धरती को संवारिए, पैसे भी कमाइए

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- Author, रिचर्ड ग्रे
- पदनाम, बीबीसी कैपिटल
छोटे-छोटे टीलों पर खिलते एस्टर, हरी पत्तेदार बेलें और स्ट्रॉबेरी के गुच्छे स्कॉट मोरान के इर्द-गिर्द झूल रहे हैं. तितलियां एक फूल से दूसरे फूल पर मंडरा रही हैं और लाल पूंछों वाले हॉक का जोड़ा अपने बच्चों को शिकार करना सिखा रहा है.
मोरान किसी देहाती इलाके की सैर पर नहीं निकले हैं. वह सैन फ्रांसिस्को के बीच में एक बिल्डिंग की छत पर खड़े हैं.
मोरान इसी बिल्डिंग में काम करते हैं. अभी वह लंच ब्रेक पर हैं. शहर की चिल्ल-पों यहां भी उनके कानों तक पहुंच रही है.
मोरान कैलिफोर्निया एकैडमी ऑफ़ साइंसेज़ में काम करते हैं. इस एकैडमी ने ढाई एकड़ (एक हेक्टेयर) छत का रूप बदल दिया है. यहां 17 लाख पौधे लगे हैं, जिनमें कीट-पतंगें हैं और चिड़ियों के घोंसले भी.
इस इमारत को बड़ी मेहनत से डिजाइन किया गया है. यह दुनिया की चुनिंदा इको-फ्रेंडली इमारतों में से एक है.
एकैडमी की छत पर सोलर पैनल लगे हैं, जिनसे बिल्डिंग में जरूरी बिजली का 5 फीसदी हिस्सा मिल जाता है. वॉशरूम के पाइप में बहने पानी भी बिजली पैदा करता है.
कुदरती रोशनी के हिसाब से खुलने और बंद होने वाले झरोखे बिल्डिंग के तापमान को नियंत्रित रखते हैं. उजाले के लिए सूरज की रोशनी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है.
मोरान इस एकैडमी में 15 साल से हैं. उन्होंने इसकी डिजाइन करने और इसे बनाने में भी मदद की है. अब आर्किटेक्चर के सीनियर डायरेक्टर के रूप में वे बिल्डिंग के ग्रीन सिस्टम को देखरेख करते हैं.
मोरान को लगता है कि वे एक महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं और भविष्य में इस तरह के काम को और ज्यादा तवज्जो मिलेगी.
"इमारतों को अब इस तरह से डिजाइन करने की जरूरत है जिससे बिजली और पानी की ज्यादा से ज्यादा बचत हो सके. इसके लिए नई टेक्नोलॉजी चाहिए और इसे संभव कर सकने वाले लोगों की मांग बढ़ने वाली है."
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) का अनुमान है कि हरित इमारतें बनाने के लिए 2030 तक 65 लाख नई नौकरियां पैदा होंगी.
आने वाले दशकों में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े क्षेत्रों में यह ऊर्जा के बाद दूसरा सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला सेक्टर होगा.
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हरियाली है तो जीवन है
हरित इमारतें वक़्त की मांग हैं. जलवायु परिवर्तन को रोकने के लक्ष्य मुश्किल होते जा रहे हैं. बिजली की लागत बढ़ रही है, पानी कम हो रहा है और मौसम बार-बार विध्वंसक रूप दिखा रहा है.
आर्किटेक्ट, इंजीनियर और कंस्ट्रक्शन कंपनियां मिलकर ऐसी इमारतें बना रहे हैं, जिनमें बिजली की खपत कम से कम हो और जरूरत की थोड़ी बिजली पैदा भी हो.
ऐसी इमारतों में पानी के दोबारा इस्तेमाल की व्यवस्था होती है और ये एयर कंडीशनिंग या सेंट्रल हीटिंग का इस्तेमाल किए बिना खुद को ठंडा या गर्म रख सकती हैं.
नई टेक्नोलॉजी से पुराने घरों और दफ्तरों को भी इको-फ्रेंडली इमारतों में बदला जा रहा है.


