वह शहर जिसने दुनिया को इटैलिक फ़ॉन्ट दिया

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    • Author, मार्गेरिटा गोकन सिल्वर
    • पदनाम, बीबीसी ट्रैवल

वेनिस के जिल्दसाज़ और काग़ज़ के कारीगर पाओलो ओल्बी के लिए एंटीका स्टांपेरिया आर्मेना (पुरानी आर्मेनियाई प्रिंट की कार्यशाला) जीवन भर का ख़्वाब सच होने जैसा है.

यह कार्यशाला वेनिस में 18वीं सदी के महल कज़ेनोबियो डेग्ली आर्मेनी पलाजो में है. इसे ज़ेनोबियो परिवार ने बनवाया था और अब आर्मेनियाई कैथोलिक चर्च के फादर इसके मालिक हैं.

किताब तैयार करने की इस कार्यशाला के पीछे एक बड़ा मक़सद है. यहां कई छापाख़ाने हैं, जिल्दसाज़ी का एक कमरा है और नई पीढ़ी को सिखाने के लिए एक ख़ास कमरा है.

ओल्बी को लगता है कि उनकी कार्यशाला से वेनिस के पुराने प्रकाशन उद्योग और किताब कारीगरी के अच्छे दिन लौटाने में मदद मिलेगी.

15वीं शताब्दी में योहानेस गुटेनबर्ग ने चल छापाख़ाना बनाया था. इसी वजह से जर्मनी को प्रकाशन उद्योग का जन्मस्थान माना जाता है. लेकिन इस उद्योग को आगे बढ़ाया वेनिस गणराज्य ने.

वेनिस के मर्सियाना राष्ट्रीय पुस्तकालय की फेडरिका बेनेडिटी कहती हैं, "यहां 1469 ईस्वी में टाइपोग्रोफिक कला आई. तब से यहां की ख़ूबियों के कारण किताब छपाई का ख़ूब विकास हुआ."

"भूमध्य सागर में वेनिस नौसेना की मुख्य शक्ति थी. यूरोप के ताक़तवर देशों और ग़ैर-यूरोपीय देशों के बीच कारोबार का यह प्रमुख केंद्र था."

व्यापारी और कारीगर यहां नई तकनीक और पूंजी लेकर आए. यहां कच्चे माल की कमी नहीं थी और व्यापार की स्थिति भी अनुकूल थी.

यह यूरोप और दूसरी जगहों पर भी मुद्रित सामग्री की मांग को पूरा करने में समर्थ था.

लेकिन व्यापार में दबदबा होना ही एकमात्र वजह नहीं थी. बेनेडिटी कहती हैं, "वेनिस के कारीगर और कारोबारी बहुत तेज़ थे और नयेपन की क़द्र करते थे."

उस समय यह शहर यूरोप के सबसे समृद्ध शहरों में से एक था. यह महानगर था और इतना ताक़तवर था कि रोम और कैथोलिक चर्च भी इसे अपने अधीन नहीं कर पाए थे.

गुटेनबर्ग की खोज से जिस संस्कृति की शुरुआत हुई थी, वेनिस ने उसे आगे बढ़ाने के लिए ज़मीन मुहैया कराई.

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प्रेस की आज़ादी

ओल्बी कहते हैं, "यहां छापाख़ाने खुले क्योंकि यहां प्रेस की आज़ादी थी. वेनिस गणराज्य था, यहां राजशाही नहीं थी."

वेनिस के प्रकाशकों में से एक थे एल्डस मनुटियस. वह मानवतावादी और ग्रीक और लैटिन के प्रशिक्षित विद्वान थे.

मनुटियस का जन्म रोम के पास बैसियानो शहर में हुआ था. वह 1490 में वेनिस चले आए थे.

दूसरे विद्वानों, कलाकारों और बुद्धिजीवियों की तरह वह भी यहां की आज़ादी से प्रभावित थे और चर्च के चंगुल से मुक्त बौद्धिक पुनर्जागरण की संभावनाओं से प्रेरित थे.

उन्होंने एल्डिन प्रेस के नाम से प्रकाशन समूह खोला और 1495 में पहली किताब छापी. इरोटेमाटा नामक इस किताब के लेखक थे कॉन्स्टेनटाइन लैस्कैरिस.

मनुटियस ने इसके बाद कई और किताबें छपीं. उन्होंने ग्रीक और लैटिन संस्कृति के प्रसार और इसकी रक्षा के लिए एक महत्वाकांक्षी प्रकाशन-शैक्षिक कार्यक्रम चलाया.

