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ल्हासा से गुज़री ओलंपिक मशाल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीजिंग में अगस्त से शुरू हो रहे ओलंपिक खेलों की मशाल अपनी यात्रा के सबसे संवेदनशील चरण में तिब्बत की राजधानी ल्हासा से गुज़री. ल्हासा में तीन महीने पहले चीन के शासन के विरोध में प्रदर्शन और दंगे हुए थे. मार्च में एक ओर तिब्बतियों और दूसरी ओर हान चीनी और सुरक्षा अधिकारियों के बीच कई झड़पें हुई थीं. शहर में ग्यारह किलोमीटर के मशाल के सफ़र के दौरान कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए थे. ओलंपिक मशाल उठाए सफ़ेद और लाल ट्रैक-सूट पहने लोग ल्हासा की सड़कों से गुज़रे. चीन के लिए महत्व शहर में मौजूद एक बीबीसी संवाददाता के अनुसार पत्रकारों को भी मशाल यात्रा का प्रारंभ देखने के लिए छह सुरक्षा नाकों से गुज़रना पड़ा और सड़कों पर भी उन्ही स्वयंसेवकों को आने दिया गया जिनके बारे में पहले पूछताछ की जा चुकी थी. मशाल यात्रा दलाई लामा के ग्रीष्म ऋतु निवास से शुरु हुई और तिब्बत के पारंपरिक शासकों के महल पोटाला पेलेस पर ख़त्म हुई.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि चीन की सरकार के लिए ओलंपिक मशाल के वो तीन घंटे का सफ़र अत्यंत महत्वपूर्ण रहा जब वह तिब्बत में रही. चीन ओलंपिक मशाल के शांतिपूर्ण प्रदर्शन से ये दिखाना चाहता था कि तिब्बत पूरी तरह से चीन का हिस्सा है. जहाँ कुछ जगह पर थोड़ी सी संख्या में दर्शक दिखाई दिए वहीं उस इलाक़े के पास चार सैन्य ट्रक भी दिखे जिनमें ख़ासी संख्या में सैनिक मौजूद थे. चीन के सरकारी मीडिया के अनुसार मार्च में हुए दंगों के बाद हिरासत में लिए लगभग एक हज़ार लोगों को रिहा कर दिया गया है जबकि 116 अब भी क़ैद हैं और मकदमा शुरु होने का इंतज़ार कर रहे हैं. |
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