इमेज कैप्शन, दुनिया के जिन देशों में लोग लंबी उम्र तक जीते हैं वहां आमतौर पर फलों और सब्ज़ियों का सेवन प्रचुर मात्रा मे किया जाता है.....में
Author, डेविड रॉबसन
पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर
नए कोरोना वायरस के कारण बहुत से लोग समय से पहले जान गंवा रहे हैं. सिर्फ़ कोविड-19 ही क्यों, बहुत सी ऐसी बीमारियां हैं, जो वक़्त से पहले लोगों की ज़िंदगी छीन लेती हैं.
ऐसे में जब कोई 'जीवेत शरद: शतम्' यानी सौ साल जीने का आशीर्वाद देता है, तो वो आशीर्वाद सच कैसे साबित हो? आख़िर क्या करें कि सौ साल या उससे ज़्यादा जिएं?
इन सवालों के जवाब हमें दुनिया के उन इलाक़ों में रहने वालों से मिल सकते हैं, जहां के लोगों की औसत आयु बाक़ी दुनिया से कहीं अधिक है. जहां के रहने वाले अक्सर सौ साल से ज़्यादा जीते हैं.
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आख़िर, लंबी उम्र का राज़ क्या है? किन जगहों के लोग सबसे अधिक उम्र तक जीते हैं?
मध्य अमरीकी देश कोस्टारिका का निकोया, इटली का सार्डीनिया, यूनान का इकारिया, जापान का ओकिनावा और अमरीका के कैलिफ़ोर्निया राज्य का लोम्बा लिंडा. ये दुनिया के वो छह इलाक़े हैं जिन्हें वैज्ञानिक 'ब्लू ज़ोन' कहते हैं. जहां के रहने वालों की औसत उम्र बाक़ी दुनिया से कहीं ज़्यादा है. इन छह जगहों पर रहने वालों के सौ साल की उम्र तक पहुंचने की संभावना ज़्यादा होती है.
इन इलाक़ों को ब्लू ज़ोन सबसे पहले इटली के महामारी विशेषज्ञ गियान्नी पेस और बेल्जियम के आबादी विशेषज्ञ माइकल पोउलेन ने कहा था. उसके बाद पेस और पोउलेन ने अमरीकी पत्रकार डैन ब्यूटेनर के साथ मिल कर इन छह जगहों के बारे में किताब भी लिखी.
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इमेज कैप्शन, लंबी उम्र चाहने वालों के लिए व्यायाम को एक ज़रूरी कारण के रूप में माना जाता है.
लंबी उम्र की लॉटरी
डैन ब्यूटेनर ने अपनी किताब के लिए रिसर्च के दौरान पाया कि ब्लू ज़ोन कहे जाने वाले इलाक़ों में रहने वालों की ज़िंदगी में कई ख़ूबियां हैं.
पहली चीज़ तो है खानपान. ब्लू ज़ोन इलाक़ों में रहने वाले लोग कम खाते हैं. जैसे कि, जापान के ओकिनावा में लोग अस्सी फ़ीसद पेट भरने के बाद खाना बंद कर देते हैं. वैज्ञानिक कहते हैं कि अगर हम दस फ़ीसद कैलोरी कम ले लेते हैं, तो इससे उम्र बढ़ने की रफ़्तार धीमी हो जाती है.
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के जीन विशेषज्ञ डी. गोविंदराजू कहते हैं कि कम खाना खाने से हमारे डीएनए में नुक़सानदेह परिवर्तन नहीं होते.
दूसरी बात ये है कि ब्लू ज़ोन वाले इलाक़ों में लोग शाकाहारी खाने को तरज़ीह देते हैं. इससे भी उनके मेटाबॉलिज़्म यानी खाना पचाने की क्षमता पर सकारात्मक असर पड़ता है.