सन् 2000 में अमरीका में सिर्फ़ 41 कंस्ट्रक्शन परियोजनाओं को ग्रीन बिल्डिंग की मान्यता थी. पिछले साल यह आंकड़ा 65 हजार तक पहुंच गया. दुनिया के दूसरे देशों में भी यही ट्रेंड चल रहा है.
वर्ल्ड ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल की मुख्य कार्यकारी टेरी विल्स कहती हैं, "पेरिस समझौते के तहत सरकारों ने तय किया है कि वे ग्लोबल वार्मिंग के असर को 2 डिग्री सेल्सियस तक रोक कर रखेंगीं."
"गर्मी बढ़ाने वाली ग्रीन हाउस गैसों का 38 फीसदी उत्सर्जन बड़ी इमारतों से होता है. अगर हमने सभी इमारतों को हरा-भरा नहीं बनाया तो हम 2 डिग्री का लक्ष्य हासिल नहीं कर पाएंगे."
सेंट्रल लंदन की जिस बिल्डिंग में विल्स का दफ्तर है, उसमें वे सारी खूबियां हैं जो भविष्य के किसी घर या दफ्तर में होनी चाहिए.
बिल्डिंग में लगी ज्यादातर चीजें या तो दोबारा इस्तेमाल वाली हैं या फिर प्राकृतिक स्रोतों से आई हैं. इससे कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलती है.
रोशनी का इंतजाम इस तरह किया गया है जिससे दिन में खिड़कियों से सूरज की प्राकृतिक रोशनी आ सके. वॉशरूम का पानी सोलर एनर्जी से गर्म किया जाता है.

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धरती को बचाने वाली नौकरियां
विल्स कहती हैं, "हमें विशेषज्ञता की जरूरत है. हमें इंजीनियर चाहिए जो बता सकें कि गैर-पारंपरिक ऊर्जा की व्यवस्था कैसे करनी है. हमें आर्किटेक्ट चाहिए जो खूबसूरत डिजाइन बना सकें."
"हमें शहरी नियोजक चाहिए जो पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इंतजाम कर सकें. हमें वित्तीय विशेषज्ञों की भी जरूरत है जो जानते हैं कि हरित इमारतों का क्या करना है."
अमरीका के श्रमिक सांख्यिकी ब्यूरो का अनुमान है कि 2026 तक सोलर पैनल लगाने वालों की नौकरी में 105 फीसदी की बढोतरी होगा. इससे अमरीका में 11,800 नई नौकरियां पैदा होंगी.
चीन में सरकार ने नये लक्ष्य तय किए हैं. पंचवर्षीय योजना के तहत शहरी क्षेत्र की 50 फीसदी नई इमारतों को ग्रीन सर्टिफिकेट लेना जरूरी है.
आईएलओ (ILO) के अर्थशास्त्री निकोलस मैत्रे कहते हैं, "पुरानी इमारतों को भी मौसम के अनुकूल बनाने की जरूरत है, जिससे उस पर बदलते मौसम का प्रभाव कम पड़े."
मैत्रे अर्थव्यवस्था पर ग्रीन बिल्डिंगों के असर पर शोध कर रहे हैं. वह कहते हैं कि ब्रिटेन में मौजूदा आधारभूत ढांचे में 10 लाख डॉलर के निवेश से 20 नौकरियां पैदा होंगी, चीन में करीब 200 और ब्राजील में 160. इनमें कई नौकरियां कुशल कामगारों की होंगी.


