खुशी देती है अजनबियों से बातचीत, जानिए कैसे शुरू करें सिलसिला?

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- Author, मर्व कारा कास्का और आन्या डोरोडिको
- पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस
कॉफी शॉप में किसी को हैलो कहना या फिर सड़क किनारे अजनबियों से हुई एक छोटी सी बातचीत लोगों को खुशी दे सकती है.
तुर्की में की गई एक स्टडी में यह बात सामने आई है कि किस तरह से सामाजिक संबंध लोगों को बेहतर महसूस करा सकते हैं.
सबानसी विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान संकाय की प्रमुख और इस स्टडी में शामिल लोगों में से एक एसरा अस्सिगिल कहती हैं, "हमने पाया कि जिन लोगों के साथ हम भावनात्मक रूप से करीब नहीं हैं, उनके साथ बातचीत जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालती है."
वह बताती हैं कि ऐसे कार्यों में बस से उतरते समय ड्राइवर को धन्यवाद देना या परिचित चेहरों का अभिवादन करना भी शामिल है.

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स्टडी से यह भी पता चलता है कि दुनिया भर में लोग अजनबियों से बातचीत करने में असहज महसूस करते हैं. उन्हें यह बेकार, अजीब और असुरक्षित लगता है.
आम लोगों के जीवन में छोटी-छोटी बातचीत किस तरह से खुशियां देती हैं और किसी से बातचीत शुरू करने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?
छोटी बातचीत के फ़ायदे

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यूके के ससेक्स विश्वविद्यालय की मनोवैज्ञानिक डॉ. गिलियन सैंडस्ट्रॉम कहती हैं कि जब लोग किसी अजनबी से बातचीत करते हैं तो उनका मूड बेहतर होता है और वे अपने आस-पास के माहौल से ज़्यादा जुड़ाव महसूस करते हैं.
डॉ. गिलियन छोटी बातचीत से मिलने वाली खुशियों पर रिसर्च करने वालों में से एक हैं, हाल ही में तुर्की में की गई स्टडी की सह-लेखिका भी हैं.
वह कहती हैं," अजनबियों से बातचीत में आप जुड़ाव महसूस करते हैं और आपको लगता है कि वह भी 'देख रहे हैं', जो कि लोगों की मूलभूत ज़रूरत है. यह 'हम कैसा महसूस करते हैं', इस पर भी असर डालती है. इसके साथ ही यह हमारे शरीर और स्वास्थ्य पर भी असर डालती है."
डॉ. सैंडस्ट्रॉम को इस विषय में करीब एक दशक से दिलचस्पी थी. वह शुरू से शर्मीली और लोगों से कम घुलती मिलती हैं. इसके बावजूद जब उन्होंने सैकड़ों अजनबियों से बातचीत की तो उनका नजरिया बदल गया और लोगों पर भरोसा बढ़ गया.
डॉ. सैंडस्ट्रॉम कहती हैं,"यह हमेशा अच्छा ही नहीं होता है लेकिन मेरा अनुभव शानदार रहा. कई मजेदार कहानियां सुनीं, कई नई चीजें सीखें और कई लोगों ने सुझाव और सिफारिश भी दी. मुझे ऐसा लगा जैसे मैं इनके समुदाय का हिस्सा हूं और मैने सुरक्षित महसूस किया.
पश्चिमी समुदाय से बाहर इस विषय पर अध्ययन करने वाले जापान के रिक्यो विश्वविद्यालय के शोधकर्ता इटारू इशिगुरो ने लिखा है, "अजनबियों से सीधे सामाजिक संपर्क अपनेपन की भावना को मजबूत करते हैं. यह बातें हमें खुशियां देती हैं."
अजनबियों से बातचीत इतनी मुश्किल क्यों है?

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अजनबियों से बात करना इतना मुश्किल क्यों है? डॉ. सैंडस्ट्रॉम कहती हैं, दरअसल लोगों को यह समझ नहीं है कि इन छोटी-छोटी बातों से भी फ़ायदा होता है. वह इन्हें बेकार और समय की बर्बादी समझते हैं, लेकिन असली कारण यह है कि लोग डरते हैं.
वह बताती हैं, "आंकड़ों से यह पता चलता है कि लोग बातचीत से इनकार किए जाने से ज्यादा अजनबियों से बातचीत के दौरान सहज महसूस नहीं करते हैं."
इटारू इशिगुरो कहते हैं कि कई लोगों को यह भी डर होता है कि क्या बातचीत सांस्कृतिक रूप से स्वीकार्य है क्योंकि एक ही देश में बातचीत में सहजता का स्तर अलग-अलग हो सकता है.
उदाहरण के लिए, जब मैं जापान के तोहोकू क्षेत्र के एक छोटे से शहर हिरोसाकी की सड़कों पर अपने बच्चे के साथ घूम रहा था, तो कई लोग हमारे पास आकर कहते थे कि 'कितना प्यारा बच्चा है!' हालाँकि, जब मैं टोक्यो चला गया तो ऐसा शायद ही कभी हुआ हो."
सुरक्षित बातचीत

