कमलनाथ के हिंदू राष्ट्र पर आए बयान के क्या हैं मायने?

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- Author, कीर्ति दुबे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने हिंदू राष्ट्र को लेकर विवादित बयान दिया है.
उन्होंने कहा है कि देश की 82 फ़ीसदी जनता हिंदू है तो ये कोई कहने कि बात नहीं है, ये हिंदू राष्ट्र तो है ही.
कमलनाथ ने छिंदवाड़ा में बाबा बागेश्वर धाम धीरेंद्र शास्त्री ने राम कथा पाठ का आयोजन किया उसमें ना सिर्फ़ कमलनाथ बल्कि उनका पूरा परिवार ही धीरेंद्र शास्त्री की सेवा में हाज़िर रहा.
मंगलवार को पत्रकारों ने कमलनाथ से सवाल पूछा कि धीरेंद्र शास्त्री अपने मंच से हिंदू राष्ट्र बनाने की बात करते हैं, इसे वो कैसे देखते हैं.
इसके जवाब में कमलनाथ ने कहा, "उन्होंने (धीरेंद्र शास्त्री) हिंदू राष्ट्र की बात नहीं की, उन्होंने तो पूरे देश की बात की, उन्होंने कहा कि ये देश सभी धर्म का है. हिंदू राष्ट्र बनाने की क्या बात है, 82 फ़ीसदी लोग तो हिंदू हैं ही. धीरेंद्र शास्त्री क्या हिंदू पैदा कर रहे हैं? जिस देश में हिंदू इतने बड़े परसेंट में हों तो वहां ये बहस की बात होनी ही नहीं चाहिए, ये तो है ही. 82 फ़ीसदी हिंदू हैं तो हम कहें कि ये हिंदू राष्ट्र है, ये क्या कहने की बात है, ये तो आंकड़े बताते हैं."
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'आरएसएस वाली भाषा'
इस बयान पर पलटवार करते हुए ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है, "कांग्रेस के मध्य प्रदेश के 'दिग्गज' नेता साफ़-साफ़ वही कह रहे हैं जो मोहन भागवत कहते हैं, कि भारत हिंदू राष्ट्र है. भारत सिर्फ़ एक समुदाय का देश नहीं है. भारत कभी हिंदू राष्ट्र ना था, ना है और ना कभी होगा इंशाअल्लाह. 'मोहब्बत की दुकान' में नफ़रत की तस्करी हो रही है. दूसरों पर बी-टीम का ठप्पा लगाने का अधिकार इन्हें कहाँ से मिला? कल के दिन अगर भाजपा हार भी जाए, तो इस नफ़रत में क्या कोई कमी आएगी?"
बागेश्वर धाम के बाबा स्वामी धीरेंद्र शास्त्री अपने कई मंचों से ‘हिन्दू राष्ट्र’ की वकालत करते आए हैं.
मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार और ऑल इंडिया सेक्यूलर फ़ोरम के राष्ट्रीय संयोजक लज्जा शंकर हरदेनिया कहते हैं, "कमलनाथ जिस हिंदू राष्ट्र की बात कर रहे हैं वो आरएसएस की परिकल्पना है. आरएसएस के लोग अतीत में ये कह चुके हैं कि ये देश हिंदुओं का है और जो भी लोग दूसरे धर्मों के हैं वो यहां मेहमान हैं और मेहमान कुछ दिनों के लिए ही रह सकते हैं."
हरदेनिया कहते हैं, "भारत धर्मनिरपेक्ष गणराज्य है और धर्मनिरपेक्ष किसी भी धर्म विशेष का नहीं हो सकता. आबादी का जो लॉजिक कमलनाथ दे रहे हैं उसके हिसाब से तो ब्रिटेन, अमेरिका या बाकी यूरोपीय देशों को ईसाई राष्ट्र होना चाहिए. देश कभी आबादी के हिसाब से अपना स्वभाव नहीं तय करता."

