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जानिए ओलंपिक के मेज़बान देश को | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वर्ष 2008 के ओलंपिक खेल चीन की राजधानी बीजिंग में आयोजित किए जा रहे हैं. ओलंपिक खेल 8 अगस्त से 24 अगस्त तक खेले जाएँगे. 28 खेलों की 302 प्रतियोगिताओं में 10 हज़ार से ज़्यादा एथलीट हिस्सा ले रहे हैं. 13 जून 2001 को बीजिंग को ओलंपिक खेलों की मेज़बानी सौंपी गई थी. उस समय से चीन ने ओलंपिक की ज़बरदस्त तैयारी की है. चीन सरकार ने ओलंपिक की तैयारी के लिए परिवहन व्यवस्था में अहम बदलाव किए हैं तो दूसरी ओर कई नए स्टेडियम भी तैयार किए गए हैं. तैयार किए गए नए स्टेडियम में सबसे प्रमुख हैं- बीजिंग नेशनल स्टेडियम, बीजिंग नेशनल इनडोर स्टेडियम, बीजिंग एक्वेटिक सेंटर, ओलंपिक ग्रीन कन्वेंशन सेंटर और ओलंपिक ग्रीन. चीन चीन दुनिया का सबसे ज़्यादा आबादी वाला देश है. चीन का इतिहास 4000 साल पुराना है. दो दशक से ज़्यादा समय तक शुरुआती कम्युनिस्ट शासन के समय चीन पूरी दुनिया से अलग-थलग रहा.
लेकिन अब चीन दुनिया का सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है. कहा जाता है कि चीन में इस समय दूसरी औद्योगिक क्रांति चल रही है. 1980 के शुरुआत में चीन में सामूहिक खेती को ख़त्म करके निजी व्यवस्था को फिर से शुरू किया गया. इस समय चीन दुनिया के शीर्ष निर्यातक देशों में है और यहाँ विदेशी निवेश भी जम कर हो रहा है. चीन विश्व व्यापार संगठन (डब्लूटीओ) का सदस्य भी है. इस कारण चीन विदेशी बाज़ार में व्यापार करता है. लेकिन बढ़ती अर्थव्यवस्था के बीच चीन के लोगों को इस बात की आशंका भी है कि वहाँ बेरोज़गारी और आर्थिक अस्थिरता बढ़ी है. लोगों का कहना है कि निजी क्षेत्र को बढ़ावा देने और सरकारी कंपनियों की लगातार होती कमी के कारण ऐसा हो सकता है. बढ़ती अर्थव्यवस्था के कारण चीन में ऊर्जा की खपत बढ़ी है. अमरीका के बाद चीन में सबसे ज़्यादा तेल की खपत होती है. ऊर्जा के क्षेत्र में चीन में काफ़ी निवेश हुआ है. चुनौती लेकिन आर्थिक प्रगति के बीच शहरी चीन और ग्रामीण चीन के बीच आर्थिक खाई बढ़ी है. कई पिछड़े इलाक़े के लोग तो देश के पूर्वी शहरों की ओर भाग रहे हैं जहाँ निर्माण का काम ज़ोर-शोर से चल रहा है.
