कोरोना वायरस का 'पेशेंट ज़ीरो' आख़िर कौन है?

कोरोना वायरस

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    • Author, फ़र्नांडो डुअर्टे
    • पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर
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कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर चीनी प्रशासन और विशेषज्ञों के बीच मतभेद हैं, ख़ासतौर पर इस मुद्दे पर कि कोरोना वायरस का 'पेशेंट ज़ीरो' कौन है?

'पेशेंट ज़ीरो' या 'इंडेक्स केस' का अर्थ होता है किसी वायरस या बैक्टीरिया की बीमारी से संक्रमित होने वाला पहला व्यक्ति.

जीन विश्लेषण में हुई प्रगति के चलते किसी वायरस की उत्पत्ति के स्रोत का पता लगाना संभव है जिससे यह जाना जा सकता है कि किसी बीमारी को फैलाने वाले पहले लोग कौन हैं.

यह पता लगाने से कुछ महत्वपूर्ण सवालों के जवाब मिल सकते हैं कि यह बीमारी कब, कहां और कैसे फैलना शुरू हुई.

इस जानकारी से वर्तमान और भविष्य में और लोगों को संक्रमित होने से बचाने में मदद मिल सकती है.

क्या हम जानते हैं कि कोरोना वायरस या Covid-19 का 'पेशेंट ज़ीरो' कौन है? छोटा सा जवाब ये है कि - 'नहीं.'

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कोरोना वायरस का पहला मामला

चीनी प्रशासन ने पहले बताया था कि कोरोना वायरस का पहला मामला 31 दिसंबर को सामने आया था और पहले मामलों में कई लोग जिनमें निमोनिया के बुखार जैसे लक्षण थे. उनका संबंध हूबे प्रांत के वुहान शहर के माँस-मछली और जानवरों के एक बाज़ार से था.

ये क्षेत्र प्रकोप का केंद्र है और जॉन हॉपकिंस विश्वविद्यालय द्वारा इकठ्ठा किए गए आंकड़ों के अनुसार चीन और शेष विश्व में सामने आए मामलों में से लगभग 82% यानी 75,000 से अधिक मामले यहीं पाए गए हैं.

हुआन थोक बाज़ार का संबंध कोरोना वायरस से पहले सामने आए मामलों से जोड़ कर देखा गया है. चीनी प्रशासन ने इस बाज़ार को जल्द ही बंद कर दिया.

हालांकि, लांसेट मेडिकल जर्नल में चीनी शोधकर्ताओं द्वारा प्रकाशित एक शोध के अनुसार Covid-19 से संक्रमित होने वाले पहले व्यक्ति का मामला 1 दिसंबर 2019 को दर्ज हुआ (यानी बहुत पहले) और यह व्यक्ति हुआन के मछली थोक बाज़ार के संपर्क में नहीं आया था.

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बीमारी के लक्षण

वुहान के जिनिनटान अस्पताल की एक वरिष्ठ डॉक्टर और रिपोर्ट तैयार करने वाले शोधकर्ताओं में से वू वेनजुआन ने बीबीसी की चीनी सर्विस को बताया कि यह मरीज़ उम्रदराज़ था, और अलज़ायमर से पीढ़ित था.

वू वेनज़ुआन ने कहा, "वह मरीज़ मछली बार से चार पांच बस स्टॉप की दूरी पर रहता था. वह बीमार था और इसलिए वह बाहर गया ही नहीं था."

उन्होंने यह भी कहा कि तीन अन्य लोगों में आने वाले दिनों में बीमारी के लक्षण दिखाई दिए लेकिन उनमें से दो वुहान के संपर्क में नहीं आए थे.

शोधकर्ताओं ने ये भी पाया कि प्रकोप के शुरुआती चरण में अस्पताल में दाख़िल हुए 41 मरीज़ों के सैंपल में 27 लोग ऐसे थे जो 'मछली बाज़ार के संपर्क में' आए थे.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार कोरोना प्रकोप कि शुरुआत में सामने आई परिकल्पना अभी भी प्रबल है कि ये बीमारी किसी जानवर के ज़रिए मनुष्य में फैली.

मगर क्या एक व्यक्ति से इतना तीव्र प्रकोप फैल सकता है?

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वायरस का संक्रमण

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, पश्चिमी अफ़्रीका में 2014 से 2016 तक फैला इबोला प्रकोप सबसे अधिक व्यापक था और इससे 11,000 से अधिक लोग मारे गए थे और 28,000 से अधिक लोग संक्रमित हुए थे.