उनके प्रयासों से कई जाने-माने विद्वान और लेखक आकर्षित हुए. अपने कार्यकाल में उन्होंने डेसिडेरियस इरैस्मस, पिएट्रो बेम्बो और गिओवन्नी पाइको के साथ काम किया.

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प्रकाशक की दूरदर्शिता

बुद्धिजीवी होने के साथ-साथ मनुटियस दूरदर्शी भी थे. उन्होंने छोटे आकार की किताबें छापीं जिनको कहीं लाना ले जाना आसान था.

इसके लिए उन्होंने पेपरशीट को आठ हिस्सों में काटने की शुरुआत की.

उनकी किताबों को आज के पेपरबैक संस्करण के पुरखे कह सकते हैं. वे सस्ती भी थीं और उनको रखना भी आसान था.

ओल्बी कहते हैं, "वह बहुत उद्यमी थे. हो सकता है कि आज हमारे लिए यह महत्व की चीज़ न हो, लेकिन बहुत बड़े और भारी किताबों के उस ज़माने में यह बड़ा बदलाव था."

मनुटियस ने छपाई का सौंदर्यशास्त्र भी बदल दिया. उनके ज़्यादातर साथी प्रकाशकों ने गुटेनबर्ग के गॉथिक टाइप का इस्तेमाल जारी रखा, लेकिन एल्डिन प्रेस ने 'एल्डिनो' में छपाई शुरू की.

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एल्डिनो फ़ॉन्ट

आज दुनिया भर में इसे ही इटैलिक्स के रूप में जाना जाता है, क्योंकि इसकी खोज इटली में एक इटैलियन ने की थी.

इस नये फ़ॉन्ट को फ्रांसेस्को ग्रिफो ने बनाया था, जो पंच कटर थे और मनुटियस के साथ काम करते थे.

ओल्बी कहते हैं, "मनुटियस कुछ हल्का फ़ॉन्ट चाहते थे, जिसमें ग्रीक और लैटिन के पुराने साहित्य को पढ़ना आसान हो."

इटैलिक्स फ़ॉन्ट भारी गॉथिक फॉन्ट से कम जगह लेते थे. छोटी आकार की किताबों में इस प्रयोग ने आम जनता के लिए किताबों को सुलभ बना दिया.

बेनेडिटी कहती हैं, "वे सस्ते थे, उनको संभालना और ले जाना आसान था. इससे पढ़ाई को बढ़ावा मिला और नये पाठक तैयार हुए."

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मध्य वर्ग के पाठक

पहले कुछ गिने-चुने लोग-अभिजात वर्ग और पादरी- ही किताबें पढ़ पाते थे. अब मध्य वर्ग के कई लोग उनको ख़रीद सकते थे.

मनुटियस और एल्डिन प्रेस प्रकाशन उद्योग में सबसे आगे थे, लेकिन वेनिस के प्रकाशन उद्योग को बनाने में अकेले वही नहीं लगे थे.

कई सम्मानित प्रकाशक समूहों ने ख़ुद को स्थापित किया, जैसे- सेसा, गिउन्टा, स्कोटो और गिओलिटो.

बेनेडिटी कहती हैं, "15वीं और 16वीं शताब्दी में यह प्रकाशन उद्योग का मुख्य केंद्र था. इटली में छपने वाली कुल किताबों की 48.6% से लेकर 54% तक किताबें वेनिस में ही छपती थीं."

16वीं शताब्दी में इस शहर में छोटे-बड़े 250 प्रकाशक थे, जिन्होंने किताबों के कम से कम 25,000 संस्करण छापे और वेनिस को यूरोप में मुद्रण-प्रकाशन का केंद्र बना दिया.

इससे वेनिस के विद्वानों, संपादकों, लेखकों और अनुवादकों को कमाई का बड़ा ज़रिया मिला.

बेनेडिटी कहती हैं, "वेनिस में प्रकाशन गतिविधियां बढ़ने से कई बुद्धिजीवियों को रोज़गार के मौक़े मिले."

"1530 से 1560 के बीच कई विद्वान वेनिस में सक्रिय थे. वे न सिर्फ़ इटली के अलग-अलग इलाक़ों के थे, बल्कि दूसरे देशों के भी थे."

व्यापारिक केंद्र के रूप में शहर की आबादी की विविधता ने कई देशों के आप्रवासियों को आकर्षित किया. इससे कई भाषाओं में किताबें छपनी शुरू हुईं.