किसानों और कामगारों की हताशा का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2005 में वहाँ क़रीब 87 हज़ार प्रदर्शन हुए. लाखों की संख्या में लोग भ्रष्टाचार, ज़मीन पर क़ब्ज़े के ख़िलाफ़ याचिका देने के लिए राजधानी बीजिंग का चक्कर लगाते रहते हैं. चीन में भ्रष्टाचार की शिकायतें ख़ूब होती हैं. भ्रष्टाचार के अलावा एचआईवी एड्स का बढ़ता संक्रमण की समाज के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है. आर्थिक प्रगति का एक और नकारात्मक प्रभाव चीन पर नज़र आता है और वो है- प्रदूषण. राजधानी बीजिंग का तो ये आलम है कि कई बार प्रदूषण के कारण ओलंपिक के आयोजन पर भी ख़तरा पैदा हुआ. बीजिंग के अलावा भी चीन में कई शहर ऐसे हैं जहाँ प्रदूषण बहुत ज़्यादा है. चीन में आर्थिक प्रगति के अनुपात में राजनीतिक सुधार भी नहीं दिखता. सत्ता पर कम्युनिस्ट पार्टी का एकाधिकार बना हुआ है. विरोधियों की आवाज़ दबाने के आरोप चीन सरकार पर लगते रहते हैं. मानवाधिकार संगठन चीन पर हमेशा से यह आरोप लगाते रहते हैं कि वहाँ लोगों को प्रताड़ित किया जाता है. संगठनों का कहना है कि चीन में हर साल सैकड़ों लोगों को मौत की सज़ा दी जाती है. तिब्बत पर चीन के शासन की भी आलोचना होती रहती है. मानवाधिकार संगठन ये भी आरोप लगाते हैं कि सोची समझी नीति के तहत तिब्बत की बौद्ध संस्कृति को तबाह किया जा रहा है. तिब्बतियों के धर्मगुरू दलाई लामा तो निर्वासित जीवन व्यतीत कर रहे हैं. चीन यह भी दावा करता है कि ताईवान भी चीन का हिस्सा है और अगर ज़रूरत पड़ी तो इसे चीन में मिला लिया जाएगा. कुछ प्रमुख तथ्य पूरा नाम: पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना आबादी: 1.33 अरब (संयुक्त राष्ट्र, 2007) राजधानी: बीजिंग सबसे बड़ा शहर: शंघाई क्षेत्रफल: 96 लाख वर्ग किलोमीटर प्रमुख भाषा: मैन्डरीन चाइनीज़ प्रमुख धर्म: बौद्ध, ईसाई, इस्लाम, ताओइज़्म औसत उम्र: 71 वर्ष (पुरुष), 75 वर्ष (महिला) मुद्रा: युवान निर्यात: कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक और हथियार प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय: 1740 अमरीकी डॉलर इंटरनेट डोमेन: CN इंटरनेशनल डायलिंग कोड: +86 राष्ट्रपति चीन के राष्ट्रपति हैं हू जिंताओ. मार्च 2003 में नेशनल पीपुल्स कांग्रेस ने उन्हें चुना था. राष्ट्रपति के रूप में उनके नाम की चर्चा 2002 में ही शुरू हो गई थी, जब पार्टी की 16वीं कांग्रेस में उन्हें पार्टी प्रमुख चुना गया था.
वे जियांग ज़ेमिन की जगह 2003 में राष्ट्रपति बने. हू जिंताओ ने भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ाई को अपनी प्राथमिकता बनाई है. उन्होंने देश में सुशासन लाने का वादा किया था. उन्होंने कहा था कि सुशासन बहुत ज़रूरी है क्योंकि समाजवाद का भविष्य इसी पर टिका है. लेकिन उन्होंने पश्चिमी शैली के राजनीतिक सुधारों को अस्वीकार कर दिया था. सामाजिक तनाव के बारे में उन्होंने कहा था कि वे समाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए काम करेंगे. उन्होंने यह भी वादा किया है कि वे ग्रामीण इलाक़े में स्वास्थ्य और शिक्षा पर विशेष ध्यान देंगे. हू जिंताओं का जन्म 1942 में हुआ था. उन्होंने बीजिंग में हाइड्रो-इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है. उन्होंने जल संरक्षण मंत्रालय में काम भी किया था. वे 1964 से कम्युनिस्ट पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता हैं. उन्होंने 1980 में गुईज़ो और तिब्बत में पार्टी प्रमुख के पद पर भी काम किया गया. वहाँ उनके रहते ही आज़ादी के समर्थकों के ख़िलाफ़ कार्रवाई हुई थी. वर्ष 1992 में वे सबसे कम उम्र में पोलित ब्यूरो की स्थायी समिति के सदस्य बने. जो पार्टी की सबसे बड़ी नीति-निर्धारण करने वाली समिति है. मार्च 2008 में एक बार फिर उन्हें राष्ट्रपति चुन लिया गया. उप राष्ट्रपति: शी जिनपिंग प्रधानमंत्री: वेन जियाबाओ विदेश मंत्री: यांग जिएची नेशनल पीपुल्स कांग्रेस चेयरमैन: वू बैंगुओ मीडिया चीन में मीडिया पर सरकार का कड़ा नियंत्रण है. अर्थव्यवस्था के उदार होने के कारण मीडिया का प्रसार बढ़ा है लेकिन संपादकीय पर नियंत्रण बरकरार है.
