो बदलता ज़रूर है.

15 महीने का समय गुज़रा है और रोहित शर्मा के सामने दूसरा मौक़ा खड़ा है. भले ये वर्ल्ड कप का फ़ाइनल ना हो, लेकिन ये चैंपियंस ट्रॉफ़ी का सेमीफ़ाइनल ज़रूर है.

एक ऐसा टूर्नामेंट, जो भारत ने इससे पहले 15 साल पहले जीता था. और आख़िरी बार जब भारतीय टीम चैंपियंस ट्रॉफ़ी के फ़ाइनल में पहुँची थी, तो उसे पाकिस्तान ने शिकस्त दी थी.

तीन मैच, तीन जीत. भारतीय टीम एक बार फिर आईसीसी टूर्नामेंट में बढ़िया फ़ॉर्म दिखा रही है. और अब ट्रॉफ़ी तक पहुँचने के लिए उसे दो पहाड़ पार करने हैं. पहला ऑस्ट्रेलिया है.

और ऑस्ट्रेलिया को हराने के लिए भारतीय टीम को इसी टीम से मिली क़रीब सवा साल पहले मिली हार से सबक सीखने चाहिए. इनमें पाँच सीख ये हो सकती हैं:

1. ट्रेविस हेड का तोड़ क्या होगा?

रोहित शर्मा के मिसटाइम शॉट पर पीछे दौड़कर शानदार कैच पकड़ना होगा या फिर मोहम्मद शमी और जसप्रीत बुमराह की तेज़-तर्रार गेंदबाज़ी के सामने डटकर खड़ा हो जाना, हाल के दिनों में भारतीय टीम को जितना ट्रेविस हेड ने तंग किया है, शायद ही किसी दूसरे खिलाड़ी ने किया होगा.

उस फ़ाइनल में हेड ने 120 गेंदों पर 137 रनों की मैच जिताऊ पारी खेली थी.

अगर चैंपियंस ट्रॉफ़ी के सेमीफ़ाइनल में भारत को ऑस्ट्रेलिया पर भारी पड़ना है, तो ट्रेविस हेड का कोई ना कोई जवाब बहुत जल्दी खोजना होगा. अगर वो टिक गए, तो तमाम अच्छे गेंदबाज़ मिलकर भी उनके तेज़ी से रन बनाने का कोई जवाब नहीं तलाश पाते.

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इमेज कैप्शन, 2017 से 2023 के बीच में हेड ने भारत के ख़िलाफ़ नौ पारियाँ खेली हैं

पहले बल्लेबाज़ी की सूरत में वो कंगारू टीम को बड़ा टोटल बनाने में मदद दे सकते हैं और शाम में बल्लेबाज़ी करने पर आक्रामक बल्लेबाज़ी से भारतीय गेंदबाज़ों की धार कुंद करने की कोशिश कर सकते हैं.

भारतीय टीम के ख़िलाफ़ उनका रिकॉर्ड भी ठोस नज़र आता है. 2017 से 2023 के बीच में हेड ने भारत के ख़िलाफ़ नौ पारियाँ खेली हैं और इनमें उन्होंने 43.12 की औसत से 345 रन बनाए हैं.

इनमें एक शतक और एक फ़िफ़्टी शामिल है. लेकिन ये पारियाँ किस रफ़्तार से खेली गई हैं, ये देखना भी ज़रूरी है.

इन नौ पारियों में वो 40 चौके और सात छक्के लगा चुके हैं. स्ट्राइक रेट 101.76 का रहा है.

2. दुबई में पहले बैटिंग करनी चाहिए या बॉलिंग?

वर्ल्ड कप 2023 के ख़िताबी मुक़ाबले में टॉस ऑस्ट्रेलियाई कप्तान पैट कमिंस ने जीता था और उन्होंने पहले गेंदबाज़ी का फ़ैसला किया.

कमिंस ने उस समय कहा था, "ये ड्राई विकेट लग रही है और हम गेंदबाज़ी करेंगे. ड्यू एक फ़ैक्टर है और रात में इसका असर दिखाई देगा."

दूसरी ओर टॉस हारने के बावजूद रोहित शर्मा ने कहा था, "मैं टॉस जीतता तो भी बल्लेबाज़ी चुनता. ये बड़ा मैच है और हम बड़ा स्कोर खड़ा करना चाहते हैं. क्रिकेट की बात करें तो इससे बड़ा मौक़ा क्या होगा."

ये बात अंदाज़ा देती है कि रोहित शर्मा और टीम मैनेजमेंट से उस दिन पिच को पढ़ने में ग़लती हुई थी. दूसरी ओर वर्ल्ड कप फ़ाइनल के प्रेशर को साइड में रखते हुए कमिंस ने पिच को सही पढ़ा और टॉस जीतकर उसी हिसाब से फ़ैसला किया.

