कॉफ़ी पीने का सही वक़्त क्या है, इसे खाने के साथ लें या बाद में

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- Author, जूलिया ग्रांची
- पदनाम, बीबीसी ब्राज़ील
क्या आप भी खाने के साथ या इसके तुरंत बाद कॉफ़ी पीते हैं तो थोड़ा संभल जाइए.
कॉफ़ी पीने की इस तरह की आदत भोजन के पोषक तत्वों को शरीर में अवशोषित होने में बाधा डाल सकती है.
कॉफ़ी में एक हज़ार केमिकल कंपाउंड होते हैं और इनमें से कैफ़ीन, पॉलिफ़ेनल्स और टैनिन्स जैसे कुछ केमिकल कंपाउंड पोषक तत्वों के शरीर में अवशोषित होने की प्रक्रिया में बाधा डाल सकते हैं.
हालांकि अच्छी बात ये है कि ज़्यादातर लोगों पर ये असर न्यूनतम होता है. ये असर इतना ज़्यादा नहीं होता कि इससे शरीर में कोई कमी आ जाए.
कॉफ़ी और न्यूट्रिशन का समीकरण

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पोषक तत्व (न्यूट्रिशन) ऐसे पदार्थ होते हैं जो हमारे खाने-पीने की चीज़ों में पाए जाते हैं और शरीर के लिए कई अहम काम को अंजाम देते हैं. स्वस्थ रहने के लिए हमें अलग-अलग पोषक तत्वों की ज़रूरत होती है.
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के न्यूट्रिशन साइंस एजुकेशन में डॉक्टरल रिसर्चर और हेल्थ साइंसेज़ एकेडमी में चीफ़ साइंस एजुकेटर एलेक्स रुआनी कहते हैं, ''ऐसा नहीं है कि शरीर में पोषक तत्वों का अवशोषण पूरी तरह 'बंद' हो जाता है. सिर्फ़ इसमें थोड़ी कमी हो सकती है.''

ये असर कॉफ़ी की स्ट्रेंथ, पोषक तत्वों की मात्रा, किसी व्यक्ति की उम्र, मेटाबॉलिज्म, सेहत की स्थिति और जेनेटिक्स पर निर्भर करता है.
जिन पोषक तत्वों की बात की जा रही है उनमें कैल्शियम,आयरन और विटामिन शामिल हैं.
लाइनस पॉलिंग इंस्टीट्यूट की डायरेक्टर और ओरेगन स्टेट यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ हेल्थ में प्रोफ़ेसर एमिली हो कहती हैं, ''अगर आपके शरीर में पोषक तत्वों का स्तर पर्याप्त है तब तो ठीक है. लेकिन अगर आपके शरीर में इसका स्तर कम या इसकी कमी है तो ज़्यादा कॉफी पीने से पोषक तत्वों का स्तर और गिर सकता है.''
कैपाचिनो से किसे संभलकर रहना चाहिए

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साल 1980 से हो रहे अध्ययन बताते हैं कि कॉफ़ी पीने और शरीर में आयरन के कम अवशोषण के बीच संबंध हैं.
एमिली हो कहती हैं, ''जब आप भोजन के साथ कॉफ़ी पीते हैं तो इसमें मौजूद पॉलिफ़ेलन्स आपके पाचन तंत्रों में मौजूद कुछ मिनरल्स के साथ जुड़ सकते हैं.''
वो बताती हैं कि ये प्रक्रिया शरीर के लिए आयरन का अवशोषण कठिन बना सकती है क्योंकि शरीर में मौजूद मिनरल्स को खून तक पहुंचने के लिए आंतों की कोशिकाओं से गुज़रना पड़ता है.
वो कहती हैं, ''अगर वो पॉलिफ़ेनल्स से चिपकते हैं तो शरीर से होकर बाहर निकल जाते हैं.''
खासकर आयरन के मामले में ये अहम है. पौधों से प्राप्त भोजन में मिलने वाले आयरन को 'नॉन हीम आयरन' कहा जाता है. फल और सब्ज़ियों जैसी खाने की चीज़ों से हासिल नॉन हीम आयरन शरीर में कठिनाई से अवशोषित होता है.
कॉफ़ी में पाया जाने वाला पॉलिफे़नल्स असल में क्लोरोजेनिक एसिड होता है वो नॉन हीम आयरन से जुड़ सकता है. ये इस तरह के नॉन हीम आयरन को खून में पहुंचने से रोकता है.
इसलिए पाचन तंत्र से गुज़रते हुए आयरन इन कंपाउंड्स में ही अटक जाते हैं. इससे शरीर इन्हें इस्तेमाल करने के बदले पेशाब के ज़रिये इन्हें निकाल देता है.
एलेक्स रुआनी कहते हैं, ''कॉफ़ी पीने का सबसे अच्छा तरीक़ा है कि इसे भोजन के एक घंटे पहले या आयरन से भरपूर भोजन के लेने के कुछ घंटों बाद लिया जाए ताकि ये पेट में आपस में न मिल पाएं.''
जिन महिलाओं को पीरियड्स होते हैं या फिर जो गर्भवती हैं उन्हें शरीर में आयरन लेवल पर नज़र रखने की ज़रूरत होती है.
उन्हें ज़्यादा आयरन की ज़रूरत होती है. आयरन की कमी से वो एनीमिया की शिकार हो सकती हैं. इसलिए ऐसी महिलाओं को इस बात का ध्यान रखना चाहिए वो कितनी कॉफ़ी पी रही हैं.
कैल्शियम और कैफ़ीन