विदेशी समाचार देने वाली कंपनियों पर भी नियंत्रण है. शॉट वेव रेडियो प्रसारण और वेब साइट पर भी ये प्रतिबंध शामिल है. आम लोगों को विदेशी समाचार पत्र भी नहीं मिलते. पहले ये आशंका थी कि चीनी नियंत्रण में आने के बाद हांगकांग में भी ऐसा ही कुछ होने वाला है, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. यहाँ स्वतंत्र मीडिया तो है लेकिन दखलंदाजी की आशंका बनी रहती है. प्रेस में अधिकारियों के भ्रष्टाचार की बात तो होती है लेकिन कम्युनिस्ट पार्टी की सत्ता को चुनौती नहीं दी जाती. हर शहर का अपना समाचार पत्र है जिसे स्थानीय सरकार प्रकाशित करती है. साथ ही वहाँ की कम्युनिस्ट पार्टी भी अपना दैनिक समाचार पत्र निकालती है. चीन में टेलीविज़न दर्शकों की संख्या एक अरब के क़रीब है. इसलिए टेलीविज़न समाचार का अच्छा स्रोत है. पे-टीवी चैनलों के लिए चीन बड़ा बाज़ार साबित हो रहा है. माना जा रहा है कि वर्ष 2010 तक यहाँ 12 करोड़ से ज़्यादा ग्राहक हो जाएँगे. विदेशी चैनलों पर नियंत्रण है. बहुत सीमित संख्या में यहाँ विदेशी चैनल दिखाए जाते हैं. चीन सरकार का कहना है कि वह उन्हीं विदेशी प्रसारकों को अनुमति देगा, जिनसे उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता को ख़तरा ना हो. नियामक संस्था का यहाँ तक कहना है कि विदेशों में बने कार्यक्रमों को प्रसारित करने से पहले अनुमति लेनी होगी. चीन में इंटरनेट का दायरा बढ़ रहा है लेकिन उस पर नियंत्रण है. समाचार पत्र रेनमिन रिबाओ (पीपुल्स डेली)- कम्युनिस्ट पार्टी डेली ज़ोन्गोऊ क़्विंगनियान बाओ (चाइना यूथ डेली)- सरकारी (कम्युनिस्ट यूथ लीग से जुड़ा) चाइना डेली- सरकारी (अंग्रेज़ी) जिफांगजुन बाओ- पीपुल्स लिबरेशन आर्मी डेली ज़ोन्गोऊ जिंगजी शिबाओ (चाइना इकोनॉमिक टाइम्स)- सरकारी दैनिक फाज़ी रिबाओ (लीगल डेली)- सरकारी गॉन्ग्रेन रिबाओ (वर्कर्स डेली)- सरकारी नॉन्गमिन रिबाओ (फॉर्मर्स डेली)- सरकारी (कृषि और ग्रामीण मुद्दे) नान्फ़ांग रिबाओ ( साउदर्न डेली)- कम्युनिस्ट पार्टी डेली, ग्वांगडांग प्रांत टेलीविज़न चाइनीज़ सेंट्रल टीवी (सीसीटीवी)- सरकारी रेडियो चाइना नेशनल रेडियो- सरकारी चाइना रेडियो इंटरनेशनल- सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ (न्यू चाइना न्यूज़ एजेंसी)- सरकारी | इससे जुड़ी ख़बरें हमले में 16 चीनी पुलिसकर्मियों की मौत04 अगस्त, 2008 | पहला पन्ना देश का नाम रोशन करूँगा: राज्यवर्धन04 अगस्त, 2008 | खेल की दुनिया निशानेबाज़ी से है सबसे बड़ी उम्मीद04 अगस्त, 2008 | खेल की दुनिया जब पदक से चूक गए भारतीय04 अगस्त, 2008 | खेल की दुनिया भारतीय मुक्केबाज़ों से भी हैं उम्मीदें04 अगस्त, 2008 | खेल की दुनिया हॉकी खिलाड़ियों के बिना भारतीय टीम04 अगस्त, 2008 | खेल की दुनिया अबला नारी की तरह प्रताड़ित हुई हॉकी04 अगस्त, 2008 | खेल की दुनिया देर ना हो जाए कहीं देर ना हो जाए....02 अगस्त, 2008 | खेल की दुनिया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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