फ्रांस के अंदर बसा एक छोटा 'गणराज्य'

सौगीस गणराज्य

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    • Author, लेबी आयरेस
    • पदनाम, बीबीसी ट्रैवल

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स्रोतः स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय

11: 30 IST को अपडेट किया गया

पूर्वी फ्रांस के हाउट-डॉब्स में सौगीस गणराज्य की राष्ट्रपति मैडम जॉर्जेट बर्टिन-पोर्शेट अपनी प्याली में चाय निकाल रही थीं.

जैसे ही तीन बजे, वहां रखी बड़ी घड़ी में हरकत हुई और इस छोटे से देश का राष्ट्रगान बजने लगा.

क्या फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के पास भी ऐसी घड़ी है जो हर घंटे ला मार्शेज (फ्रांस का राष्ट्रगान) बजाती है?

यदि नहीं तो मैक्रों 85 साल की मैडम प्रेसिडेंट से एक-दो चीजें सीख सकते हैं.

तीन साल से फ्रांस के राष्ट्रपति होने के बावजूद मैक्रों अब तक बर्टिन-पोर्शेट से शिष्टाचार मुलाकात का वक़्त नहीं निकाल पाए हैं.

वह अपने 'देश' की दूसरी महिला नेता हैं और उनका 128 वर्ग किलोमीटर के देश पर शासन है.

शायद मैक्रों को उस मजाक के बारे में नहीं पता जो 1947 से चली आ रही है, जब सौगीस के एक अधिकारी ने स्विट्जरलैंड सीमा से लगती इस घाटी को गणराज्य घोषित किया था.

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इमेज कैप्शन, सौगीस गणराज्य की राष्ट्रपति गैब्रियल

मजाक में बना गणराज्य

बर्टिन-पोर्शेट के पिता जॉर्जेस मॉन्टबेनॉयट गांव के ऐबी (ईसाई मठ) के पास रेस्तरां चलाते थे.

"एक दिन वह कुछ अधिकारियों के लिए खाना तैयार कर रहे थे. डॉब्स क्षेत्र के नेता लुइस ओटावियानी जब वहां पहुंचे तो मेरे पिता ने मजाक में पूछा कि क्या उनके पास ली सौगीस आने का परमिट है?"

लुइस को भी हंसी मजाक पसंद था. उन्होंने जॉर्जेस से ली सौगीस का इतिहास पूछा और फिर कहा, "यह एक गणराज्य जैसा लगता है और गणराज्य को एक राष्ट्रपति की ज़रूरत होती है, इसलिए मैं आपको ली सौगीस गणराज्य का राष्ट्रपति नियुक्त करता हूं."

इस तरह पोर्शेट वंश शुरू हुआ. जॉर्जेस राष्ट्रपति बने और 1968 में निधन होने तक 11 गांवों पर शासन किया.

जॉर्जेस के निधन के बाद मई 1972 में मठ के पुजारी और गांव के मेयर ने जॉर्जेट की मां गैब्रियल को बताया कि गणराज्य के नागरिकों ने उनको अपना राष्ट्रपति चुना है.

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1,000 साल पुराना इतिहास

ली सौगीस का इतिहास एक हजार साल पुराना है जब 1,000 मीटर की ऊंचाई पर बसी घाटी दुर्गम हुआ करती थी.

यहां घने जंगल थे और भारी बर्फबारी के चलते यहां आना मुश्किल होता था.

यहां सिर्फ़ कुछ ईसाई भिक्षु एकांत में रहते थे. उन्हीं भिक्षुओं में से एक बेनॉयट ने यहां उपदेश देना शुरू किया, जहां आगे चलकर मॉन्टबेनॉयट ऐबी बना.

1150 में जॉक्स के स्थानीय शासक ने यह इलाका बेसान्कों के बिशप को उपहार में दे दिया.

स्विट्जरलैंड के सेंट ऑगस्टीन भिक्षुओं और फ्रांस के सवोई इलाके के कुछ मजदूरों ने फ़र और चीड़ के घने जंगलों को साफ किया.

बर्टिन-पोर्शेट कहती हैं, "उन्होंने इसे रहने लायक बनाया, ऐबी बनवाया और इसके इर्द-गिर्द 11 गांव बसे."

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दो देशों के बीच

डॉब्स नदी और ऊंचे पहाड़ों के कारण यह इलाका स्विट्जरलैंड से अलग है.

इस जगह ने ज़ल्द ही अपनी अलग खूबियां बना लीं जो घाटी के दोनों छोर पर बसे दो शहरों से बिल्कुल अलग हैं.