इस बीमारी को जन्म देने वाले वायरस के बारे में पहली बार 1976 में पता चला था.

ईबोला प्रकोप का असर दो साल तक रहा. हालांकि, ईबोला के मामले दस देशों मे पाए गए इनमें से अधिकतर पश्चीमी अफ़्रीका में थे.

मगर कुछ मामले अमरीका, ब्रिटेन, स्पेन और इटली में भी पाए गए थे.

वैज्ञानिकों का निष्कर्ष था कि पश्चीमी अफ़्रीका में फैले ईबोला प्रकोप की शूरुआत गिनी के दो साल के लड़के से हुई और माना जाता है कि उसमे इस वायरस का संक्रमण चमगादड़ों से हुआ.

माना जाता है कि यह बच्चा घर के बाहर एक ऐसे पेड़ के नीचे खेल रहा होगा जहां चमगादड़ों का झुंड रहता था.

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'सुपर स्प्रेडर'

लेकिन इबोला के प्रकोप के स्रोत पर अपनी रिपोर्ट प्रकाशित करने से पहले वैज्ञानिकों ने इस बच्चे के गांव का दौरा किया और सैंपल इकठ्ठा करने के साथ-साथ वहां के लोगों से बात की.

लेकिन विश्व की सबसे प्रसिद्ध 'पेशेंट ज़ीरो' मैरी मेलन हैं जिन्हें टायफ़ाइड मैरी भी कहा जाता था.

न्यूयॉर्क में 1906 में हुए प्रकोप की शूरुआत उनसे हुई. वह आयरलैंड से अमरीका आकर बसी थी. वह न्यूयॉर्क के धनी परिवारों में खाना बनाने का काम करती थीं.

डॉक्टरों ने पाया कि जहां-जहां वह काम करती थीं उन सभी परिवारों में टायफ़ॉइड का संक्रमण हुआ.

डॉक्टर उन्हें स्वस्थ संक्रामक बताते थे यानी एक ऐसा व्यक्ति जिसमें बीमारी के संक्रमण के बावजूद बीमारी के लक्षण दिखाई ना दें यानी वो कई अन्य लोगों को संक्रमित करते रहते हैं.

अन्य लोगों की तुलना में कुछ लोग कहीं अधिक प्रभावी तरीके से संक्रमण फैला सकते हैं और इन्हें 'सुपर स्प्रेडर' कहा जाता है.

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'पेशेंट ज़ीरो'

लेकिन 'पेशेंट ज़ीरो' शब्द के साथ कलंक का भाव जुड़ा हुआ है. कई स्वास्थ्य विशेषज्ञ किसी रोगी के दर्ज हुए पहले मामले के तौर पर निशानदेही का विरोध करते हैं क्योंकि इससे उसके साथ भेदभाव या उसके उत्पीड़न की आशंका होती है.

इसका सबसे मशहूर उदाहरण वो व्यक्ति है जिसे ग़लती से एड्स महामारी का 'पेशेंट ज़ीरो' मान लिया गया था.

गीटेन डुगास, कनाडा के समलैंगिक विमानकर्मी एक ऐसे रोगी थे जिन्हें इतिहास में सबसे अधिक भर्त्सना झेलने वाले रोगी के रूप में देखा जाएगा क्योंकि उन्हें 1980 के दशक में अमरीका में HIV के प्रसार के लिए ज़िम्मेदार ठहराया गया. लेकिन, तीस साल बाद वैज्ञानिकों ने पाया कि वह HIV के पहले रोगी नहीं हो सकते थे.

वीडियो कैप्शन, कोरोना वायरस से बचना चाहते हैं तो क्या इस बार होली नहीं मनानी?

2016 में एक शोध के ज़रिए पता चला कि वायरस दरअस्ल 1970 के दशक की शुरुआत में ही केरेबियाई क्षेत्र से अमरीका पहुंच चुका था. हालांकि 'पेशेंट ज़ीरो' शब्द ग़लती से ही HIV महामारी के चलते प्रचलन में आया.

लॉस एंजेलिस और सैन फ़्रेंसिस्को में 80 के दशक में एड्स के फैलने के कारणों की जांच कर रहे सेंटर फ़ॉर डिसीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के शोधकर्ताओं ने कैलिफ़ॉर्निया राज्य से बाहर के किसी भी मामले को इंगित करने के लिए "O" अक्षर का इस्तेमाल किया गया मगर अन्य शोधकर्ताओं ने ग़लती से इसे 0 (ज़ीरो) समझा.

इस तरह 'पेशंट ज़ीरो' शब्द प्रचलन में आया.

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