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....जिसका नाम है उसैन 'थंडर' बोल्ट | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उसैन बोल्ट कहिए या फिर कहिए बिजली की रफ़्तार से दौड़ने वाला ऐसा धावक, जिसने बीजिंग ओलंपिक में धूम मचा दी है. ऐसी धूम जिसे आने वाले कई वर्षों तक याद रखा जाएगा. अगर बीजिंग ओलंपिक का पहला हाफ़ सुपरस्टार तैराक माइकल फेलप्स के नाम रहा तो दूसरा हाफ़ सिर्फ़ और सिर्फ़ उसैन बोल्ट के नाम रहा. उसैन बोल्ट का नाम हर जगह है. उनके चर्चे हर अख़बारों और टेलीविज़न चैनलों पर हैं. खेल की दुनिया इस नए हीरो की जय-जयकार करने में लगी है. ऐसा हो भी क्यों ना. बोल्ट ने अपने प्रदर्शन से सबको हैरत में डाल दिया है. अब उनके प्रदर्शन पर नज़र डालिए- 100 मीटर की दौड़ में विश्व रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल, 200 मीटर की दौड़ में विश्व रिकॉर्ड के साथ गोल्ड और फिर 4x100 मीटर रिले में विश्व रिकॉर्ड के साथ गोल्ड. एक ही ओलंपिक में इन तीनों प्रतियोगिताओं में विश्व रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल हासिल करने वाले वे पहले खिलाड़ी हैं. ख़ास अनुभव बीजिंग से काफ़ी दूर टेलीविज़न सेट पर इन तीनों दौड़ को देखना एक ख़ास अनुभव था. ऐसा अनुभव जो लंबे समय तक शायद ही दिलो-दिमाग़ से उतरे.
कंगारु की तरह ट्रैक पर कुलांचे भरते उसैन बोल्ट की तस्वीर जल्द ही याद्दाश्त ने नहीं जाएगी. क़रीब एक लाख दर्शकों के बीच उसैन बोल्ट को दौड़ते और विश्व रिकॉर्ड बनाते देख एक बात तो साफ़ लगी इस खिलाड़ी को अपनी जीत का पूरा भरोसा था. हर दौड़ में उनके और बाक़ी के धावकों की दूरी इस बात का सबूत थी कि उन्हें चुनौती देने वाला कोई नहीं था. ट्रैक एंड फ़ील्ड प्रतियोगिता में अमरीकी अधिपत्य को चुनौती देने वाले जमैका के उसैन बोल्ट का नाम कुछ महीने पहले तक अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में इतनी जगह नहीं बटोर पाया था. मई में न्यूयॉर्क में उन्होंने 100 मीटर की दौड़ में विश्व रिकॉर्ड बनाया और अब देखिए सिर्फ़ तीन महीने बाद उसैन बोल्ट कहाँ से कहाँ पहुँच गए हैं. सवाल क्यों इस 21 अगस्त को अपना 22वाँ जन्मदिन मनाने वाले उसैन बोल्ट को मीडिया का एक वर्ग भले ही घमंडी कहे और भले ही अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति को जीत का जश्न मनाने के उनके तरीक़े पर आपत्ति हो लेकिन बोल्ट को इसकी फ़िक्र कहाँ.
फ़िक्र उन लोगों को भी नहीं है जिन्हें बोल्ड ने अपना प्रशंसक बना लिया है. अब बताइए तीन पदक पर एक अरब से ज़्यादा की आबादी वाले भारत में इतना जश्न है तो इतने छोटे देश का खिलाड़ी ओलंपिक जैसी प्रतियोगिता में कीर्तिमान स्थापित करके क्यों न ख़ुशी से पागल हो जाए. ये अजीब बात है लेकिन है सच कि क्रिकेट प्रेमी देश में पैदा होने के कारण बोल्ट का भी पहला प्यार क्रिकेट ही था. शुरू में बोल्ट का पहला प्यार क्रिकेट ही था और वे तेज़ गति से गेंदबाज़ी करते थे. हाई स्कूल में उनके क्रिकेट कोच ने उनकी गति को पहचाना और उन्हें सलाह दी कि वे ट्रैक एंड फ़ील्ड मुक़ाबले की ओर ध्यान दें. वर्ष 2001 में 200 मीटर की दौड़ में हाई स्कूल प्रतियोगिता में पदक जीतने वाले उसैन बोल्ट 2002 में वर्ल्ड जूनियर विश्व चैम्पियनशिप में अपना जलवा दिखाया और कई पदक जीते. अगले ही साल यानी 2003 में वर्ल्ड यूथ विश्व चैम्पियनशिप में उन्होंने नया रिकॉर्ड बनाया. उसके बाद तो लगातार उनके अच्छे प्रदर्शन का सिलसिला ही चल पड़ा. 22 वर्षीय उसैन बोल्ट के लिए बीजिंग ओलंपिक तो शुरुआत है. अपने तेवर और प्रदर्शन से उन्होंने जता दिया है कि वे लंबी रेस का घोड़ा हैं. |
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