क्या रात के ढाई बजे जग जाना है कामयाबी का राज़?

मार्क वॉलबर्ग, हॉलीवुड, विदेशी सिनेमा

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    • Author, ब्रायन लुफ़किन
    • पदनाम, बीबीसी कैपिटल

हॉलीवुड स्टार और दो बार ऑस्कर पुरस्कारों के लिए नॉमिनेट किए गए मार्क वॉलबर्ग ने पिछले हफ्ते ख़ुलासा किया कि वे रात के ढाई बजे जग जाते हैं.

जब आप सो रहे होते हैं, उस वक़्त वॉलबर्ग जिम में कसरत कर रहे होते हैं. वे जिम में 90 मिनट बिताते हैं. फिर गोल्फ़ खेलते हैं और प्रार्थना करते हैं. वॉलबर्ग शाम में साढ़े सात बजे ही सोने चले जाते हैं.

जल्दी जगने वालों में वॉलबर्ग अकेले नहीं हैं. ऐप्पल के सीईओ टिम कुक सुबह पौने चार बजे जगते हैं. डिज़्नी के बॉस बॉब आइगर सुबह 4 बजकर 25 मिनट पर वर्कआउट शुरू कर देते हैं.

अमरीका में एनबीए के खिलाड़ी भी सुबह बहुत जल्दी जिम में पहुंच जाते हैं.

कॉरपोरेट जगत के कामयाब लोगों के प्रोफ़ाइल में एक बात आम दिखती है कि अगर आप सफल होना चाहते हैं तो जल्दी उठिए.

क्या हम सबको जल्दी जगना चाहिए? क्या इससे हमें ज्यादा काम करने में मदद मिलेगी?

हो सकता है कि ऐसा हो, लेकिन इसकी कीमत भी चुकानी पड़ सकती है.

टिम कुक, एप्पल, आईफोन, टिम कुक की जिंदगी

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कितनी जल्दी जगा जाए

रात के ढाई बजे दिन की शुरुआत करने का मतलब है बहुत ही लंबा दिन और लगभग न के बराबर आराम. लेकिन वॉलबर्ग के सोने के वक़्त को देखकर लगता है कि वे हर रोज़ सात घंटे ज़रूर सोते हैं.

काम करने के लिए यह ज़रूरी है. नींद से समझौता हो तो सेहत बिगड़ जाती है. दिमाग भी सही से नहीं चलता.

वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के क्रिस्टोफर बार्न्स और मिशिगन यूनिवर्सिटी की ग्रेचेन स्प्रिट्ज़र ने इस विषय पर गहन शोध किया. उनके सामने प्रश्न यह था कि क्या कंपनियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके कर्मचारी पूरी नींद लें

वॉलबर्ग के मामले में स्प्रिट्ज़र का कहना है कि उन्होंने सिर्फ़ अपने वर्किंग शिड्यूल को अलग समय में शिफ्ट किया है. सुबह बहुत जल्दी उठने से ऐसा लगता है कि वे ज्यादा काम करते हैं.

स्प्रिट्ज़र कहती हैं, "कुछ फायदे तो अवश्य हैं. आप एक अनुशासन में बंधते हैं और अपने लिए ज्यादा वक़्त निकाल पाते हैं. परिवार वालों के जगने से और सहकर्मियों के मिलने से पहले आप अपना काम कर चुके होते हैं."

लेकिन बहुत जल्दी सोने से सामाजिक संबंधों को नुकसान होता है. सामाजिक रिश्ते नहीं बन पाते, जो अच्छी मानसिक सेहत के लिए जरूरी हैं.

रात को जल्दी सोना, सुबह जल्दी उठना, नींद नहीं आना, बहुत नींद आना

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शाम के साढ़े सात बजे ही बेडरूम में चले जाने का मतलब है कि आप परिवार के साथ डिनर नहीं कर पा रहे और दोस्तों के साथ सामाजिक गतिविधियों में भी हिस्सा नहीं ले पा रहे.

