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विरोध के बीच जली ओलंपिक मशाल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीजिंग में होने वाले ओलंपिक की मशाल जलाने की औपचारिक रस्म ग्रीस के ओलंपिया में आयोजित एक भव्य समारोह में संपन्न हो गई जहाँ तीन हज़ार साल पहले इन खेलों की शुरूआत हुई थी. इस रस्म के बाद अब ओलंपिक की मशाल बीजिंग के लिए निकल पड़ी है. मशाल की 137 हज़ार किलोमीटर की यात्रा ओलंपिक के इतिहास में अब तक की सबसे लंबी यात्रा होगी. यह मशाल 100 से भी ज़्यादा दिनों के समय में 20 देशों से होकर गुज़रेगी और ये यात्रा चीन की राजधानी बीजिंग में समाप्त होगी. आयोजन में कड़ी सुरक्षा के बावजूद दो मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने समारोह में बाधा डालने की कोशिश की. उन्होंने नारे लगाए और जब चीन के दूत ने बोलना शुरू किया तो बैनर दिखाए. उन्हें बाहर निकाल दिया गया. तिब्बत से होकर गुज़रेगी
आठ अगस्त को खेल शुरू होने से पहले ये मशाल माउंट एवरेस्ट से होकर भी गुज़रेगी. प्रदर्शनकारी नहीं चाहते कि यह मशाल माउंट एवरेस्ट से होकर गुज़रे- ये तिब्बत और नेपाल के बीच का इलाक़ा है. लेकिन चीन ने इस रास्ते में कोई बदलाव करने से इंकार कर दिया. तिब्बत की आज़ादी के समर्थकों ने कहा कि वे इस रस्म के दौरान ओलंपिया में भी अपना प्रदर्शन करेंगे. आज़ाद तिब्बत के लिए छात्रों के उप निदेशक तेनज़िंग दोरजी ने कहा कि आईओसी को तिब्बत से गुज़रने से बचना चाहिए. लेकिन चीन के अधिकारियों का कहना है कि यह मार्ग तय हो चुका है और मशाल को पकड़ने वाले भी चुने जा चुके हैं. अपना नाम न बताते हुए तिब्बत स्पोर्ट्स अथॉरिटी के एक अधिकारी ने स्थानीय समाचार पत्र को बताया, "मशाल रिले टीम सभी संबंधित इकाइयों के साथ काम करेगी." उन्होंने कहा कि दलाई गुट के लोगों और दूसरे सभी व्यवधानों को देखते हुए सुरक्षा के सभी इंतज़ाम पूरे कर लिए गए हैं. अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी (आईओसी) के अध्यक्ष ने मशाल जलाने की रस्म से पहले समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस से कहा कि वे तिब्बत और दूसरे कई मुद्दों पर चीन से लगातार बात कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा था कि कोई मुख्य राजनीतिक नेता बहिष्कार नहीं चाहता. ग्रीस में मशाल जलाने की रस्म को दुनिया भर में टेलिविज़न पर दिखाया गया. मशाल को पारंपरिक रूप से एक दर्पण में रखा गया और सूर्य की किरणों से इसे जलाया गया. पोशाक रिहर्सल के वक्त रविवार को आकाश में बादलों और अंधड़ की आशंका की वजह से डर था कि मशाल पारंपरिक रूप से नहीं जल सकेगी. इसी वजह से आयोजकों ने इस रस्म का समय एक घंटे आगे कर दिया था. इस रस्म में हज़ारों लोग शामिल हुए जिनमें बीजिंग ओलंपिक आयोजक कमेटी के प्रमुख ली की और ग्रीस के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भी शामिल थे. | इससे जुड़ी ख़बरें 'मैं ओलंपिक खेलों का समर्थन करता हूँ'23 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस क्या इस ओलंपिक में बनेंगे विश्व रिकॉर्ड..?18 मार्च, 2008 | पहला पन्ना तिब्बत ने बढ़ाई बीजिंग की उलझन15 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस विरोध जताने निकले निर्वासित तिब्बती...10 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस 'ओलंपिक खेलों पर राजनीति हो रही है'12 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस दर्शकों को उत्साह बढ़ाने का प्रशिक्षण 30 दिसंबर, 2007 | खेल की दुनिया ओलंपिक की तैयारियों में जुटा बीजिंग07 अक्तूबर, 2007 | खेल की दुनिया चीन-ताईवान विवाद में ओलंपिक मशाल21 सितंबर, 2007 | खेल की दुनिया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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