यहां के लोग आत्म-निर्भर हैं. कई लोग सवोई के मूल मेहनती वाशिंदों के वंशज हैं. उनके सरनेम आज भी वही हैं जो पीढ़ियों से चले आ रहे हैं.

बर्टिन-पोर्शेट कहती हैं, "मैं हमेशा लोगों को बताती हूं कि सौगीस गणराज्य (दो फ्रांसीसी शहरों) पोंटार्लियर और मॉर्टेउ और स्विट्जरलैंड और फ्रांस के बीच में है."

1637 में स्विट्जरलैंड के लोगों ने यहां नरसंहार किया, जिसके निशान ऐबी की दीवारों पर आज भी मौजूद हैं. हमले से यहां की नक्काशियों को नुकसान पहुंचा था.

इस जगह की अपनी बोली थी जो फ्रेंच, स्विस और इटैलियन अल्पाइन भाषा अर्पिटन का एक संस्करण थी.

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गणराज्य का राष्ट्रगान

1910 में मॉन्टेबेनॉयट में जन्मे स्थानीय पादरी जोसेफ बोबिलियर ने उसी बोली में एक मनोरंजक हाइम लिखी थी जिसे थियोडोर बोट्रेल ने कंपोज किया था.

उसी हाइम को गणराज्य का राष्ट्रगान मंजूर किया गया.

इसके बोल कुछ इस तरह हैं, "सौगीस होने का मतलब है फ्रेंच से थोड़ा ज़्यादा होना और यदि कोई स्विस यहां आने की हिम्मत करेगा तो भून दिया जाएगा."

गैब्रियल ने अपने पूर्वजों के संकल्प को मूर्त रूप दिया. उन्होंने ली सौगीस को दुनिया के नक्शे पर लाने के लिए ज़िंदगी के 33 साल लगा दिए.

ऐबी की मरम्मत के लिए उन्होंने गांवों में मेले लगाकर पैसे जुटाए. 99 साल की उम्र में उनका निधन हुआ. तब तक वही राष्ट्रपति रहीं.

बर्टिन-पोर्शेट कहती हैं, "ज़्यादातर बड़ी परियोजनाएं मेरी मां की देन हैं."

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गणराज्य की पहचान

ली सौगीस का राजकीय चिह्न 1973 में डिजाइन किया गया.

इसमें ऐबी का एक स्टाफ है, जॉक्स के शासक का हेलमेट है, फ़र का पेड़ और सौगीस घाटी में बहने वाले डॉब्स नदी है.

1981 में फ्रांचे-कोम्टे क्षेत्र के पुराने रंगों पर आधारित एक झंडा बनाया गया. 1987 में डाक टिकट बनाया गया. सैलानी परमिट मिलने पर ही यहां आ सकते हैं.

2005 में गैब्रियल के निधन के बाद उनकी बेटी राष्ट्रपति नहीं बनना चाहती थीं.

"मैंने कसम खाई थी कि मैं ऐसा कभी नहीं करूंगी. मैं हमेशा मां से शिकायत करती थी कि हम कभी लंच या डिनर साथ नहीं करते क्योंकि आप हमेशा काम करती रहती हो."

सौगीस की सरकार, जिसमें एक प्रधानमंत्री, महासचिव, दो कस्टम अधिकारी और राजदूत शामिल हैं, ने बर्टिन-पोर्शेट से राष्ट्रपति बनने की अपील की.

वह छह महीने तक इसका विरोध करती रहीं.

"उन्होंने मुझसे कहा कि मैं निर्विरोध चुनाव जीत गई हूं. मैंने उनसे कहा कि मैंने तो कोई चुनाव नतीजा देखा ही नहीं. फिर भी वे मुझे मनाते रहे." छह महीने बाद वह मान गईं.

"यदि मेरे पति लियोन ज़िंदा होते तो वह कभी नहीं चाहते कि मैं यह सब करूं. वह सेना में थे और मेरे राष्ट्रपति बनने पर उनका मेरे साथ रहना नहीं हो पाता."

"अगर मेरे बच्चे होते तो भी मैं यह नहीं कर सकती थी. मैं इसे नसीब नहीं कहूंगी, लेकिन मैं अकेली थी."

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लोकप्रिय राष्ट्रपति

बूढ़ी होने के बावजूद बर्टिन-पोर्शेट सक्रिय रहती हैं. किताबों की उनकी आलमारी नागरिकों को दिए जाने वाले सम्मान के दस्तावेजों से भरी हुई है.

हर साल अक्टूबर के पहले रविवार नेशनल डे के मौके पर गणराज्य की रक्षा करने वाले नागरिकों को चुना जाता है.

