टॉयलेट में बैठकर देखते हैं रील्स? देर होने से पहले इन 6 बातों पर दीजिए ध्यान

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- Author, ओंकार करंबेलकर
- पदनाम, बीबीसी मराठी संवाददाता
क्या आप भी अपना फोन हमेशा अपने साथ रखते हैं? क्या आप खाना खाते समय, रात को सोते समय और सुबह उठने के तुरंत बाद अपना फोन देखे बिना नहीं रह सकते हैं?
इतना ही नहीं, क्या आप अपना मोबाइल फोन भी टॉयलेट में साथ ले जाते हैं? कितना ही वक़्त रील्स देखने में चला जाता है? अगर ऐसा है तो फिर ये चिंता की बात है.
मोबाइल फोन पर सोशल मीडिया, फोन कॉल, ईमेल, मैसेज, रील्स आदि के लगातार इस्तेमाल से व्यक्ति को टॉयलेट में भी अपना फोन ले जाने की इच्छा होती है.
कई लोगों को तो यह एहसास ही नहीं होता कि अपने फोन के साथ टॉयलेट में थोड़ा समय बिताने से वे कई ख़तरनाक चीजों के संपर्क में आ जाते हैं.

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इस रिपोर्ट में हम यही जानने की कोशिश करेंगे कि जब आप अपना मोबाइल फोन टॉयलेट में ले जाते हैं तो आपको किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है.

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1. असल में समस्या क्या है?
हम में से कई लोगों को खासकर युवाओं को टॉयलेट में भी अपना फोन ले जाने की आदत होती है. जो लोग टॉयलेट में आधे घंटे से अधिक समय बिताते हैं उन्हें कई बीमारियाँ हो जाती हैं.
ये लोग लंबे समय तक एक ही स्थान पर बैठकर अपने मोबाइल फोन देखते रहते हैं. इससे गुदा के पास की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जो मल को बाहर निकालने में मदद करती हैं.
जबरदस्ती शौच करने से इन सभी अंगों से संबंधित कई बीमारियां हो सकती हैं. इनमें बवासीर, कब्ज, फिस्टुला और फिशर जैसी कई बीमारियां शामिल हैं.
लंबे समय तक एक ही स्थान पर बैठे रहने से ब्लड सर्कुलेशन भी प्रभावित होता है. इस स्थिति में बैठने और मल त्यागने में जोर लगाने से कब्ज और मल के कठोर होने की प्रवृति बढ़ जाती है.
इससे गुदा के पास की नसों पर दबाव पड़ता है. जिसकी वजह से उनमें सूजन आ जाती है और वहां कई तरह के संक्रमणों की आशंका बढ़ जाती है. ऐसे लोगों को बाद में कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है.
असल में कमोड इस तरह से डिजाइन होता है जिससे टॉयलेट करते वक्त गुदा क्षेत्र और वहां की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है.


2. ज़्यादा देर बैठे तो होगी समस्या
अगर आप टॉयलेट में लंबे समय तक बैठे रहें तो ज्यादा दबाव पड़ने की समस्या बढ़ जाती है.
इसी कड़ी में जब शौच में देरी होती है तो ये समस्या और बढ़ जाती है. क्योंकि लोग टॉयलेट करते हुए ज्यादा जोर लगाने की कोशिश करते हैं और इस तरह वे कई समस्याओं में फँस जाते हैं.
इसलिए ये बात ध्यान रखना जरूरी है कि जब आप टॉयलेट जाएं तो वहां फोन का इस्तेमाल न करें.
टॉयलेट की सीट पर बहुत देर तक बैठे रहने और अपने फोन को देखने से शरीर के दूसरे हिस्सों पर भी दवाब पड़ता है. जैसे गर्दन और पीठ में दर्द.
इससे हाथों और पैरों में झुनझुनी, पैरों में भारीपन महसूस हो सकता है. लंबे समय तक झुककर बैठने और मोबाइल फोन देखने से गर्दन में खिंचाव और पीठ दर्द कर सकती है.
कोविड 19 के बाद हमारे लाइफस्टाइल में कई तरह के बदलाव आए हैं. इनमें लगातार बैठे रहना, बैठकर काम करना, घर से बाहर न निकलना, व्यायाम या योग का अभाव, फास्ट फूड और पैकेज्ड फूड खाने जैसी आदतें शुमार हैं.
इतना ही नहीं मोबाइल का इस्तेमाल भी बढ़ा है क्योंकि अब ज्यादातर लेन-देन मोबाइल पर ही होता है. लगातार फोन के इस्तेमाल के कारण कई लोगों में टॉयलेट में अपना फोन ले जाने की आदत विकसित हो गई है.
एक ही जगह पर बैठे रहने से हृदय रोग, डायबिटीज, मोटापा, गर्दन और पीठ दर्द, मांसपेशियों में कमजोरी, वैरिकाज़ नसों, स्ट्रोक, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
लेकिन इससे भी ज्यादा पेट फूलना, अनावश्यक वजन बढ़ना जैसी समस्याएं मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं.
इस लाइफस्टाइल के कारण चिंता, अवसाद, तनाव या खान-पान संबंधी बीमारी हो सकती हैं.