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बीते दिनों आगामी लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए विपक्ष की 26 पार्टियों ने इंडियन नेशनल डिवेलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस यानी 'इंडिया' गठबंधन का गठन किया.
इस गठबंधन में शामिल पार्टियों के नेताओं ने बेंगलुरु के मंच से कहा था कि गठबंधन का मक़सद बीजेपी की विभाजित करने वाली नीतियों से लड़ना है.
ऐसे वक्त में जब राहुल गांधी 'मोहब्बत की दुकान' की बात कर रहे हैं तो कमलनाथ का ये बयान कांग्रेस के नैरेटिव को क्या नुकसान पहुंचा सकता है.
इस सवाल के जवाब में हरदेनिया कहते हैं, "कांग्रेस ने आज तक हिंदू राष्ट्र की बात नहीं की. खुद नेहरू ने भोपाल से कहा था कि अगर देश में हिंदुत्व की विचारधारा को लागू किया जाएगा तो मैं खुद प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा देकर ऐसी शक्तियों के ख़िलाफ़ लड़ूंगा. ऐसे समय में जब केंद्र में कांग्रेस और बीजेपी की हिंदुत्व की राजनीति के ख़िलाफ़ पार्टियां गठबंधन बना रही हैं, कमलनाथ का ये बयान उस पूरी पहल के ही विपरीत है."

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कमलनाथ ऐसे बयान क्यों दे रहे हैं
मध्य प्रदेश में इस साल चुनाव होने हैं. ऐसे में राज्य में हलचल तेज़ है. बाबा बागेश्वर धाम को भारतीय जनता पार्टी के हिंदुत्व से जोड़कर देखा जाता रहा है.
बागेश्वर धाम ने कई बार ये कहा है कि देश में रहने वाले लोग सनातनी हैं. उनके मंच पर कमनाथ का परिवार सहित पहुंचना और उनकी तारीफ़ करने के बाद ये चर्चा ज़ोरों पर है कि क्या कमलनाथ कांग्रेस की सेक्युलर राजनीति छोड़ धर्म की राजनीति कर रहे हैं.
लेकिन सवाल ये है कि ऐसा करने से क्या उन्हें फ़ायदा होगा?
मध्य प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष साजिद अली मानते हैं कि कमलनाथ को इस तरह के बयान से बचना चाहिए.
वह कहते हैं, "अगर कमलनाथ को लगता है कि वह हिन्दुत्व के मोर्चे पर बीजेपी को सॉफ़्ट हिन्दुत्व से मात देंगे तो ये उनकी ख़ुशफ़हमी है. हिन्दुत्व के लिए तो बीजेपी है ही. हम सेक्युलर राजनीति करते हैं. मध्य प्रदेश में मुझे नहीं लगता है कि धर्म के आधार पर ध्रुवीकरण की राजनीति के लिए कोई स्पेस है."

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साजिद अली कहते हैं, ''कमलनाथ जिस तरीक़े से बोल रहे हैं, उनसे ज़्यादा सवाल लोग दिग्विजय सिंह से पूछेंगे. दिग्विजय सिंह खुलकर कमलनाथ का समर्थन कर रहे हैं लेकिन मुझे नहीं लगता है कि वह कमलनाथ के इस पहलू का साथ देंगे."
"कमलनाथ के इन बयानों से शीर्ष नेतृत्व भी ख़ुश नहीं होगा. मेरा मानना है कि कमलनाथ सेक्युलर नेता हैं लेकिन लोकप्रिय राजनीति की बयार में वह भी भटकते दिख रहे हैं. इसके बावजूद मैं कहूंगा कि कमलनाथ एक सेक्युलर नेता हैं."
हरदेनिया भी मानते हैं कि बीजेपी को इस तरह की राजनीति में महारत हासिल है. साल 1950 में जनसंघ के समय से धर्म की राजनीति की जा रही है और कांग्रेस चाह कर भी यहां से बीजेपी को मात नहीं दे पाएगी.
वो कहते हैं, "भोपाल के कांग्रेस के दफ़्तर में दुर्गा पूजा की जाती है, तमाम मौकों पर पूजा होती है, ये आज से पहले कांग्रेस के दफ़्तर में कभी नहीं होता था. कमलनाथ को लग रहा है कि हिंदू राष्ट्र की बात करके वो चुनाव में बीजेपी से मुक़ाबला कर लेंगे तो ऐसा नहीं होगा. वोटर यही मानेंगे कि जब दोनों पार्टियां हिंदुत्व की बात कर रही हैं तो क्यों ना उस पार्टी को वोट दें जो हमेशा से ही इसी की मांग करती थी."

