क्रिप्टो कंपनी एफ़टीएक्स के डूबने पर घिरे भारतीय मूल के निषाद सिंह कौन हैं?

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- Author, ब्रजेश मिश्र
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी क्रिप्टो एक्सचेंज कंपनी एफ़टीएक्स (FTX) महज़ एक हफ्ते में अर्श से फर्श पर पहुंच गई. 'क्रिप्टो किंग' के नाम से मशहूर एफ़टीएक्स के संस्थापक सैम बैंकमैन-फ्रायड ने कंपनी के चीफ़ एक्जीक्यूटिव पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. एफ़टीएक्स की प्रतिद्वंद्वी कंपनी बाइनेंस ने इसे खरीदने की इच्छा जताई है.
अरबों के मालिक सैम अब जांच एजेंसियों की नज़र में हैं. एफ़टीएक्स ने अदालत में अर्जी देकर खुद को दिवालिया घोषित करने की अपील की. लेकिन एफ़टीएक्स के डूबने में अकेले सैम बैंकमैन ही नहीं कई और लोग भी जांच एजेंसियों के निशाने पर हैं.
इनमें से एक नाम है निषाद सिंह.
भारतीय मूल के निषाद सिंह एफ़टीएक्स और इसकी दूसरी कंपनी अलमेडा का हिस्सा रहे हैं. एफ़टीएक्स की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, निषाद सिंह कंपनी के डायरेक्टर ऑफ़ इंजीनियरिंग पद पर हैं.
कौन हैं निषाद सिंह?
एफ़टीएक्स की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, निषाद सिंह ने बर्कले में यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया से पढ़ाई की. उन्होंने अच्छे अंकों के साथ यहां से डिग्री हासिल की.
एफ़टीएक्स में आने से पहले वो फ़ेसबुक में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर काम करते थे. यहां वो मशीन लर्निंग पर काम कर रहे थे. निषाद ने फ़ेसबुक में महज पांच महीने काम किया.
भारतीय मूल के निषाद सिंह ने दिसंबर 2017 में एफ़टीएक्स की दूसरी कंपनी अलमेडा रिसर्च ज्वाइन की.
यहां उन्होंने करीब डेढ़ साल तक बतौर इंजीनियर काम किया और बाद में 2019 में वो एफ़टीएक्स से बतौर इंजीनियरिंग डायरेक्टर जुड़े.
कंपनी पर लग रहे आरोप

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निषाद सिंह ने 2020 में एफ़टीएक्स पॉडकास्ट में अपने बारे में कुछ चीज़ें साझा की थीं. इसमें उन्होंने बताया था फ़ेसबुक में वो अपनी 'ड्रीम जॉब' कर रहे थे. लेकिन एक अपार्टमेंट में उनकी मुलाक़ात सैम बैमकमैन-फ्रायड से हुई और उन्होंने अलमाडा रिसर्च ज्वाइन करने का फ़ैसला किया.
उन्होंने आगे कहा, ''तब यह अपार्टमेंट ही था. ये बहुत शुरुआती दिन थे. मुझे लगता है मैं पहली बार अलमेडा तब आया जब शायद इस कंपनी को बने हुए एक महीना होने को था. अपार्टमेंट में कुछ पांच लोग रहे होंगे लेकिन बहुत शोरशराबे से भरा था. तब तक मुझे ट्रेडिंग के बारे में कुछ नहीं पता था.''
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक ख़बर के मुताबिक, एफ़टीएक्स के संस्थापक और पूर्व सीईओ सैम बैंकमैन-फ्रायड ने बेहद गोपनीय तरीके से एफ़टीएक्स के ग्राहकों के 10 अरब डॉलर अलमेडा में ट्रांसफ़र कर दिए.
द वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अलमेडा रिसर्च की सीईओ और एफ़टीएक्स के सीनियर पदाधिकारियों को इस बात की जानकारी थी अलमेडा की मदद के लिए एफ़टीएक्स के ग्राहकों का पैसा इधर ट्रांसफ़र किया गया.
अलमेडा रिसर्च इस जून से आर्थिक तंगी की हालत में थी. कंपनी ने निवेश के लिए काफ़ी लोन लिया हुआ था.
रिपोर्ट में कुछ कंपनी कर्मचारियों के हवाले से दावा किया गया है कि क्रिप्टो करेंसी हेज फंड थ्री एरो कैपिटल के जून में डूबने के बाद अलमेडा को कर्ज देने वालों के सामने मुश्किल होने लगी.
कर्ज देने वालों ने अपने पैसे मांगने शुरू कर दिए जिससे वायेजर डिजिटल लिमिटेड जैसे क्रिप्टो ब्रोकरों को नुकसान हुआ.
रिपोर्ट के मुताबिक, अलमेडा की सीआईओ कैरोलीन एलिसन ने बुधवार को कर्मचारियों के साथ बैठक में इस बात का ज़िक्र किया कि एफ़टीएक्स के ग्राहकों का पैसा अलमेडा में ट्रांसफर करने की जानकारी सैम बैंकमैन के अलावा एफटीक्स के दूसरे पदाधिकारियों निषाद सिंह और गैरी वांग को भी थी.
गैरी वांग पहले गूगल में काम करते थे फिर बाद में उन्होंने सैम के साथ मिलकर एफ़टीएक्स को आगे बढ़ाया. वो एफ़टीएक्स में चीफ़ टेक्नोलॉजी ऑफिसर हैं.
एफ़टीएक्स के संस्थापक सैम बैंकमैन-फ़ायड सोशल मीडिया पर काफ़ी लोकप्रिय रहे हैं.
कैसे डूब गई इतनी बड़ी कंपनी?