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3. सेहत पर क्या असर होता है
बिना किसी शारीरिक गतिविधि के लंबे समय तक एक ही स्थान पर बैठे रहने से आपके जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होती है.
इतना ही नहीं इससे कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है.
लंबे समय तक बैठे रहने से शरीर की ब्लड शुगर और इंसुलिन के स्तर को नियंत्रित करने की क्षमता पर भी असर पड़ता है.
जिससे टाइप 2 डायबिटीज, चिंता और तनाव, मोटापा, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल के स्तर में वृद्धि, साथ ही स्ट्रोक और हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है.
लंबे समय तक एक ही जगह पर बैठे रहने से पीठ की मांसपेशियों पर भी दबाव पड़ता है और रीढ़ की हड्डी संबंधी समस्याएं पैदा होती हैं.
ऐसी लाइफस्टाइल कमर दर्द, गर्दन दर्द जैसी बीमारियों को आमंत्रित करती है.


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4. टॉयलेट में फोन इस्तेमाल करने की आदत कैसे छोड़ें?
अब बात करते हैं कि हर जगह मोबाइल फोन का उपयोग करने की इस आदत को कैसे छोड़ें.
हमने ये सवाल मुंबई के लीलावती अस्पताल के जनरल सर्जन डॉ. नरेंद्र निकम से पूछा.
डॉ. निकम ने कहा, "लंबे समय तक टॉयलेट सीट पर बैठने से हमारी पेल्विक मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं. इससे पेशाब और शौच को नियंत्रित करने में भी समस्या होती है."
"इसलिए आपको टॉयलेट में पांच से दस मिनट से ज्यादा समय नहीं बिताना चाहिए. शरीर के इस हिस्से पर ज्यादा तनाव न डालें. इस स्थिति से बचने के लिए आपको प्रतिदिन दो से तीन लीटर पानी पीना चाहिए और नियमित व्यायाम करना चाहिए. आपके खाने में फाइबर की मात्रा ज्यादा होनी चाहिए."
डॉक्टर्स का यह भी कहना है कि यदि आपको पेट खराब होने या पेट दर्द जैसे लक्षण दो दिन से ज्यादा समय तक रहते हैं तो डॉक्टर से संपर्क जरूर करें.

डोंबिवली स्थित एम्स अस्पताल में काम करने वाले जनरल सर्जन डॉ. शाहिद परवेज़ भी कई बातों की ओर ध्यान दिलाते हैं.
उन्होंने कहा, "बवासीर या इससे संबंधित बीमारियों का कारण केवल कम फाइबर वाला खाना ही नहीं है. बल्कि टॉयलेट सीट पर लंबे समय तक बैठना और वहीं फोन का इस्तेमाल करना जैसी आदतें भी इसके लिए जिम्मेदार हैं."
"इससे गुदा के पास की नसों पर दबाव पड़ता है और व्यक्ति को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है. अगर बवासीर की वजह खून बहने लगे तो यह बहुत कष्टदायक होता है. इसके अलावा मोबाइल फोन पर मौजूद कीटाणु आपके चेहरे और हाथों के संपर्क में आते हैं, तो पेट में संक्रमण होने की संभावना है."
डॉ. परवेज़ का कहना है कि आपको अपने घर में फोन-मुक्त एरिया बनाना चाहिए. इस एरिया में फोन का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए. इसमें सोने और खाने के लिए स्थान शामिल होने चाहिए. टॉयलेट में फोन इस्तेमाल नहीं करने का नियम भी बना सकते हैं.
वो कहते हैं कि आप फोन का उपयोग सीमित कर सकते हैं. यह लगातार बैठे रहने की आदत को छोड़ने में भी मदद कर सकता है. पढ़ाई करते समय ब्रेक लेने के लिए अपनी कुर्सी से उठें और अपने पैरों और हाथों को हिलाएं. इसी तरह, यदि आप स्क्रीन का उपयोग करके काम कर रहे हैं, तो आप अपनी आँखों को आराम देने के लिए कुछ कर सकते हैं.