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आध्यात्मिक संबंध
खानपान की आदतों के अलावा, ब्लू ज़ोन में रहने वालों के सामाजिक जीवन की भी अहमियत है. इन सभी क्षेत्रों के लोग ऐसे समुदायों में रहते हैं, जिनके बीच आपसी संबंध बेहद मज़बूत हैं और रिसर्च से ये बात साबित हो चुकी है कि मज़बूत सामाजिक संबंध हमारा तनाव कम करते हैं. दोस्ती या अन्य सामाजिक रिश्ते हमारी मानसिक और शारीरिक गतिविधियों के लिए अच्छे माने जाते हैं. अच्छे संबंध हमारे स्वास्थ्य को उसी तरह प्रभावित करते हैं, जैसे खान-पान और वर्ज़िश.
सौ साल से ज़्यादा उम्र तक जीने के लिए धार्मिक आस्था भी अहम रोल निभाती है क्योंकि ब्लू ज़ोन के लोग धार्मिक आस्था वाले होते हैं. जैसे कि कैलिफ़ोर्निया के लोमा लिंडा के रहने वाले सेवेंथ डे एडवेंटिस्ट चर्च के अनुयायी हैं. वहीं, कोस्टारिका के निकोया और इटली के सार्डीनिया के रहने वाले कैथोलिक ईसाई हैं. तो ग्रीस के इकारिया द्वीप के रहने वाले ग्रीक ऑर्थोडॉक्स चर्च में विश्वास रखते हैं.
डैन ब्यूटेनर ने अपनी किताब में लिखा था कि उन्होंने ब्लू ज़ोन में क़रीब ढाई सौ लोगों से बात की. ये सभी लोग किसी न किसी आध्यात्मिक समुदाय का हिस्सा थे.
धार्मिक आस्था हमारे जीवन में बहुत अहम भूमिका निभा सकती है. अगर आप परेशान हैं, तो आप धर्म की शरण ले सकते हैं. इससे आपकी उम्र पांच वर्ष तक बढ़ सकती है.
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तो, हो जाए एक प्याली?
इन मोटी बातों के सिवा दुनिया के छह ब्लू ज़ोन या अधिक औसत आयु वाले इलाक़ों की अपनी अपनी ख़ास ख़ूबियां हैं. जैसे कि ग्रीस के इकारिया द्वीप के लोग दिन में कई बार चाय या कॉफ़ी पीते हैं. जानकार कहते हैं कि दिन में इन गर्म पेय पदार्थों के कुछ प्याले दिल की बीमारियों से दूर रखते हैं. क्योंकि इनमें कई छोटे छोटे पोषक तत्व जैसे कि मैग्नीशियम, पोटैशियम, नियासिन और विटामिन ई पाए जाते हैं.
इन पेय पदार्थों की मदद से टाइप-2 डायबिटीज़ से भी बचा जा सकता है. इससे आपकी खाना पचाने की क्षमता बेहतर होती है. अगर इसमें कम कैलोरी वाला खाना, फलों और सब्ज़ियों की ख़ुराक को जोड़ दें, तो एक आदर्श खान पान का चार्ट तैयार दिखता है.
वीडियो कैप्शन, कोरोनावायरस ने कई व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हुए हैं पर घर में बने खाने की मांग बढ़ी है.
मीठा-तीखा समाधान
जापान के ओकिनावा द्वीप के लोग शकरकंद और कड़वा तरबूज़ बहुत खाते हैं.
शकरकंद में विटामिन ए, सी और ई प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. इसमें मिलने वाला पोटैशियम ब्लड प्रेशर कम करता है. शकरकंद में फाइबर बहुत होते हैं, जो हमारा पेट साफ़ रखते हैं.
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गोले प्रत्येक देश में कोरोना वायरस के पुष्ट मामलों की संख्या दर्शाते हैं.
स्रोत: जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी, राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियां
आंकड़े कब अपडेट किए गए 5 जुलाई 2022, 1:29 pm IST
इसी तरह कड़वा तरबूज़ जो ब्लैक टी जैसा लगता है, जो ओकिनावा के लोगों को डायबिटीज़ जैसी बीमारियों से बचाता है.
