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रविवार, 07 अक्तूबर, 2007 को 11:17 GMT तक के समाचार
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ओलंपिक की तैयारियों में जुटा बीजिंग

बीजिंग में कारीगर
बीजिंग में अगले वर्ष होने वाले ओलंपिक की तैयारियां जोर शोर से चल रही हैं
बीजिंग 800 सालों से अपनी आँखों के सामने दुनिया को बदलते देख रहा है.

बीजिंग ने राजा को रंक और रंक को राजा बनते देखा है. स्वर्ग पुत्रों का शासन देखा है तो साम्यवादी आंदोलन भी देखा है.

सांस्कृतिक क्रांति के घाव झेले हैं तो थियानमन चौक पर उठी लोकतंत्र की आवाज़ भी सुनी है. यानी चेहरे की झुर्रियाँ इसके लंबे अनुभव की कहानी कहती हैं.

पर अब बीजिंग का 'फ़ेस लिफ़्ट' हो रहा है. खेलों के महाकुंभ ओलंपिक की तैयारी के ज़रिए पश्चिमी दुनिया को चकित करने की कोशिश हो रही है.

ऐसा लगता है मानो बीजिंग की आबोहवा में अगस्त 2008 में होने वाले ओलंपिक खेलों की ख़ुशबू ही समा गई है.

आज अगर बीजिंग में आपको नीला आसमान दिख जाए तो ये किसी आश्चर्य से कम नहीं.

 ओलंपिक सभी को देखने को मिलना चाहिए इसलिए टिकटों की कीमतें कम रखी गई है
चीनी अधिकारी

यहाँ तक कि चीन की दीवार भी धुंधलके में लिपटी अपने इतिहास की कहानी कहती है.

लेकिन ये धुंधलका भी इस दीवार में लगी अनगिनत कारीगरों की मेहनत और इंजीनियरिंग की महानता को छुपा नही सकता. और अब आधुनिक चीन के आधुनिक कारीगर अपने हाथों का जादू दुनिया के सामने लाने को तैयार खडे़ है.

चिड़िया के घोंसले जैसा राष्ट्रीय स्टेडियम हो या फिर बर्फ के क्यूब जैसा तैराकी स्टेडियम, एअरपोर्ट की नई इमारत हो या फिर खेलग्राम, नया नवेला ओपेरा हाउस - सभी पर काम चल रहा है.

बदलाव

बीजिंग में हो रहा निर्माण कार्य
चीन में बड़े स्तर पर हो रहे निर्माण कार्य से प्रदूषण बढ़ रहा है

साथ ही साथ यहाँ के पुराने गली-कूचे अब आप ढूढंने भी निकलेंगे तो आपको मिलेंगे नहीं. पुरानी इमारतें ख़ाक मे मिलाई जा रही हैं और नए चीन की उस पर नींव रखी जा रही है.

ऐसा लगता है कि सारी दुनिया का इस्पात, सीमेंट और क्रेनें बीजिंग आ गई है.

पूरा शहर ही निर्माणाधीन लगता है. नए सपनों का निर्माण, जिसकी नींव में है एक फ़लसफ़ा-सबसे ऊँचा, बड़ा, बेहतर और विशाल होना. पश्चिमी देशों को मानो ये दिखाना हो कि हम किसी से कम नहीं.

सून वेड़ ओलंपिक समिति के उप निदेशक है और उनका तर्क है कि ओलंपिक सभी को देखने को मिलना चाहिए इसलिए टिकटों की कीमतें कम रखी गई है.

बीजिंग ओलंपिक की 58 प्रतिशत टिकटें 13 डॉलर से कम की होंगी.

जहां तक टॉर्च रिले का सवाल है माउंट एवरेस्ट से कम पर चीन कैसे मानता. तो ओलंपिक मशाल को दुनिया की सबसे ऊँची चोटी पर पहुंचाने के लिए 50 खिलाड़ी तैयारी कर रहे है.