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चाहे वो सुबह-सुबह ऑफिस पहुंचना हो या फिर ऑफिस में ही बीन बैग पर सोना, सोशल मीडिया पर सैम बहुत कुछ साझा करते थे.
बीबीसी रेडियो को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने यह दावा भी किया था कि अब तक वो ''करोड़ों डॉलर'' दान कर चुके हैं.
बीते छह महीनों में उन्हें 'क्रिप्टो किंग' के बाद 'क्रिप्टो का वाइट नाइट' जैसी उपाधि भी मिलने लगी.
साल 2022 में क्रिप्टो मार्केट बुरी तरह प्रभावित रहा और अधिकतर कंपनियां घाटे में चली गईं. लेकिन जब बहुत सी कंपनियां घाटे में जा रही थीं, तब सैम करोड़ों के बेलआउट कैश का इस्तेमाल धड़ल्ले से कर रहे थे.
सीएनबीसी ने उनसे बातचीत में सवाल किया था कि वो ऐसा क्यों कर रहे हैं, इस पर सैम ने कहा ''अगर यह बड़ा नुकसान है और असल दर्द है तो यह लंबे वक़्त के लिहाज से ठीक नहीं है और ग्राहकों के लिए भी सही नहीं है.''
इसी इंटरव्यू में उन्होंने दावा किया था वो नुकसान झेल रही क्रिप्टो कंपनियों को उबारने के लिए दो अरब डॉलर खर्च करेंगे.
लेकिन बीते सप्ताह वो खुद क्रिप्टो मार्केट में मदद मांगते नज़र आ रहे थे ताकि अपनी कंपनी और ग्राहकों को बचा सकें.
एफ़टीएक्स की आर्थिक स्थिति तब बिगड़नी शुरू हुई जब क्रिप्टो न्यूज़ वेबसाइट क्वाइनडेस्क ने सैम की ट्रेडिंग कंपनी अलमेडा रिसर्च और एफ़टीएक्स के आपस में जुड़े होने का ज़िक्र किया और यह बताया कि दोनों स्वतंत्र कंपनियां नहीं हैं बल्कि एक फ़ाउंडेशन का हिस्सा हैं.
इसके बाद एक और आरोप लगा कि अलमेडा ने एफ़टीएक्स के ग्राहकों का पैसा बतौर लोन इस्तेमाल किया है.
कंपनी के बुरे दौर की शुरुआत हो चुकी थी और इन आरोपों के कुछ दिन बाद ही एफ़टीएक्स की मुख्य प्रतिद्वंद्वी बाइनेंस ने एफ़टीएक्स से जुड़े अपने सारे क्रिप्टो टोकन बेच दिए.

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बाइनेंस के सीईओ चांगपेंग शाओ ने अपने 75 लाख फॉलोवर्स को बताया कि हालिया आरोपों को देखते हुए कंपनी अपने शेयर बेच रही है.
इसके बाद एफ़टीएक्स पर भूचाल आ गया. एक-एक कर ग्राहकों ने एफ़टीएक्स से अपनी पैसा निकालना शुरू कर दिया.
आखिरकार एफ़टीएक्स से पैसे निकालने पर रोक लग गई और सैम बैंकमैन ने बेलआउट फंड जुटाने की कोशिश की और एक समय ऐसा ऐसा आया जब बाइनेंस ने कंपनी खरीदने में भी दिलचस्पी दिखाई लेकिन फिर मुकर गई.
बाइनेंस ने कहा कि ग्राहकों के पैसे का गलत इस्तेमाल और कथित अमेरिकी एजेंसियों की जांच को देखते हुए कंपनी ने अपना फैसला बदला है.
इसके एक दिन बाद एफ़टीएक्स को दिवालिया घोषित करने प्रक्रिया आरंभ हो गई.
सैम बैंकमैन ने एक साथ कई ट्वीट करके अपने ग्राहकों से माफ़ी मांगी. उन्होंने कहा, ''मैं आप सब से फिर माफी मांगता हूं कि हम इस स्थिति में पहुंच गए.''
क्रिप्टो मार्केट की हालत फिलहाल बेहद बिगड़ी है. बिटकॉइन दो साल के सबसे निचले स्तर पर है.
एफ़टीएक्स का दिवालिया होना कई कंपनियों और उनके ग्राहकों के लिए चिंता का विषय बन गया है.
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