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इमेज कैप्शन, रोहित शर्मा ने वर्ल्ड कप 2023 के सेमीफ़ाइनल में टॉस जीता था

भारतीय टीम वनडे में लगातार 13 टॉस हार चुकी है. आख़िरी बार रोहित शर्मा ने वर्ल्ड कप 2023 के सेमीफ़ाइनल में टॉस जीता था. अगर ये क्रम टूटता है और रोहित शर्मा चैंपियंस ट्रॉफ़ी सेमीफाइनल में टॉस जीतते हैं तो उन्हें इस बार मौक़े के हिसाब से नहीं, बल्कि पिच के हिसाब से फ़ैसला करना होगा.

हालांकि, दुबई की पिच ने आख़िरी लीग मैच में दिखाया कि यहाँ ड्यू फ़ैक्टर का इतना फ़र्क नहीं पड़ता और फ़्लड लाइट के नीचे भी भारत के फिरकी गेंदबाज़ों ने न्यूज़ीलैंड के बल्लेबाज़ों के ऐसे बांधा कि वो हिल नहीं सके.

ऐसे में भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया के मैच में इस पिच पर पहले बल्लेबाज़ी करना चाहिए या गेंदबाज़ी, ये फ़ैसला काफ़ी हद तक तय कर सकता है कि इस मैच का विजेता कौन होगा.

3. रोहित शर्मा ने जिस सिरदर्द की बात कही, उसका इलाज क्या है?

वर्ल्ड कप 2023 के फ़ाइनल में तेज़ गेंदबाज़ों के शुरुआती ओवर की बात छोड़ दें, तो भारतीय गेंदबाज़ बाद में किसी भी ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ को दबाव में लाने में नाकाम साबित हुए थे.

उस मैच में रवींद्र जडेजा और कुलदीप यादव एक भी विकेट झटकने में नाकाम रहे थे.

हालाँकि, अहमदाबाद की तुलना में दुबई की पिच ने रविवार को धीमे गेंदबाज़ों का ख़ूब साथ दिया. क्या मंगलवार को भी ऐसा होगा?

न्यूज़ीलैंड को हराने के बाद जब रोहित शर्मा से अगले मैच के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मैदान में कौन से 11 खिलाड़ी होंगे, इस बारे में विचार करना होगा, लेकिन ये अच्छा सिरदर्द है.

ज़ाहिर है वो विकल्पों की बहुतायत पर बात कर रहे थे.

भारतीय टीम में फिलहाल मोहम्मद शमी, हार्दिक पंड्या जैसे तेज़ और मध्यम तेज़ गेंदबाज़ हैं. न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ हर्षित राणा और अर्शदीप सिंह जैसे अच्छे गेंदबाज़ बाहर बैठे, क्योंकि टीम मैनेजमेंट ने अक्षर पटेल, कुलदीप यादव, रवींद्र जडेजा और मिस्टरी स्पिनर कहे जा रहे वरुण चक्रवर्ती को मौक़ा दिया.

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इमेज कैप्शन, टीम इंडिया एक बार फिर आईसीसी टूर्नामेंट में बढ़िया फ़ॉर्म दिखा रही है

अब सवाल खड़ा होता है कि क्या भारतीय टीम सेमीफ़ाइनल में दो पेसर और चार स्पिनर के साथ उतरेगी या फिर तीन पेसर-तीन स्पिनर का कॉम्बिनेशन ठीक रहेगा.

न्यूज़ीलैंड के बल्लेबाज़ भारत के फिरकी गेंदबाज़ों के सामने बेबस नज़र आ रहे थे. लेकिन रिकॉर्ड बताते हैं कि न्यूज़ीलैंड की तुलना में ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज़ दबाव में ज़्यादा बेहतर खेलते हैं.

रविवार को जब फ़िरकी गेंदबाज़ों ने शिकंजा कसना शुरू किया, तो न्यूज़ीलैंड ने डॉट बॉल खेलते हुए विकेट बचाने की रणनीति अपनाई. और ये दबाव इतना ज़्यादा बढ़ गया कि कीवी बल्लेबाज़ों के पास बाद में वापसी का कोई मौक़ा नहीं बचा.

लेकिन ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ विकेट गिरने के बावजूद आक्रामकता दिखाने के लिए जाने जाते हैं.

4. हेड के अलावा बाकी कंगारू बल्लेबाज़ों का क्या?

