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भारत को बीजिंग ओलंपिक से बहुत सीखना है! | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी इन दिनों अपने पूरे दलबल के साथ बीजिंग में हैं. इस दल में शामिल सभी अधिकारी दिल्ली में 2010 में होने वाले कॉमनवेल्थ खेलों की संस्था से जुड़े हुए हैं. मीडिया से बात करते हुए कलमाड़ी ने बताया कि चीन में आम आदमी की भागीदारी ने ही बीजिंग ओलंपिक खेलों को अब तक इतना कामयाब किया है. उनका कहना था,"आप ट्रैफ़िक प्रबंधन देखिए. दूर हो रहे खेलों को देखने के लिए आप सिर्फ़ आधे घंटे में पहुँच जाएँगे. इसकी वजह है कि विशेष नंबरों की कारें आपको अलग लेन से लेकर जाएँगी और उसी तरह लेकर भी आएँगी. हमने ऐसे ही अलग लेन की बात जब दिल्ली में करने की बात की तो हमारा ज़बरदस्त विरोध किया गया." बीजिंग का नया एयरपोर्ट बीजिंग में हर चीज़ पूरी तरह व्यवस्थित तैयार की गई है. हाल ही में तैयार किए गए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का प्रबंधन देखकर आप खुश हो जाएँगे. ओलंपिक खेलों में हिस्सा लेने पहुँचे लोगों का सामान बीजिंग जाने वाली फ़्लाइट पर पहले ही अलग तरह से चिन्हित कर दिया जाता है. इस सामान को फ़्लाइट में चढ़ाने और उतारने में प्राथमिकता दी जाती है. हालांकि, भारतीय दल का अनुभव इससे कुछ उलट रहा लेकिन सामान्य तौर पर प्रबंधन बेहत चुस्त है. भारतीय दल का सामान सभी यात्रियों के जाने के आधे घंटे बाद पहुँचा. शुक्रवार को उदघाटन समारोह के पहले तो हवाई अड्डे का नज़ारा ही एकदम अलग था. आपने शायद ही कभी इतने सारे निजी जेट विमानों को एक साथ खड़े देखा हो. शुक्रवार को यहाँ तक़रीबन 50 निजी जेट विमान एक साथ खड़े हुए थे क्योंकि, हर देश से ख़ास मेहमान यहाँ पहुँचे हुए थे. भाषा की परेशानी नहीं बीजिंग खेलों के लिए मदद करने वाले स्वयंसेवक आपसे टूटी-फूटी अंग्रेज़ी में बात करेंगे. लेकिन यकीन मानिए आपको ज़रा भी परेशानी नहीं होगी. हाँ ये आप ज़रूर महसूस करेंगे कि वो लोगों से कह रहे हों कि आप ज़रा धीरे बोलें ताकि वो समझ सकें कि आप क्या कहना चाहते हैं? स्वयंसेवक जैसे ही आपकी बात समझ जाएगा वो तेज़ी से आपको आपके गंतव्य तक पहुँचाने की कोशिश करेगा. हर ओलंपिक बस पर आपको स्वयंसेवक मिलेंगे. जैसे ही बस रुकती है ये ऐलान कर आपको बताएँगे कि ये स्टॉप कौन सा है. बेहद कड़ी सुरक्षा ऐसा माना जा रहा था कि बीजिंग ओलंपिक के लिए सुरक्षा बेहद-बेहद कड़ी होगी. हर शख्स और उसके सामान की बार-बार जाँच की जाएगी.
लेकिन अब तक अनुभव बेहद सुखद रहा. सभी लोगों की सिर्फ़ एक बार पूरी सावधानी के साथ जाँच की गई उसके बाद उन्हें तेज़ी से उनके गंतव्य तक पहुँचा दिया गया. खास बात ये है कि आपको सुरक्षा जाँच बिंदु पर बिल्कुल भी सुरक्षाकर्मियों से ज़रा भी असहजता महसूस नहीं होगी क्योंकि सुरक्षाकर्मी और स्वयंसेवक दोनों ही आपको आसमानी रंग की टी-शर्ट में आपकी मदद के लिए तैयार दिखाई देंगे. लेकिन उनसे कुछ ही दूरी पर हथियार लिए पुलिसवाले खड़े नज़र आ जाएँगे जो सुरक्षा चौकी से निकल कर आने वालों पर बेहद पैनी निगाह रखते हैं. ज़रा किसी ने सुरक्षा चौकी से बच कर निकलने की कोशिश की और इन पुलिस वालों ने उसे पूछताछ के लिए रोका. कैमरा, लैपटॉप, बैग और खाने-पीने की चीज़ों की सघनता से सिर्फ़ एक बार जाँच की जाएगी उसके बाद आप हर जगह आसानी से आ-जा सकते हैं. इंटरनेट पर पाबंदी पूरी दुनिया में भले ही इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों की तादाद दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हो लेकिन चीन में तस्वीर कुछ और ही कहती है. चीन में इंटरनेट बेहद प्रतिबंधित क्षेत्र है. बीजिंग ओलंपिक तक के लिए इंटरनेट सिर्फ़ एक सर्विस प्रोवाइडर से मिलता है वो भी बेहद महँगे दाम पर. अगर आप एक महीने तक इंटरनेट का कनेक्शन लेना चाहते हैं तो आपको 11 हज़ार युआन (तकरीबन 70 हज़ार रुपए) तक चुकाने होंगे. इसके बावजूद भी इंटरनेट की सुविधा आपको शहर के कुछेर इलाक़े में ही मिल पाएगी. यहाँ तक कि मुख्य प्रेस केंद्र और अंतरराष्ट्रीय ब्रॉडकास्ट केंद्र पर भी कुछ ख़ास वेबसाइटों पर पूर्ण प्रतिबंध है. हाँ, लेकिन खेलों से जुड़ी हर जानकारी आपको बड़ी आसानी से बिना कोई क़ीमत चुकाए मिल जाएगी क्योंकि इसके लिए जगह-जगह पर विशेष कंप्यूटर लगाए गए हैं. |
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