यूरोप के कुलीनों के साथ उनकी मुलाकात की तस्वीरों और अख़बार की कतरनों के कई फोल्डर हैं.

सौगीस गणराज्य को फ्रांस ने मान्यता नहीं दी है, लेकिन पूर्व राष्ट्रपति, ख़ास तौर पर निकोलस सारकोज़ी उनकी भूमिका की कद्र करते थे.

उन्होंने बर्टिन-पोर्शेट को एलिसी पैलेस में होने वाले सरकारी समारोहों में तीन बार आमंत्रित किया था.

बर्टिन-पोर्शेट का मेल-बॉक्स निमंत्रणों से भरा हुआ है, जिसका उनको जवाब देना है. यह पूर्णकालिक काम है. चाय के बाद हम प्रधानमंत्री सिमोन मार्गेट से मिलने ऐबी पहुंचे.

गैब्रियल और उनकी बेटी के प्रयासों से ऐबी की मरम्मत कर दी गई है और अब यह सौगीस का प्रमुख पर्यटन केंद्र है.

यहां एक छोटा म्यूजियम है जो सौगीस के इतिहास को समर्पित है. यहां एक तहखाना भी है, जहां 1950 तक भिक्षु रहते थे.

फरवरी की ठंडी दोपहर में भी यह मठ सैलानियों से भरा मिला. राष्ट्रपति को वहां देखकर वे उत्साहित हो गए.

स्कूली बच्चों की एक पार्टी वहां पहुंची तो बर्टिन-पोर्शेट ने हैंडबैग से अपना प्रेसिडेंशियल सैश निकाल लिया.

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भविष्य क्या है?

सौगीस घाटी की आर्थिक राजधानी गिली की आबादी 1,615 है. यहां के स्मोक हाउस में जॉर्जेट की एक मॉडल घूम-घूमकर आगंतुकों को यहां का इतिहास बताती है.

यहां एक बैरियर और कस्टम अधिकारी का पुतला बनाया गया है जो तस्करों को घूरता रहता है.

कभी-कभी असली अधिकारी आकर सैलानियों को रोकते हैं और परमिट सौंपते हैं.

सैलानी पुतलों को देखने स्मोक हाउस आते हैं और मॉर्टेउ सॉसेज (स्मोक्ड सॉसेज) और स्मोक्ड हैम का जायका चखते हैं.

स्मोक हाउस के मालिक पास्कल निकोलेट ख़ुद को फ्रेंच या सॉगेट क्या समझते हैं? वह कहते हैं, "मैं दोनों के फायदे लेता हूं."

73 साल के अस्तित्व के बाद इस गणराज्य पर एक संकट आया है. पिछले कुछ साल से बर्टिन-पोर्शेट अपने प्रधानमंत्री को संकेत दे रही हैं कि वह रिटायर होने जा रही हैं.

"मैं थक गई हूं. अब मैं उत्तराधिकारी चुनना चाहती हूं. मेरी जगह कोई नहीं लेना चाहता. यह शर्मनाक है."

मार्गेट उनकी स्वाभाविक पसंद हो सकते हैं, लेकिन वह परिवार और अपने आधिकारिक जिम्मेदारियों में पहले से व्यस्त हैं.

चूंकि बर्टिन-पोर्शेट को कोई संतान नहीं है, इसलिए राष्ट्रपति का पद पहली बार पोर्शेट परिवार से बाहर जाएगा.

सौगीस के आधिकारिक गाइड के मुताबिक "जॉर्जेट ने दिखाया कि राष्ट्रपति होना लोककथाओं का हिस्सा होने या सिर्फ़ नाम का राष्ट्रपति होने से कहीं ज़्यादा है."

"उन्होंने अपना हृदय इसमें मिला दिया है. उन्होंने इस पर अपनी छाप छोड़ी है और यह सुनिश्चित किया है कि गणराज्य हमेशा सौगेट आत्मा का प्रतीक है."

राष्ट्रपति के साथ एक दिन का वक्त गुजारे बिना गणराज्य को पर्यटकों को लुभाने वाली ब्रांडिंग डिजाइन कहकर खारिज किया जाना आसान है.

इसकी शुरुआत भले ही दोस्तों के बीच हंसी-मजाक से हुई थी, लेकिन बर्टिन-पोर्शेट और उनके अधिकारियों में यहां के इतिहास और परंपराओं को बचाने का एक जुनून है

अब ली सौगीस गणराज्य का अस्तित्व दांव पर है. अब यह यहां के नागरिकों पर निर्भर करता है कि वे आगे बढ़कर जिम्मेदारी उठाएं.

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