वर्ल्ड कप फ़ाइनल 2023 में हेड की वो पारी भला कौन सा भारतीय भूला होगा. न्यूज़ीलैंड को हराने के बाद जब ये तय हुआ है कि भारतीय टीम का मुकाबला सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया से होगा, तो कई मीम चलने लगे जिसमें ट्रेविस हेड को भारतीय टीम का सिरदर्द बनते हुए दिखाया गया था.

ये बात सही है कि भारत के ख़िलाफ़ ऑस्ट्रेलिया के ट्रेविस हेड शानदार खेलते हैं. लेकिन कोई भी टीम ये भूल नहीं कर सकती कि सारा ध्यान उन्हीं पर ध्यान लगा दे और बाकियों को भूल जाए.

क्योंकि इसी टीम में स्टीव स्मिथ, जॉश इंग्लिस, मार्नस लाबुशेन और ग्लेन मैक्सवेल सरीखे़ बल्लेबाज़ भी हैं.

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इमेज कैप्शन, स्टीव स्मिथ और ग्लेन मैक्सवेल जैसे बल्लेबाज़ भी भारत के लिए हो सकते हैं ख़तरा

मैक्सवेल जब रंग में होते हैं, तो अकेले ही मैच की शक्ल बदल देते हैं. और तेज़ी से इस टीम के मज़बूत स्तंभ साबित हो रहे इंग्लिस ने इसी चैंपियंस ट्रॉफ़ी में हाल में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ मैच जिताऊ पारी खेली है.

ऑस्ट्रेलिया की कप्तानी संभाल रहे स्टीव स्मिथ को नज़रअंदाज़ करना भी बड़ी भूल साबित हो सकती है. भारत के ख़िलाफ़ बल्लेबाज़ी वैसे भी स्मिथ को ख़ासी पसंद आती है. भारत के ख़िलाफ़ 29 मैचों की 25 पारियों में स्मिथ ने 1310 रन बनाए हैं, जिनमें 6 शतक और 5 फ़िफ़्टी शामिल हैं. इनमें 132 चौक्के और 18 छ्क्के शामिल हैं.

भारत के ख़िलाफ़ स्मिथ का औसत भी शानदार है. ये 52.40 रहा है और स्ट्राइक रेट 100 से ज़्यादा का है. दूसरी ओर ग्लेन मैक्सवेल हैं, जिन्होंने अब तक भारत के ख़िलाफ़ रन तो कम बनाए हैं, लेकिन जब-जब बनाए हैं तो तेज़ रफ़्तार से बनाए हैं.

टीम इंडिया के ख़िलाफ़ उनका स्ट्राइक रेट 134 से ज़्यादा का रहा है.

5. बीच के ओवरों में बल्लेबाज़ी कौन संभालेगा?

2023 के नवंबर में अहमदाबाद के उस मैच में भारतीय टीम ने जिस तरह से शुरुआत की थी, लगा था कि भारतीय टीम बड़ा स्कोर खड़ा करेगी. रोहित शर्मा और शुभमन गिल ने तेज़ शुरुआत की थी, लेकिन जब ये दोनो, ख़ास तौर से रोहित आउट हुए तो बाक़ी के भारतीय बल्लेबाज़ कंगारू बॉलर पर दबाव बनाने में नाकाम रहे.

इस मैच में भारत की तरफ़ से केएल राहुल और विराट कोहली ने अच्छी साझेदारी की थी, लेकिन जब लगा था कि ये दोनों मिलकर ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ भारत को 270-280 तक ले जाएँगे, तो एक-एक करके दोनों आउट हो गए. और भारत महज़ 240 रनों तक पहुँच सका. अंत में ये रन ऑस्ट्रेलिया के सामने बहुत कम साबित हुए.

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इमेज कैप्शन, बीच के ओवरों में केएल राहुल, हार्दिक पांड्या और श्रेयस अय्यर से रहेगी उम्मीद

अगर चैंपियंस ट्रॉफ़ी में भारत के शुरुआती बल्लेबाज़ नाकाम साबित होते हैं या छोटी कामयाबी के बाद पवेलियन लौट जाते हैं, तो मध्य क्रम की बल्लेबाज़ी को ये ज़िम्मेदारी संभालनी होगी. शुरुआत में टिककर खेलना होगा, फिर बाद में आक्रामक रुख़ अपनाते हुए टीम को ऐसे टोटल तक ले जाना होगा, जहाँ गेंदबाज़ों को लड़ने का मौक़ा मिल सके.

अगर टीम बाद में बल्लेबाज़ी करती है, तो चेज़ करते समय अलग तरह का दबाव होगा. उस समय विराट कोहली पर काफ़ी दारोमदार होगा, जो चेज़ करते समय अपनी पारी को बढ़िया अंदाज़ में सजाने के लिए जाने जाते हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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