चकवा और उल्लू

इंसान के सोने और जगने का समय उनके शरीर की आंतरिक घड़ी से नियंत्रित होता है. शरीर खुद सिग्नल देता है कि कब सोना है और कब जगना है.

कई लोग तय समय पर जगने और तय समय पर सोने के इतने अभ्यस्त हो जाते हैं कि अलग टाइम ज़ोन में जाने पर उनका शरीर बुरी तरह जेटलैग का शिकार हो जाता है.

सोने और जगने के समय के आधार पर शोधकर्ता लोगों को मोटे तौर पर दो समूहों में बांटते हैं.

जल्दी जगने और जल्दी सोने वालों को चकवा (पक्षी) की तरह कहा जाता है. देर से सोने और देर से जगने वालों को उल्लू की संज्ञा दी जाती है.

बार्न्स कहते हैं कि बचपन में लगभग सभी व्यक्ति चकवा की तरह होते हैं. वे जल्दी जगते और जल्दी सो जाते हैं.

जवानी आते ही इंसान उल्लू की तरह होने लगता है. उसे देर से नींद आती है और वह देर से ही जगना चाहता है. बुढ़ापे में इंसान फिर से जल्दी जगने और जल्दी सोने लगता है.

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बार्न्स मानते हैं मार्क वॉलबर्ग की तरह रात के ढाई बजे जगने वाले व्यक्ति विरले होते हैं. "मनोवैज्ञानिक और व्यावहारिक रूप से आप सबसे अच्छा तब महसूस करते हैं, जब अपने शरीर की आंतरिक घड़ी के अनुसार सोते और जगते हैं."

जो लोग शरीर की आंतरिक घड़ी को नज़रअंदाज़ करके अपने के साथ ज़्यादती करते हैं और दूसरों को भी ऐसा करने को प्रेरित करते हैं, वे किसी और लक्ष्य से प्रेरित होते हैं.

धौंस जमाने की कोशिश

जल्दी जगने वाले लोग इस बात को लेकर दूसरे पर रौब क्यों गांठते हैं? ऐसा करके वे दिखाना चाहते हैं कि वे ज्यादा काम करते हैं.

भारत सहित कई देशों की संस्कृतियों में ऐसा मान लिया गया है कि जो लोग जल्दी जगते हैं वे ज्यादा अच्छे होते हैं.

2014 में 120 वयस्क लोगों पर एक अध्ययन हुआ था जिसमें पाया गया कि जिन्होंने दिन में देर से काम शुरू किया, उनको सुपरवाइजर से खराब रेटिंग मिली. सुपरवाइजर ने उनको कर्तव्यनिष्ठ कर्मचारी नहीं माना.

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दिलचस्प है कि जो सुपरवाइजर खुद देर से जगने वाले थे उन्होंने कम नकारात्मक रेटिंग दी.

बार्न्स कहते हैं, "लोग आपके काम को आपके शिड्यूल के हिसाब से भी आंकते हैं. अगर आप सुबह जल्दी अपना काम शुरू करते हैं तो आपको पसंद किया जाता है."

सवाल है कि आप हासिल क्या करना चाहते हैं? क्या आप सिर्फ लोगों को प्रभावित करना चाहते हैं?

अगर आप सुन सकते हैं तो अपने शरीर की सुनिए. यह समझिए कि आपके शरीर को कब आराम की जरूरत है.

यदि आप अधिक काम करने के लिए सुबह जल्दी उठ रहे हैं तो अपने काम का मूल्यांकन कीजिए. खुद से यह जरूर पूछिए कि आप सुबह बहुत जल्दी क्यों उठ रहे हैं- ज्यादा काम करने के लिए या किसी को प्रभावित करने के लिए?

वजह चाहे जो हो, आपकी सेहत सबसे जरूरी है. बार्न्स के शोध ने दिखाया है कि जबर्दस्ती जगना और शरीर को काम में लगना अनैतिक है.

बार्न्स कहते हैं, "अगर आप काम में मन नहीं लगा पा रहे हैं तो आप गलतियां करेंगे." इस स्थिति से बचने की जरूरत है.

(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी कैप्टिल पर उपलब्ध है.)

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