ग्रीक भाषा के साथ ग्लैगोटिक (सबसे पुरानी ज्ञात स्लाव लिपि), जर्मन, हिब्रू, अरबी और आर्मेनियाई संस्करण छपे.

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अच्छे दिन आएंगे

आर्मेनियाई समुदाय प्रकाशन उद्योग में ज़्यादा सक्रिय था. सैन लज़ारो द्वीप पर आर्मेनियाई कैथोलिक चर्च का मठ कई अहम प्रकाशन समूहों का केंद्र बना.

उसी संगठन ने आधुनिक वेनिस में परंपरागत जिल्दसाज़ी के पुनरुद्धार के लिए ओल्बी को अपने पलाजो में कार्यशाला खोलने का मौक़ा दिया है.

81 साल के ओल्बी वेनिस के सबसे मशहूर जिल्दसाज़ों में से एक हैं. उनका अपना छापाख़ाना है.

पिछले 50 साल से अधिक समय से वह काग़ज़ के साथ काम कर रहे हैं. वह हाथ से बंधी हुए नोटबुक बनाते हैं, चमड़े का फोटो अलबम बनाते हैं और हाथ से छपी डायरियां बनाते हैं.

जिल्दसाज़ी की परंपरा को ज़िंदा रखने के लिए उन्होंने 100 से अधिक जिल्दसाज़ों को प्रशिक्षण दिया है.

उनके प्रशिक्षुओं में से एक एन्ना स्कोवाक्रिकी ने उनको 2018 के होमो फ़ेबर प्रदर्शनी (यूरोपीय शिल्प कौशल प्रदर्शनी) में आमंत्रित किया तो ओल्बी अभिभूत रह गए.

वह कहते हैं, "सबसे सुंदर चीज़ें हाथ से बनाई जाती हैं."

प्रदर्शनी में यूरोपीय शिल्प की सुंदरता देखकर उनको इस बात की चिंता भी हुई कि वेनिस का कितना पतन हो गया है.

वह कहते हैं, "हम पापी हैं. हम इसके (संस्कृति के पतन के) ज़िम्मेदार हैं."

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नई पीढ़ी को प्रशिक्षण

वेनिस की जिल्दसाज़ी की कारीगरी को फिर से जीवित करना हमेशा ओल्बी का मक़सद रहा है. प्रदर्शनी में जाने के बाद उनको लगता है कि यह मुमकिन है.

एंटीका स्टांपेरिया आर्मेना खोलने के बाद वह पुस्तकों की कला को समर्पित एक सांस्कृतिक केंद्र बना रहे हैं.

वह जड़ों तक वापस जाना चाहते हैं इसलिए वह वेनिस की प्रिंटिंग के बारे में नई पीढ़ी को प्रशिक्षण देना चाहते हैं.

ओल्बी की कार्यशाला में फ़िलहाल काम करने वाले दो प्रशिक्षुओं में से एक स्कोवाक्रिकी कला पृष्ठभूमि की हैं.

वह कहती हैं, "किताबों से मुझे हमेशा प्यार रहा है, ख़ास तौर पर ऑब्जेक्ट के रूप में."

"मुझे काग़ज़ की गंध पसंद है, उनको छूना पसंद है, अपने हाथों से बनाना पसंद है और उनपर चित्र बनाना पसंद है."

स्कोवाक्रिकी ओल्बी के सपनों को पूरा करने में उनकी मदद कर रही हैं. "हम नई पीढ़ी के लोग इस विरासत को बचा सकते हैं और वेनिस को फिर से जीवंत बना सके हैं."

इस परियोजना में मुश्किलें भी हैं. कार्यशाला के भूतल तक अक्सर हाईटाइड का पानी तबाही मचाता रहता है.

नवीकरण के लिए या कारीगरों, प्रशिक्षुओं को उनके काम के पैसे देने के लिए फ़ंड की कमी है. लेकिन ओल्बी और स्कोवाक्रिकी दोनों आशावादी हैं.

अब तक उन्होंने जो कुछ भी हासिल किया है वह ओल्बी की लगन और इस विश्वास से हासिल किया है कि वेनिस की जिल्दसाज़ी की कला को फिर वेनिस का अभिन्न अंग बनाया जा सकता है, ठीक वैसे ही जैसे यह मनुटियस के समय था.

ओल्बी कहते हैं, "मैं जो भी जानता हूं, उस ज्ञान, कौशल और जुनून को अगली पीढ़ी को देना ही मेरा काम है."

(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी ट्रैवल पर उपलब्ध है.)

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