गौतम गंभीर पर उठ रहे हैं सवाल, किन चुनौतियां से अब है सामना?

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- Author, मनोज चतुर्वेदी, वरिष्ठ खेल पत्रकार
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
भारतीय क्रिकेट टीम के लगातार दूसरी टेस्ट सिरीज़ हारने से टीम में बदलाव की ज़रूरत महसूस की जाने लगी है. साथ ही टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर पर भी सवाल उठने लगे हैं.
इसकी वजह राहुल द्रविड़ के कोच रहते जो टीम अजेय मानी जा रही थी, वह एकाएक बिखरी नजर आने लगी है.
गौतम गंभीर ने कोच बनने के बाद बांग्लादेश के ख़िलाफ़ पहली टेस्ट सिरीज़ जीती. पर इसके बाद न्यूजीलैंड के ख़िलाफ़ घर में पहली बार टेस्ट सिरीज़ में क्लीन स्वीप का सामना करना पड़ा.
इसके बाद ऑस्ट्रेलिया से पिछले एक दशक में पहली बार सिरीज़ हारने से टीम इंडिया को झटके पर झटके लग गए हैं.

गंभीर के फ़ैसलों पर उठ रहे हैं सवाल

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इस दौरे की भारत ने जीत से शुरुआत ज़रूर की पर दूसरे ही टेस्ट से भारतीय बल्लेबाज़ी की कलई खुलने लगी.
तीसरे टेस्ट को भारत कमजोर बल्लेबाज़ी की वजह से हारा. इस स्थिति में चौथे टेस्ट में बल्लेबाज़ी को मजबूत करने की ज़रूरत थी.
पर टीम में वाशिंगटन सुंदर की जगह बनाने के लिए शुभमन गिल को ही बाहर बैठाकर बल्लेबाज़ी और कमजोर कर दी गई.
सिडनी टेस्ट में दो स्पिनरों को खिलाना ग़लत फ़ैसला साबित हुआ. दूसरे स्पिनर वाशिंगटन सुंदर को इसलिए खिलाया गया ताकि गेंदबाज़ी के साथ बल्लेबाज़ी में भी मजबूती आएगी.
लेकिन उनसे सिर्फ पूरे टेस्ट में एक ही ओवर गेंदबाज़ी करवाई गई. बल्लेबाज़ी में वह कुछ ख़ास नहीं कर सके. बेहतर होता कि सिडनी में आकाशदीप या हर्षित राणा के रूप में एक और पेस गेंदबाज खिलाया जाता तो कहीं बेहतर परिणाम आ सकते थे.
गावसकर ने की कोच, कोचिंग स्टाफ़ की आलोचना

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सभी जानते हैं कि सपोर्ट स्टाफ़ कोच की पसंद से लिया जाता है. मौजूदा सपोर्ट स्टाफ़ की नियुक्ति भी इससे अलग नहीं है.
गावसकर ने स्टार स्पोर्ट्स चैनल से कहा कि सपोर्ट स्टाफ़ से पूछा जाना चाहिए कि उन्होंने क्या किया है. बल्लेबाज़ी में सुधार क्यों नहीं दिख रहा है.
उन्होंने कहा, "अच्छी गेंदों के सामने हमारे बल्लेबाज़ टिक नहीं पा रहे हैं, ठीक है. महान बल्लेबाज़ों को भी अच्छी गेंदों पर दिक़्क़त होती है. पर वह साधारण गेंदों का भी सामना नहीं कर पा रहे हैं, तो उनसे पूछना चाहिए कि उन्होंने किया क्या है."
गावसकर ने कहा कि अगली सिरीज़ जून-जुलाई में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ होनी है. उस समय इस सपोर्टिग स्टाफ़ को बरकरार रखना है या नहीं, यह तय करने की ज़रूरत है.
उन्होंने साथ ही ये भी कहा कि विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की अगली साइकिल इंग्लैंड के साथ सिरीज़ से होगी और इस साइकिल का फाइनल जब जून 2027 में खेला जाएगा, उस समय टीम के दिग्गज खिलाड़ी फ़िट रह पाएंगे, इसे ध्यान में रखकर फ़ैसला करना चाहिए. उन्होंने कहा कि इसे ध्यान में रखकर युवाओं पर फोकस करने की ज़रूरत है.
गावसकर दौरों पर अभ्यास मैचों के आयोजन के पक्षधर हैं. पिछले कुछ समय से अभ्यास मैचों पर ज़ोर ही नहीं दिया जा रहा है. गावसकर कहते हैं कि हो सकता है कि दिग्गज खिलाड़ी इन मैचों में खेलना पसंद ना करें. पर टीम के ऐसे खिलाड़ी जो एकादश में नहीं हैं, उन्हें तैयार करने के लिए यह मैच बहुत ज़रूरी हैं. इन मैचों की वजह से एकादश से बाहर के खिलाड़ियों को ज़रूरत के समय के लिए तैयार किया जा सकता है.
गंभीर की अगली परीक्षा भी मुश्किल