शानदार नज़ारों वाले इलाक़े
दुनिया के जिन ब्लू ज़ोन का हमने ज़िक्र किया, वो बेहद ख़ूबसूरत मंज़र वाले हैं.
जैसे कि इटली का सार्डीनिया. ये पहाड़ी इलाक़ा बेहद ख़ूबसूरत है. यहां खेती करने वालों को अक्सर पहाड़ियों पर चढ़ना उतरना पड़ता है. इससे उनकी वर्ज़िश भी हो जाती है.
वहीं, ग्रीस के इकारिया में हल्की रेडियोएक्टिविटी के लक्षण मिले हैं. वैज्ञानिक कहते हैं कि ये रेडियोएक्टिव तत्व इस द्वीप के झरनों में मिलते हैं. इकारिया के रहने वाले इन झरनों को अमरता के झरने कहते हैं.
ऐसा मेडिकल टेस्ट जिससे साबित हो सके कि किसी शख्स को कोरोना वायरस था और अब उसमें कुछ इम्युनिटी आ गई है. यह टेस्ट खून में एंटीबॉडीज का पता लगाता है, जिन्हें बीमारी से लड़ने के लिए शरीर पैदा करता है.
बिना लक्षण वाले
ऐसा शख्स जिसे बीमारी हुई मगर उसमें कोई लक्षण नहीं दिखाई दिए. कुछ स्टडीज से पता चला है कि कोरोना वायरस का शिकार हुए कुछ लोगों में तेज़ बुखार या कफ़ जैसे आम लक्षण नहीं नज़र आए.
कोरोना वायरस
वायरस समूह में से एक वायरस जिससे मनुष्यों या जानवरों में गंभीर या हल्की बीमारी हो सकती है. पूरी दुनिया में फैले कोरोना वायरस से कोविड-19 बीमारी हो रही है. सामान्य सर्दी या इंफ्लूएंजा (फ़्लू) फैलाने वाले दूसरे तरह के कोरोना वायरस हैं.
कोविड-19
कोरोना वायरस की वजह से फैल रही बीमारी का सबसे पहले पता 2019 के अंत में चीन के वुहान में लगा. यह मूलरूप में फ़ेफ़ड़ों पर असर डालता है.
संक्रमण की तेज़ी को रोकना
ट्रांसमिशन की दर को कम करना ताकि चार्ट पर प्रदर्शित किए जाने पर मामलों की संख्या के आधार पर पीक को फ्लैट कर कर्व को नीचे लाया जाए ताकि स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते बोझ को कम किया जा सके.
फ़्लू
इंफ्लूएंजा का संक्षिप्त नाम. एक वायरस जो कि सीजनल बीमारियों में मनुष्यों और जानवरों में फैलता है.
सामुदायिक प्रतिरोधक क्षमता
एक बड़ी आबादी तक पहुंचने के बाद किस तरह से एक बीमारी का फैलाव सुस्त पड़ता है.
लड़ने में सक्षम
ऐसा शख्स जिसका शरीर किसी बीमारी के सामने टिक सके या उसे रोक दे वह इससे इम्यून कहा जाता है. एक बार जब कोई शख्स कोरोना वायरस से उबर जाता है तो ऐसा माना जाता है कि वह एक निश्चित अवधि तक इस बीमारी का फिर से शिकार नहीं हो सकता.
वायरस के असर करने की अवधि
किसी बीमारी का शिकार होने और उसका लक्षण दिखाई देना शुरू होने के बीच की अवधि
लॉकडाउन
आवाजाही या रोज़ाना की ज़िंदगी पर पाबंदियां, जिनमें सार्वजनिक इमारतें बंद हैं और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए कहा गया है. कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कई देशों में लॉकडाउन को कड़े उपायों के तौर पर लागू किया गया है."
शुरुआत
किसी क्लस्टर या अलग-अलग इलाकों में तेज रफ्तार से बीमारी के कई मामले सामने आना.
