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शनिवार, 09 अगस्त, 2008 को 04:23 GMT तक के समाचार
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ओलंपिक खेलों की रंगारंग शुरुआत
ओलंपिक समारोह
बीजिंग ओलंपिक के उदघाटन को खेल जगत का अब तक का सबसे भव्य समारोह माना जा रहा है

शुक्रवार शाम प्रकाश किरणों की चकाचौंध के बीच ओलंपिक के इतिहास ने बीजिंग आगमन की दस्तक दे दी. रंगारंग उदघाटन समारोह विशेष तौर पर बनाए गए बर्ड नेस्ट स्टेडियम में हुआ.

दुनिया भर के खेल प्रतिनिधियों, कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों और लगभग नब्बे हज़ारों दर्शकों की उपस्थिति में चीनी कलाकारों ने अपनी पाँच हज़ार साल पुरानी संस्कृति की मंत्रमुग्ध कर देने वाली झलक पेश की है.

पिछले दस वर्षों से चली आ रही ओलंपिक की अथक तैयारी का निचोड़ इन समारोहों में स्पष्ट दिखाई दिया.

चीन के स्वर्णिम अतीत से आधुनिक युग की ओर क़दमताल में जितने पड़ाव आए उन सबकी झलक दिखाने की कोशिश की गई.

चीन के स्वर्णिम अतीत से आधुनिक युग तक जितने पड़ाव आए, उन सबकी झलक दिखाई गई

बीजिंग के आसमान में शानदार आतिशबाज़ी के ज़रिए चीन ने मानो ये याद दिलाने की कोशिश की कि बारूद उसी की देन है.

यही नहीं चीन की दीवार, छपाई कला, रेशम कारोबार से लेकर उन सबकी झलकियाँ देखने को मिलीं जो दुनिया को चीन की देन हैं.

लगभग दस हज़ार कलाकार समारोह की शाम को रंगीन बनाने में जुटे.

ऐतिहासिक क्षण

चीन के राष्ट्रपति हू चिंताओ ने ओलंपिक समारोह शुरु होने पर कहा, "जिस ऐतिहासिक क्षण का हमें इंतज़ार था, वो आ गया."

ओलंपिक समारोह को देखते हुए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी और बीजिंग के मुख्य हवाई अड्डे को बंद कर दिया गया था.

24 अगस्त तक चलने वाले ओलंपिक में भाग लेने के लिए दुनिया भर के 11 हज़ार खिलाड़ी बीजिंग में एकत्रित हुए हैं. वे 302 खेलों में हिस्सा लेकर एक हज़ार मैडल जीतने के लिए खेलेंगे.

माना जा रहा है कि 1980 के दशक की शुरुआत में जब खेलों का बहिष्कार हुआ था, उसके बाद से यह पहला आयोजन है जिसका इतना राजनीतिकरण हुआ है.

मुख्य स्टेडियम
सुरक्षा के भी पुख़्ता इंतज़ाम किए गए हैं

प्रदूषण से लेकर मानवाधिकार तक बहुत से विवादों से गुज़रने के बाद उद्धाटन समारोह को बीजिंग नेशनल स्टेडियम के अलावा टीवी पर लाखों लोगों ने देखा.

लंबी और खर्चीली तैयारी

चीन को इन ओलंपिक खेलों की तैयारियाँ करने में सात साल का समय लगा है और इन पर लगभग 40 अरब डॉलर का ख़र्च आया है.

चीन ने दुनिया को यह दिखाने में कोई कोर क़सर बाक़ी नहीं छोड़ी कि वह भी ओलंपिक जैसा विशाल आयोजन कर सकता है.

चीन ने इन ओलंपिक खेलों के लिए ख़ासतौर से बीजिंग नेशनल स्टेडियम तैयार किया है जो स्टील की छड़ों से बना है और इसी लिए इसे 'बर्ड्स नेस्ट' यानी 'चिड़ियों का घोंसला' का नाम भी दिया गया है.

बीजिंग ओलंपिक खेलों के आयोजन में शामिल एक अधिकारी तीऊ मिंगते का विचार है कि चीन के लोग इन ओलंपिक खेलों के लोकर गौर्वान्वित महसूस कर रहे हैं और बहुत उत्साहित भी हैं.

 दुनिया इन खेलों के ज़रिए एक ऐसे देश को समझने की कोशिश करेगी जिसका पाँच हज़ार साल का एक इतिहास और परंपरा है. वे चीन को एक अदभुत देश पाएंगे और मेरा ख़याल है कि इससे दुनिया भर में चीन के बारे में राय बदलेगी
ज़्याक रॉख़े, अध्यक्ष, अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति

वे कहते हैं, "चूँकि आप ख़ुद यहाँ हैं इसलिए आप ख़ुद यहाँ के माहौल को महसूस कर सकते हैं. आम लोगों में इन खेलों को लेकर जो उत्साह नज़र आता है, वो देखते ही बनता है."

समझने का मौक़ा

उधर अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के अध्यक्ष ज़्याक रॉख़े ने उम्मीद जताई है कि इन खेलों के ज़रिए चीन को दुनिया को समझने और दुनिया को चीन को समझने का मौक़ा मिलेगा.

रॉख़े ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति इस पर नज़र रख रही है कि इतिहास में अभी तक के सबसे महंगे बीजिंग ओलंपिक खेलों से क्या निकलकर आता है.

उन्होंने कहा, "दुनिया इन खेलों के ज़रिए एक ऐसे देश को समझने की कोशिश करेगी जिसका पाँच हज़ार साल का एक इतिहास और परंपरा है. वे चीन को एक अदभुत देश पाएंगे और मेरा ख़याल है कि इससे दुनिया भर में चीन के बारे में राय बदलेगी."

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