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5. किन बीमारियों का ख़तरा
कब्ज या पूरी तरह से मल त्याग में रुकावट के कारण कई समस्याएं हो सकती हैं.
जब पाचन तंत्र खराब हो जाता है तो गुदा पर दबाव पड़ता है, जिससे बवासीर और गुदा टिशूज में दरारें जैसी समस्याएं हो सकती हैं. यह समस्या विशेषकर 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में आम है.
अक्सर गंभीर मामलों में, गुदा पर अत्यधिक दबाव के कारण होने वाली कब्ज से रक्त के थक्के बन सकते हैं. जिससे दिल का दौरा और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. ऐसी स्थिति में, भविष्य की जटिलताओं से बचने के लिए कब्ज का तुरंत इलाज करना महत्वपूर्ण है.
जब आंतें एक सप्ताह या उससे अधिक समय तक साफ नहीं होतीं तो उसे क्रोनिक कब्ज कहा जाता है. इसके लक्षणों में पेट फूलना, पेट में दर्द, मल त्याग के दौरान तनाव और मल का पूरी तरह से त्याग नहीं शामिल है.
अगर तुरंत इलाज न किया जाए तो अत्यधिक दबाव से गुदा टिशूज को नुकसान पहुंच सकता है. जिससे बवासीर और फिशर जैसी समस्याएं पैदा होती हैं. इनसे काफी दर्द होता है.


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6. डॉक्टर्स क्या कहते हैं?
हमने इस विषय में अधिक जानकारी के लिए अन्य डॉक्टरों से भी बात की.
मुंबई के अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल के जनरल सर्जन डॉ. लकिन वीरा ने कहा, "क्रोनिक कब्ज के कारण हैं, खाने में फाइबर की कमी, व्यायाम की कमी, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम, या फिर गर्भावस्था और उम्र बढ़ने के दौरान आंतों में रुकावट है."
उन्होंने बताया, "क्रोनिक कब्ज के कारण गुदा की नसों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे सूजन और बवासीर हो जाती है. लगातार तनाव के कारण रोगी के गुदा में अल्सर या घाव भी हो सकता है. ये अल्सर गुदा के अंदर और बाहर दोनों जगह हो सकते हैं."
"यदि स्थिति अधिक गंभीर हो जाए तो इससे ब्लड निकल सकता है और दर्द भी हो सकता है."
डॉ. वीरा कहती हैं, "45-65 वर्ष की आयु के लगभग 20 प्रतिशत लोग कब्ज की शिकायत के साथ अस्पताल में भर्ती होते हैं. हर दिन, 10 में से 2 लोग कब्ज से पीड़ित होते हैं, जिससे गुदा पर दबाव पड़ता है और बवासीर और फिशर का खतरा बढ़ जाता है. मरीजों को मल को नरम करने वाली दवाएँ लेने की भी सलाह दी जाती है, साथ ही उन्हें बवासीर और फिशर के बीच के संबंध के बारे में भी बताया जाता है."
मुंबई के जिनोवा शाल्बी अस्पताल के जनरल और लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. हेमंत पटेल ने कहा कि इस समय हमारे पास आने वाले अधिकांश मरीज़ कब्ज से पीड़ित हैं.
उन्होंने कहा कि 45 से 65 वर्ष की आयु के लगभग 15 प्रतिशत लोगों को प्रतिदिन कब्ज, पेट फूलना और पेट दर्द की शिकायत रहती है.
डॉ. पटेल के अनुसार, "कब्ज का समय पर उपचार करने से बवासीर और फिशर जैसी समस्याओं को रोका जा सकता है."
"केला, सेब, चिया सीड्स, गाजर और चुकंदर सहित फाइबर से भरपूर आहार, नियमित शारीरिक गतिविधियां और भरपूर पानी पीने से आंतों के काम करने में सुधार होता है."
वे कहते हैं, "मल त्याग के दौरान ज्यादा जोर ना लगाएं और आंतों के अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए अपने आहार में प्रोबायोटिक्स को शामिल करें."
"समय पर उपचार से बड़ी समस्याओं को रोका जा सकता है. साथ ही बवासीर और गुदा टिशूज जैसी बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है."
अगर आप अपनी जीवनशैली में कोई महत्वपूर्ण बदलाव करना चाहते हैं, अपने खाने को बदलना चाहते हैं, या शारीरिक व्यायाम शुरू करना चाहते हैं, तो डॉक्टर और विशेषज्ञ की मदद लेना महत्वपूर्ण है.
सबसे अच्छा यह है कि आप अपने शरीर और लक्षणों की डॉक्टर से उचित जांच करवाएं और उनकी सलाह के आधार पर लाइफस्टाइल में बदलाव करें.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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