महामारी
किसी गंभीर बीमारी का कई देशों में एकसाथ तेजी से फैलना महामारी कहलाता है.
एकांतवास
किसी संक्रामक बीमारी को फैलने से रोकने के लिए इसकी जद में आए लोगों को अलग रखना.
सार्स
सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम एक कोरोना वायरस का ही प्रकार है जो कि एशिया में 2003 में शुरू हुआ था.
सेल्फ-आइसोलेशन
घर पर ही रहना और अन्य लोगों से सभी तरह के संपर्क से बचना ताकि बीमारी को फैलने से रोका जा सके.
सामाजिक दूरी
अन्य लोगों से दूर रहना ताकि बीमारी के ट्रांसमिशन की रफ्तार कम की जा सके. सरकार की सलाह है कि अपने साथ रह रहे लोगों के अलावा दोस्तों और रिश्तेदारों से न मिलें. साथ ही सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल से भी बचें.
आपातकालीन स्थिति
किसी संकट के वक्त सरकार द्वारा रोज़ाना की जिंदगी पर पाबंदी लगाने के मकसद से उठाए गए कदम. इसमें स्कूलों और दफ्तरों को बंद करना, लोगों की आवाजाही पर पाबंदी लगाना और यहां तक कि सैन्य बलों को तैनात करना ताकि रेगुलर इमर्जेंसी सेवाओं को सपोर्ट किया जा सके."
लक्षण
संक्रमण से लड़ने के लिए शरीर की कोशिश के तौर पर इम्यून सिस्टम से किसी बीमारी के संकेत. कोरोना वायरस का मुख्य लक्षण बुखार, सूखी खांसी और सांस लेने में दिक्कत होना है."
टीका
ऐसा इलाज जिससे शरीर एंटीबॉडीज पैदा करता है, जो कि बीमारी से लड़ता है और आगे के संक्रमण से लड़ने की इम्युनिटी देता है."
वेंटीलेटर
ऐसी मशीन जो कि ऐसे वक्त पर शरीर के लिए सांस लेने का काम करती है जब फ़ेफ़ड़े काम करना बंद करने लगते हैं.
विषाणु
एक छोटा सा एजेंट जो कि किसी जीवित सेल के भीतर अपनी कॉपी बना लेता है. वायरस की वजह से ये सेल मरने लगती हैं और शरीर की सामान्य केमिकल प्रक्रियाओं को अवरुद्ध कर देती हैं जिससे बीमारी हो जाती है.
मुख्य कहानी नीचे जारी है
ट्रांसलेटर
इन सभी शब्दों का क्या मतलब है?
इसी तरह कैलिफ़ोर्निया का लोमा लिंडा भी हल्के रेडिएशन के लिए जाना जाता है. हालांकि इसके फ़ायदे अभी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हैं.
संयम का सिद्धांत
कुल मिलाकर कहें, तो ब्लू ज़ोन में रहने वालों की लंबी उम्र का राज़ कोई एक नहीं है. बल्कि इसके कई कारण हैं.
फलों और सब्ज़ियों से भरपूर मगर कम खाना, नियमित रूप से वर्ज़िश करना, कॉफ़ी-पीना और अपने मुश्किल दौर में आध्यात्म की शरण लेना. ये वो कारण हैं, जो ब्लू ज़ोन में रहने वालों की उम्र बढ़ाते हैं. आप भी इन नुस्खों को अपनी ज़िंदगी में अमल में ला सकते हैं.
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कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है
सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं
कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.
ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.
लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.
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जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.
यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.
ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.
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वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.
इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.
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दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.
ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.
फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.
बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
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हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.
इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.
अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
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अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.
अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.
क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड
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ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.
ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.
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कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.
लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.
कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ
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शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.
फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.
क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.
मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.
फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.
यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.
अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.
सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.
मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.
यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.
गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.
मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.
अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.
ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.
बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.
ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.
हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.