टॉर्च रिले एक लाख 37 हज़ार किलोमीटर चलेगी और 2800 लोगों के हाथों से 130 दिन का सफ़र पूरा करेगी. एक दुनिया और एक सपना के नारे को चीनी चरितार्थ करने की कोशिश कर रहे हैं.

अंग्रेज़ी अभियान

बीजिंग ओलंपिक
बीजिंग में लोगों को तेज़ी से अंग्रेज़ी सिखाई जा रही है

चीन में खेल महाकुंभ हो और संवाद की दिक्कत हो ये कैसे हो सकता है. सरकारी आँकड़ों की मानें तो पिछले साल लगभग 49 लाख बीजिंग निवासी अंग्रेज़ी बोल सकते थे.

टैक्सी चालकों को अंग्रेज़ी सिखाई जा रही है. कम से कम हैलो, आपको कहाँ जाना है, कितने पैसे हुए इतना तो वो बता ही सकें.

यहां तक की स्थानीय अख़बारों में रोज एक अंग्रेज़ी वाक्य छापा जाता है. टीवी पर कोई सेलेब्रिटी रोज़ अंग्रेज़ी के दो शब्द सिखाने की कोशिश करता है. यानी कोई कसर नही छोड़ी गई.

अब रही बात स्वयंसेवको की तो लाखों मे अर्ज़ियाँ आ रही हैं. इन खेलो के प्रायोजकों की भीड़ जुट रही है. यानी तैयारी पूरी है.

लेकिन इन सबके बीच बीजिंग 12 प्रतिशत से ज़्यादा की आर्थिक विकास दर हासिल करने में ऐसा जुटा कि प्रदूषण की सुध नहीं ली.

अब यही प्रदूषण उसके लिए जी का जंजाल बन गया है. सारी दुनिया में बीजिंग के स्लेटी आसमान की चर्चा है.

प्रदूषण

प्रदूषण रोकने के लिए
 पिछले 10 सालों मे बीजिंग नगर निगम ने 720 अरब रुपए खर्च किए हैं और पिछले पाँच सालों में करीब 600 अरब रुपए सार्वजनिक यातायात पर खर्च किए गए हैं

कुछ खेल संघ अपने खिलाड़ियो की सेहत को लेकर चिंतित हैं. उनका कहना है की अगर स्थिति नहीं सुधरी तो वो बीजिंग न आने के बारे में भी सोच सकते हैं.

चीन सरकार इस आलोचना को कितनी गंभीरता से लेती है उसका आकलन इस बात से हो सकता है कि पिछले 10 सालों मे बीजिंग नगर निगम ने 720 अरब रुपए खर्च किए हैं और पिछले पाँच सालों में करीब 600 अरब रुपए सार्वजनिक यातायात पर खर्च किए गए हैं.

यहां के प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को हटाया जा रहा है. अब चाहे इन उद्योगों में काम करने वाले लोगो की मुसीबत खड़ी हो जाए. अब तक 200 प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग हटाए जा चुके हैं.

साथ ही ऐसी योजना भी है कि कुछ ख़ास नंबर तय कर उन नंबर वाली गाड़ियों को हफ़्ते के किसी तय दिन रोक दिया जाए. कम वाहन होंगे तो कम प्रदूषण होगा.

सरकारी कर्मचारियों से कहा गया है की वो कार छोड़ें और साइकिल अपनाएँ. चीन की शासन व्यवस्था अगर कुछ कह देती है तो किसी की हिम्मत नही होती की वो आदेश न माने.

अब मज़े की बात है कि 8 अगस्त 2008 को बारिश आने के अंदेशे का भी इलाज़ सोच लिया गया है. 'क्लॉउड सीडिंग' तकनीक से बारिश जल्दी कराने का मन बना लिया गया है ताकि उदघाटन कार्यक्रम की चकाचौंध फीकी न पडे़.

अब जब बीजिंग वालों ने सोच लिया है कि इंद्र देवता भी रंग मे भंग नही डालें तो फिर ऐसा ही होगा भी.

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