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गौतम गंभीर अपनी कोचिंग का एक साल इंग्लैंड के ख़िलाफ़ मुश्किल सिरीज़ के साथ पूरा करेंगे.
अब तक हम यदि उनके सभी प्रारूपों में प्रदर्शन को देखें तो सिर्फ टी-20 में उनके समय में खेले सभी छह मैच जीते हैं.
इसके अलावा 10 टेस्ट में से तीन जीते हैं, छह हारे हैं और एक ड्रा रहा है. वहीं तीन वनडे में से दो हारे हैं और एक टाई हुआ है.
इंग्लैंड में सिरीज़ खेलना कभी आसान नहीं रहा है. गंभीर यदि इंग्लैंड में अच्छा प्रदर्शन नहीं करा पाए तो फिर उनकी आलोचना में तेजी आना तय है.
दिग्गजों पर खुलकर बोलने से कतराए

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इस सिरीज़ में भारत के दो दिग्गज खिलाड़ियों रोहित शर्मा और विराट कोहली के ख़राब प्रदर्शन को हारने की प्रमुख वजह माना जा रहा है.
पर इस संबंध में मैच के बाद संवाददाता सम्मेलन में बदलाव के दौर के बारे में सवाल किया गया तो गंभीर का कहना था, "अभी इस बारे में चर्चा करने का समय नहीं है. पांच महीने का समय बहुत अच्छा होता है. पांच महीने बाद हम कहां होंगे. खेल में बहुत कुछ बदलता है. फॉर्म बदलता है, लोग बदलते हैं, तेवर बदलते हैं, सब कुछ बदल जाता है."
उन्होंने कहा, "इंग्लैंड के ख़िलाफ़ सिरीज़ के समय देखेंगे कि क्या होता है. लेकिन जो भी होगा, भारतीय क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ हित में होगा."
गंभीर के इन संकेतों से लगता है कि इंग्लैंड दौरे के समय टीम को लेकर कुछ सख़्त फ़ैसले लिए जा सकते हैं. पर यह जरूर लगा कि वह अभी अपने पत्ते खोलते नजर नहीं आ रहे हैं.
गंभीर का घरेलू क्रिकेट में खेलने पर ज़ोर

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भारत के दिग्गज क्रिकेट हमेशा ही घरेलू क्रिकेट खेलने से परहेज करते रहे हैं.
करीब एक दशक पहले तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खरे नहीं उतरने वाले खिलाड़ियों को घरेलू क्रिकेट में खेलने को कह दिया जाता था.
लेकिन दिग्गजों की मनमानी से यह नियम धरा रह गया.
गंभीर ने कहा कि भारत को सीमित ओवरों के मैचों की सिरीज़ खेलनी है और फिर चैंपियंस ट्रॉफी खेलनी है. इनमें भाग नहीं लेने वाले खिलाड़ियों को 23 जनवरी से फिर शुरू हो रहे रणजी ट्रॉफी मैचों में भाग लेना चाहिए. इन मैचों में खेलकर ही टेस्ट मैचों में प्रदर्शन को सुधारा जा सकता है.
असल में घरेलू क्रिकेट में खेलकर खिलाड़ी अपनी तकनीकी खामियों को सुधारा करते थे. लेकिन अब खिलाड़ियों के खेल में आई खामी लंबे समय तक दिखती है, इसकी वजह इन खामियों को सुधारने के लिए काम ही नहीं किया जाता.
मिसाल की तौर पर विराट कोहली पिछले कुछ सालों से ऑफ़ स्टंप से बाहर की गेंदों पर ड्राइव करने के चक्कर में कैच हो रहे हैं. इस सिरीज़ में भी वह कई बार इसी तरह से आउट हुए हैं.
पर वह कई सालों से घरेलू क्रिकेट नहीं खेले हैं. घरेलू क्रिकेट में खेलने से खिलाड़ियों को अलग-अलग तरह के विकेट पर खेलना का अभ्यस्त होना भी सिखाता है.
(ये लेखक के निजी विचार हैं)
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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