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कैल्शियम हमारी हड्डियों के लिए बहुत ज़रूरी है. लेकिन ब्रिटेन में 16 से 49 साल के लोग अपने भोजन के ज़रिये लोएस्ट रेफ़रेंस न्यूट्रिएंट इनटेक (एलआरएनआई यानी जितनी न्यूनतम मात्रा की ज़रूरत है) से कम कैल्शियम लेते हैं. इससे उनकी हड्डियों के कमज़ोर होने का जोखिम रहता है.
हमारी किडनी हमारे ख़ून (और पेशाब) से अतिरिक्त अपशिष्ट और अतिरिक्त पानी को हटाकर शरीर में रसायनों (जैसे सोडियम, पोटेशियम और कैल्शियम) का संतुलन बनाकर रखते हैं. ये शरीर में हार्मोन भी बनाते हैं.
अध्ययन बताते हैं कि कैफ़ीन आपके शरीर में कैल्शियम को बरकरार रखने को मुश्किल बना सकता है क्योंकि ये आपकी किडनी में कैल्शियम की प्रोसेसिंग और आंतों में इसके अवशोषण के तरीके़ में बाधा डाल सकता है.
हालांकि इसका असर न्यूनतम है. ये उन लोगों को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है जो पहले ही कम कैल्शियम वाला भोजन लेते हैं और हड्डी से संबंधित रोगों के जोखिम से घिरे होते हैं.
एलेक्स रुआनी कहते हैं, ''ऑस्टियोपोरोसिस इंटरनेशल नाम के जर्नल में छपी एक स्टडी में बताया गया है कि कैफ़ीन से हड्डियां कमज़ोर हो सकती हैं. क्योंकि ये बोन मेटाबोलिज्म में दखल देता है. हालांकि कैफ़ीन का ऑस्टियोपोरोसिस के जोखिम पर क्या असर पड़ता है, ये साबित करने के लिए कई और अध्ययनों की ज़रूरत है.''
कैल्शियम आपके शरीर में जमा हो सकता है इसलिए आपको हर दिन इसकी एक निश्चित खुराक लेने की ज़रूरत नहीं होती है. लेकिन 19 से 64 साल की उम्र तक के वयस्कों को कुछ महीनों तक हर दिन औसतन 700 मिलीग्राम कैल्शियम हर महीने लेना चाहिए.
हालांकि ये भी ध्यान में रखना चाहिए कि कैफ़ीन से बार-बार पेशाब जाने की समस्या पैदा हो सकती है.
एमिली हो कहती हैं, ''इससे शरीर से पानी में घुलनशील विटामिन और मिनरल्स (जैसे कुछ विटामिन बी) शरीर से निकल सकते हैं. हालांकि पेशाब के ज़रिए इनका निकलना शरीर में इनकी मात्रा को संतुलित करता है.''
विटामिन बी और कॉफ़ी

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रुआनी कहते हैं, ''चूंकि कॉफ़ी का किडनी के काम करने के तरीके और न्यूट्रिएंट मेटाबॉलिज्म पर असर पड़ता है इसलिए इसके ज़्यादा सेवन से (एक दिन में चार या इससे अधिक कप पीने से) पेशाब बार-बार आ सकता है. और इससे शरीर से विटामिन बी समेत पानी में घुलनशील दूसरे विटामिन निकल सकते हैं.''
विटामिन बी पानी में घुलनशील होते हैं. इसलिए ये शरीर में जमा नहीं रहते. हालांकि शरीर में ज़्यादा होने पर वो पेशाब के ज़रिये निकल जाते हैं.
प्रोबायोटिक्स

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प्रोबायोटिक्स जीवित बैक्टीरिया और यीस्ट हैं, जिन्हें सेहत के लिए फ़ायदेमंद बताया जाता है.
एनएचएस की वेबसाइट के मुताबिक़ कुछ मामलों में वे आपके पेट में बैक्टीरिया के स्वाभाविक बनने में मददगार हो सकते हैं. हालांकि इस दावे के समर्थन में काफी कम सुबूत हैं.
फिर अगर आप प्रोबायोटिक सप्लीमेंट या प्रोबायोटिक्स से भरी चीज़ें जैसे योगर्ट और किमची खाते हैं तो फिर इसे कॉफ़ी जैसी गर्म पेय के साथ न लें.
रुआनी कहते हैं, ''दरअसल जीवित बैक्टीरिया गर्मी के प्रति काफी संवेदनशील होते हैं. इससे आपके पेट में ये बैक्टीरिया जीवित नहीं रह पाते हैं और फिर प्रोबायोटिक का असर कम हो जाता है.''
डॉक्टर कभी-कभी एंटीबायोटिक दवाओं से होने वाले डायरिया से निजात पाने के लिए प्रोबायोटिक इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं.
प्रोबायोटिक का अधिकतम लाभ लेने के लिए इसे कॉफ़ी पीने के कम से कम आधे या एक घंटे के बाद लेना चाहिए.
अगर आपने एक कप कॉफ़ी ली है तो प्रोबायोटिक का अधिकतम फ़ायदा लेने के लिए आधे से एक घंटे तक रुकना चाहिए.
क्या कॉफ़ी की तुलना में चाय अच्छी है?

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अगर कॉफ़ी छोड़कर चाय पीना चाहते हैं तो ये जानना ज़रूरी है कि दोनों को लेकर चिंताएं एक जैसी हैं.
एमिली हो कहती हैं, ''दरअसल चाय में मौजूद पॉलिफेनल्स पोषक तत्वों की जैव उपलब्धता पर समान असर डालते हैं. इसलिए अगर आप चाहते हैं कि आपका शरीर पोषक तत्वों को सही तरीके से अवशोषित करे तो चाय पीने के समय पर भी ध्यान रखें.''
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित















