अमरीका की धरती पर इस जगह लड़ा गया था दूसरा विश्वयुद्ध

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    • Author, ब्रायन कार्लटन
    • पदनाम, बीबीसी ट्रैवल

उत्तरी कैरोलिना के ओक्राकोक द्वीप के निवासियों ने 23 जनवरी 1942 की रात को धमाका सुना था.

धमाके की आवाज़ तट की तरफ से आई थी और यह इतनी तेज़ थी कि घर भी हिल गए थे.

नॉर्थ कैरोलिना मैरीटाइम म्यूजियम सिस्टम के निदेशक जोसेफ श्वार्ज़र द्वितीय का कहना है कि जो कमरे में सो रहे होंगे उन्होंने भी धमाके की आवाज़ सुनी होगी.

लोग बाहर निकले तो देखा कि एक जहाज को डुबो दिया गया था. वह ब्रिटिश टैंकर एम्पायर जेम था, जिसे जर्मनी के एक यू-बोट (अंडरसी बोट या पनडुब्बी) ने तारपीडो किया था.

अगले छह महीने में ओक्राकोक के लोगों ने ऐसे बहुत से धमाके सुने और कई जहाजों के मलबे देखे. जर्मनी ने अपने ऑपरेशन ड्रमबीट ब्लॉकेड को लॉन्च कर दिया था.

अमरीका के ज़्यादातर लोगों के लिए दूसरा विश्वयुद्ध हजारों मील दूर लड़ा जा रहा था.

युद्ध के समाचार उनको रात के रेडियो बुलेटिन से मिलते थे. उसी से उन्हें गुआडलकैनाल (सोलोमन आइलैंड) या नॉरमैंडी (फ्रांस) के बारे में जानकारी मिलती थी.

लेकिन उत्तरी कैरोलिना के तट पर रहने वालों के लिए युद्ध उनके करीब लड़ा जा रहा था.

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जर्मनी का हमला

ऑपरेशन ड्रमबीट में जर्मनी ने अमरीकी बंदरगाहों से चलने वाले व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाया, क्योंकि उनमें से अधिकतर जहाज ब्रिटेन जा रहे थे.

युद्ध में अमरीका के शामिल होने से पहले ही उसके जहाज नियमित रूप से पूर्वी तट से रवाना हो रहे थे.

उनमें खाद्य सामग्री, एल्युमिनियम, स्टील और रबर जैसी चीजें जाती थी, जो युद्ध में ब्रिटेन के काम आ रही थी.

अमरीका आधिकारिक रूप से तटस्थ था, इसलिए जर्मनी खुलेआम उसके जहाजों को नहीं डुबो सकता था.

दिसंबर 1941 में हालात बदल गए, जब जर्मनी और जापान ने अमरीका से भी युद्ध की घोषणा कर दी.

एक महीने बाद यू-बोट्स अमरीका के पूर्वी तट तक पहुंच गए और ओक्राकोक में जहाजों को निशाना बनाने लगे.

स्मिथसोनियन नेशनल म्यूजियम ऑफ़ अमरीकन हिस्ट्री में सैन्य इतिहास के मुख्य क्यूरेटर डॉ. फ्रैंक ब्लाज़िक कहते हैं, "उत्तरी कैरोलिना तट पर समुद्र की तलहटी उथली है. वहां की रेत से जहाज बचना चाहते हैं."

"जहाज तट तक पहुंचकर थोड़ा पीछे हो जाते हैं ताकि वे उथली रेत से बच सकें. यू-बोट वहां छिप सकते थे और फ़ायर करके भाग सकते थे."

उन्होंने यही किया. सिर्फ़ जनवरी 1942 में ही जर्मन पनडुब्बियों ने पूर्वी तट पर मित्र देशों के 35 जहाज डुबो दिए.

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भारी नुकसान

डॉ. श्वार्ज़र के मुताबिक औसत रूप से हर जहाज पर इतना रसद भरा था कि उससे एक दिन के लिए पूरे इंग्लैंड का पेट भरा जा सकता था.

35 जहाज डुबोने का मतलब है कि उन पर लदी रसद से इंग्लैंड को महीने भर खिलाया जा सकता था.

ओक्राकोक जाने के रास्ते में मैंने भी उस विनाश के अवशेष देखे. हैटरस आइलैंड के पास फेरी का इंतज़ार करने के दौरान मैं "ग्रेवयार्ड ऑफ़ दि अटलांटिक म्यूजियम" में रुका.

युद्ध में बर्बाद हुए जहाजों के मलबे और उनकी तस्वीरों से ऑपरेशन ड्रमबीट से हुए नुकसान का पता चलता है, साथ ही 1942 से 1945 के बीच अटलांटिक में लड़े गए युद्ध की कहानी भी साफ होती है.

ओक्राकोक के निवासियों ने वह विनाशलीला अपनी आंखों से देखी थी. उन्होंने यू-बोट्स से होने वाले हमले देखे थे, धमाकों की आवाज़ें सुनी थी और डुबोए गए जहाजों के मलबे देखे थे.

श्वार्ज़र कहते हैं, "कई बार तो छात्र मलबे पर चढ़कर स्कूल जाते थे."

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श्रद्धांजलि

हर साल मई महीने के बीच में एक वीकेंड पर अमरीकी कोस्ट गार्ड और ब्रिटेन की रॉयल नेवी ओक्राकोक द्वीप पर एक समारोह करती है.

जमीन का वह छोटा टुकड़ा हमेशा के लिए ब्रिटेन को पट्टे पर दे दिया गया है जहां उसके 4 नाविक दफन हैं. यूनियन जैक वहां की पहचान है.

वहां फूलों की क्यारियां हैं और एक स्मारक बना है. वहां चार आदमियों की कब्रें हैं- लंदन के 24 साल के स्टैनली क्रेग, ब्लैकपूल के 27 साल के थॉमस कनिंघम और उनके दो साथी, जिनकी कभी पहचान नहीं हो सकी.

उनकी कब्रों के पास ही एक शिलापट्ट पर 37 नाम लिखे हैं. ये सभी HMT बेडफोर्डशायर के चालक दल के सदस्य थे.

उनमें कनाडा के 18 साल के रसेल सैमुएल डेविस भी थे, जो रॉयल कैनेडियन नेवल वालंटियर रिजर्व के हिस्से के रूप में युद्ध में शामिल हुए थे.

उनमें ब्रिटेन के सभी हिस्सों के नाविक थे, जिनमें शामिल थे सरे के 21 साल के विलियम फ्रेडरिक क्लेमेंस, गिर्वन (स्कॉटलैंड) के 32 साल के जॉन रोवन डिक और ब्रेकनॉकशायर के 31 साल के फ्रेडरिक विलियम बार्न्स.

वहां पहले विश्वयुद्ध के एक सैनिक रूपर्ट ब्रुक की एक कविता के अंश भी लिखे हैं- "गर मुझे मरना है / केवल इस बारे में सोचें/ विदेशी धरती पर कोई कोना है / जो सदा के लिए इंग्लैंड है."

उत्तरी कैरोलिना के एक द्वीप पर ब्रिटिश जहाज के चालक दल का स्मारक क्यों है?

इसका संबंध उस धमाके की आवाज़ से है जो ओक्राकोक के निवासियों ने उस रात सुनी थी और उसे रोकने की योजना से है.

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यू-बोट्स को रोकना

व्यावसायिक जहाजों को डूबने से बचाने में असमर्थ होने पर अमरीकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन रूजवेल्ट ने ब्रिटेन की मदद मांगी.

प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने अमरीका के पूर्वी तट पर गश्त के लिए 24 जहाज भेजने की पेशकश की. ये निजी जहाज थे, जिनको रॉयल नेवी की सेवा में ले लिया गया था.

समारोह में आए ब्रिटेन के नेवल अटैशे कमोडोर एंड्रयू बेटन कहते हैं, "उन जहाजों पर चालक दल के मूल सदस्य ही थे. साथ में रॉयल नेवी के कुछ रिजर्व गनर, नाविक और कमांडिंग अफसर थे."

उन जहाजों में से एक बेडफोर्डशायर था, जिस पर कनिंघम, क्रेग और उसके चालक दल के बाकी सदस्य थे.

यह गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाला ट्रॉलर था. रॉयल नेवी ने इसे अगस्त 1939 में खरीद लिया था और इस पर सोनार सिस्टम, 4 ईंच की डेक तोप, .303 कैलिबर लुइस मशीनगन और 80 से 100 डेप्थ चार्ज (पनडुब्बी मारक) लगाए गए थे.

यह जहाज एक अनुभवी यू-बोट शिकारी था. इसने ब्रिटेन के पास से जर्मन जहाजों को कई बार खदेड़ा था.

फरवरी 1942 में इसका काम बदल गया. बेडफोर्डशायर को अमरीकी तट पर जर्मन नाकेबंदी को तोड़ने के लिए भेज दिया गया.

आख़िरी पोस्ट

बेडफोर्डशायर ने दो महीने तक गश्ती की. 11 मई 1942 को यह शिकारी ख़ुद शिकार हो गया.

जर्मन यू-558 ने बेडफोर्डशायर और एक दूसरे ट्रॉलर HMT सेंट लोमन पर एक साथ तॉरपीडो मार दिया. बेडफोर्डशायर पूरे चालक दल के साथ डूब गया.

यह सब इतना जल्दी हुआ कि मदद मांगने का मौका तक नहीं मिला. कई दिनों तक किसी को पता भी नहीं चला कि बेडफोर्डशायर को क्या हुआ.

14 मई को चार नौसैनिकों के शव बहते हुए ओक्राकोक तट पर आ गए. उन चारों में से सिर्फ़ कनिंघम और क्रेग की पहचान हो सकी.

युद्ध के दिनों में आम तौर पर किसी सैनिक का शव उसके परिवार को भेजा जाता है.

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लेकिन यह द्वीप अलग था और 1942 में ओक्राकोक में शवों को सुरक्षित रखने वाली चीजें भी नहीं थीं. ऐसे में चारों नौसैनिकों को वहीं दफना दिया गया.

बेडफोर्डशायर के चालक दल के सदस्यों को सम्मान देने के लिए ओक्राकोक के निवासियों ने कब्रिस्तान के एक हिस्से में स्मारक भी बनाया, जहां उनको सैन्य सम्मान दिया गया.

डॉ. श्वार्ज़र कहते हैं, "ओक्राकोक का कब्रिस्तान एकमात्र ऐसी जगह है जिसे ब्रिटेन को दे दिया गया है. द्वीप के लोगों ने इस जमीन को हमेशा के लिए ब्रिटेन को दे दिया."

इस जमीन का पट्टा कॉमनवेल्थ वॉर ग्रेव्स कमीशन को दिया गया, जो दोनों विश्वयुद्धों में मारे गए सैनिकों की कब्रों की देखरेख करता है.

चूंकि जमीन का पट्टा हमेशा के लिए दे दिया गया है, इसलिए यहां बना स्मारक भी ब्रिटिश जमीन पर बना स्मारक माना जाता है.

साझा समारोह

समारोह के दौरान वहां शहीदों को फूलों से श्रद्धांजलि दी गई. यूएस कोस्ट गार्ड के पाइप बैंड ने संगीत बजाया.

अमरीकी और ब्रिटिन लीजन राइडर्स और पूर्व सैनिक वहां मौजूद थे. उन्होंने हर साल की तरह घायल सैनिकों और अन्य चैरिटी कार्यों के लिए पैसे इकट्ठे करने के लिए मोटरबाइक रैली की.

सभी समूहों के लोग दो तरह का पानी लेकर आए थे- उत्तरी कैरोलिना तट से और ब्रिटेन से.

दोनों पानी को मिलाया गया. यह इस बात का प्रतीक था कि ओक्राकोक और ब्रिटेन कैसे एक-दूसरे से जुड़े हैं.

इसके बाद बेडफोर्डशायर के चालक दल के सभी सदस्यों के नाम पुकारे गए, फिर 21 तोपों की सलामी के साथ समारोह पूरा हुआ.

37 लोग अपना घर-बार छोड़कर दूसरे देश के लोगों की रक्षा के लिए आए थे और अपनी जान कुर्बान कर दी. वे वास्तव में सम्मान के हकदार हैं.

बेडफ़ोर्डशायर के चालक दल को भुलाया नहीं गया है. विदेशी धरती के एक कोने में उनको सम्मान मिला है.

(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी ट्रैवल पर उपलब्ध है.)

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