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अजनबियों से बातचीत का मामला बचपन के खतरों से जुड़ा है. बचपन में बच्चों को अक्सर अजनबियों से दूर रहने के लिए कहा जाता है. इसे "स्ट्रेंजर डेंजर" के नाम से जाना जाता है.
डॉ. गिलियन सैंडस्ट्रॉम कहती हैं, "अब सलाह अधिक संकुचित हो गई है. हां, अजनबी लोग ख़तरनाक हो सकते हैं, लेकिन ऐसे अजनबी मददगार भी होते हैं."
उदाहरण के लिए, ब्रिटेन में बच्चों को "सुरक्षित अजनबियों" की पहचान करना सिखाया जाता है जिन पर वे भरोसा कर सकते हैं, जैसे कि अन्य बच्चों के माता-पिता, पुलिस अधिकारी या सुपरमार्केट कर्मचारी जैसे वर्दीधारी लोग.
डॉ. सैंडस्टॉर्म का मानना है कि वयस्कों के लिए अजनबियों से बातचीत करने के कई सुरक्षित तरीके हैं. "मैं यह सुझाव नहीं दे रही हूँ कि हम लोगों से किसी अंधेरी गली में बात करें, लेकिन सार्वजनिक स्थान पर लोगों के बीच हम सीमित क्यों रहते हैं? हम मानवीय जुड़ाव के इन पलों का आनंद ले सकते हैं?
बातचीत शुरू करने के पांच तरीके

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अजनबियों से बातचीत करने के शुरू करने के लिए डॉ. सैंडस्ट्रॉम ने ये तरीके बताए हैं...
- समान रुचि : कुछ ऐसा तलाश करें जो आप दोनों में समान हो.जैसे लोग मौसम के बारे में बात करते हैं तो आप भी उसकी ही बात करते हैं. बसंत में आप किसी पार्क में खिला हुआ फूल देखते हैं तो उसके बारे में आप दूसरों से चर्चा कर सकते हैं.
- जिज्ञासु बनें, सवाल करें : "मैं अक्सर लोगों से सिर्फ़ यही पूछता हूँ कि वे क्या कर रहे हैं? कैमरे से एक व्यक्ति को दीवार की तस्वीर लेते देखा और मैंने पूछा, 'आप क्या कर रहे हैं?'. आप ट्रेन में हैं और कोई व्यक्ति सूटकेस लेकर बैठा है तो आप पूछें कि 'आप कहाँ जा रहे हैं?' यह ध्यान देने और चीज़ों को नोटिस करने के बारे में है. आप जब हल्के-फुल्के अंदाज़ में पूछते हैंं तो आम तौर पर लोग खुश होते हैं. ऐसा नहीं लगना चाहिए जैसे आप उन पर हावी हो रहे हों.
- संग्रहालय या दिलचस्प जगह पर : "यहां किसी कर्मचारी से पूछें कि वहां उनकी पसंदीदा चीज़ क्या है? ऐसे में वह आपको ऐसी बढ़िया कहानी सुना सकते हैं और चीज दिखा सकते हैं जिस पर आपने पहले कभी ध्यान नहीं दिया हो."
- सुझाव मांगे: "अगर किसी से सुझाव या सिफारिश साझा करने को कहेंगे तो लोग इससे प्रसन्न होते हैं. आप अगर किसी को भी संशय में देखते हैं तो कह सकते हैं, 'क्या आपको कुछ मदद चाहिए?'
- तारीफ़ करें : "मैं किसी की शारीरिक बनावट की तारीफ करने की सलाह नहीं दे रही क्योंकि यह थोड़ा मुश्किल हो सकता है, लेकिन अगर आप उनकी पसंद की किसी चीज़ पर टिप्पणी करते हैं - जैसे आभूषण या नीले बाल. किसी अनजान व्यक्ति से अकारण ऐसी प्रशंसा सुनकर अच्छा लगता है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित
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