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कमलनाथ के बागेश्वर बाबा से मुलाकात और कांग्रेस की आपत्ति
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि कमलनाथ जिस तरह से काम कर रहे हैं उससे बीजेपी को चुनौती ज़रूर मिल रही है.
दैनिक सांध्य प्रकाश के संपादक संजय सक्सेना कहते हैं कि छिंदवाड़ा जाकर बागेश्वर धाम के बाबा स्वामी धीरेन्द्र शास्त्री के बयान में भी फ़र्क साफ़ सुनने को मिला.
वो कहते हैं, "पहले बाबा हिंदू राष्ट्र की बात करते थे जबकि कांग्रेस सनातन धर्म की बात करती रही है. छिंदवाड़ा के अपने कार्यक्रम में बाबा का ये कहना कि - 'भारत में रहने वाला हर कोई सनातन है' - बहुत कुछ संकेत देता है. छिंदवाड़ा की सभा में बाबा हिंदू राष्ट्र की बजाय सनातन धर्म पर ही ज़ोर देते रहे."
कांग्रेस के ही उत्तर प्रदेश के नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने ट्वीट कर कहा, "मुसलमानों के ऊपर बुलडोज़र चढ़ाने और आरएसएस का एजेंडा हिंदू राष्ट्र की खुल्लमखुल्ला वकालत कर के 'संविधान' की धज्जियाँ उड़ाने वाले भाजपा के स्टार प्रचारक की आरती उतारना कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को शोभा नहीं देता."

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कांग्रेस का हिंदुत्व पर ज़ोर
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की ओर से इस आयोजन और कमलनाथ की भूमिका को लेकर कोई बयान सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आया है.
आचार्य प्रमोद ने एक अन्य ट्वीट में कहा, "आज रो रही होगी गांधी की 'आत्मा' और तड़प रहे होंगे पंडित नेहरू और भगत सिंह, लेकिन सेक्युलरिज्म के ध्वज वाहक जयराम रमेश और दिग्विजय सिंह जी और मल्लिकार्जुन खड़गे जी, सब ख़ामोश हैं."
पिछले कुछ सालों से कमलनाथ ने आम लोगों के बीच अपनी छवि 'हनुमान भक्त' के रूप में बनाने की कोशिश की है.
साल 2015 में उन्होंने अपने चुनावी क्षेत्र में हनुमान की एक विशालकाय मूर्ति की स्थापना भी की है जहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँचते हैं.
इसी साल दो अप्रैल को भोपाल के शिवाजी नगर स्थित मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी का मुख्यालय 'इंदिरा भवन' भगवा झंडों और बैनरों से पटा पड़ा था.
तब कमल नाथ ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के 'पुजारी प्रकोष्ठ' का गठन करके, उसकी बैठक का आयोजन किया था, जिसमें प्रदेश भर के विभिन्न मंदिरों के पुजारियों को आमंत्रित किया गया था.
राज्य के राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि कमल नाथ अपनी पार्टी की तय की गई रेखा या विचारधारा से थोड़ा हट कर भी चल रहे हैं और वो ऐसा डंके की चोट पर कर रहे हैं.
वो ऐसे प्रयोग भी कर रहे हैं जिनकी शायद किसी और नेता को पार्टी हाई कमान से सहमति भी नहीं मिल पाती.
उन्होंने बतौर प्रदेश अध्यक्ष 40 से 45 प्रकोष्ठों का गठन किया है जिनमे पुजारी प्रकोष्ठ के अलावा 'मठ मंदिर प्रकोष्ठ' और धार्मिक उत्सव प्रकोष्ठ भी शामिल हैं.
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