"कई देश जलवायु परिवर्तन के मुताबिक खुद को ढाल रहे हैं. ऐसे में विनिर्माण क्षेत्र में ढेरों नौकरियां पैदा होंगी. मिसाल के लिए, अर्जेंटीना में 15 साल के नेशनल वाटर प्लान से दो लाख नौकरियां पैदा होंगी."
कैलिफोर्निया एकैडमी ऑफ़ साइंसेज़ की बिल्डिंग बनाने वाले इंजीनियरों में शामिल एलिस्डैर मैकग्रेगॉर कहते हैं, "इंजीनियरिंग में हमें जितने लोगों की जरूरत है, हम उतने की भर्ती नहीं कर पा रहे हैं."
90 के दशक में ग्रीन बिल्डिंग का मतलब था मानो 100 लोगों की कोई गुप्त सोसाइटी हो जो कहीं कांन्फ्रेंस करने जा रही हो. सन् 2000 के बाद इसमें तेज़ी आ गई.
अब मैकग्रेगॉर के कई बड़े क्लाएंट, जिनमें सरकारें और बड़े कॉरपोरेट घराने भी शामिल हैं, चाहते हैं कि वह उनके लिए काम करें."

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महिलाओं के लिए मौका
ब्रिटेन की ओपन यूनिवर्सिटी में टिकाऊ निर्माण की विशेषज्ञ एलिस मॉनकास्टर को लगता है कि कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री में महिलाओं के लिए भी दरवाजे खुल रहे हैं.
एलिस कहती हैं कि अभी इस क्षेत्र में विविधता की बहुत कमी है. उन्हें लगता है कि मांग बढ़ने से महिलाएं भी पर्यावरण से जुड़े पेशों को अपनाने के लिए आगे बढ़ेंगी.
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के मुताबिक आने वाले दिनों में चीन और भारत में भी इको-डिजाइनर जैसी नौकरियां महत्वपूर्ण हो जाएंगी.
विल्स कहती हैं, "किसी बिल्डिंग में होने वाले कार्बन उत्सर्जन को आंकने वाले और उसे कम करने में मदद देने वाले विशेषज्ञों की मांग बढ़ने वाली है. अब तक जिन कामों में गिने-चुने विशेषज्ञ लगे थे, वहां भी कुशल लोगों की मांग बढ़ेगी."


विल्स एक दीवार दिखाती हैं जो पौधों और हरी बेलों से लगभग पूरी तरह ढंकी हुई है. दीवार पर लगे पौधे इमारत के अंदर जाने वाली हवा को साफ कर देते हैं.
दुनिया भर में इस तरह की दीवारों का चलन बढ़ रहा है. ऑस्ट्रेलिया के सिडनी सेंट्रल पार्क में दुनिया का सबसे ऊंचा वर्टिकल गार्डन बनाया गया है. लंदन में गूगल के नये हेडक्वार्टर की विशाल छत को हरियाली से भर दिया गया है.
विल्स कहती हैं, "हमारे पास विशेषज्ञ स्टाफ हैं जो इन हरित दीवारों पर काम करते हैं. खड़ी दीवारों पर पौधे लगाना, उनको पानी देना, उनकी देखभाल करना मज़ेदार भी है और चुनौतियों से भरा हुआ भी."
मोरान कहते हैं ग्रीन बिल्डिंगों में कुशल लोगों की जरूरत है जो अब तक कंस्ट्रक्शन सेक्टर के लिए अनजान थे.
"सामान्य हरियाली बनाने की तुलना में लिविंग रूफ की देखरेख करने के लिए अलग तरह के कौशल की जरूरत है. आपको पर्यावरण की समझ होनी चाहिए. सूरज की दिशा और हवाओं के रुख से क्या फ़र्क पड़ता है, यह पता होनी चाहिए. इसमें टेक्नोलॉजी भी जुड़ रही है."
"पूरी बिल्डिंग एक सेंट्रल कंप्यूटर सिस्टम से नियंत्रित होती है. इसलिए हम एक आईपैड लेकर भी घूम सकते हैं और जरूरी समन्वयन कर सकते हैं. भविष्य की इमारतों में ऐसी और खूबियां जुड़ेंगी."
(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.)
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