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देश का नाम रोशन करूँगा: राज्यवर्धन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एथेंस ओलंपिक में भारत की ओर से एकमात्र पदक जीतने वाले निशानेबाज़ राज्यवर्धन सिंह राठौर से बीजिंग ओलंपिक में भी काफ़ी उम्मीदें हैं. राज्यवर्धन इस बार भी पूरे जोश से बीजिंग ओलंपिक में उतरेंगे. उन्हें उम्मीद है कि इस बार भी वे देश का नाम ज़रूर रोशन करेंगे. राज्यवर्धन सिंह ने पिछले चार सालों में अच्छी तैयारी की है. उन्हें गर्व है कि वे सेना में काम करते हैं और सेना की ट्रेनिंग ने उनकी तैयारी में सहायता की है. राज्यवर्धन सिंह राठौर अपने साथी खिलाड़ियों से भी काफ़ी उम्मीद कर रहे हैं. उनका कहना है कि सभी साथी खिलाड़ियों ने अच्छी तैयारी की है और उनसे पदक की उम्मीद की जा सकती है. बीजिंग में ट्रेनिंग कर रहे राज्यवर्धन सिंह राठौर से हुई बातचीत के प्रमुख अंश. पिछली बार आपने ही भारत की ओर से एकमात्र पदक जीता था. इस बार आपकी तैयारी कैसी है? क्या उम्मीद है आपको इस ओलंपिक से. ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करते मुझे गर्व हो रहा है. मैं इस ओलंपिक में भी पूरे जोश से उतरूँगा. जैसा मैं हमेशा से करता हूँ. जब भी हम किसी प्रतियोगिता में जाते हैं तो अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद करते हैं. मुझे उम्मीद है कि बीजिंग में भी मैं अच्छा प्रदर्शन करूँगा. इस बार यही उम्मीद लगाई जा रही है कि निशानेबाज़ी में ही भारत ज़्यादा पदक ला सकता है. आपको इस प्रतियोगिता में कितनी टक्कर मिलेगी? लेकिन मुक़ाबला तो हमेशा ही ज़बरदस्त होता है. इस बार ओलंपिक में सबसे ज़्यादा उम्मीदें निशानेबाज़ों से ही है. ये अच्छा है कि पिछले दो-तीन सालों में निशानेबाज़ों ने शानदार प्रदर्शन किया है. उसी की वजह से सबकी निगाहें निशानेबाज़ों पर हैं. ये बात भी सच है कि धीरे-धीरे ही भारत ओलंपिक में अच्छा प्रदर्शन करना शुरू करेगा. अगर निशानेबाज़ी में पदक मिले तो ये बहुत अच्छी बात होगी. उम्मीदें आपको अपने अलावा किस साथी निशानेबाज़ से बड़ी उम्मीदें हैं? किसी एक का नाम लेना तो बहुत ग़लत होगा. मेरी तो उम्मीद सबसे है. क्योंकि सभी अपने स्तर पर कहीं ना कहीं अच्छा प्रदर्शन कर चुके हैं. लेकिन यह भी सच है कि ओलंपिक एक अलग ही खेल होता है. ओलंपिक का अलग दबाव होता है. मैं तो किसी एक का नाम नहीं ले सकता. लेकिन उम्मीद यही करता हूँ कि सभी निशानेबाज़ अपनी काबिलियत के मुताबिक़ प्रदर्शन करेंगे. आपने अमरीकी विशेषज्ञ से ट्रेनिंग ली है. क्या आप अपनी तैयारी से पूरी तरह संतुष्ट हैं? कहीं कोई कमी तो नहीं रह गई. देखिए एक्सपर्ट चाहे अमरीकी हो, ऑस्ट्रेलियाई हो या इंडियन हो. एक्सपर्ट तो एक्सपर्ट ही होता है. सभी खिलाड़ी अपने-अपने एक्सपर्ट के साथ ही ट्रेनिंग करते हैं. ओलंपिक में तो सभी तैयारी करके आते हैं. तैयारी सबकी अच्छी है. उसी तरह मेरी भी तैयारी अच्छी है. टाइम पत्रिका ने आपको उन 100 खिलाड़ियों में रखा है, जिनसे बीजिंग ओलंपिक में पदकों की सबसे ज़्यादा उम्मीद की जा सकती है. कैसा लग रहा है. ये सब तो अभी आकलन है. पिछले ओलंपिक में मैंने अच्छा प्रदर्शन किया था. पदक भी जीता था. पिछले दो-तीन सालों में भी अच्छा प्रदर्शन किया है. इसलिए इस बार भी उम्मीद की जा रही है. लेकिन हर मुक़ाबला नया मुक़ाबला होता है. मैं हर मुक़ाबले को नया मुक़ाबला ही समझता हूँ. ओलंपिक से ना कभी पहले मैं घबराया था और ना अब घबराऊँगा. मैं अपनी ओर से पूरी कोशिश करूँगा जैसा हमेशा करता आया हूँ. अनुशासन सेना की पृष्ठभूमि से आने का ऐसी बड़ी प्रतियोगिताओं में कितना लाभ होता है? क्या सेना का अनुशासन ओलंपिक जैसी प्रतियोगिता में कोई भूमिका निभाता है? देखिए, सेना में बड़ी कठिन परिस्थितियों में काम करना होता है. हमें कठिन परिस्थितियों में काम करना सिखाया जाता है. वहाँ सिखाया जाता है कि हमेशा हिम्मत से काम लेना चाहिए. वो सारी चीज़ें मुझमें कूट-कूट कर भरी हुई हैं. सेना आपको काफ़ी मज़बूत बना देती है. मैं भी काफ़ी मज़बूत हूँ. मैं सेना का शुक्रगुज़ार हूँ कि मुझे कड़ी ट्रेनिंग दी गई. लेकिन इसके अलावा भी कई और चीज़ें होती हैं, जो इतनी बड़ी प्रतियोगिताओं के लिए होनी चाहिए. जितने भी खिलाड़ी ओलंपिक में आते हैं, उनकी ट्रेनिंग सेना से कम नहीं होती. भारत की सबसे ज़्यादा उम्मीदें आपसे हैं. क्या कहना चाहेंगे देशवासियों को. सबसे पहले तो मैं सभी लोगों को शुक्रगुज़ार हूँ, जिन्हें मुझे पर इतना भरोसा है. मेरे लिए यह बहुत गर्व की बात है. जब भी मैं भारत के लिए आगे आता हूँ, वो चाहे लड़ाई का मैदान हो या खेल का मैदान हो, मैं हमेशा पूरे जोश से और भारत का नाम रोशन करने के लिए काम करता हूँ. तो मैं इतना भरोसा दिलाता हूँ कि मैं अपनी ओर से पदक जीतने की पूरी कोशिश करूँगा. |
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