तालिबान ने महिलाओं के बोलने, पहनने और जीने के लिए तय किए पैमाने

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इमेज कैप्शन, तालिबान के शासन में महिलाओं की हक़मारी की सारी सीमाएं टूट गई हैं
    • Author, अली हुसैनी
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़ फ़ारसी

अफ़ग़ानिस्तान की तालिबान सरकार महिलाओं पर कई तरह की पाबंदी लगाने को लेकर पिछले हफ़्ते एक नया क़ानून लेकर आई है.

इसके तहत महिलाओं के घर से बाहर ज़ोर से बोलने और सार्वजनिक जगहों पर चेहरा दिखाने की मनाही है. स्त्रियों को सार्वजनिक जगहों पर चेहरा ढकने का आदेश दिया गया है.

महिलाओं को लेकर बनाए गए इस नए क़ानून को तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अख़ुंदज़ादा ने मंज़ूरी दी है. इसको लागू करने की ज़िम्मेदारी मॉरलिटी मंत्रालय को दी गई है.

मंत्रालय ने कहा कि इस क़ाननू से किसी को छूट नहीं दी जाएगी. क़ानून के तहत मॉरलिटी पुलिस सार्वजनिक स्थानों पर देखेगी कि किसने क्या पहना है.

वैसे मॉरलिटी मंत्रालय पहले से ही शरिया क़ानून के आधार पर इन प्रावधानों को लागू कर रहा है. इसका पालन नहीं करने पर हज़ारों लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है.

तालिबान के मुताबिक़, ये नियम इस्लाम की शरिया क़ानूनी प्रणाली की आधार पर बनाए गए हैं. इसे लागू करने का काम मॉरलिटी पुलिस करेगी.

इसको लेकर तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अख़ुंदज़ादा ने वैसे तो 2022 में ही आदेश दिया था, लेकिन अब इसे औपचारिक तौर पर क़ानून के रूप में अपनाया जा रहा है.

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इमेज कैप्शन, अफ़ग़ानिस्तान में महिलाएं तालिबान का खुलकर विरोध करती रही हैं लेकिन तालिबान की सख़्ती बढ़ती ही जा रही है

क़ानून में महिलाओं पर क्या प्रतिबंध लगाए गए हैं?

  • महिलाओं को पूरा शरीर ढकना होगा
  • सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं को चुप रहना होगा
  • सार्वजनिक स्थानों के साथ घर में भी गाना गाना और ज़ोर से पढ़ना मना है
  • कपड़े टाइट नहीं होने चाहिए
  • गैर मर्दाें से शरीर, चेहरा छिपाना होगा

नए क़ानून में महिलाओं के अलावा पुरुषों पर भी पांबदियां लगाई गई हैं. पुरुष को किसी महिला का शरीर और चेहरा देखने के लिए मना किया गया है. स्त्रियों को भी ऐसा ही करने के लिए बोला गया है.

अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं पर क्या प्रतिबंध

पुरुषों को क्या करना होगा?

  • पुरुषों को शरिया के तहत हेयर स्टाइल रखना होगा
  • पुरुषों के टाई पहनने पर भी प्रतिबंध लगाया है

इसको देखते हुए तालिबान ने कई जगहों पर पुरुष की दाढ़ी ट्रिम करने और शेव कराने से बाल काटने वालों को मना किया है. तालिबान का दावा है कि ये शरिया के तहत है.

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मॉरलिटी पुलिस का क्या काम है?

अफ़ग़ानिस्तान की मॉरलिटी पुलिस देखगी कि नए क़ानून का पालन सभी जगह हो रहा है या नहीं. पुलिस का काम क़ानून का उल्लंघन करने वालों को कोर्ट लेकर भी जाना है.

मॉरलिटी पुलिस की शक्तियां पहले से ज़्यादा हो गईं क्योंकि इस बार उन्हें हिबतुल्लाह अख़ुंदज़ादा का समर्थन हासिल है.

ऐसे में मॉरलिटी पुलिस की ज़िम्मेदारी होगी कि महिला और पुरुष नए क़ानून के प्रावधान का पालन करें. साथ ही मॉरलिटी पुलिस टैक्सी ड्राइवर को उन महिलाओं को कहीं ले जाने से रोक सकती है जो अपने किसी पुरुष संबंधी जैसे कि पिता और भाई के साथ नहीं हैं.

इस दौरान स्त्रियों को हिजाब भी पहनना होगा. इसके अलावा कार में महिला और पुरुष के अगल-बगल बैठने पर पाबंदी लगाई गई है.

नए क़ानून में क्या प्रावधान हैं?

नए क़ानून के तहत जीवित प्राणियों की तस्वीरें बनाना या प्रकाशित करने पर भी प्रतिबंध है. ऐसे में किसी पक्षी, जानवर या परिवाार के सदस्य की तस्वीर बनाने पर पाबंदी है.

नए नियम के तहत जीवित प्राणियों की मूर्तियां ख़रीदने और बेचने पर भी रोक है.

क़ानून के मुताबिक, मॉरलिटी पुलिस रेडियो और टेप रिकॉर्डर का ग़लत इस्तेमाल करने से भी रोकेगी.

ऐसा इसलिए क्योंकि शरिया क़ानून के तहत गाना बजाना हराम है. इसके अलावा किसी जीवित प्राणी को लेकर बनाई गई फ़िल्म देखने पर भी पाबंदी है.

नए क़ानूनों के प्रावधानों के उलट तालिबान सरकार में मंत्री मोहम्मद खालिद हनफी सहित कई अधिकारी कैमरे के सामने आ चुके हैं.

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सज़ा क्या होगी?

कोई भी शख्स क़ानून का उल्लंघन कर निंदनीय कृत्य (तालिबान के मुताबिक़) करता है तो जुर्माना और तीन दिन तक जेल हो सकती है.

इन नए क़ानूनों की कई लोग आलोचना कर रहे हैं. अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन की प्रमुख रोजा ओटुनबायेवा ने कहा कि कई दशकों तक चले युद्ध और संकट झेलने के बाद अफ़ग़ानिस्तान के लोग बेहतर के हक़दार हैं.

क्या क़ानून लागू हो गए हैं?

तालिबान इस क़ानून को लागू करने से पीछे नहीं हटेगा, लेकिन अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल सहित देश के कुछ हिस्सों में क़ानून को व्यवस्थित रूप से लागू नहीं किया गया है.

मॉरलिटी मंत्रालय से जुड़े सूत्र ने बीबीसी फ़ारसी से कहा कि वे क़ानून के प्रावधानों को लागू करने को लेकर एक रूपरेखा पर काम कर रहे हैं.

रूपरेखा तैयार होने और क़ानून को लागू करने को लेकर अधिक स्पष्टता आ जाएगी, लेकिन कई प्रावधान देश के अन्य हिस्सों में लागू हो चुके हैं.

तालिबान सरकार ने कहा कि पिछले साल मॉरलिटी पुलिस ने शरिया क़ानून का पालन नहीं करने पर 13 हज़ार से ज़्यादा लोगों को अस्थायी तौर पर हिरासत में लिया था.

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